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भजन संहित 61 ↟↟
- हे परमेश्वर, मेरा चिल्लाना सुन, मेरी प्रार्थना की ओर घ्यान दे।
- मूर्छा खाते समय मैं पृथ्वी की छोर से भी तुझे पुकारूंगा, जो चट्टान मेरे लिये ऊंची है, उस पर मुझ को ले चला,
- क्योंकि तू मेरा शरणस्थान है, और शत्रु से बचने के लिये ऊंचा गढ़ है॥
- मै तेरे तम्बू में युगानुयुग बना रहूंगा। मैं तेरे पंखों की ओट में शरण लिये रहुंगा
- क्योंकि हे परमेश्वर, तू ने मेरी मन्नतें सुनीं, जो तेरे नाम के डरवैये हैं, उनका सा भाग तू ने मुझे दिया है॥
- तू राजा की आयु को बहुत बढ़ाएगा, उसके वर्ष पीढ़ी पीढ़ी के बराबर होंगे।
- वह परमेश्वर के सम्मुख सदा बना रहेगा, तू अपनी करूणा और सच्चाई को उसकी रक्षा के लिये ठहरा रख।
- और मैं सर्वदा तेरे नाम का भजन गा गाकर अपनी मन्नतें हर दिन पूरी किया करूंगा॥
भजन संहित 62 ↟↟
- सचमुच मैं चुपचाप होकर परमेरश्वर की ओर मन लगाए हूं, मेरा उद्धार उसी से होता है।
- सचमुच वही, मेरी चट्टान और मेरा उद्धार है, वह मेरा गढ़ है, मैं बहुत न डिगूंगा॥
- तुम कब तक एक पुरूष पर धावा करते रहोगे, कि सब मिलकर उसका घात करो? वह तो झुकी हुई भीत वा गिरते हुए बाड़े के समान है।
- सचमुच वे उसको, उसके ऊंचे पद से गिराने की सम्मति करते हैं, वे झूठ से प्रसन्न रहते हैं। मुंह से तो वे आशीर्वाद देते पर मन में कोसते हैं॥
- हे मेरे मन, परमेश्वर के साम्हने चुपचाप रह, क्योंकि मेरी आशा उसी से है।
- सचमुच वही मेरी चट्टान, और मेरा उद्धार है, वह मेरा गढ़ है, इसलिये मैं न डिगूंगा।
- मेरा उद्धार और मेरी महिमा का आधार परमेश्वर है, मेरी दृढ़ चट्टान, और मेरा शरणस्थान परमेश्वर है।
- हे लोगो, हर समय उस पर भरोसा रखो, उससे अपने अपने मन की बातें खोलकर कहो, परमेश्वर हमारा शरणस्थान है।
- सचमुच नीच लोग तो अस्थाई, और बड़े लोग मिथ्या ही हैं, तौल में वे हलके निकलते हैं, वे सब के सब सांस से भी हलके हैं।
- 0अन्धेर करने पर भरोसा मत रखो, और लूट पाट करने पर मत फूलो, चाहे धन सम्पति बढ़े, तौभी उस पर मन न लगाना॥
- 1परमेश्वर ने एक बार कहा है, और दो बार मैं ने यह सुना है: कि सामर्थ्य परमेश्वर का है।
- 2और हे प्रभु, करूणा भी तेरी है। क्योंकि तू एक एक जन को उसके काम के अनुसार फल देता है॥
भजन संहित 63 ↟↟
- हे परमेश्वर, तू मेरा ईश्वर है, मैं तुझे यत्न से ढूंढूंगा, सूखी और निर्जल ऊसर भूमि पर, मेरा मन तेरा प्यासा है, मेरा शरीर तेरा अति अभिलाषी है।
- इस प्रकार से मैं ने पवित्रास्थान में तुझ पर दृष्टि की, कि तेरी सामर्थ्य और महिमा को देखूं।
- क्योंकि तेरी करूणा जीवन से भी उत्तम है मैं तेरी प्रशंसा करूंगा।
- इसी प्रकार मैं जीवन भर तुझे धन्य कहता रहूंगा, और तेरा नाम लेकर अपने हाथ उठाऊंगा॥
- मेरा जीव मानो चर्बी और चिकने भोजन से तृप्त होगा, और मैं जयजयकार करके तेरी स्तुति करूंगा।
- जब मैं बिछौने पर पड़ा तेरा स्मरण करूंगा, तब रात के एक एक पहर में तुझ पर ध्यान करूंगा,
- क्योंकि तू मेरा सहायक बना है, इसलिये मैं तेरे पंखों की छाया में जयजयकार करूंगा।
- मेरा मन तेरे पीछे पीछे लगा चलता है, और मुझे तो तू अपने दाहिने हाथ से थाम रखता है॥
- परन्तु जो मेरे प्राण के खोजी हैं, वे पृथ्वी के नीचे स्थानों में जा पड़ेंगे,
- 0वे तलवार से मारे जाएंगे, और गीदड़ों का आहार हो जाएंगे।
- 1परन्तु राजा परमेश्वर के कारण आनन्दित होगा, जो कोई ईश्वर की शपथ खाए, वह बड़ाई करने पाएगा, परन्तु झूठ बोलने वालों का मुंह बन्द किया जाएगा॥
भजन संहित 64 ↟↟
- हे परमेश्वर, जब मैं तेरी दोहाई दूं, तब मेरी सुन, शत्रु के उपजाए हुए भय के समय मेरे प्राण की रक्षा कर।
- कुकर्मियों की गोष्ठी से, और अनर्थकारियों के हुल्लड़ से मेरी आड़ हो।
- उन्होंने अपनी जीभ को तलवार की नाईं तेज किया है, और अपने कड़वे वचनों के तीरों को चढ़ाया है,
- ताकि छिपकर खरे मनुष्य को मारें, वे निडर होकर उसको अचानक मारते भी हैं।
- वे बुरे काम करने को हियाव बान्धते हैं, वे फन्दे लगाने के विषय बातचीत करते हैं, और कहते हैं, कि हम को कौन देखेगा?
- वे कुटिलता की युक्ति निकालते हैं, और कहते हैं, कि हम ने पक्की युक्ति खोजकर निकाली है। क्योंकि मनुष्य का मन और हृदय अथाह हैं.
- परन्तु परमेश्वर उन पर तीर चलाएगा, वे अचानक घायल हो जाएंगे।
- वे अपने ही वचनों के कारण ठोकर खाकर गिर पड़ेंगे, जितने उन पर दृष्टि करेंगे वे सब अपने अपने सिर हिलाएंगे
- तब सारे लोग डर जाएंगे, और परमेश्वर के कामों का बखान करेंगे, और उसके कार्यक्रम को भली भांति समझेंगे॥
- 0धर्मी तो यहोवा के कारण आनन्दित होकर उसका शरणागत होगा, और सब सीधे मन वाले बड़ाई करेंगे॥
भजन संहित 65 ↟↟
- हे परमेश्वर, सिय्योन में स्तुति तेरी बाट जोहती है, और तेरे लिये मन्नतें पूरी की जाएंगी।
- हे प्रार्थना के सुनने वाले. सब प्राणी तेरे ही पास आएंगे।
- अर्धम के काम मुझ पर प्रबल हुए हैं, हमारे अपराधों को तू ढांप देगा।
- क्या ही धन्य है वह, जिस को तू चुनकर अपने समीप आने देता है, कि वह तेरे आंगनों में बास करे. हम तेरे भवन के, अर्थात तेरे पवित्र मन्दिर के उत्तम उत्तम पदार्थों से तृप्त होंगे॥
- हे हमारे उद्धारकर्ता परमेश्वर, हे पृथ्वी के सब दूर दूर देशों के और दूर के समुद्र पर के रहने वालों के आधार, तू धर्म से किए हुए भयानक कामों के द्वारा हमारा मुंह मांगा वर देगा,
- तू जो पराक्रम का फेंटा कसे हुए, अपनी सामर्थ्य के पर्वतों को स्थिर करता है,
- तू जो समुद्र का महाशब्द, उसकी तरंगो का महाशब्द, और देश देश के लोगों का कोलाहल शन्त करता है,
- इसलिये दूर दूर देशों के रहने वाले तेरे चिन्ह देखकर डर गए हैं, तू उदयाचल और अस्ताचल दोनों से जयजयकार कराता है॥
- तू भूमि की सुधि लेकर उसको सींचता हैं, तू उसको बहुत फलदायक करता है, परमेश्वर की नहर जल से भरी रहती है, तू पृथ्वी को तैयार करके मनुष्यों के लिये अन्न को तैयार करता है।
- 0तू रेघारियों को भली भांति सींचता है, और उनके बीच की मिट्टी को बैठाता है, तू भूमि को मेंह से नरम करता है, और उसकी उपज पर आशीष देता है।
- 1अपनी भलाई से भरे हुए वर्ष पर तू ने मानो मुकुट धर दिया है, तेरे मार्गों में उत्तम उत्तम पदार्थ पाए जाते हैं।
- 2वे जंगल की चराइयों में पाए जाते हैं, और पहाड़ियां हर्ष का फेंटा बान्धे हुए है॥
- 3चराइयां भेड़- बकरियों से भरी हुई हैं, और तराइयां अन्न से ढंपी हुई हैं, वे जयजयकार करतीं और गाती भी हैं॥
भजन संहित 66 ↟↟
- हे सारी पृथ्वी के लोगों, परमेश्वर के लिये जयजयकार करो,
- उसके नाम की महिमा का भजन गाओ, उसकी स्तुति करते हुए, उसकी महिमा करो।
- परमेश्वर से कहो, कि तेरे काम क्या ही भयानक हैं. तेरी महासामर्थ्य के कारण तेरे शत्रु तेरी चापलूसी करेंगे।
- सारी पृथ्वी के लोग तुझे दण्डवत करेंगे, और तेरा भजन गाएंगे, वे तेरे नाम का भजन गाएंगे॥
- आओ परमेश्वर के कामों को देखो, वह अपने कार्यों के कारण मनुष्यों को भय योग्य देख पड़ता है।
- उसने समुद्र को सूखी भूमि कर डाला, वे महानद में से पांव पावं पार उतरे। वहां हम उसके कारण आनन्दित हुए,
- जो पराक्रम से सर्वदा प्रभुता करता है, और अपनी आंखों से जाति जाति को ताकता है। हठीले अपने सिर न उठाएं॥
- हे देश देश के लोगो, हमारे परमेश्वर को धन्य कहो, और उसकी स्तुति में राग उठाओ,
- जो हम को जीवित रखता है, और हमारे पांव को टलने नहीं देता।
- 0क्योंकि हे परमेश्वर तू ने हम को जांचा, तू ने हमें चान्दी की नाईं ताया था।
- 1तू ने हम को जाल में फंसाया, और हमारी कटि पर भारी बोझ बान्धा था,
- 2तू ने घुड़चढ़ों को हमारे सिरों के ऊपर से चलाया, हम आग और जल से होकर गए, परन्तु तू ने हम को उबार के सुख से भर दिया है॥
- 3मैं होमबलि लेकर तेरे भवन में आऊंगा मैं उन मन्नतों को तेरे लिये पूरी करूंगा,
- 4जो मैं ने मुंह खोलकर मानीं, और संकट के समय कही थीं।
- 5मैं तुझे मोटे पशुओं के होमबलि, मेंढ़ों की चर्बी के धूप समेत चढ़ऊंगा, मैं बकरों समेत बैल चढ़ाऊंगा॥
- 6हे परमेश्वर के सब डरवैयों आकर सुनो, मैं बताऊंगा कि उसने मेरे लिये क्या क्या किया है।
- 7मैं ने उसको पुकारा, और उसी का गुणानुवाद मुझ से हुआ।
- 8यदि मैं मन में अनर्थ बात सोचता तो प्रभु मेरी न सुनता।
- 9परन्तु परमेश्वर ने तो सुना है, उसने मेरी प्रार्थना की ओर ध्यान दिया है॥
- 0धन्य है परमेश्वर, जिसने न तो मेरी प्रार्थना अनसुनी की, और न मुझ से अपनी करूणा दूर कर दी है.
भजन संहित 67 ↟↟
- परमेश्वर हम पर अनुग्रह करे और हम को आशीष दे, वह हम पर अपने मुख का प्रकाश चमकाए
- जिस से तेरी गति पृथ्वी पर, और तेरा किया हुआ उद्धार सारी जातियों में जाना जाए।
- हे परमेश्वर, देश देश के लोग तेरा धन्यवाद करें, देश देश के सब लोग तेरा धन्यवाद करें॥
- राज्य राज्य के लोग आनन्द करें, और जयजयकार करें, क्योंकि तू देश देश के लोंगों का न्याय धर्म से करेगा, और पृथ्वी के राज्य राज्य के लोगों की अगुवाई करेगा॥
- हे परमेश्वर, देश देश के लोग तेरा धन्यवाद करें, देश देश के सब लोग तेरा धन्यवाद करें॥
- भूमि ने अपनी उपज दी है, परमेश्वर जो हमारा परमेश्वर है, उसने हमें आशीष दी है।
- परमेश्वर हम को आशीष देगा, और पृथ्वी के दूर दूर देशों के सब लोग उसका भय मानेंगे॥
भजन संहित 68 ↟↟
- परमेश्वर उठे, उसके शत्रु तित्तर बितर हों, और उसके बैरी उसके साम्हने से भाग जाएं।
- जैसे धुआं उड़ जाता है, वैसे ही तू उन को उड़ा दे, जैसे मोम आग की आंच से पिघल जाता है, वैसे ही दुष्ट लोग परमेश्वर की उपस्थिति से नाश हों।
- परन्तु धर्मी आनन्दित हों, वे परमेश्वर के साम्हने प्रफुल्लित हों, वे आनन्द से मगन हों.
- परमेश्वर का गीत गाओ, उसके नाम का भजन गाओ, जो निर्जल देशों में सवार होकर चलता है, उसके लिये सड़क बनाओ, उसका नाम याह है, इसलिये तुम उसके साम्हने प्रफुल्लित हो.
- परमेश्वर अपने पवित्र धाम में, अनाथों का पिता और विधवाओं का न्यायी है।
- परमेश्वर अनाथों का घर बसाता है, और बन्धुओं को छुड़ाकर भाग्यवान करता है, परन्तु हठीलों को सूखी भूमि पर रहना पड़ता है॥
- हे परमेश्वर, जब तू अपनी प्रजा के आगे आगे चलता था, जब तू निर्जल भूमि में सेना समेत चला,
- तब पृथ्वी कांप उठी, और आकाश भी परमेश्वर के साम्हने टपकने लगा, उधर सीनै पर्वत परमेश्वर, हां इस्राएल के परमेश्वर के साम्हने कांप उठा।
- हे परमेश्वर, तू ने बहुत से वरदान बरसाए, तेरा निज भाग तो बहुत सूखा था, परन्तु तू ने उसको हरा भरा किया है,
- 0तेरा झुण्ड उस में बसने लगा, हे परमेश्वर तू ने अपनी भलाई से दीन जन के लिये तैयारी की है।
- 1प्रभु आज्ञा देता है, तब शुभ समाचार सुनाने वालियों की बड़ी सेना हो जाती है।
- 2अपनी अपनी सेना समेत राजा भागे चले जाते हैं, और गृहस्थिन लूट को बांट लेती है।
- 3क्या तुम भेड़शालों के बीच लेट जाओगे? और ऐसी कबूतरी के समान होगे जिसके पंख चान्दी से और जिसके पर पीले सोने से मढ़े हुए हों?
- 4जब सर्वशक्तिमान ने उस में राजाओं को तित्तर बितर किया, तब मानो सल्मोन पर्वत पर हिम पड़ा॥
- 5बाशान का पहाड़ परमेश्वर का पहाड़ है, बाशान का पहाड़ बहुत शिखरवाला पहाड़ है।
- 6परन्तु हे शिखर वाले पहाड़ों, तुम क्यों उस पर्वत को घूरते हो, जिसे परमेश्वर ने अपने वास के लिये चाहा है, और जहां यहोवा सदा वास किए रहेगा?
- 7परमेश्वर के रथ बीस हजार, वरन हजारों हजार हैं, प्रभु उनके बीच में है, जैसे वह सीनै पवित्र स्थान में है।
- 8तू ऊंचे पर चढ़ा, तू लोगों को बन्धुवाई में ले गया, तू ने मनुष्यों से, वरन हठीले मनुष्यों से भी भेंटें लीं, जिस से याह परमेश्वर उन में वास करे॥
- 9धन्य है प्रभु, जो प्रति दिन हमारा बोझ उठाता है, वही हमारा उद्धारकर्ता ईश्वर है।
- 0वही हमारे लिये बचाने वाला ईश्वर ठहरा, यहोवा प्रभु मृत्यु से भी बचाता है॥
- 1निश्चय परमेश्वर अपने शत्रुओं के सिर पर, और जो अधर्म के र्माग पर चलता रहता है, उसके बाल भरी खोपड़ी पर मार मार के उसे चूर करेगा।
- 2प्रभु ने कहा है, कि मैं उन्हें बाशान से निकाल लाऊंगा, मैं उन को गहिरे सागर के तल से भी फेर ले आऊंगा,
- 3कि तू अपने पांव को लोहू में डुबोए, और तेरे शत्रु तेरे कुत्तों का भाग ठहरें॥
- 4हे परमेश्वर तेरी गति देखी गई, मेरे ईश्वर, मेरे राजा की गति पवित्र स्थान में दिखाई दी है,
- 5गाने वाले आगे आगे और तार वाले बाजों के बजाने वाले पीछे पीछे गए, चारों ओर कुमारियां डफ बजाती थीं।
- 6सभाओं में परमेश्वर का, हे इस्राएल के सोते से निकले हुए लोगों, प्रभु का धन्यवाद करो।
- 7वहां उनका अध्यक्ष छोटा बिन्यामीन है, वहां यहूदा के हाकिम अपने अनुचरों समेत हैं, वहां जबूलून और नप्ताली के भी हाकिम हैं॥
- 8तेरे परमेश्वर ने आज्ञा दी, कि तुझे सामर्थ्य मिले, हे परमेश्वर जो कुछ तू ने हमारे लिये किया है, उसे दृढ़ कर।
- 9तेरे मन्दिर के कारण जो यरूशलेम में हैं, राजा तेरे लिये भेंट ले आएंगे।
- 0नरकटों में रहने वाले बनैले पशुओं को, सांड़ों के झुण्ड को और देश देश के बछड़ों को झिड़क दे। वे चान्दी के टुकड़े लिये हुए प्रणाम करेंगे, जो लोगे युद्ध से प्रसन्न रहते हैं, उन को उसने तितर बितर किया है।
- 1मिस्त्र से रईस आएंगे, कूशी अपने हाथों को परमेश्वर की ओर फुर्ती से फैलाएंगे॥
- 2हे पृथ्वी पर के राज्य राज्य के लोगों परमेश्वर का गीत गाओ, प्रभु का भजन गाओ,
- 3जो सब से ऊंचे सनातन स्वर्ग में सवार होकर चलता है, देखो वह अपनी वाणी सुनाता है, वह गम्भीर वाणी शक्तिशाली है।
- 4परमेश्वर की सामर्थ्य की स्तुति करो, उसका प्रताप इस्राएल पर छाया हुआ है, और उसकी सामर्थ्य आकाशमण्डल में है।
- 5हे परमेश्वर, तू अपने पवित्र स्थानों में भय योग्य है, इस्राएल का ईश्वर ही अपनी प्रजा को सामर्थ्य और शक्ति का देने वाला है। परमेश्वर धन्य है॥
भजन संहित 69 ↟↟
- हे परमेश्वर, मेरा उद्धार कर, मैं जल में डूबा जाता हूं।
- मैं बड़े दलदल में धसा जाता हूं, और मेरे पैर कहीं नहीं रूकते, मैं गहिरे जल में आ गया, और धारा में डूबा जाता हूं।
- मैं पुकारते पुकारते थक गया, मेरा गला सूख गया है, अपने परमेश्वर की बाट जोहते जोहते, मेरी आंखे रह गई हैं॥
- जो अकारण मेरे बैरी हैं, वे गिनती में मेरे सिर के बालों से अधिक हैं, मेरे विनाश करने वाले जो व्यर्थ मेरे शत्रु हैं, वे सामर्थी हैं, इसलिये जो मैं ने लूटा नहीं वह भी मुझ को देना पड़ा है।
- हे परमेश्वर, तू तो मेरी मूढ़ता को जानता है, और मेरे दोष तुझ से छिपे नहीं हैं॥
- हे प्रभु, हे सेनाओं के यहोवा, जो तेरी बाट जोहते हैं, उनकी आशा मेरे कारण न टूटे, हे इस्राएल के परमेश्वर, जो तुझे ढूंढते हैं उनका मुंह मेरे कारण काला न हो।
- तेरे ही कारण मेरी निन्दा हुई है, और मेरा मुंह लज्जा से ढंपा है।
- मैं अपने भाइयों के साम्हने अजनबी हुआ, और अपने सगे भाइयों की दृष्टि में परदेशी ठहरा हूं॥
- क्योंकि मैं तेरे भवन के निमित्त जलते जलते भस्म हुआ, और जो निन्दा वे तेरी करते हैं, वही निन्दा मुझ को सहनी पड़ी है।
- 0जब मैं रोकर और उपवास करके दु:ख उठाता था, तब उससे भी मेरी नामधराई ही हुई।
- 1और जब मैं टाट का वस्त्र पहिने था, तब मेरा दृष्टान्त उन में चलता था।
- 2फाटक के पास बैठने वाले मेरे विषय बातचीत करते हैं, और मदिरा पीने वाले मुझ पर लगता हुआ गीत गाते हैं।
- 3परन्तु हे यहोवा, मेरी प्रार्थना तो तेरी प्रसन्नता के समय में हो रही है, हे परमेश्वर अपनी करूणा की बहुतायात से, और बचाने की अपनी सच्ची प्रतिज्ञा के अनुसार मेरी सुन ले।
- 4मुझ को दलदल में से उबार, कि मैं धंस न जाऊं, मैं अपने बैरियों से, और गहिरे जल में से बच जाऊं।
- 5मैं धारा में डूब न जाऊं, और न मैं गहिरे जल में डूब मरूं, और न पाताल का मुंह मेरे ऊपर बन्द हो॥
- 6हे यहोवा, मेरी सुन ले, क्योंकि तेरी करूणा उत्तम है, अपनी दया की बहुतायत के अनुसार मेरी ओर ध्यान दे।
- 7अपने दास से अपना मुंह न मोड़, क्योंकि मैं संकट में हूं, फुर्ती से मेरी सुन ले।
- 8मेरे निकट आकर मुझे छुड़ा ले, मेरे शत्रुओं से मुझ को छुटकारा दे॥
- 9मेरी नामधराई और लज्जा और अनादर को तू जानता है: मेरे सब द्रोही तेरे साम्हने हैं।
- 0मेरा हृदय नामधराई के कारण फट गया, और मैं बहुत उदास हूं। मैं ने किसी तरस खाने वाले की आशा तो की, परन्तु किसी को न पाया, और शान्ति देने वाले ढूंढ़ता तो रहा, परन्तु कोई न मिला।
- 1और लोगों ने मेरे खाने के लिये इन्द्रायन दिया, और मेरी प्यास बुझाने के लिये मुझे सिरका पिलाया॥
- 2उनका भोजन उनके लिये फन्दा हो जाए, और उनके सुख के समय जाल बन जाए।
- 3उनकी आंखों पर अन्धेरा छा जाए, ताकि वे देख न सकें, और तू उनकी कटि को निरन्तर कंपाता रह।
- 4उनके ऊपर अपना रोष भड़का, और तेरे क्रोध की आंच उन को लगे।
- 5उनकी छावनी उजड़ जाए, उनके डेरों में कोई न रहे।
- 6क्योंकि जिस को तू ने मारा, वे उसके पीछे पड़े हैं, और जिन को तू ने घायल किया, वे उनकी पीड़ा की चर्चा करते हैं।
- 7उनके अधर्म पर अधर्म बढ़ा, और वे तेरे धर्म को प्राप्त न करें।
- 8उनका नाम जीवन की पुस्तक में से काटा जाए, और धर्मियों के संग लिखा न जाए॥
- 9परन्तु मैं तो दु:खी और पीड़ित हूं, इसलिये हे परमेश्वर तू मेरा उद्धार करके मुझे ऊंचे स्थान पर बैठा।
- 0मैं गीत गाकर तेरे नाम की स्तुति करूंगा, और धन्यवाद करता हुआ तेरी बड़ाई करूंगा।
- 1यह यहोवा को बैल से अधिक, वरन सींग और खुर वाले बैल से भी अधिक भाएगा।
- 2नम्र लोग इसे देख कर आनन्दित होंगे, हे परमेश्वर के खोजियों तुम्हारा मन हरा हो जाए।
- 3क्योंकि यहोवा दरिद्रों की ओर कान लगाता है, और अपने लोगों को जो बन्धुए हैं तुच्छ नहीं जानता॥
- 4स्वर्ग और पृथ्वी उसकी स्तुति करें, और समुद्र अपने सब जीव जन्तुओं समेत उसकी स्तुति करे।
- 5क्योंकि परमेश्वर सिय्योन का उद्धार करेगा, और यहूदा के नगरों को फिर बसाएगा, और लोग फिर वहां बस कर उसके अधिकारी हो जाएंगे।
- 6उसके दासों को वंश उसको अपने भाग में पाएगा, और उसके नाम के प्रेमी उस में वास करेंगे॥
भजन संहित 70 ↟↟
- हे परमेश्वर मुझे छुड़ाने के लिये, हे यहोवा मेरी सहायता करने के लिये फुर्ती कर.
- जो मेरे प्राण के खोजी हैं, उनकी आशा टूटे, और मुंह काला हो जाए. जो मेरी हानि से प्रसन्न होते हैं, वे पीछे हटाए और निरादर किए जाएं।
- जो कहते हैं, आहा, आहा, वे अपनी लज्जा के मारे उलटे फेरे जाएं॥
- जितने तुझे ढूंढ़ते हैं, वे सब तेरे कारण हर्षित और आनन्दित हों. और जो तेरा उद्धार चाहते हैं, वे निरन्तर कहते रहें, कि परमेश्वर की बड़ाई हो।
- मैं तो दीन और दरिद्र हूं, हे परमेश्वर मेरे लिये फुर्ती कर. तू मेरा सहायक और छुड़ाने वाला है, हे यहोवा विलम्ब न कर.
भजन संहित 71 ↟↟
- हे यहोवा मैं तेरा शरणागत हूं, मेरी आशा कभी टूटने न पाए.
- तू तो धर्मी है, मुझे छुड़ा और मेरा उद्धार कर, मेरी ओर कान लगा, और मेरा उद्धार कर.
- मेरे लिये सनातन काल की चट्टान का धाम बन, जिस में मैं नित्य जा सकूं, तू ने मेरे उद्धार की आज्ञा तो दी है, क्योंकि तू मेरी चट्टान और मेरा गढ़ ठहरा है॥
- हे मेरे परमेश्वर दुष्ट के, और कुटिल और क्रूर मनुष्य के हाथ से मेरी रक्षा कर।
- क्योंकि हे प्रभु यहोवा, मैं तेरी ही बाट जोहता आया हूं, बचपन से मेरा आधार तू है।
- मैं गर्भ से निकलते ही, तुझ से सम्भाला गया, मुझे मां की कोख से तू ही ने निकाला, इसलिये मैं नित्य तेरी स्तुति करता रहूंगा॥
- मैं बहुतों के लिये चमत्कार बना हूं, परन्तु तू मेरा दृढ़ शरण स्थान है।
- मेरे मुंह से तेरे गुणानुवाद, और दिन भर तेरी शोभा का वर्णन बहुत हुआ करे।
- बुढ़ापे के समय मेरा त्याग न कर, जब मेरा बल घटे तब मुझ को छोड़ न दे।
- 0क्योंकि मेरे शत्रु मेरे विषय बातें करते हैं, और जो मेरे प्राण की ताक में हैं, वे आपस में यह सम्मति करते हैं, कि
- 1परमेश्वर ने उसको छोड़ दिया है, उसका पीछा करके उसे पकड़ लो, क्योंकि उसका कोई छुड़ाने वाला नहीं॥
- 2हे परमेश्वर, मुझ से दूर न रह, हे मेरे परमेश्वर, मेरी सहायता के लिये फुर्ती कर.
- 3जो मेरे प्राण के विरोधी हैं, उनकी आशा टूटे और उनका अन्त हो जाए, जो मेरी हानि के अभिलाषी हैं, वे नामधराई और अनादर में गड़ जाएं।
- 4मैं तो निरन्तर आशा लगाए रहूंगा, और तेरी स्तुति अधिक अधिक करता जाऊंगा।
- 5मैं अपने मुंह से तेरे धर्म का, और तेरे किए हुए उद्धार का वर्णन दिन भर करता रहूंगा, परन्तु उनका पूरा ब्योरा जाना भी नहीं जाता।
- 6मैं प्रभु यहोवा के पराक्रम के कामों का वर्णन करता हुआ आऊंगा, मैं केवल तेरे ही धर्म की चर्चा किया करूंगा॥
- 7हे परमेश्वर, तू तो मुझ को बचपन ही से सिखाता आया है, और अब तक मैं तेरे आश्चर्य कर्मों का प्रचार करता आया हूं।
- 8इसलिये हे परमेश्वर जब मैं बूढ़ा हो जाऊं और मेरे बाल पक जाएं, तब भी तू मुझे न छोड़, जब तक मैं आने वाली पीढ़ी के लोगों को तेरा बाहुबल और सब उत्पन्न होने वालों को तेरा पराक्रम सुनाऊं।
- 9और हे परमेश्वर, तेरा धर्म अति महान है॥ तू जिसने महाकार्य किए हैं, हे परमेश्वर तेरे तुल्य कौन है?
- 0तू ने तो हम को बहुत से कठिन कष्ट दिखाए हैं परन्तु अब तू फिर से हम को जिलाएगा, और पृथ्वी के गहिरे गड़हे में से उबार लेगा।
- 1तू मेरी बड़ाई को बढ़ाएगा, और फिर कर मुझे शान्ति देगा॥
- 2हे मेरे परमेश्वर, मैं भी तेरी सच्चाई का धन्यवाद सारंगी बजाकर गाऊंगा, हे इस्राएल के पवित्र मैं वीणा बजा कर तेरा भजन गाऊंगा।
- 3जब मैं तेरा भजन गाऊंगा, तब अपने मुंह से और अपने प्राण से भी जो तू ने बचा लिया है, जयजयकार करूंगा।
- 4और मैं तेरे धर्म की चर्चा दिन भर करता रहूंगा, क्योंकि जो मेरी हानि के अभिलाषी थे, उनकी आशा टूट गई और मुंह काले हो गए हैं॥
भजन संहित 72 ↟↟
- हे परमेश्वर, राजा को अपना नियम बता, राजपुत्र को अपना धर्म सिखला.
- वह तेरी प्रजा का न्याय धर्म से, और तेरे दीन लोगों का न्याय ठीक ठीक चुकाएगा।
- पहाडों और पहाड़ियों से प्रजा के लिये, धर्म के द्वारा शान्ति मिला करेगी
- वह प्रजा के दीन लोगों का न्याय करेगा, और दरिद्र लोगों को बचाएगा, और अन्धेर करने वालों को चूर करेगा॥
- जब तक सूर्य और चन्द्रमा बने रहेंगे तब तक लोग पीढ़ी- पीढ़ी तेरा भय मानते रहेंगे।
- वह घास की खूंटी पर बरसने वाले मेंह, और भूमि सींचने वाली झाड़ियों के समान होगा।
- उसके दिनों में धर्मी फूले फलेंगे, और जब तक चन्द्रमा बना रहेगा, तब तक शान्ति बहुत रहेगी॥
- वह समुद्र से समुद्र तक और महानद से पृथ्वी की छोर तक प्रभुता करेगा।
- उसके साम्हने जंगल के रहने वाले घुटने टेकेंगे, और उसके शत्रु मिट्टी चाटेंगे।
- 0तर्शीश और द्वीप द्वीप के राजा भेंट ले आएंगे, शेबा और सबा दोनों के राजा द्रव्य पहुंचाएंगे।
- 1सब राजा दण्डवत करेंगे, जाति जाति के लोग उसके आधीन हो जाएंगे॥
- 2क्योंकि वह दोहाई देने वाले दरिद्र को, और दु:खी और असहाय मनुष्य का उद्धार करेगा।
- 3वह कंगाल और दरिद्र पर तरस खाएगा, और दरिद्रों के प्राणो को बचाएगा।
- 4वह उनके प्राणों को अन्धेर और उपद्रव से छुड़ा लेगा, और उनका लोहू उसकी दृष्टि में अनमोल ठहरेगा॥
- 5वह तो जीवित रहेगा और शेबा के सोने में से उसको दिया जाएगा। लोग उसके लिये नित्य प्रार्थना करेंगे, और दिन भर उसको धन्य कहते रहेंगे।
- 6देश में पहाड़ों की चोटियों पर बहुत सा अन्न होगा, जिसकी बालें लबानोन के देवदारों की नाईं झूमेंगी, और नगर के लोग घास की नाईं लहलहाएंगे।
- 7उसका नाम सदा सर्वदा बना रहेगा, जब तक सूर्य बना रहेगा, तब तक उसका नाम नित्य नया होता रहेगा, और लोग अपने को उसके कारण धन्य गिनेंगे, सारी जातियां उसको भाग्यवान कहेंगी॥
- 8धन्य है, यहोवा परमेश्वर जो इस्राएल का परमेश्वर है, आश्चर्य कर्म केवल वही करता है।
- 9उसका महिमायुक्त नाम सर्वदा धन्य रहेगा, और सारी पृथ्वी उसकी महिमा से परिपूर्ण होगी। आमीन फिर आमीन॥
- 0यिशै के पुत्र दाऊद की प्रार्थना समाप्त हुई॥
भजन संहित 73 ↟↟
- सचमुच इस्त्राएल के लिये अर्थात शुद्ध मन वालों के लिये परमेश्वर भला है।
- मेरे डग तो उखड़ना चाहते थे, मेरे डग फिसलने ही पर थे।
- क्योंकि जब मैं दुष्टों का कुशल देखता था, तब उन घमण्डियों के विषय डाह करता था॥
- क्योंकि उनकी मृत्यु में वेदनाएं नहीं होतीं, परन्तु उनका बल अटूट रहता है।
- उन को दूसरे मनुष्यों की नाईं कष्ट नहीं होता, और और मनुष्यों के समान उन पर विपत्ति नहीं पड़ती।
- इस कारण अहंकार उनके गले का हार बना है, उनका ओढ़ना उपद्रव है।
- उनकी आंखें चर्बी से झलकती हैं, उनके मन की भवनाएं उमण्डती हैं।
- वे ठट्ठा मारते हैं, और दुष्टता से अन्धेर की बात बोलते हैं,
- वे डींग मारते हैं। वे मानों स्वर्ग में बैठे हुए बोलते हैं, और वे पृथ्वी में बोलते फिरते हैं॥
- 0तौभी उसकी प्रजा इधर लौट आएगी, और उन को भरे हुए प्याले का जल मिलेगा।
- 1फिर वे कहते हैं, ईश्वर कैसे जानता है? क्या परमप्रधान को कुछ ज्ञान है?
- 2देखो, ये तो दुष्ट लोग हैं, तौभी सदा सुभागी रहकर, धन सम्पत्ति बटोरते रहते हैं।
- 3निश्चय, मैं ने अपने हृदय को व्यर्थ शुद्ध किया और अपने हाथों को निर्दोषता में धोया है,
- 4क्योंकि मैं दिन भर मार खाता आया हूं और प्रति भोर को मेरी ताड़ना होती आई है॥
- 5यदि मैं ने कहा होता कि मैं ऐसा ही कहूंगा, तो देख मैं तेरे लड़कों की सन्तान के साथ क्रूरता का व्यवहार करता,
- 6जब मैं सोचने लगा कि इसे मैं कैसे समझूं, तो यह मेरी दृष्टि में अति कठिन समस्या थी,
- 7जब तक कि मैं ने ईश्वर के पवित्र स्थान में जाकर उन लोगों के परिणाम को न सोचा।
- 8निश्चय तू उन्हें फिसलने वाले स्थानों में रखता है, और गिराकर सत्यानाश कर देता है।
- 9अहा, वे क्षण भर में कैसे उजड़ गए हैं. वे मिट गए, वे घबराते घबराते नाश हो गए हैं।
- 0जैसे जागने हारा स्वप्न को तुच्छ जानता है, वैसे ही हे प्रभु जब तू उठेगा, तब उन को छाया सा समझ कर तुच्छ जानेगा॥
- 1मेरा मन तो चिड़चिड़ा हो गया, मेरा अन्त:करण छिद गया था,
- 2मैं तो पशु सरीखा था, और समझता न था, मैं तेरे संग रह कर भी, पशु बन गया था।
- 3तौभी मैं निरन्तर तेरे संग ही था, तू ने मेरे दाहिने हाथ को पकड़ रखा।
- 4तू सम्मति देता हुआ, मेरी अगुवाई करेगा, और तब मेरी महिमा करके मुझ को अपने पास रखेगा।
- 5स्वर्ग में मेरा और कौन है? तेरे संग रहते हुए मैं पृथ्वी पर और कुछ नहीं चाहता।
- 6मेरे हृदय और मन दोनों तो हार गए हैं, परन्तु परमेश्वर सर्वदा के लिये मेरा भाग और मेरे हृदय की चट्टान बना है॥
- 7जो तुझ से दूर रहते हैं वे तो नाश होंगे, जो कोई तेरे विरुद्ध व्यभिचार करता है, उसको तू विनाश करता है।
- 8परन्तु परमेश्वर के समीप रहना, यही मेरे लिये भला है, मैं ने प्रभु यहोवा को अपना शरणस्थान माना है, जिस से मैं तेरे सब कामों का वर्णन करूं॥
भजन संहित 74 ↟↟
- हे परमेश्वर, तू ने हमें क्यों सदा के लिये छोड़ दिया है? तेरी कोपाग्नि का धुआं तेरी चराई की भेंड़ों के विरुद्ध क्यों उठ रहा है?
- अपनी मण्डली को जिसे तू ने प्राचीन काल में मोल लिया था, और अपने निज भाग का गोत्र होने के लिये छुड़ा लिया था, और इस सिय्योन पर्वत को भी, जिस पर तू ने वास किया था, स्मारण कर.
- अपने डग सनातन की खंडहर की ओर बढ़ा, अर्थात उन सब बुराइयों की ओर जो शत्रु ने पवित्र स्थान में किए हैं॥
- तेरे द्रोही तेरे सभा स्थान के बीच गरजते रहे हैं, उन्होंने अपनी ही ध्वजाओं को चिन्ह ठहराया है। वे उन मनुष्यों के समान थे
- जो घने वन के पेड़ों पर कुल्हाड़े चलाते हैं।
- और अब वे उस भवन की नक्काशी को, कुल्हाडियों और हथौड़ों से बिलकुल तोड़े डालते हैं।
- उन्होंने तेरे पवित्र स्थान को आग में झोंक दिया है, और तेरे नाम के निवास को गिरा कर अशुद्ध कर डाला है।
- उन्होंने मन में कहा है कि हम इन को एकदम दबा दें, उन्होंने इस देश में ईश्वर के सब सभा स्थानों को फूंक दिया है॥
- हम को हमारे निशान नहीं देख पड़ते, अब कोई नबी नहीं रहा, न हमारे बीच कोई जानता है कि कब तक यह दशा रहेगी।
- 0हे परमेश्वर द्रोही कब तक नामधराई करता रहेगा? क्या शत्रु, तेरे नाम की निन्दा सदा करता रहेगा?
- 1तू अपना दहिना हाथ क्यों रोके रहता है? उसे अपने पांजर से निकाल कर उनका अन्त कर दे॥
- 2परमेश्वर तो प्राचीन काल से मेरा राजा है, वह पृथ्वी पर उद्धार के काम करता आया है।
- 3तू ने अपनी शक्ति से समुद्र को दो भाग कर दिया, तू ने जल में मगरमच्छों के सिरों को फोड़ दिया।
- 4तू ने तो लिव्यातानों के सिर टुकड़े टुकड़े करके जंगली जन्तुओं को खिला दिए।
- 5तू ने तो सोता खोल कर जल की धारा बहाई, तू ने तो बारहमासी नदियों को सुखा डाला।
- 6दिन तेरा है रात भी तेरी है, सूर्य और चन्द्रमा को तू ने स्थिर किया है।
- 7तू ने तो पृथ्वी के सब सिवानों को ठहराया, धूपकाल और जाड़ा दोनों तू ने ठहराए हैं॥
- 8हे यहोवा स्मरण कर, कि शत्रु ने नामधराई की है, और मूढ़ लोगों ने तेरे नाम की निन्दा की है।
- 9अपनी पिण्डुकी के प्राण को वनपशु के वश में न कर, अपने दीन जनों को सदा के लिये न भूल
- 0अपनी वाचा की सुधि ले, क्योंकि देश के अन्धेरे स्थान अत्याचार के घरों से भरपूर हैं।
- 1पिसे हुए जन को निरादर होकर लौटना न पड़े, दीन दरिद्र लोग तेरे नाम की स्तुति करने पाएं॥
- 2हे परमेश्वर उठ, अपना मुकद्दमा आप ही लड़, तेरी जो नामधराई मूढ़ से दिन भर होती रहती है, उसे स्मरण कर।
- 3अपने द्रोहियों का बड़ा बोल न भूल, तेरे विरोधियों का कोलाहल तो निरन्तर उठता रहता है।
भजन संहित 75 ↟↟
- हे परमेश्वर हम तेरा धन्यवाद करते, हम तेरा नाम का धन्यवाद करते हैं, क्योंकि तेरा नाम प्रगट हुआ है, तेरे आश्चर्यकर्मों का वर्णन हो रहा है॥
- जब ठीक समय आएगा तब मैं आप ही ठीक ठीक न्याय करूंगा।
- पृथ्वी अपने सब रहने वालों समेत डोल रही है, मैं ने उसके खम्भों को स्थिर कर दिया है।
- मैं ने घमंडियों से कहा, घमंड मत करो, और दुष्टों से, कि सींग ऊंचा मत करो,
- अपना सींग बहुत ऊंचा मत करो, न सिर उठा कर ढिठाई की बात बोलो॥
- क्योंकि बढ़ती न तो पूरब से न पच्छिम से, और न जंगल की ओर से आती है,
- परन्तु परमेश्वर ही न्यायी है, वह एक को घटाता और दूसरे को बढ़ाता है।
- यहोवा के हाथ में एक कटोरा है, जिस में का दाखमधु झाग वाला है, उस में मसाला मिला है, और वह उस में से उंडेलता है, निश्चय उसकी तलछट तक पृथ्वी के सब दृष्ट लोग पी जाएंगे॥
- परन्तु मैं तो सदा प्रचार करता रहूंगा, मैं याकूब के परमेश्वर का भजन गांऊगा।
- 0दुष्टों के सब सींगों को मैं काट डालूंगा, परन्तु धर्मी के सींग ऊंचे किए जाएंगे।
भजन संहित 76 ↟↟
- परमेश्वर यहूदा में जाना गया है, उसका नाम इस्राएल में महान हुआ है।
- और उसका मण्डप शालेम में, और उसका धाम सिय्योन में है।
- वहां उसने चमचमाते तीरों को, और ढाल और तलवार को तोड़कर, निदान लड़ाई ही को तोड़ डाला है॥
- हे परमेश्वर तू तो ज्योतिमय है, तू अहेर से भरे हुए पहाड़ों से अधिक उत्तम और महान है।
- दृढ़ मन वाले लुट गए, और भरी नींद में पड़े हैं,
- और शूरवीरों में से किसी का हाथ न चला। हे याकूब के परमेश्वर, तेरी घुड़की से, रथों समेत घोड़े भारी नींद में पड़े हैं।
- केवल तू ही भय योग्य है, और जब तू क्रोध करने लगे, तब तेरे साम्हने कौन खड़ा रह सकेगा?
- तू ने स्वर्ग से निर्णय सुनाया है, पृथ्वी उस समय सुनकर डर गई, और चुप रही,
- जब परमेश्वर न्याय करने को, और पृथ्वी के सब नम्र लोगों का उद्धार करने को उठा॥
- 0निश्चय मनुष्य की जलजलाहट तेरी स्तुति का कारण हो जाएगी, और जो जलजलाहट रह जाए, उसको तू रोकेगा।
- 1अपने परमेश्वर यहोवा की मन्नत मानो, और पूरी भी करो, वह जो भय के योग्य है, उसके आस पास के सब उसके लिये भेंट ले आएं।
- 2वह तो प्रधानों का अभिमान मिटा देगा, वह पृथ्वी के राजाओं को भय योग्य जान पड़ता है॥
भजन संहित 77 ↟↟
- मैं परमेश्वर की दोहाई चिल्ला चिल्लाकर दूंगा, मैं परमेश्वर की दोहाई दूंगा, और वह मेरी ओर कान लगाएगा।
- संकट के दिन मैं प्रभु की खोज में लगा रहा, रात को मेरा हाथ फैला रहा, और ढीला न हुआ, मुझ में शांति आई ही नहीं।
- मैं परमेश्वर का स्मरण कर करके करहाता हूं, मैं चिन्ता करते करते मूर्छित हो चला हूं। (सेला)
- तू मुझे झपक्की लगने नहीं देता, मैं ऐसा घबराया हूं कि मेरे मुंह से बात नहीं निकलती॥
- मैंने प्राचीन काल के दिनों को, और युग युग के वर्षों को सोचा है।
- मैं रात के समय अपने गीत को स्मरण करता, और मन में ध्यान करता हूं, और मन में भली भांति विचार करता हूं:
- क्या प्रभु युग युग के लिये छोड़ देगा, और फिर कभी प्रसन्न न होगा?
- क्या उसकी करूणा सदा के लिये जाती रही? क्या उसका वचन पीढ़ी पीढ़ी के लिये निष्फल हो गया है?
- क्या ईश्वर अनुग्रह करना भूल गया? क्या उसने क्रोध करके अपनी सब दया को रोक रखा है? (सेला)
- 0मैने कहा यह तो मेरी दुर्बलता ही है, परन्तु मैं परमप्रधान के दाहिने हाथ के वर्षों को विचारता हूं॥
- 1मैं याह के बड़े कामों की चर्चा करूंगा, निश्चय मैं तेरे प्राचीन काल वाले अद्भुत कामों को स्मरण करूंगा।
- 2मैं तेरे सब कामों पर ध्यान करूंगा, और तेरे बड़े कामों को सोचूंगा।
- 3हे परमेश्वर तेरी गति पवित्रता की है। कौन सा देवता परमेश्वर के तुल्य बड़ा है?
- 4अद्भुत काम करने वाला ईश्वर तू ही है, तू ने अपने देश देश के लोगों पर अपनी शक्ति प्रगट की है।
- 5तू ने अपने भुजबल से अपनी प्रजा, याकूब और यूसुफ के वंश को छुड़ा लिया है॥ (सेला)
- 6हे परमेश्वर समुद्र ने तुझे देखा, समुद्र तुझे देख कर ड़र गया, गहिरा सागर भी कांप उठा।
- 7मेघों से बड़ी वर्षा हुई, आकाश से शब्द हुआ, फिर तेरे तीर इधर उधर चले।
- 8बवणडर में तेरे गरजने का शब्द सुन पड़ा था, जगत बिजली से प्रकाशित हुआ, पृथ्वी कांपी और हिल गई।
- 9तेरे मार्ग समुद्र में है, और तेरा रास्ता गहिरे जल में हुआ, और तेरे पांवों के चिन्ह मालूम नहीं होते।
- 0तू ने मूसा और हारून के द्धारा, अपनी प्रजा की अगुवाई भेड़ों की सी की॥
भजन संहित 78 ↟↟
- हे मेरे लोगों, मेरी शिक्षा सुनो, मेरे वचनों की ओर कान लगाओ.
- मैं अपना मूंह नीतिवचन कहने के लिये खोलूंगा, मैं प्राचीन काल की गुप्त बातें कहूंगा,
- जिन बातों को हम ने सुना, ओर जान लिया, और हमारे बाप दादों ने हम से वर्णन किया है।
- उन्हे हम उनकी सन्तान से गुप्त न रखेंगें, परन्तु होनहार पीढ़ी के लोगों से, यहोवा का गुणानुवाद और उसकी सामर्थ और आश्चर्यकर्मों का वर्णन करेंगें॥
- उसने तो याकूब में एक चितौनी ठहराई, और इस्त्राएल में एक व्यवस्था चलाई, जिसके विषय उसने हमारे पितरों को आज्ञा दी, कि तुम इन्हे अपने अपने लड़के बालों को बताना,
- कि आने वाली पीढ़ी के लोग, अर्थात जो लड़के बाले उत्पन्न होने वाले हैं, वे इन्हे जानें, और अपने अपने लड़के बालों से इनका बखान करने में उद्यत हों, जिस से वे परमेश्वर का आसरा रखें,
- और ईश्वर के बड़े कामों को भूल न जाएं, परन्तु उसकी आज्ञाओं का पालन करते रहें,
- और अपने पितरों के समान न हों, क्योंकि उस पीढ़ी के लोग तो हठीले और झगड़ालू थे, और उन्होंने अपना मन स्थिर न किया था, और न उनकी आत्मा ईश्वर की ओर सच्ची रही॥
- एप्रेमयों ने तो शस्त्राधारी और धनुर्धारी होने पर भी, युद्ध के समय पीठ दिखा दी।
- 0उन्होंने परमेश्वर की वाचा पूरी नहीं की, और उसकी व्यवस्था पर चलने से इनकार किया।
- 1उन्होंने उसके बड़े कामों को और जो आश्चर्यकर्म उसने उनके साम्हने किए थे, उन को भुला दिया।
- 2उसने तो उनके बाप दादों के सम्मुख मिस्त्र देश के सोअन के मैदान में अद्भुत कर्म किए थे।
- 3उसने समुद्र को दो भाग करके उन्हे पार कर दिया, और जल को ढ़ेर की नाईं खड़ा कर दिया।
- 4और उसने दिन को बादल के खम्भों से और रात भर अग्नि के प्रकाश के द्धारा उनकी अगुवाई की।
- 5वह जंगल में चट्टानें फाड़कर, उन को मानो गहिरे जलाशयों से मनमाने पिलाता था।
- 6उसने चट्टान से भी धाराएं निकालीं और नदियों का सा जल बहाया॥
- 7तौभी वे फिर उसके विरुद्ध अधिक पाप करते गए, और निर्जल देश में परमप्रधान के विरुद्ध उठते रहे।
- 8और अपनी चाह के अनुसार भोजन मांग कर मन ही मन ईश्वर की परीक्षा की।
- 9वे परमेश्वर के विरुद्ध बोले, और कहने लगे, क्या ईश्वर जंगल में मेज लगा सकता है?
- 0उसने चट्टान पर मार के जल बहा तो दिया, और धाराएं उमण्ड़ चली, परन्तु क्या वह रोटी भी दे सकता है? क्या वह अपनी प्रजा के लिये मांस भी तैयार कर सकता?
- 1यहोवा सुनकर क्रोध से भर गया, तब याकूब के बीच आग लगी, और इस्त्राएल के विरुद्ध क्रोध भड़का,
- 2इसलिए कि उन्होंने परमेश्वर पर विश्वास नहीं रखा था, न उसकी उद्धार करने की शक्ति पर भरोसा किया।
- 3तौभी उसने आकाश को आज्ञा दी, और स्वर्ग के द्वारों को खोला,
- 4और उनके लिये खाने को मन्ना बरसाया, और उन्हे स्वर्ग का अन्न दिया।
- 5उन को शूरवीरों की सी रोटी मिली, उसने उन को मनमाना भोजन दिया।
- 6उसने आकाश में पुरवाई को चलाया, और अपनी शक्ति से दक्खिनी बहाई,
- 7और उनके लिये मांस धूलि की नाईं बहुत बरसाया, और समुद्र के बालू के समान अनगिनित पक्षी भेजे,
- 8और उनकी छावनी के बीच में, उनके निवासों के चारों ओर गिराए।
- 9और वे खाकर अति तृप्त हुए, और उसने उनकी कामना पूरी की।
- 0उनकी कामना बनी ही रही, उनका भोजन उनके मुंह ही में था,
- 1कि परमेश्वर का क्रोध उन पर भड़का, और उसने उनके हृष्टपुष्टों को घात किया, और इस्त्राएल के जवानों को गिरा दिया॥
- 2इतने पर भी वे और अधिक पाप करते गए, और परमेश्वर के आश्चर्यकर्मों की प्रतीति न की।
- 3तब उसने उनके दिनों को व्यर्थ श्रम में, और उनके वर्षों को घबराहट में कटवाया।
- 4जब जब वह उन्हे घात करने लगता, तब तब वे उसको पूछते थे, और फिरकर ईश्वर को यत्न से खोजते थे।
- 5और उन को स्मरण होता था कि परमेश्वर हमारी चट्टान है, और परमप्रधान ईश्वर हमारा छुड़ाने वाला है।
- 6तौभी उन्होंने उससे चापलूसी की, वे उससे झूठ बोले।
- 7क्योंकि उनका हृदय उसकी ओर दृढ़ न था, न वे उसकी वाचा के विषय सच्चे थे।
- 8परन्तु वह जो दयालु है, वह अधर्म को ढांपता, और नाश नहीं करता, वह बारबार अपने क्रोध को ठण्डा करता है, और अपनी जलजलाहट को पूरी रीति से भड़कने नहीं देता।
- 9उसको स्मरण हुआ कि ये नाशमान हैं, ये वायु के समान हैं जो चली जाती और लौट नहीं आती।
- 0उन्होंने कितनी ही बार जंगल में उससे बलवा किया, और निर्जल देश में उसको उदास किया.
- 1वे बारबार ईश्वर की परीक्षा करते थे, और इस्त्राएल के पवित्र को खेदित करते थे।
- 2उन्होने न तो उसका भुजबल स्मरण किया, न वह दिन जब उसने उन को द्रोही के वश से छुड़ाया था,
- 3कि उसने क्योंकर अपने चिन्ह मिस्त्र में, और अपने चमत्कार सोअन के मैदान में किए थे।
- 4उसने तो मिस्त्रियों की नहरों को लोहू बना डाला, और वे अपनी नदियों का जल पी न सके।
- 5उसने उनके बीच में डांस भेजे जिन्होंने उन्हे काट खाया, और मेंढक भी भेजे, जिन्होंने उनका बिगाड़ किया।
- 6उसने उनकी भूमि की उपज कीड़ों को, और उनकी खेतीबारी टिड्डयों को खिला दी थी।
- 7उसने उनकी दाखलताओं को ओेलों से, और उनके गूलर के पेड़ों को बड़े बड़े पत्थर बरसा कर नाश किया।
- 8उसने उनके पशुओं को ओलों से, और उनके ढोरों को बिजलियों से मिटा दिया।
- 9उसने उनके ऊपर अपना प्रचणड क्रोध और रोष भड़काया, और उन्हे संकट में डाला, और दुखदाई दूतों का दल भेजा।
- 0उसने अपने क्रोध का मार्ग खोला, और उनके प्राणों को मृत्यु से न बचाया, परन्तु उन को मरी के वश में कर दिया।
- 1उसने मित्र के सब पहिलौठों को मारा, जो हाम के डेरों में पौरूष के पहिले फल थे,
- 2परन्तु अपनी प्रजा को भेड़- बकरियों की नाईं प्रस्थान कराया, और जंगल में उनकी अगुवाई पशुओं के झुण्ड की सी की।
- 3तब वे उसके चलाने से बेखटके चले और उन को कुछ भय न हुआ, परन्तु उनके शत्रु समुद्र में डूब गए।
- 4और उसने उन को अपने पवित्र देश के सिवाने तक, इसी पहाड़ी देश में पहुंचाया, जो उसने अपने दाहिने हाथ से प्राप्त किया था।
- 5उसने उनके साम्हने से अन्यजातियों को भगा दिया, और उनकी भूमि को डोरी से माप माप कर बांट दिया, और इस्त्राएल के गोत्रों को उनके डेरों में बसाया॥
- 6तौभी उन्होने परमप्रधान परमेश्वर की परीक्षा की और उससे बलवा किया, और उसकी चितौनियों को न माना,
- 7और मुड़ कर अपने पुरखाओं की नाईं विश्वासघात किया, उन्होंने निकम्मे धनुष की नाईं धोखा दिया।
- 8क्योंकि उन्होंने ऊंचे स्थान बनाकर उसको रिस दिलाई, और खुदी हुई मुर्तियों के द्वारा उस में जलन उपजाई।
- 9परमेश्वर सुनकर रोष से भर गया, और उसने इस्त्राएल को बिलकुल तज दिया।
- 0उसने शीलो के निवास, अर्थात उस तम्बु को जो उसने मनुष्यों के बीच खडा किया था, त्याग दिया,
- 1और अपनी सामर्थ को बन्धुआई में जाने दिया, और अपनी शोभा को द्रोही के वश में कर दिया।
- 2उसने अपनी प्रजा को तलवार से मरवा दिया, और अपने निज भाग के लोगों पर रोष से भर गया।
- 3उन के जवान आग से भस्म हुए, और उनकी कुमारियों के विवाह के गीत न गाए गए।
- 4उनके याजक तलवार से मारे गए, और उनकी विधवाएं रोने न पाईं।
- 5तब प्रभु मानो नींद से चौंक उठा, और ऐसे वीर के समान उठा जो दाखमधु पीकर ललकारता हो।
- 6और उसने अपने द्रोहियों को मार कर पीछे हटा दिया, और उनकी सदा की नामधराई कराई॥
- 7फिर उसने यूसुफ के तम्बू को तज दिया, और एप्रैम के गोत्रा को न चुना,
- 8परन्तु यहूदा ही के गोत्र को, और अपने प्रिय सिय्योन पर्वत को चुन लिया।
- 9उसने अपने पवित्र स्थान को बहुत ऊंचा बना दिया, और पृथ्वी के समान स्थिर बनाया, जिसकी नेव उसने सदा के लिये डाली है।
- 0फिर उसने अपने दास दाऊद को चुन कर भेड़शालाओं में से ले लिया,
- 1वह उसको बच्चे वाली भेड़ों के पीछे पीछे फिरने से ले आया कि वह उसकी प्रजा याकूब की अर्थात उसके निज भाग इस्त्राएल की चरवाही करे।
- 2तब उसने खरे मन से उनकी चरवाही की, और अपने हाथ की कुशलता से उनकी अगुवाई की॥
भजन संहित 79 ↟↟
- हे परमेश्वर अन्यजातियां तेरे निज भग में घुस आई, उन्होंने तेरे पवित्र मन्दिर को अशुद्ध किया, और यरूशलेम को खंडहर कर दिया है।
- उन्होंने तेरे दासों की लोथों को आकाश के पक्षियों का आहार कर दिया, और तेरे भक्तों का मांस वनपशुओें को खिला दिया है।
- उन्होंने उनका लोहू यरूशलेम के चारों ओर जल की नाईं बहाया, और उन को मिट्टी देने वाला कोई न था।
- पड़ोसियों के बीच हमारी नामधराई हुई, चारों ओर के रहने वाले हम पर हंसते, और ठट्ठा करते हैं॥
- हे यहोवा, तू कब तक लगातार क्रोध करता रहेगा? तुझ में आग की सी जलन कब तक भड़कती रहेगी?
- जो जातियां तुझ को नहीं जानती, और जिन राज्यों के लोग तुझ से प्रार्थना नहीं करते, उन्ही पर अपनी सब जलजलाहट भड़का.
- क्योंकि उन्होंने याकूब को निगल लिया, और उसके वासस्थान को उजाड़ दिया है।
- हमारी हानि के लिये हमारे पुरखाओं के अधर्म के कामों को स्मरण न कर, तेरी दया हम पर शीघ्र हो, क्योंकि हम बड़ी दुर्दशा में पड़े हैं।
- हे हमारे उद्धारकर्ता परमेश्वर, अपने नाम की महिमा के निमित हमारी सहायता कर, और अपने नाम के निमित हम को छुड़ा कर हमारे पापों को ढांप दे।
- 0अनयजातियां क्यों कहने पाएं कि उनका परमेश्वर कहां रहा? अन्यजातियों के बीच तेरे दासों के खून का पलटा लेना हमारे देखते उन्हें मालूम हो जाए॥
- 1बन्धुओं का कराहना तेरे कान तक पहुंचे, घात होने वालों को अपने भुजबल के द्वारा बचा।
- 2और हे प्रभु, हमारे पड़ोसियों ने जो तेरी निन्दा की है, उसका सातगुणा बदला उन को दे.
- 3तब हम जो तेरी प्रजा और तेरी चराई की भेड़ें हैं, तेरा धन्यवाद सदा करते रहेंगे, और पीढ़ी से पीढ़ी तक तेरा गुणानुवाद करते रहेंगें॥
भजन संहित 80 ↟↟
- हे इस्त्राएल के चरवाहे, तू जो यूसुफ की अगुवाई भेड़ों की सी करता है, कान लगा. तू जो करूबों पर विराजमान है, अपना तेज दिखा.
- एप्रैम, बिन्यामीन, और मनश्शे के साम्हने अपना पराक्रम दिखा कर, हमारा उद्धार करने को आ.
- हे परमेश्वर, हम को ज्यों का त्यों कर दे, और अपने मुख का प्रकाश चमका, तब हमारा उद्धार हो जाएगा.
- हे सेनाओं के परमेश्वर यहोवा, तू कब तक अपनी प्रजा की प्रार्थना पर क्रोधित रहेगा?
- तू ने आंसुओं को उनका आहार कर दिया, और मटके भर भर के उन्हें आंसु पिलाए हैं।
- तू हमें हमारे पड़ोसियों के झगड़ने का कारण कर देता है, और हमारे शत्रु मनमाने ठट्ठा करते हैं॥
- हे सेनाओं के परमेश्वर, हम को ज्यों का त्यों कर दे, और अपने मुख का प्रकाश हम पर चमका, तब हमारा उद्धार हो जाएगा॥
- तू मिस्त्र से एक दाखलता ले आया, और अन्यजातियों को निकाल कर उसे लगा दिया।
- तू ने उसके लिये स्थान तैयार किया है, और उसने जड़ पकड़ी और फैल कर देश को भर दिया।
- 0उसकी छाया पहाड़ों पर फैल गई, और उसकी डालियां ईश्वर के देवदारों के समान हुईं,
- 1उसकी शाखाएं समुद्र तक बढ़ गई, और उसके अंकुर महानद तक फैल गए।
- 2फिर तू ने उसके बाड़ों को क्यों गिरा दिया, कि सब बटोही उसके फलों को तोड़ते हैं?
- 3जंगली सूअर उसको नाश किए डालता है, और मैदान के सब पशु उसे चर जाते हैं॥
- 4हे सेनाओं के परमेश्वर, फिर आ. स्वर्ग से ध्यान देकर देख, और इस दाखलता की सुधि ले,
- 5ये पौधा तू ने अपने दाहिने हाथ से लगाया, और जो लता की शाखा तू ने अपने लिये दृढ़ की है।
- 6वह जल गई, वह कट गई है, तेरी घुड़की से वे नाश होते हैं।
- 7तेरे दाहिने हाथ के सम्भाले हुअ पुरूष पर तेरा हाथ रखा रहे, उस आदमी पर, जिसे तू ने अपने लिये दृढ़ किया है।
- 8तब हम लोग तुझ से न मुड़ेंगे: तू हम को जिला, और हम तुझ से प्रार्थना कर सकेंगे।
- 9हे सेनाओं के परमेश्वर यहोवा, हम को ज्यों का त्यों कर दे. और अपने मुख का प्रकाश हम पर चमका, तब हमारा उद्धार हो जाएगा.
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