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भजन संहित 101 ↟↟
- मैं करूणा और न्याय के विषय गाऊंगा, हे यहोवा, मैं तेरा ही भजन गाऊंगा।
- मैं बुद्धिमानी से खरे मार्ग में चलूंगा। तू मेरे पास कब आएगा. मैं अपने घर में मन की खराई के साथ अपनी चाल चलूंगा,
- मैं किसी ओछे काम पर चित्त न लगाऊंगा॥ मैं कुमार्ग पर चलने वालों के काम से घिन रखता हूं, ऐसे काम में मैं न लगूंगा।
- टेढ़ा स्वभाव मुझ से दूर रहेगा, मैं बुराई को जानूंगा भी नहीं॥
- जो छिप कर अपने पड़ोसी की चुगली खाए, उसको मैं सत्यानाश करूंगा, जिसकी आंखें चढ़ी हों और जिसका मन घमण्डी है, उसकी मैं न सहूंगा॥
- मेरी आंखें देश के विश्वासयोग्य लोगों पर लगी रहेंगी कि वे मेरे संग रहें, जो खरे मार्ग पर चलता है वही मेरा टहलुआ होगा॥
- जो छल करता है वह मेरे घर के भीतर न रहने पाएगा, जो झूठ बोलता है वह मेरे साम्हने बना न रहेगा॥
- भोर ही भोर को मैं देश के सब दुष्टों को सत्यानाश किया करूंगा, इसलिये कि यहोवा के नगर के सब अनर्थकारियों को नाश करूं॥
भजन संहित 102 ↟↟
- हे यहोवा, मेरी प्रार्थना सुन, मेरी दोहाई तुझ तक पहुंचे.
- मेरे संकट के दिन अपना मुख मुझ से न छिपा ले, अपना कान मेरी ओर लगा, जिस समय मैं पुकारूं, उसी समय फुर्ती से मेरी सुन ले.
- क्योंकि मेरे दिन धुएं की नाईं उड़े जाते हैं, और मेरी हडि्डयां लुकटी के समान जल गई हैं।
- मेरा मन झुलसी हुई घास की नाईं सूख गया है, और मैं अपनी रोटी खाना भूल जाता हूं।
- कराहते कराहते मेरा चमड़ा हडि्डयों में सट गया है।
- मैं जंगल के धनेश के समान हो गया हूं, मैं उजड़े स्थानों के उल्लू के समान बन गया हूं।
- मैं पड़ा पड़ा जागता रहता हूं और गौरे के समान हो गया हूं जो छत के ऊपर अकेला बैठता है।
- मेरे शत्रु लगातार मेरी नामधराई करते हैं, जो मेरे विराध की धुन में बावले हो रहे हैं, वे मेरा नाम लेकर शपथ खाते हैं।
- क्योंकि मैं ने रोटी की नाईं राख खाई और आंसू मिला कर पानी पीता हूं।
- 0यह तेरे क्रोध और कोप के कारण हुआ है, क्योंकि तू ने मुझे उठाया, और फिर फेंक दिया है।
- 1मेरी आयु ढलती हुई छाया के समान है, और मैं आप घास की नाईं सूख चला हूं॥
- 2परन्तु हे यहोवा, तू सदैव विराजमान रहेगा, और जिस नाम से तेरा स्मरण होता है, वह पीढ़ी से पीढ़ी तक बना रहेगा।
- 3तू उठकर सिय्योन पर दया करेगा, क्योंकि उस पर अनुग्रह करने का ठहराया हुआ समय आ पहुंचा है।
- 4क्योंकि तेरे दास उसके पत्थरों को चाहते हैं, और उसकी धूलि पर तरस खाते हैं।
- 5इसलिये अन्यजातियां यहोवा के नाम का भय मानेंगी, और पृथ्वी के सब राजा तेरे प्रताप से डरेंगे।
- 6क्योंकि यहोवा ने सिय्योन को फिर बसाया है, और वह अपनी महिमा के साथ दिखाई देता है,
- 7वह लाचार की प्रार्थना की ओर मुंह करता है, और उनकी प्रार्थना को तुच्छ नहीं जानता।
- 8यह बात आने वाली पीढ़ी के लिये लिखी जाएगी, और एक जाति जो सिरजी जाएगी वही याह की स्तुति करेगी।
- 9क्योंकि यहोवा ने अपने ऊंचे और पवित्र स्थान से दृष्टि करके स्वर्ग से पृथ्वी की ओर देखा है,
- 0ताकि बन्धुओं का कराहना सुने, और घात होन वालों के बन्धन खोले,
- 1और सिय्योन में यहोवा के नाम का वर्णन किया जाए, और यरूशलेम में उसकी स्तुति की जाए,
- 2यह उस समय होगा जब देश देश, और राज्य राज्य के लोग यहोवा की उपासना करने को इकट्ठे होंगे॥
- 3उसने मुझे जीवन यात्रा में दु:ख देकर, मेरे बल और आयु को घटाया।
- 4मैं ने कहा, हे मेरे ईश्वर, मुझे आधी आयु में न उठा ले, मेरे वर्ष पीढ़ी से पीढ़ी तक बने रहेंगे.
- 5आदि में तू ने पृथ्वी की नेव डाली, और आकाश तेरे हाथों का बनाया हुआ है।
- 6वह तो नाश होगा, परन्तु तू बना रहेगा, और वह सब कपड़े के समान पुराना हो जाएगा। तू उसको वस्त्र की नाईं बदलेगा, और वह तो बदल जाएगा,
- 7परन्तु तू वहीं है, और तेरे वर्षों का अन्त नहीं होने का।
- 8तेरे दासों की सन्तान बनी रहेगी, और उनका वंश तेरे साम्हने स्थिर रहेगा॥
भजन संहित 103 ↟↟
- हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह, और जो कुछ मुझ में है, वह उसके पवित्र नाम को धन्य कहे.
- हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह, और उसके किसी उपकार को न भूलना।
- वही तो तेरे सब अधर्म को क्षमा करता, और तेरे सब रोगों को चंगा करता है,
- वही तो तेरे प्राण को नाश होने से बचा लेता है, और तेरे सिर पर करूणा और दया का मुकुट बान्धता है,
- वही तो तेरी लालसा को उत्तम पदार्थों से तृप्त करता है, जिस से तेरी जवानी उकाब की नाईं नई हो जाती है॥
- यहोवा सब पिसे हुओं के लिये धर्म और न्याय के काम करता है।
- उसने मूसा को अपनी गति, और इस्राएलियों पर अपने काम प्रगट किए।
- यहोवा दयालु और अनुग्रहकरी, विलम्ब से कोप करने वाला और अति करूणामय है।
- वह सर्वदा वादविवाद करता न रहेगा, न उसका क्रोध सदा के लिये भड़का रहेगा।
- 0उसने हमारे पापों के अनुसार हम से व्यवहार नहीं किया, और न हमारे अधर्म के कामों के अनुसार हम को बदला दिया है।
- 1जैसे आकाश पृथ्वी के ऊपर ऊंचा है, वैसे ही उसकी करूणा उसके डरवैयों के ऊपर प्रबल है।
- 2उदयाचल अस्ताचल से जितनी दूर है, उसने हमारे अपराधों को हम से उतनी ही दूर कर दिया है।
- 3जैसे पिता अपने बालकों पर दया करता है, वैसे ही यहोवा अपने डरवैयों पर दया करता है।
- 4क्योंकि वह हमारी सृष्टि जानता है, और उसको स्मरण रहता है कि मनुष्य मिट्टी ही है॥
- 5मनुष्य की आयु घास के समान होती है, वह मैदान के फूल की नाईं फूलता है,
- 6जो पवन लगते ही ठहर नहीं सकता, और न वह अपने स्थान में फिर मिलता है।
- 7परन्तु यहोवा की करूणा उसके डरवैयों पर युग युग, और उसका धर्म उनके नाती- पोतों पर भी प्रगट होता रहता है,
- 8अर्थात उन पर जो उसकी वाचा का पालन करते और उसके उपदेशों को स्मरण करके उन पर चलते हैं॥
- 9यहोवा ने तो अपना सिंहासन स्वर्ग में स्थिर किया है, और उसका राज्य पूरी सृष्टि पर है।
- 0हे यहोवा के दूतों, तुम जो बड़े वीर हो, और उसके वचन के मानने से उसको पूरा करते हो उसको धन्य कहो.
- 1हे यहोवा की सारी सेनाओं, हे उसके टहलुओं, तुम जो उसकी इच्छा पूरी करते हो, उसको धन्य कहो.
- 2हे यहोवा की सारी सृष्टि, उसके राज्य के सब स्थानों में उसको धन्य कहो। हे मेरे मन, तू यहोवा को धन्य कह.
भजन संहित 104 ↟↟
- हे मेरे मन, तू यहोवा को धन्य कह. हे मेरे परमेश्वर यहोवा, तू अत्यन्त महान है. तू वैभव और ऐश्वर्य का वस्त्र पहिने हुए है,
- जो उजियाले को चादर की नाईं ओढ़े रहता है, और आकाश को तम्बू के समान ताने रहता है,
- जो अपनी अटारियों की कड़ियां जल में धरता है, और मेघों को अपना रथ बनाता है, और पवन के पंखों पर चलता है,
- जो पवनों को अपने दूत, और धधकती आग को अपने टहलुए बनाता है॥
- तू ने पृथ्वी को उसकी नीव पर स्थिर किया है, ताकि वह कभी न डगमगाए।
- तू ने उसको गहिरे सागर से ढांप दिया है जैसे वस्त्र से, जल पहाड़ों के ऊपर ठहर गया।
- तेरी घुड़की से वह भाग गया, तेरे गरजने का शब्द सुनते ही, वह उतावली करके बह गया।
- वह पहाड़ों पर चढ़ गया, और तराईयों के मार्ग से उस स्थान में उतर गया जिसे तू ने उसके लिये तैयार किया था।
- तू ने एक सिवाना ठहराया जिस को वह नहीं लांघ सकता है, और न फिरकर स्थल को ढांप सकता है॥
- 0तू नालों में सोतों को बहाता है, वे पहाड़ों के बीच से बहते हैं,
- 1उन से मैदान के सब जीव- जन्तु जल पीते हैं, जंगली गदहे भी अपनी प्यास बुझा लेते हैं।
- 2उनके पास आकाश के पक्षी बसेरा करते, और डालियों के बीच में से बोलते हैं।
- 3तू अपनी अटारियों में से पहाड़ों को सींचता है तेरे कामों के फल से पृथ्वी तृप्त रहती है॥
- 4तू पशुओं के लिये घास, और मनुष्यों के काम के लिये अन्न आदि उपजाता है, और इस रीति भूमि से वह भोजन- वस्तुएं उत्पन्न करता है,
- 5और दाखमधु जिस से मनुष्य का मन आनन्दित होता है, और तेल जिस से उसका मुख चमकता है, और अन्न जिस से वह सम्भल जाता है।
- 6यहोवा के वृक्ष तृप्त रहते हैं, अर्थात लबानोन के देवदार जो उसी के लगाए हुए हैं।
- 7उन में चिड़ियां अपने घोंसले बनाती हैं, लगलग का बसेरा सनौवर के वृक्षों में होता है।
- 8ऊंचे पहाड़ जंगली बकरों के लिये हैं, और चट्टानें शापानों के शरणस्थान हैं।
- 9उसने नियत समयों के लिये चन्द्रमा को बनाया है, सूर्य अपने अस्त होने का समय जानता है।
- 0तू अन्धकार करता है, तब रात हो जाती है, जिस में वन के सब जीव जन्तु घूमते फिरते हैं।
- 1जवान सिंह अहेर के लिये गरजते हैं, और ईश्वर से अपना आहार मांगते हैं।
- 2सूर्य उदय होते ही वे चले जाते हैं और अपनी मांदों में जा बैठते हैं।
- 3तब मनुष्य अपने काम के लिये और सन्ध्या तक परिश्रम करने के लिये निकलता है।
- 4हे यहोवा तेरे काम अनगिनित हैं. इन सब वस्तुओं को तू ने बुद्धि से बनाया है, पृथ्वी तेरी सम्पत्ति से परिपूर्ण है।
- 5इसी प्रकार समुद्र बड़ा और बहुत ही चौड़ा है, और उस में अनगिनित जलचर जीव- जन्तु, क्या छोटे, क्या बड़े भरे पड़े हैं।
- 6उस में जहाज भी आते जाते हैं, और लिव्यातान भी जिसे तू ने वहां खेलने के लिये बनाया है॥
- 7इन सब को तेरा ही आसरा है, कि तू उनका आहार समय पर दिया करे।
- 8तू उन्हें देता हे, वे चुन लेते हैं, तू अपनी मुट्ठी खोलता है और वे उत्तम पदार्थों से तृप्त होते हैं।
- 9तू मुख फेर लेता है, और वे घबरा जाते हैं, तू उनकी सांस ले लेता है, और उनके प्राण छूट जाते हैं और मिट्टी में फिर मिल जाते हैं।
- 0फिर तू अपनी ओर से सांस भेजता है, और वे सिरजे जाते हैं, और तू धरती को नया कर देता है॥
- 1यहोवा की महिमा सदा काल बनी रहे, यहोवा अपने कामों से आन्दित होवे.
- 2उसकी दृष्टि ही से पृथ्वी कांप उठती है, और उसके छूते ही पहाड़ों से धुआं निकलता है।
- 3मैं जीवन भर यहोवा का गीत गाता रहूंगा, जब तक मैं बना रहूंगा तब तक अपने परमेश्वर का भजन गाता रहूंगा।
- 4मेरा ध्यान करना, उसको प्रिय लगे, क्योंकि मैं तो यहोवा के कारण आनन्दित रहूंगा।
- 5पापी लोग पृथ्वी पर से मिट जाएं, और दुष्ट लोग आगे को न रहें. हे मेरे मन यहोवा को धन्य कह. याह की स्तुति करो.
भजन संहित 105 ↟↟
- यहोवा का धन्यवाद करो, उससे प्रार्थना करो, देश देश के लोगों में उसके कामों का प्रचार करो.
- उसके लिये गीत गाओ, उसके लिये भजन गाओ, उसके सब आश्चर्यकर्मों पर ध्यान करो.
- उसके पवित्र नाम की बड़ाई करो, यहोवा के खोजियों का हृदय आनन्दित हो.
- यहोवा और उसकी सामर्थ को खोजो, उसके दर्शन के लगातार खोजी बने रहो.
- उसके किए हुए आश्चर्यकर्म स्मरण करो, उसके चमत्कार और निर्णय स्मरण करो.
- हे उसके दास इब्राहीम के वंश, हे याकूब की सन्तान, तुम तो उसके चुने हुए हो.
- वही हमारा परमेश्वर यहोवा है, पृथ्वी भर में उसके निर्णय होते हैं।
- वह अपनी वाचा को सदा स्मरण रखता आया है, यह वही वचन है जो उसने हजार पीढ़ीयों के लिये ठहराया है,
- वही वाचा जो उसने इब्राहीम के साथ बान्धी, और उसके विषय में उसने इसहाक से शपथ खाई,
- 0और उसी को उसने याकूब के लिये विधि करके, और इस्राएल के लिये यह कह कर सदा की वाचा करके दृढ़ किया,
- 1कि मैं कनान देश को तुझी को दूंगा, वह बांट में तुम्हारा निज भाग होगा॥
- 2उस समय तो वे गिनती में थोड़े थे, वरन बहुत ही थोड़े, और उस देश में परदेशी थे।
- 3वे एक जाति से दूसरी जाति में, और एक राज्य से दूसरे राज्य में फिरते रहे,
- 4परन्तु उसने किसी मनुष्य को उन पर अन्धेर करने न दिया, और वह राजाओं को उनके निमित्त यह धमकी देता था,
- 5कि मेरे अभिषिक्तों को मत छुओ, और न मेरे नबियों की हानि करो.
- 6फिर उसने उस देश में अकाल भेजा, और अन्न के सब आधार को दूर कर दिया।
- 7उसने यूसुफ नाम एक पुरूष को उन से पहिले भेजा था, जो दास होने के लिये बेचा गया था।
- 8लोगों ने उसके पैरों में बेड़ियां डाल कर उसे दु:ख दिया, वह लोहे की सांकलों से जकड़ा गया,
- 9जब तक कि उसकी बात पूरी न हुई तब तक यहोवा का वचन उसे कसौटी पर कसता रहा।
- 0तब राजा ने दूत भेज कर उसे निकलवा लिया, और देश देश के लोगों के स्वामी ने उसके बन्धन खुलवाए,
- 1उसने उसको अपने भवन का प्रधान और अपनी पूरी सम्पत्ति का अधिकारी ठहराया,
- 2कि वह उसके हाकिमों को अपनी इच्छा के अनुसार कैद करे और पुरनियों को ज्ञान सिखाए॥
- 3फिर इस्राएल मिस्त्र में आया, और याकूब हाम के देश में परदेशी रहा।
- 4तब उसने अपनी प्रजा को गिनती में बहुत बढ़ाया, और उसके द्रोहियों से अधिक बलवन्त किया।
- 5उसने मिस्त्रियों के मन को ऐसा फेर दिया, कि वे उसकी प्रजा से बैर रखने, और उसके दासों से छल करने लगे॥
- 6उसने अपने दास मूसा को, और अपने चुने हुए हारून को भेजा।
- 7उन्होंने उनके बीच उसकी ओर से भांति भांति के चिन्ह, और हाम के देश में चमत्कार दिखाए।
- 8उसने अन्धकार कर दिया, और अन्धियारा हो गया, और उन्होंने उसकी बातों को न टाला।
- 9उसने मिस्त्रियों के जल को लोहू कर डाला, और मछलियों को मार डाला।
- 0मेंढक उनकी भूमि में वरन उनके राजा की कोठरियों में भी भर गए।
- 1उसने आज्ञा दी, तब डांस आ गए, और उनके सारे देश में कुटकियां आ गईं।
- 2उसने उनके लिये जलवृष्टि की सन्ती ओले, और उनके देश में धधकती आग बरसाई।
- 3और उसने उनकी दाखलताओं और अंजीर के वृक्षों को वरन उनके देश के सब पेड़ों को तोड़ डाला।
- 4उसने आज्ञा दी तब अनगिनत टिडि्डयां, और कीड़े आए,
- 5और उन्होंने उनके देश के सब अन्न आदि को खा डाला, और उनकी भूमि के सब फलों को चट कर गए।
- 6उसने उनके देश के सब पहिलौठों को, उनके पौरूष के सब पहिले फल को नाश किया॥
- 7तब वह अपने गोत्रियों को सोना चांदी दिला कर निकाल लाया, और उन में से कोई निर्बल न था।
- 8उनके जाने से मिस्त्री आनन्दित हुए, क्योंकि उनका डर उन में समा गया था।
- 9उसने छाया के लिये बादल फैलाया, और रात को प्रकाश देने के लिये आग प्रगट की।
- 0उन्होंने मांगा तब उसने बटेरें पहुंचाई, और उन को स्वर्गीय भोजन से तृप्त किया।
- 1उसने चट्टान फाड़ी तब पानी बह निकला, और निर्जल भूमि पर नदी बहने लगी।
- 2क्योंकि उसने अपने पवित्र वचन और अपने दास इब्राहीम को स्मरण किया॥
- 3वह अपनी प्रजा को हर्षित करके और अपने चुने हुओं से जयजयकार कराके निकाल लाया।
- 4और उन को अन्यजातियों के देश दिए, और वे और लोगों के श्रम के फल के अधिकारी किए गए,
- 5कि वे उसकी विधियों को मानें, और उसकी व्यवस्था को पूरी करें। याह की स्तुति करो.
भजन संहित 106 ↟↟
- याह की स्तुति करो. यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है, और उसकी करूणा सदा की है.
- यहोवा के पराक्रम के कामों का वर्णन कौन कर सकता है, या उसका पूरा गुणानुवाद कौन सुना सकता?
- क्या ही धन्य हैं वे जो न्याय पर चलते, और हर समय धर्म के काम करते हैं.
- हे यहोवा, अपनी प्रजा पर की प्रसन्नता के अनुसार मुझे स्मरण कर, मेरे उद्धार के लिये मेरी सुधि ले,
- कि मैं तेरे चुने हुओं का कल्याण देखूं, और तेरी प्रजा के आनन्द में आनन्दित हो जाऊं, और तेरे निज भाग के संग बड़ाई करने पाऊं॥
- हम ने तो अपने पुरखाओं की नाईं पाप किया है, हम ने कुटिलता की, हम ने दुष्टता की है.
- मिस्त्र में हमारे पुरखाओं ने तेरे आश्चर्यकर्मों पर मन नहीं लगाया, न तेरी अपार करूणा को स्मरण रखा, उन्होंने समुद्र के तीर पर, अर्थात लाल समुद्र के तीर पर बलवा किया।
- तौभी उसने अपने नाम के निमित्त उनका उद्धार किया, जिस से वह अपने पराक्रम को प्रगट करे।
- तब उसने लाल समुद्र को घुड़का और वह सूख गया, और वह उन्हें गहिरे जल के बीच से मानों जंगल में से निकाल ले गया।
- 0उसने उन्हें बैरी के हाथ से उबारा, और शत्रु के हाथ से छुड़ा लिया।
- 1और उन के द्रोही जल में डूब गए, उन में से एक भी न बचा।
- 2तब उन्हों ने उसके वचनों का विश्वास किया, और उसकी स्तुति गाने लगे॥
- 3परन्तु वे झट उसके कामों को भूल गए, और उसकी युक्ति के लिये न ठहरे।
- 4उन्होंने जंगल में अति लालसा की और निर्जल स्थान में ईश्वर की परीक्षा की।
- 5तब उसने उन्हें मुंह मांगा वर तो दिया, परन्तु उनके प्राण को सुखा दिया॥
- 6उन्होंने छावनी में मूसा के, और यहोवा के पवित्र जन हारून के विषय में डाह की,
- 7भूमि फट कर दातान को निगल गई, और अबीराम के झुण्ड को ग्रस लिया।
- 8और उन के झुण्ड में आग भड़क उठी, और दुष्ट लोग लौ से भस्म हो गए॥
- 9उन्होंने होरब में बछड़ा बनाया, और ढली हुई मूर्ति को दण्डवत की।
- 0यों उन्होंने अपनी महिमा अर्थात ईश्वर को घास खाने वाले बैल की प्रतिमा से बदल डाला।
- 1वे अपने उद्धारकर्ता ईश्वर को भूल गए, जिसने मिस्त्र में बड़े बड़े काम किए थे।
- 2उसने तो हाम के देश में आश्चर्यकर्म और लाल समुद्र के तीर पर भयंकर काम किए थे।
- 3इसलिये उसने कहा, कि मैं इन्हें सत्यानाश कर डालता यदि मेरा चुना हुआ मूसा जोखिम के स्थान में उनके लिये खड़ा न होता ताकि मेरी जलजलाहट को ठण्डा करे कहीं ऐसा न हो कि मैं उन्हें नाश कर डालूं॥
- 4उन्होंने मनभावने देश को निकम्मा जाना, और उसके वचन की प्रतीति न की।
- 5वे अपने तम्बुओं में कुड़कुड़ाए, और यहोवा का कहा न माना।
- 6तब उसने उनके विषय में शपथ खाई कि मैं इन को जंगल में नाश करूंगा,
- 7और इनके वंश को अन्यजातियों के सम्मुख गिरा दूंगा, और देश देश में तितर बितर करूंगा॥
- 8वे पोर वाले बाल देवता को पूजने लगे और मुर्दों को चढ़ाए हुए पशुओं का मांस खाने लगे।
- 9यों उन्होंने अपने कामों से उसको क्रोध दिलाया और मरी उन में फूट पड़ी।
- 0तब पीनहास ने उठ कर न्यायदण्ड दिया, जिस से मरी थम गई।
- 1और यह उसके लेखे पीढ़ी से पीढ़ी तक सर्वदा के लिये धर्म गिना गया॥
- 2उन्होंने मरीबा के सोते के पास भी यहोवा का क्रोध भड़काया, और उनके कारण मूसा की हानि हुई,
- 3क्योंकि उन्होंने उसकी आत्मा से बलवा किया, तब मूसा बिन सोचे बोल उठा।
- 4जिन लोगों के विषय यहोवा ने उन्हें आज्ञा दी थी, उन को उन्होंने सत्यानाश न किया,
- 5वरन उन्हीं जातियों से हिलमिल गए और उनके व्यवहारों को सीख लिया,
- 6और उनकी मूर्तियों की पूजा करने लगे, और वे उनके लिये फन्दा बन गईं।
- 7वरन उन्होंने अपने बेटे- बेटियों को पिशाचों के लिये बलिदान किया,
- 8और अपने निर्दोष बेटे- बेटियों का लोहू बहाया जिन्हें उन्होंने कनान की मूर्तियों पर बलि किया, इसलिये देश खून से अपवित्र हो गया।
- 9और वे आप अपने कामों के द्वारा अशुद्ध हो गए, और अपने कार्यों के द्वारा व्यभिचारी भी बन गए॥
- 0तब यहोवा का क्रोध अपनी प्रजा पर भड़का, और उसको अपने निज भाग से घृणा आई,
- 1तब उसने उन को अन्यजातियों के वश में कर दिया, और उनके बैरियों ने उन पर प्रभुता की।
- 2उन के शत्रुओं ने उन पर अन्धेर किया, और वे उनके हाथ तले दब गए।
- 3बारम्बार उसने उन्हें छुड़ाया, परन्तु वे उसके विरुद्ध युक्ति करते गए, और अपने अधर्म के कारण दबते गए।
- 4तौभी जब जब उनका चिल्लाना उसके कान में पड़ा, तब तब उसने उनके संकट पर दृष्टि की.
- 5और उनके हित अपनी वाचा को स्मरण करके अपनी अपार करूणा के अनुसार तरस खाया,
- 6और जो उन्हें बन्धुए करके ले गए थे उन सब से उन पर दया कराई॥
- 7हे हमारे परमेश्वर यहोवा, हमारा उद्धार कर, और हमें अन्यजातियों में से इकट्ठा कर ले, कि हम तेरे पवित्र नाम का धन्यवाद करें, और तेरी स्तुति करते हुए तेरे विषय में बड़ाई करें॥
- 8इस्राएल का परमेश्वर यहोवा अनादिकाल से अनन्तकाल तक धन्य है. और सारी प्रजा कहे आमीन. याह की स्तुति करो॥
भजन संहित 107 ↟↟
- यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है, और उसकी करूणा सदा की है.
- यहोवा के छुड़ाए हुए ऐसा ही कहें, जिन्हें उसने द्रोही के हाथ से दाम दे कर छुड़ा लिया है,
- और उन्हें देश देश से पूरब- पश्चिम, उत्तर और दक्खिन से इकट्ठा किया है॥
- वे जंगल में मरूभूमि के मार्ग पर भटकते फिरे, और कोई बसा हुआ नगर न पाया,
- भूख और प्यास के मारे, वे विकल हो गए।
- तब उन्होंने संकट में यहोवा की दोहाई दी, और उसने उन को सकेती से छुड़ाया,
- और उन को ठीक मार्ग पर चलाया, ताकि वे बसने के लिये किसी नगर को जा पहुंचे।
- लोग यहोवा की करूणा के कारण, और उन आश्चर्यकर्मों के कारण, जो वह मनुष्यों के लिये करता है, उसका धन्यवाद करें.
- क्योंकि वह अभिलाषी जीव को सन्तुष्ट करता है, और भूखे को उत्तम पदार्थों से तृप्त करता है॥
- 0जो अन्धियारे और मृत्यु की छाया में बैठे, और दु:ख में पड़े और बेड़ियों से जकड़े हुए थे,
- 1इसलिये कि वे ईश्वर के वचनों के विरुद्ध चले, और परमप्रधान की सम्मति को तुच्छ जाना।
- 2तब उसने उन को कष्ट के द्वारा दबाया, वे ठोकर खाकर गिर पड़े, और उन को कोई सहायक न मिला।
- 3तब उन्होंने संकट में यहोवा की दोहाई दी, और उस ने सकेती से उनका उद्धार किया,
- 4उसने उन को अन्धियारे और मृत्यु की छाया में से निकाल लिया, और उन के बन्धनों को तोड़ डाला।
- 5लोग यहोवा की करूणा के कारण, और उन आश्चर्यकर्मों के कारण जो वह मनुष्यों के लिये करता है, उसका धन्यवाद करें.
- 6क्योंकि उसने पीतल के फाटकों को तोड़ा, और लोहे के बेण्डों को टुकड़े टुकड़े किया॥
- 7मूढ़ अपनी कुचाल, और अधर्म के कामों के कारण अति दु:खित होते हैं।
- 8उनका जी सब भांति के भोजन से मिचलाता है, और वे मृत्यु के फाटक तक पहुंचते हैं।
- 9तब वे संकट में यहोवा की दोहाई देते हैं, और व सकेती से उनका उद्धार करता है,
- 0वह अपने वचन के द्वारा उन को चंगा करता और जिस गड़हे में वे पड़े हैं, उससे निकालता है।
- 1लोग यहोवा की करूणा के कारण और उन आश्चर्यकर्मों के कारण जो वह मनुष्यों के लिये करता है, उसका धन्यवाद करें.
- 2और वे धन्यवाद बलि चढ़ाएं, और जयजयकार करते हुए, उसके कामों का वर्णन करें॥
- 3जो लोग जहाजों में समुद्र पर चलते हैं, और महासागर पर होकर व्यापार करते हैं,
- 4वे यहोवा के कामों को, और उन आश्चर्यकर्मों को जो वह गहिरे समुद्र में करता है, देखते हैं।
- 5क्योंकि वह आज्ञा देता है, वह प्रचण्ड बयार उठकर तरंगों को उठाती है।
- 6वे आकाश तक चढ़ जाते, फिर गहराई में उतर आते हैं, और क्लेश के मारे उनके जी में जी नहीं रहता,
- 7वे चक्कर खाते, और मत वाले की नाईं लड़खड़ाते हैं, और उनकी सारी बुद्धि मारी जाती है।
- 8तब वे संकट में यहोवा की दोहाई देते हैं, और वह उन को सकेती से निकालता है।
- 9वह आंधी को थाम देता है और तरंगें बैठ जाती हैं।
- 0तब वे उनके बैठने से आनन्दित होते हैं, और वह उन को मन चाहे बन्दर स्थान में पहुंचा देता है।
- 1लोग यहोवा की करूणा के कारण, और उन आश्चर्यकर्मों के कारण जो वह मनुष्यों के लिये करता है, उसका धन्यवाद करें।
- 2और सभा में उसको सराहें, और पुरनियों के बैठक में उसकी स्तुति करें॥
- 3वह नदियों को जंगल बना डालता है, और जल के सोतों को सूखी भूमि कर देता है।
- 4वह फलवन्त भूमि को नोनी करता है, यह वहां के रहने वालों की दुष्टता के कारण होता है।
- 5वह जंगल को जल का ताल, और निर्जल देश को जल के सोते कर देता है।
- 6और वहां वह भूखों को बसाता है, कि वे बसने के लिये नगर तैयार करें,
- 7और खेती करें, और दाख की बारियां लगाएं, और भांति भांति के फल उपजा लें।
- 8और वह उन को ऐसी आशीष देता है कि वे बहुत बढ़ जाते हैं, और उनके पशुओं को भी वह घटने नहीं देता॥
- 9फिर अन्धेर, विपत्ति और शोक के कारण, वे घटते और दब जाते हैं।
- 0और वह हाकिमों को अपमान से लाद कर मार्ग रहित जंगल में भटकाता है,
- 1वह दरिद्रों को दु:ख से छुड़ा कर ऊंचे पर रखता है, और उन को भेड़ों के झुंड सा परिवार देता है।
- 2सीधे लोग देख कर आनन्दित होते हैं, और सब कुटिल लोग अपने मुंह बन्द करते हैं।
- 3जो कोई बुद्धिमान हो, वह इन बातों पर ध्यान करेगा, और यहोवा की करूणा के कामों पर ध्यान करेगा॥
भजन संहित 108 ↟↟
- हे परमेश्वर, मेरा हृदय स्थिर है, मैं गाऊंगा, मैं अपनी आत्मा से भी भजन गाऊंगा।
- हे सारंगी और वीणा जागो. मैं आप पौ फटते जाग उठूंगा.
- हे यहोवा, मैं देश देश के लोगों के मध्य में तेरा धन्यवाद करूंगा, और राज्य राज्य के लोगों के मध्य में तेरा भजन गाऊंगा।
- क्योंकि तेरी करूणा आकाश से भी ऊंची है, और तेरी सच्चाई आकाशमण्डल तक है॥
- हे परमेश्वर, तू स्वर्ग के ऊपर हो. और तेरी महिमा सारी पृथ्वी के ऊपर हो.
- इसलिये कि तेरे प्रिय छुड़ाए जाएं, तू अपने दाहिने हाथ से बचा ले और हमारी बिनती सुन ले.
- परमेश्वर ने अपनी पवित्रता में होकर कहा है, मैं प्रफुल्लित होकर शेकेम को बांट लूंगा, और सुक्कोत की तराई को नपवाऊंगा।
- गिलाद मेरा है, मनश्शे भी मेरा है, और एप्रैम मेरे सिर का टोप है, यहूदा मेरा राजदण्ड है।
- मोआब मेरे धोने का पात्र है, मैं एदोम पर अपना जूता फेंकूंगा, पलिश्त पर मैं जयजयकार करूंगा॥
- 0मुझे गढ़ वाले नगर में कौन पहुंचाएगा? ऐदोम तक मेरी अगुवाई किस ने की है?
- 1हे परमेश्वर, क्या तू ने हम को नहीं त्याग दिया, और हे परमेश्वर, तू हमारी सेना के साथ पलायन नहीं करता।
- 2द्रोहियों के विरुद्ध हमारी सहायता कर, क्योंकि मनुष्य का किया हुआ छुटकारा व्यर्थ है.
- 3परमेश्वर की सहायता से हम वीरता दिखाएंगे, हमारे द्रोहियों को वही रौंदेगा॥
भजन संहित 109 ↟↟
- हे परमेश्वर तू जिसकी मैं स्तुति करता हूं, चुप न रह।
- क्योंकि दुष्ट और कपटी मनुष्यों ने मेरे विरुद्ध मुंह खोला है, वे मेरे विषय में झूठ बोलते हैं।
- और उन्होंने बैर के वचनों से मुझे चारों ओर घेर लिया है, और व्यर्थ मुझ से लड़ते हैं।
- मेरे प्रेम के बदले में वे मुझ से विरोध करते हैं, परन्तु मैं तो प्रार्थना में लवलीन रहता हूं।
- उन्होंने भलाई के पलटे में मुझ से बुराई की और मेरे प्रेम के बदले मुझ से बैर किया है॥
- तू उसको किसी दुष्ट के अधिकार में रख, और कोई विरोधी उसकी दाहिनी ओर खड़ा रहे।
- जब उसका न्याय किया जाए, तब वह दोषी निकले, और उसकी प्रार्थना पाप गिनी जाए.
- उसके दिन थोड़े हों, और उसके पद को दूसरा ले.
- उसक लड़के बाले अनाथ हो जाएं और उसकी स्त्री विधवा हो जाए.
- 0और उसके लड़के मारे मारे फिरें, और भीख मांगा करे, उन को उनके उजड़े हुए घर से दूर जा कर टुकड़े मांगना पड़े.
- 1महाजन फन्दा लगा कर, उसका सर्वस्व ले ले, और परदेशी उसकी कमाई को लूट लें.
- 2कोई न हो जो उस पर करूणा करता रहे, और उसके अनाथ बालकों पर कोई अनुग्रह न करे.
- 3उसका वंश नाश हो जाए, दूसरी पीढ़ी में उसका नाम मिट जाए.
- 4उसके पितरों का अधर्म यहोवा को स्मरण रहे, और उसकी माता का पाप न मिटे.
- 5वह निरन्तर यहोवा के सम्मुख रहे, कि वह उनका नाम पृथ्वी पर से मिटा डाले.
- 6क्योंकि वह दुष्ट, कृपा करना भूल गया वरन दीन और दरिद्र को सताता था और मार डालने की इच्छा से खेदित मन वालों के पीछे पड़ा रहता था॥
- 7वह शाप देने में प्रीति रखता था, और शाप उस पर आ पड़ा, वह आशीर्वाद देने से प्रसन्न न होता था, सो आर्शीवाद उससे दूर रहा।
- 8वह शाप देना वस्त्र की नाईं पहिनता था, और वह उसके पेट में जल की नाईं और उसकी हडि्डयों में तेल की नाईं समा गया।
- 9वह उसके लिये ओढ़ने का काम दे, और फेंटे की नाईं उसकी कटि में नित्य कसा रहे॥
- 0यहोवा की ओर से मेरे विरोधियों को, और मेरे विरुद्ध बुरा कहने वालों को यही बदला मिले.
- 1परन्तु मुझ से हे यहोवा प्रभु, तू अपने नाम के निमित्त बर्ताव कर, तेरी करूणा तो बड़ी है, सो तू मुझे छुटकारा दे.
- 2क्योंकि मैं दीन और दरिद्र हूं, और मेरा हृदय घायल हुआ है।
- 3मैं ढलती हुई छाया की नाईं जाता रहा हूं, मैं टिड्डी के समान उड़ा दिया गया हूं।
- 4उपवास करते करते मेरे घुटने निर्बल हो गए, और मुझ में चर्बी न रहने से मैं सूख गया हूं।
- 5मेरी तो उन लोगों से नामधराई होती है, जब वे मुझे देखते, तब सिर हिलाते हैं॥
- 6हे मेरे परमेश्वर यहोवा, मेरी सहायता कर. अपनी करूणा के अनुसार मेरा उद्धार कर.
- 7जिस से वे जाने कि यह तेरा काम है, और हे यहोवा, तू ही ने यह किया है.
- 8वे कोसते तो रहें, परन्तु तू आशीष दे. वे तो उठते ही लज्जित हों, परन्तु तेरा दास आनन्दित हो.
- 9मेरे विरोधियों को अनादररूपी वस्त्र पहिनाया जाए, और वे अपनी लज्जा को कम्बल की नाईं ओढ़ें.
- 0मैं यहोवा का बहुत धन्यवाद करूंगा, और बहुत लोगों के बीच में उसकी स्तुति करूंगा।
- 1क्योंकि वह दरिद्र की दाहिनी ओर खड़ा रहेगा, कि उसको घात करने वाले न्यायियों से बचाए॥
भजन संहित 110 ↟↟
- मेरे प्रभु से यहोवा की वाणी यह है, कि तू मेरे दाहिने हाथ बैठ, जब तक मैं तेरे शत्रुओं को तेरे चरणों की चौकी न कर दूं॥
- तेरे पराक्रम का राजदण्ड यहोवा सिय्योन से बढ़ाएगा। तू अपने शत्रुओं के बीच में शासन कर।
- तेरी प्रजा के लोग तेरे पराक्रम के दिन स्वेच्छाबलि बनते हैं, तेरे जवान लोग पवित्रता से शोभायमान, और भोर के गर्भ से जन्मी हुई ओस के समान तेरे पास हैं।
- यहोवा ने शपथ खाई और न पछताएगा, कि तू मेल्कीसेदेक की रीति पर सर्वदा का याजक है॥
- प्रभु तेरी दाहिनी ओर होकर अपने क्रोध के दिन राजाओं को चूर कर देगा।
- वह जाति जाति में न्याय चुकाएगा, रणभूमि लोथों से भर जाएगी, वह लम्बे चौड़े देश के प्रधान को चूर चूर कर देगा।
- वह मार्ग में चलता हुआ नदी का जल पीएगा इस कारण वह सिर को ऊंचा करेगा॥
भजन संहित 111 ↟↟
- याह की स्तुति करो। मैं सीधे लोगों की गोष्ठी में और मण्डली में भी सम्पूर्ण मन से यहोवा का धन्यवाद करूंगा।
- यहोवा के काम बड़े हैं, जितने उन से प्रसन्न रहते हैं, वे उन पर ध्यान लगाते हैं।
- उसके काम का वैभवमय और ऐश्वरर्यमय होते हैं, और उसका धर्म सदा तक बना रहेगा।
- उसने अपने आश्चर्यकर्मों का स्मरण कराया है, यहोवा अनुग्रहकारी और दयावन्त है।
- उसने अपने डरवैयों को आहार दिया है, वह अपनी वाचा को सदा तक स्मरण रखेगा।
- उसने अपनी प्रजा को अन्यजातियों का भाग देने के लिये, अपने कामों का प्रताप दिखाया है।
- सच्चाई और न्याय उसके हाथों के काम हैं, उसके सब उपदेश विश्वासयोग्य हैं,
- वे सदा सर्वदा अटल रहेंगे, वे सच्चाई और सिधाई से किए हुए हैं।
- उसने अपनी प्रजा का उद्धार किया है, उसने अपनी वाचा को सदा के लिये ठहराया है। उसका नाम पवित्र और भय योग्य है।
- 0बुद्धि का मूल यहोवा का भय है, जितने उसकी आज्ञाओं को मानते हैं, उनकी बुद्धि अच्छी होती है। उसकी स्तुति सदा बनी रहेगी॥
भजन संहित 112 ↟↟
- याह की स्तुति करो। क्या ही धन्य है वह पुरूष जो यहोवा का भय मानता है, और उसकी आज्ञाओं से अति प्रसन्न रहता है.
- उसका वंश पृथ्वी पर पराक्रमी होगा, सीधे लोगों की सन्तान आशीष पाएगी।
- उसके घर में धन सम्पत्ति रहती है, और उसका धर्म सदा बना रहेगा।
- सीधे लोगों के लिये अन्धकार के बीच में ज्योति उदय होती है, वह अनुग्रहकारी, दयावन्त और धर्मी होता है।
- जो पुरूष अनुग्रह करता और उधार देता है, उसका कल्याण होता है, वह न्याय में अपने मुकद्दमें को जीतेगा।
- वह तो सदा तक अटल रहेगा, धर्मी का स्मरण सदा तक बना रहेगा।
- वह बुरे समाचार से नहीं डरता, उसका हृदय यहोवा पर भरोसा रखने से स्थिर रहता है।
- उसका हृदय सम्भला हुआ है, इसलिये वह न डरेगा, वरन अपने द्रोहियों पर दृष्टि करके सन्तुष्ट होगा।
- उसने उदारता से दरिद्रों को दान दिया, उसका धर्म सदा बना रहेगा और उसका सींग महिमा के साथ ऊंचा किया जाएगा।
- 0दुष्ट उसे देख कर कुढेगा, वह दांत पीस- पीसकर गल जाएगा, दुष्टों की लालसा पूरी न होगी॥
भजन संहित 113 ↟↟
- याह की स्तुति करो हे यहोवा के दासों स्तुति करो, यहोवा के नाम की स्तुति करो.
- यहोवा का नाम अब से ले कर सर्वदा तक धन्य कहा जाय.
- उदयाचल से ले कर अस्ताचल तक, यहोवा का नाम स्तुति के योग्य है।
- यहोवा सारी जातियों के ऊपर महान है, और उसकी महिमा आकाश से भी ऊंची है॥
- हमारे परमेश्वर यहोवा के तुल्य कौन है? वह तो ऊंचे पर विराजमान है,
- और आकाश और पृथ्वी पर भी, दृष्टि करने के लिये झुकता है।
- वह कंगाल को मिट्टी पर से, और दरिद्र को घूरे पर से उठा कर ऊंचा करता है,
- कि उसको प्रधानों के संग, अर्थात अपनी प्रजा के प्रधानों के संग बैठाए।
- वह बांझ को घर में लड़कों की आनन्द करने वाली माता बनाता है। याह की स्तुति करो.
भजन संहित 114 ↟↟
- जब इस्राएल ने मिस्त्र से, अर्थात याकूब के घराने ने अन्य भाषा वालों के बीच में कूच किया,
- तब यहूदा यहोवा का पवित्र स्थान और इस्राएल उसके राज्य के लोग हो गए॥
- समुद्र देखकर भागा, यर्दन नदी उलटी बही।
- पहाड़ मेढ़ों की नाईं उछलने लगे, और पहाड़ियां भेड़- बकरियों के बच्चों की नाईं उछलने लगीं॥
- हे समुद्र, तुझे क्या हुआ, कि तू भागा? और हे यर्दन तुझे क्या हुआ, कि तू उलटी बही?
- हे पहाड़ों तुम्हें क्या हुआ, कि तुम भेड़ों की नाईं, और हे पहाड़ियों तुम्हें क्या हुआ, कि तुम भेड़- बकरियों के बच्चों की नाईं उछलीं?
- हे पृथ्वी प्रभु के साम्हने, हां याकूब के परमेश्वर के साम्हने थरथरा।
- वह चट्टान को जल का ताल, चकमक के पत्थर को जल का सोता बना डालता है॥
भजन संहित 115 ↟↟
- हे यहोवा, हमारी नहीं, हमारी नहीं, वरन अपने ही नाम की महिमा, अपनी करूणा और सच्चाई के निमित्त कर।
- जाति जाति के लोग क्यों कहने पांए, कि उनका परमेश्वर कहां रहा?
- हमारा परमेश्वर तो स्वर्ग में हैं, उसने जो चाहा वही किया है।
- उन लोगों की मूरतें सोने चान्दी ही की तो हैं, वे मनुष्यों के हाथ की बनाईं हुई हैं।
- उनका मुंह तो रहता है परन्तु वे बोल नहीं सकती, उनके आंखें तो रहती हैं परन्तु वे देख नहीं सकतीं।
- उनके कान तो रहते हैं, परन्तु वे सुन नहीं सकतीं, उनके नाक तो रहती हैं, परन्तु वे सूंघ नहीं सकतीं।
- उनके हाथ तो रहते हैं, परन्तु वे स्पर्श नहीं कर सकतीं, उनके पांव तो रहते हैं, परन्तु वे चल नहीं सकतीं, और अपने कण्ठ से कुछ भी शब्द नहीं निकाल सकतीं।
- जैसी वे हैं वैसे ही उनके बनाने वाले हैं, और उन पर भरोसा रखने वाले भी वैसे ही हो जाएंगे॥
- हे इस्राएल यहोवा पर भरोसा रख. तेरा सहायक और ढाल वही है।
- 0हे हारून के घराने यहोवा पर भरोसा रख. तेरा सहायक और ढाल वही है।
- 1हे यहोवा के डरवैयो, यहोवा पर भरोसा रखो. तुम्हारा सहायक और ढाल वही है॥
- 2यहोवा ने हम को स्मरण किया है, वह आशीष देगा, वह इस्राएल के घराने को आशीष देगा, वह हारून के घराने को आशीष देगा।
- 3क्या छोटे क्या बड़े जितने यहोवा के डरवैये हैं, वह उन्हें आशीष देगा॥
- 4यहोवा तुम को और तुम्हारे लड़कों को भी अधिक बढ़ाता जाए.
- 5यहोवा जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है, उसकी ओर से तुम अशीष पाए हो॥
- 6स्वर्ग तो यहोवा का है, परन्तु पृथ्वी उसने मनुष्यों को दी है।
- 7मृतक जितने चुपचाप पड़े हैं, वे तो याह की स्तुति नहीं कर सकते,
- 8परन्तु हम लोग याह को अब से ले कर सर्वदा तक धन्य कहते रहेंगे। याह की स्तुति करो.
भजन संहित 116 ↟↟
- मैं प्रेम रखता हूं, इसलिये कि यहोवा ने मेरे गिड़गिड़ाने को सुना है।
- उसने जो मेरी ओर कान लगाया है, इसलिये मैं जीवन भर उसको पुकारा करूंगा।
- मृत्यु की रस्सियां मेरे चारोंओर थीं, मैं अधोलोक की सकेती में पड़ा था, मुझे संकट और शोक भोगना पड़ा।
- तब मैं ने यहोवा से प्रार्थना की, कि हे यहोवा बिनती सुन कर मेरे प्राण को बचा ले.
- यहोवा अनुग्रहकारी और धर्मी है, और हमारा परमेश्वर दया करने वाला है।
- यहोवा भोलों की रक्षा करता है, जब मैं बलहीन हो गया था, उसने मेरा उद्धार किया।
- हे मेरे प्राण तू अपने विश्राम स्थान में लौट आ, क्योंकि यहोवा ने तेरा उपकार किया है॥
- तू ने तो मेरे प्राण को मृत्यु से, मेरी आंख को आंसू बहाने से, और मेरे पांव को ठोकर खाने से बचाया है।
- मैं जीवित रहते हुए, अपने को यहोवा के साम्हने जान कर नित चलता रहूंगा।
- 0मैं ने जो ऐसा कहा है, इसे विश्वास की कसौटी पर कस कर कहा है, कि मैं तो बहुत ही दु:खित हुआ,
- 1मैं ने उतावली से कहा, कि सब मनुष्य झूठे हैं॥
- 2यहोवा ने मेरे जितने उपकार किए हैं, उनका बदला मैं उसको क्या दूं?
- 3मैं उद्धार का कटोरा उठा कर, यहोवा से प्रार्थना करूंगा,
- 4मैं यहोवा के लिये अपनी मन्नतें सभों की दृष्टि में प्रगट रूप में उसकी सारी प्रजा के साम्हने पूरी करूंगा।
- 5यहोवा के भक्तों की मृत्यु, उसकी दृष्टि में अनमोल है।
- 6हे यहोवा, सुन, मैं तो तेरा दास हूं, मैं तेरा दास, और तेरी दासी का पुत्र हूं। तू ने मेरे बन्धन खोल दिए हैं।
- 7मैं तुझ को धन्यवाद बलि चढ़ाऊंगा, और यहोवा से प्रार्थना करूंगा।
- 8मैं यहोवा के लिये अपनी मन्नतें, प्रगट में उसकी सारी प्रजा के साम्हने
- 9यहोवा के भवन के आंगनों में, हे यरूशलेम, तेरे भीतर पूरी करूंगा। याह की स्तुति करो.
भजन संहित 117 ↟↟
- हे जाति जाति के सब लोगोंयहोवा की स्तुति करो. हे राज्य राज्य के सब लोगो, उसकी प्रशंसा करो.
- क्योंकि उसकी करूणा हमारे ऊपर प्रबल हुई है, और यहोवा की सच्चाई सदा की है याह की स्तुति करो.
भजन संहित 118 ↟↟
- हे जाति जाति के सब लोगों यहोवा की स्तुति करो. हे राज्य राज्य के सब लोगो, उसकी प्रशंसा करो.क्योंकि उसकी करूणा हमारे ऊपर प्रबल हुई है, और यहोवा की सच्चाई सदा की है याह की स्तुति करो. यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है, और उसकी करूणा सदा की है.
- इस्राएल कहे, उसकी करूणा सदा की है।
- हारून का घराना कहे, उसकी करूणा सदा की है।
- यहोवा के डरवैये कहें, उसकी करूणा सदा की है।
- मैं ने सकेती में परमेश्वर को पुकारा, परमेश्वर ने मेरी सुन कर, मुझे चौड़े स्थान में पहुंचाया।
- यहोवा मेरी ओर है, मैं न डरूंगा। मनुष्य मेरा क्या कर सकता है?
- यहोवा मेरी ओर मेरे सहायकों में है, मैं अपने बैरियों पर दृष्टि कर सन्तुष्ट हूंगा।
- यहोवा की शरण लेनी, मनुष्य पर भरोसा रखने से उत्तम है।
- यहोवा की शरण लेनी, प्रधानों पर भी भरोसा रखने से उत्तम है॥
- 0सब जातियों ने मुझ को घेर लिया है, परन्तु यहोवा के नाम से मैं निश्चय उन्हें नाश कर डालूंगा.
- 1उन्होंने मुझ को घेर लिया है, नि:सन्देह घेर लिया है, परन्तु यहोवा के नाम से मैं निश्चय उन्हें नाश कर डालूंगा.
- 2उन्होंने मुझे मधुमक्खियों की नाईं घेर लिया है, परन्तु कांटों की आग की नाईं वे बुझ गए, यहोवा के नाम से मैं निश्चय उन्हें नाश कर डालूंगा.
- 3तू ने मुझे बड़ा धक्का दिया तो था, कि मैं गिर पडूं परन्तु यहोवा ने मेरी सहायता की।
- 4परमेश्वर मेरा बल और भजन का विषय है, वह मेरा उद्धार ठहरा है॥
- 5धर्मियों के तम्बुओं में जयजयकार और उद्धार की ध्वनि हो रही है, यहोवा के दाहिने हाथ से पराक्रम का काम होता है,
- 6यहोवा का दहिना हाथ महान हुआ है, यहोवा के दाहिने हाथ से पराक्रम का काम होता है.
- 7मैं न मरूंगा वरन जीवित रहूंगा, और परमेश्वर के कामों का वर्णन करता रहूंगा।
- 8परमेश्वर ने मेरी बड़ी ताड़ना तो की है परन्तु मुझे मृत्यु के वश में नहीं किया॥
- 9मेरे लिये धर्म के द्वार खोलो, मैं उन से प्रवेश करके याह का धन्यवाद करूंगा॥
- 0यहोवा का द्वार यही है, इस से धर्मी प्रवेश करने पाएंगे॥
- 1हे यहोवा मैं तेरा धन्यवाद करूंगा, क्योंकि तू ने मेरी सुन ली है और मेरा उद्धार ठहर गया है।
- 2राजमिस्त्रियों ने जिस पत्थर को निकम्मा ठहराया था वही कोने का सिरा हो गया है।
- 3यह तो यहोवा की ओर से हुआ है, यह हमारी दृष्टि में अद्भुत है।
- 4आज वह दिन है जो यहोवा ने बनाया है, हम इस में मगन और आनन्दित हों।
- 5हे यहोवा, बिनती सुन, उद्धार कर. हे यहोवा, बिनती सुन, सफलता दे.
- 6धन्य है वह जो यहोवा के नाम से आता है. हम ने तुम को यहोवा के घर से आशीर्वाद दिया है।
- 7यहोवा ईश्वर है, और उसने हम को प्रकाश दिया है। यज्ञपशु को वेदी के सींगों से रस्सियों बान्धो.
- 8हे यहोवा, तू मेरा ईश्वर है, मैं तेरा धन्यवाद करूंगा, तू मेरा परमेश्वर है, मैं तुझ को सराहूंगा॥
- 9यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है, और उसकी करूणा सदा बनी रहेगी.
भजन संहित 119 ↟↟
- क्या ही धन्य हैं वे जो चाल के खरे हैं, और यहोवा की व्यवस्था पर चलते हैं.
- क्या ही धन्य हैं वे जो उसकी चितौनियों को मानते हैं, और पूर्ण मन से उसके पास आते हैं.
- फिर वे कुटिलता का काम नहीं करते, वे उसके मार्गों में चलते हैं।
- तू ने अपने उपदेश इसलिये दिए हैं, कि वे यत्न से माने जाएं।
- भला होता कि तेरी विधियों के मानने के लिये मेरी चालचलन दृढ़ हो जाए.
- तब मैं तेरी सब आज्ञाओं की ओर चित्त लगाए रहूंगा, और मेरी आशा न टूटेगी।
- जब मैं तेरे धर्ममय नियमों को सीखूंगा, तब तेरा धन्यवाद सीधे मन से करूंगा।
- मैं तेरी विधियों को मानूंगा: मुझे पूरी रीति से न तज.
- जवान अपनी चाल को किस उपाय से शुद्ध रखे? तेरे वचन के अनुसार सावधान रहने से।
- 0मैं पूरे मन से तेरी खोज मे लगा हूं, मुझे तेरी आज्ञाओं की बाट से भटकने न दे.
- 1मैं ने तेरे वचन को अपने हृदय में रख छोड़ा है, कि तेरे विरुद्ध पाप न करूं।
- 2हे यहोवा, तू धन्य है, मुझे अपनी विधियां सिखा.
- 3तेरे सब कहे हुए नियमों का वर्णन, मैं ने अपने मुंह से किया है।
- 4मैं तेरी चितौनियों के मार्ग से, मानों सब प्रकार के धन से हर्षित हुआ हूं।
- 5मैं तेरे उपदेशों पर ध्यान करूंगा, और तेरे मार्गों की ओर दृष्टि रखूंगा।
- 6मैं तेरी विधियों से सुख पाऊंगा, और तेरे वचन को न भूलूंगा॥
- 7अपने दास का उपकार कर, कि मैं जीवित रहूं, और तेरे वचन पर चलता रहूं।
- 8मेरी आंखें खोल दे, कि मैं तेरी व्यवस्था की अद्भुत बातें देख सकूं।
- 9मैं तो पृथ्वी पर परदेशी हूं, अपनी आज्ञाओं को मुझ से छिपाए न रख.
- 0मेरा मन तेरे नियमों की अभिलाषा के कारण हर समय खेदित रहता है।
- 1तू ने अभिमानियों को, जो शापित हैं, घुड़का है, वे तेरी आज्ञाओं की बाट से भटके हुए हैं।
- 2मेरी नामधराई और अपमान दूर कर, क्योंकि मैं तेरी चितौनियों को पकड़े हूं।
- 3हाकिम भी बैठे हुए आपास में मेरे विरुद्ध बातें करते थे, परन्तु तेरा दास तेरी विधियों पर ध्यान करता रहा।
- 4तेरी चितौनियां मेरा सुखमूल और मेरे मन्त्री हैं॥
- 5मैं धूल में पड़ा हूं, तू अपने वचन के अनुसार मुझ को जिला.
- 6मैं ने अपनी चालचलन का तुझ से वर्णन किया है और तू ने मेरी बात मान ली है, तू मुझ को अपनी विधियां सिखा.
- 7अपने उपदेशों का मार्ग मुझे बता, तब मैं तेरे आश्यर्चकर्मों पर ध्यान करूंगा।
- 8मेरा जीवन उदासी के मारे गल चला है, तू अपने वचन के अनुसार मुझे सम्भल.
- 9मुझ को झूठ के मार्ग से दूर कर, और करूणा कर के अपनी व्यवस्था मुझे दे।
- 0मैं ने सच्चाई का मार्ग चुन लिया है, तेरे नियमों की ओर मैं चित्त लगाए रहता हूं।
- 1मैं तेरी चितौनियों में लौलीन हूं, हे यहोवा, मेरी आशा न तोड़.
- 2जब तू मेरा हियाव बढ़ाएगा, तब मैं तेरी आज्ञाओं के मार्ग में दौडूंगा॥
- 3हे यहोवा, मुझे अपनी विधियों का मार्ग दिखा दे, तब मैं उसे अन्त तक पकड़े रहूंगा।
- 4मुझे समझ दे, तब मैं तेरी व्यवस्था को पकड़े रहूंगा और पूर्ण मन से उस पर चलूंगा।
- 5अपनी आज्ञाओं के पथ में मुझ को चला, क्योंकि मैं उसी से प्रसन्न हूं।
- 6मेरे मन को लोभ की ओर नहीं, अपनी चितौनियों ही की ओर फेर दे।
- 7मेरी आंखों को व्यर्थ वस्तुओं की ओर से फेर दे, तू अपने मार्ग में मुझे जिला।
- 8तेरा वचन जो तेरे भय मानने वालों के लिये है, उसको अपने दास के निमित्त भी पूरा कर।
- 9जिस नामधराई से मैं डरता हूं, उसे दूर कर, क्योंकि तेरे नियम उत्तम हैं।
- 0देख, मैं तेरे उपदेशों का अभिलाषी हूं, अपने धर्म के कारण मुझ को जिला।
- 1हे यहोवा, तेरी करूणा और तेरा किया हुआ उद्धार, तेरे वचन के अनुसार, मुझ को भी मिले,
- 2तब मैं अपनी नामधराई करने वालों को कुछ उत्तर दे सकूंगा, क्योंकि मेरा भरोसा, तेरे वचन पर है।
- 3मुझे अपने सत्य वचन कहने से न रोक क्योंकि मेरी आशा तेरे नियमों पर हैं।
- 4तब मैं तेरी व्यवस्था पर लगातार, सदा सर्वदा चलता रहूंगा,
- 5और मैं चोड़े स्थान में चला फिरा करूंगा, क्योंकि मैं ने तेरे उपदेशों की सुधि रखी है।
- 6और मैं तेरी चितौनियों की चर्चा राजाओं के साम्हने भी करूंगा, और संकोच न करूंगा,
- 7क्योंकि मैं तेरी आज्ञाओं के कारण सुखी हूं, और मैं उन से प्रीति रखता हूं।
- 8मैं तेरी आज्ञाओं की ओर जिन में मैं प्रीति रखता हूं, हाथ फैलाऊंगा और तेरी विधियों पर ध्यान करूंगा॥
- 9जो वचन तू ने अपने दास को दिया है, उसे स्मरण कर, क्योंकि तू ने मुझे आशा दी है।
- 0मेरे दु:ख में मुझे शान्ति उसी से हुई है, क्योंकि तेरे वचन के द्वारा मैं ने जीवन पाया है।
- 1अभिमानियों ने मुझे अत्यन्त ठट्ठे में उड़ाया है, तौभी मैं तेरी व्यवस्था से नहीं हटा।
- 2हे यहोवा, मैं ने तेरे प्राचीन नियमों को स्मरण करके शान्ति पाई है।
- 3जो दुष्ट तेरी व्यवस्था को छोड़े हुए हैं, उनके कारण मैं सन्ताप से जलता हूं।
- 4जहां मैं परदेशी होकर रहता हूं, वहां तेरी विधियां, मेरे गीत गाने का विषय बनी हैं।
- 5हे यहोवा, मैं ने रात को तेरा नाम स्मरण किया और तेरी व्यवस्था पर चला हूं।
- 6यह मुझ से इस कारण हुआ, कि मैं तेरे उपदेशों को पकड़े हुए था॥
- 7यहोवा मेरा भाग है, मैं ने तेरे वचनों के अनुसार चलने का निश्चय किया है।
- 8मैं ने पूरे मन से तुझे मनाया है, इसलिये अपने वचन के अनुसार मुझ पर अनुग्रह कर।
- 9मैं ने अपनी चालचलन को सोचा, और तेरी चितौनियों का मार्ग लिया।
- 0मैं ने तेरी आज्ञाओं के मानने में विलम्ब नहीं, फुर्ती की है।
- 1मैं दुष्टों की रस्सियों बन्ध गया हूं, तौभी मैं तेरी व्यवस्था को नहीं भूला।
- 2तेरे धर्ममय नियमों के कारण मैं आधी रात को तेरा धन्यवाद करने को उठूंगा।
- 3जितने तेरा भय मानते और तेरे उपदेशों पर चलते हैं, उनका मैं संगी हूं।
- 4हे यहोवा, तेरी करुणा पृथ्वी में भरी हुई है, तू मुझे अपनी विधियां सिखा.
- 5हे यहोवा, तू ने अपने वचन के अनुसार अपने दास के संग भलाई की है।
- 6मुझे भली विवेक- शक्ति और ज्ञान दे, क्योंकि मैं ने तेरी आज्ञाओं का विश्वास किया है।
- 7उससे पहिले कि मैं दु:खित हुआ, मैं भटकता था, परन्तु अब मैं तेरे वचन को मानता हूं।
- 8तू भला है, और भला करता भी है, मुझे अपनी विधियां सिखा।
- 9अभिमानियों ने तो मेरे विरुद्ध झूठ बात गढ़ी है, परन्तु मैं तेरे उपदेशों को पूरे मन से पकड़े रहूंगा।
- 0उनका मन मोटा हो गया है, परन्तु मैं तेरी व्यवस्था के कारण सुखी हूं।
- 1मुझे जो दु:ख हुआ वह मेरे लिये भला ही हुआ है, जिस से मैं तेरी विधियों को सीख सकूं।
- 2तेरी दी हुई व्यवस्था मेरे लिये हजारों रूपयों और मुहरों से भी उत्तम है॥
- 3तेरे हाथों से मैं बनाया और रचा गया हूं, मुझे समझ दे कि मैं तेरी आज्ञाओं को सीखूं।
- 4तेरे डरवैये मुझे देख कर आनन्दित होंगे, क्योंकि मैं ने तेरे वचन पर आशा लगाई है।
- 5हे यहोवा, मैं जान गया कि तेरे नियम धर्ममय हैं, और तू ने अपने सच्चाई के अनुसार मुझे दु:ख दिया है।
- 6मुझे अपनी करूणा से शान्ति दे, क्योंकि तू ने अपने दास को ऐसा ही वचन दिया है।
- 7तेरी दया मुझ पर हो, तब मैं जीवित रहूंगा, क्योंकि मैं तेरी व्यवस्था से सुखी हूं।
- 8अभिमानियों की आशा टूटे, क्योंकि उन्होंने मुझे झूठ के द्वारा गिरा दिया है, परन्तु मैं तेरे उपदेशों पर ध्यान करूंगा।
- 9जो तेरा भय मानते हैं, वह मेरी ओर फिरें, तब वे तेरी चितौनियों को समझ लेंगे।
- 0मेरा मन तेरी विधियों के मानने में सिद्ध हो, ऐसा न हो कि मुझे लज्जित होना पड़े॥
- 1मेरा प्राण तेरे उद्धार के लिये बैचेन है, परन्तु मुझे तेरे वचन पर आशा रहती है।
- 2मेरी आंखें तेरे वचन के पूरे होने की बाट जोहते जोहते रह गईं है, और मैं कहता हूं कि तू मुझे कब शान्ति देगा?
- 3क्योंकि मैं धूएं में की कुप्पी के समान हो गया हूं, तौभी तेरी विधियों को नहीं भूला।
- 4तेरे दास के कितने दिन रह गए हैं? तू मेरे पीछे पड़े हुओं को दण्ड कब देगा?
- 5अभिमानी जो तरी व्यवस्था के अनुसार नहीं चलते, उन्होंने मेरे लिये गड़हे खोदे हैं।
- 6तेरी सब आज्ञाएं विश्वासयोग्य हैं, वे लोग झूठ बोलते हुए मेरे पीछे पड़े हैं, तू मेरी सहायता कर.
- 7वे मुझ को पृथ्वी पर से मिटा डालने ही पर थे, परन्तु मैं ने तेरे उपदेशों को नहीं छोड़ा।
- 8अपनी करूणा के अनुसार मुझ को जिला, तब मैं तेरी दी हुई चितौनी को मानूंगा॥
- 9हे यहोवा, तेरा वचन, आकाश में सदा तक स्थिर रहता है।
- 0तेरी सच्चाई पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहती है, तू ने पृथ्वी को स्थिर किया, इसलिये वह बनी है।
- 1वे आज के दिन तक तेरे नियमों के अनुसार ठहरे हैं, क्योंकि सारी सृष्टि तेरे आधीन है।
- 2यदि मैं तेरी व्यवस्था से सुखी न होता, तो मैं दु:ख के समय नाश हो जाता।
- 3मैं तेरे उपदेशों को कभी न भूलूंगा, क्योंकि उन्हीं के द्वारा तू ने मुझे जिलाया है।
- 4मैं तेरा ही हूं, तू मेरा उद्धार कर, क्योंकि मैं तेरे उपदेशों की सुधि रखता हूं।
- 5दुष्ट मेरा नाश करने के लिये मेरी घात में लगे हैं, परन्तु मैं तेरी चितौनियों पर ध्यान करता हूं।
- 6जितनी बातें पूरी जान पड़ती हैं, उन सब को तो मैं ने अधूरी पाया है, परन्तु तेरी आज्ञा का विस्तार बड़ा है॥
- 7अहा. मैं तेरी व्यवस्था में कैसी प्रीति रखता हूं. दिन भर मेरा ध्यान उसी पर लगा रहता है।
- 8तू अपनी आज्ञाओं के द्वारा मुझे अपने शत्रुओं से अधिक बुद्धिमान करता है, क्योंकि वे सदा मेरे मन में रहती हैं।
- 9मैं अपने सब शिक्षकों से भी अधिक समझ रखता हूं, क्योंकि मेरा ध्यान तेरी चितौनियों पर लगा है।
- 00मैं पुरनियों से भी समझदार हूं, क्योंकि मैं तेरे उपदेशों को पकड़े हुए हूं।
- 01मैं ने अपने पांवों को हर एक बुरे रास्ते से रोक रखा है, जिस से मैं तेरे वचन के अनुसार चलूं।
- 02मैं तेरे नियमों से नहीं हटा, क्योंकि तू ही ने मुझे शिक्षा दी है।
- 03तेरे वचन मुझ को कैसे मीठे लगते हैं, वे मेरे मुंह में मधु से भी मीठे हैं.
- 04तेरे उपदेशों के कारण मैं समझदार हो जाता हूं, इसलिये मैं सब मिथ्या मार्गों से बैर रखता हूं॥
- 05तेरा वचन मेरे पांव के लिये दीपक, और मेरे मार्ग के लिये उजियाला है।
- 06मैं ने शपथ खाई, और ठाना भी है कि मैं तेरे धर्ममय नियमों के अनुसार चलूंगा।
- 07मैं अत्यन्त दु:ख में पड़ा हूं, हे यहोवा, अपने वचन के अनुसार मुझे जिला।
- 08हे यहोवा, मेरे वचनों को स्वेच्छाबलि जान कर ग्रहण कर, और अपने नियमों को मुझे सिखा।
- 09मेरा प्राण निरन्तर मेरी हथेली पर रहता है, तौभी मैं तेरी व्यवस्था को भूल नहीं गया।
- 10दुष्टों ने मेरे लिये फन्दा लगाया है, परन्तु मैं तेरे उपदेशों के मार्ग से नहीं भटका।
- 11मैं ने तेरी चितौनियों को सदा के लिये अपना निज भाग कर लिया है, क्योंकि वे मेरे हृदय के हर्ष का कारण हैं।
- 12मैं ने अपने मन को इस बात पर लगाया है, कि अन्त तक तेरी विधियों पर सदा चलता रहूं।
- 13मैं दुचित्तों से तो बैर रखता हूं, परन्तु तेरी व्यवस्था से प्रीति रखता हूं।
- 14तू मेरी आड़ और ढ़ाल है, मेरी आशा तेरे वचन पर है।
- 15हे कुकर्मियों, मुझ से दूर हो जाओ, कि मैं अपने परमेश्वर की आज्ञाओं को पकड़े रहूं।
- 16हे यहोवा, अपने वचन के अनुसार मुझे सम्भाल, कि मैं जीवित रहूं, और मेरी आशा को न तोड़.
- 17मुझे थाम रख, तब मैं बचा रहूंगा, और निरन्तर तेरी विधियों की ओर चित्त लगाए रहूंगा.
- 18जितने तेरी विधियों के मार्ग से भटक जाते हैं, उन सब को तू तुच्छ जानता है, क्योंकि उनकी चतुराई झूठ है।
- 19तू ने पृथ्वी के सब दुष्टों को धातु के मैल के समान दूर किया है, इस कारण मैं तेरी चितौनियों से प्रीति रखता हूं।
- 20तेरे भय से मेरा शरीर कांप उठता है, और मैं तेरे नियमों से डरता हूं॥
- 21मैं ने तो न्याय और धर्म का काम किया है, तू मुझे अन्धेर करने वालों के हाथ में न छोड़।
- 22अपने दास की भलाई के लिये जामिन हो, ताकि अभिमानी मुझ पर अन्धेर न करने पांए।
- 23मेरी आंखें तुझ से उद्धार पाने, और तेरे धर्ममय वचन के पूरे होने की बाट जोहते जोहते रह गई हैं।
- 24अपने दास के संग अपनी करूणा के अनुसार बर्ताव कर, और अपनी विधियां मुझे सिखा।
- 25मैं तेरा दास हूं, तू मुझे समझ दे कि मैं तेरी चितौनियों को समझूं।
- 26वह समय आया है, कि यहोवा काम करे, क्योंकि लोगों ने तेरी व्यवस्था को तोड़ दिया है।
- 27इस कारण मैं तेरी आज्ञाओं को सोने से वरन कुन्दन से भी अधिक प्रिय मानता हूं।
- 28इसी कारण मैं तेरे सब उपदेशों को सब विषयों में ठीक जानता हूं, और सब मिथ्या मार्गों से बैर रखता हूं॥
- 29तेरी चितौनियां अनूप हैं, इस कारण मैं उन्हें अपने जी से पकड़े हुए हूं।
- 30तेरी बातों के खुलने से प्रकाश होता है, उससे भोले लोग समझ प्राप्त करते हैं।
- 31मैं मुंह खोल कर हांफने लगा, क्योंकि मैं तेरी आज्ञाओं का प्यासा था।
- 32जैसी तेरी रीति अपने नाम की प्रीति रखने वालों से है, वैसे ही मेरी ओर भी फिर कर मुझ पर अनुग्रह कर।
- 33मेरे पैरों को अपने वचन के मार्ग पर स्थिर कर, और किसी अनर्थ बात को मुझ पर प्रभुता न करने दे।
- 34मुझे मनुष्यों के अन्धेर से छुड़ा ले, तब मैं तेरे उपदेशों को मानूंगा।
- 35अपने दास पर अपने मुख का प्रकाश चमका दे, और अपनी विधियां मुझे सिखा।
- 36मेरी आंखों से जल की धारा बहती रहती है, क्योंकि लोग तेरी व्यवस्था को नहीं मानते॥
- 37हे यहोवा तू धर्मी है, और तेरे नियम सीधे हैं।
- 38तू ने अपनी चितौनियों को धर्म और पूरी सत्यता से कहा है।
- 39मैं तेरी धुन में भस्म हो रहा हूं, क्योंकि मेरे सताने वाले तेरे वचनों को भूल गए हैं।
- 40तेरा वचन पूरी रीति से ताया हुआ है, इसलिये तेरा दास उस में प्रीति रखता है।
- 41मैं छोटा और तुच्छ हूं, तौभी मैं तेरे उपदेशों को नही भूलता।
- 42तेरा धर्म सदा का धर्म है, और तेरी व्यवस्था सत्य है।
- 43मैं संकट और सकेती में फंसा हूं, परन्तु मैं तेरी आज्ञाओं से सुखी हूं।
- 44तेरी चितौनियां सदा धर्ममय हैं, तू मुझ को समझ दे कि मैं जीवित रहूं॥
- 45मैं ने सारे मन से प्रार्थना की है, हे यहोवा मेरी सुन लेना. मैं तेरी विधियों को पकड़े रहूंगा।
- 46मैं ने तुझ से प्रार्थना की है, तू मेरा उद्धार कर, और मैं तेरी चितौनियों को माना करूंगा।
- 47मैं ने पौ फटने से पहिले दोहाई दी, मेरी आशा तेरे वचनों पर थी।
- 48मेरी आंखें रात के एक एक पहर से पहिले खुल गईं, कि मैं तेरे वचन पर ध्यान करूं।
- 49अपनी करूणा के अनुसार मेरी सुन ले, हे यहोवा, अपनी रीति के अनुसार मुझे जीवित कर।
- 50जो दुष्टता में धुन लगाते हैं, वे निकट आ गए हैं, वे तेरी व्यवस्था से दूर हैं।
- 51हे यहोवा, तू निकट है, और तेरी सब आज्ञाएं सत्य हैं।
- 52बहुत काल से मैं तेरी चितौनियों को जानता हूं, कि तू ने उनकी नेव सदा के लिये डाली है॥
- 53मेरे दु:ख को देख कर मुझे छुड़ा ले, क्योंकि मैं तेरी व्यवस्था को भूल नहीं गया।
- 54मेरा मुकद्दमा लड़, और मुझे छुड़ा ले, अपने वचन के अनुसार मुझ को जिला।
- 55दुष्टों को उद्धार मिलना कठिन है, क्योंकि वे तेरी विधियों की सुधि नहीं रखते।
- 56हे यहोवा, तेरी दया तो बड़ी है, इसलिये अपने नियमों के अनुसार मुझे जिला।
- 57मेरा पीछा करने वाले और मेरे सताने वाले बहुत हैं, परन्तु मैं तेरी चितौनियों से नहीं हटता।
- 58मैं विश्वासघातियों को देख कर उदास हुआ, क्योंकि वे तेरे वचन को नहीं मानते।
- 59देख, मैं तेरे नियमों से कैसी प्रीति रखता हूं. हे यहोवा, अपनी करूणा के अनुसार मुझ को जिला।
- 60तेरा सारा वचन सत्य ही है, और तेरा एक एक धर्ममय नियम सदा काल तक अटल है॥
- 61हाकिम व्यर्थ मेरे पीछे पड़े हैं, परन्तु मेरा हृदय तेरे वचनों का भय मानता है।
- 62जैसे कोई बड़ी लूट पा कर हर्षित होता है, वैसे ही मैं तेरे वचन के कारण हर्षित हूं।
- 63झूठ से तो मैं बैर और घृणा रखता हूं, परन्तु तेरी व्यवस्था से प्रीति रखता हूं।
- 64तेरे धर्ममय नियमों के कारण मैं प्रतिदिन सात बेर तेरी स्तुति करता हूं।
- 65तेरी व्यवस्था से प्रीति रखने वालों को बड़ी शान्ति होती है, और उन को कुछ ठोकर नहीं लगती।
- 66हे यहोवा, मैं तुझ से उद्धार पाने की आशा रखता हूं, और तेरी आज्ञाओं पर चलता आया हूं।
- 67मैं तेरी चितौनियों को जी से मानता हूं, और उन से बहुत प्रीति रखता आया हूं।
- 68मैं तेरे उपदेशों और चितौनियों को मानता आया हूं, क्योंकि मेरी सारी चालचलन तेरे सम्मुख प्रगट है॥
- 69हे यहोवा, मेरी दोहाई तुझ तक पहुंचे, तू अपने वचन के अनुसार मुझे समझ दे.
- 70मेरा गिड़गिड़ाना तुझ तक पहुंचे, तू अपने वचन के अनुसार मुझे छुड़ा ले।
- 71मेरे मुंह से स्तुति निकला करे, क्योंकि तू मुझे अपनी विधियां सिखाता है।
- 72मैं तेरे वचन का गीत गाऊंगा, क्योंकि तेरी सब आज्ञाएं धर्ममय हैं।
- 73तेरा हाथ मेरी सहायता करने को तैयार रहता है, क्योंकि मैं ने तेरे उपदेशों को अपनाया है।
- 74हे यहोवा, मैं तुझ से उद्धार पाने की अभिलाषा करता हूं, मैं तेरी व्यवस्था से सुखी हूं।
- 75मुझे जिला, और मैं तेरी स्तुति करूंगा, तेरे नियमों से मेरी सहायता हो।
- 76मैं खोई हुई भेड़ की नाईं भटका हूं, तू अपने दास को ढूंढ़ ले, क्योंकि मैं तेरी आज्ञाओं को भूल नहीं गया॥
भजन संहित 120 ↟↟
- संकट के समय मैं ने यहोवा को पुकारा, और उसने मेरी सुन ली।
- हे यहोवा, झूठ बोलने वाले मुंह से और छली जीभ से मेरी रक्षा कर॥
- हे छली जीभ, तुझ को क्या मिले? और तेरे साथ और क्या अधिक किया जाए?
- वीर के नोकीले तीर और झाऊ के अंगारे.
- हाय, हाय, क्योंकि मुझे मेशेक में परदेशी होकर रहना पड़ा और केदार के तम्बुओं में बसना पड़ा है.
- बहुत काल से मुझ को मेल के बैरियों के साथ बसना पड़ा है।
- मैं तो मेल चाहता हूं, परन्तु मेरे बोलते ही, वे लड़ना चाहते हैं.
भजन संहित 121 ↟↟
- मैं अपनी आंखें पर्वतों की ओर लगाऊंगा। मुझे सहायता कहां से मिलेगी?
- मुझे सहायता यहोवा की ओर से मिलती है, जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है॥
- वह तेरे पांव को टलने न देगा, तेरा रक्षक कभी न ऊंघेगा।
- सुन, इस्राएल का रक्षक, न ऊंघेगा और न सोएगा॥
- यहोवा तेरा रक्षक है, यहोवा तेरी दाहिनी ओर तेरी आड़ है।
- न तो दिन को धूप से, और न रात को चांदनी से तेरी कुछ हानि होगी॥
- यहोवा सारी विपत्ति से तेरी रक्षा करेगा, वह तेरे प्राण की रक्षा करेगा।
- यहोवा तेरे आने जाने में तेरी रक्षा अब से ले कर सदा तक करता रहेगा॥
भजन संहित 122 ↟↟
- जब लोगों ने मुझ से कहा, कि हम यहोवा के भवन को चलें, तब मैं आनन्दित हुआ।
- हे यरूशलेम, तेरे फाटकों के भीतर, हम खड़े हो गए हैं.
- हे यरूशलेम, तू ऐसे नगर के समान बना है, जिसके घर एक दूसरे से मिले हुए हैं।
- वहां याह के गोत्र गोत्र के लोग यहोवा के नाम का धन्यवाद करने को जाते हैं, यह इस्राएल के लिये साक्षी है।
- वहां तो न्याय के सिंहासन, दाऊद के घराने के लिये धरे हुए हैं॥
- यरूशलेम की शान्ति का वरदान मांगो, तेरे प्रेमी कुशल से रहें.
- तेरी शहरपनाह के भीतर शान्ति, और तेरे महलों में कुशल होवे.
- अपने भाइयों और संगियों के निमित्त, मैं कहूंगा कि तुझ में शान्ति होवे.
- अपने परमेश्वर यहोवा के भवन के निमित्त, मैं तेरी भलाई का यत्न करूंगा॥
भजन संहित 123 ↟↟
- हे स्वर्ग में विराजमान मैं अपनी आंखें तेरी ओर लगाता हूं.
- देख, जैसे दासों की आंखें अपने स्वामियों के हाथ की ओर, और जैसे दासियों की आंखें अपनी स्वामिनी के हाथ की ओर लगी रहती है, वैसे ही हमारी आंखें हमारे परमेश्वर यहोवा की ओर उस समय तक लगी रहेंगी, जब तक वह हम पर अनुग्रह न करे॥
- हम पर अनुग्रह कर, हे यहोवा, हम पर अनुग्रह कर, क्योंकि हम अपमान से बहुत ही भर गए हैं।
- हमारा जीव सुखी लोगों के ठट्ठों से, और अहंकारियों के अपमान से बहुत ही भर गया है॥
भजन संहित 124 ↟↟
- इस्राएल यह कहे, कि यदि हमारी ओर यहोवा न होता,
- यदि यहोवा उस समय हमारी ओर न होता जब मनुष्यों ने हम पर चढ़ाई की,
- तो वे हम को उसी समय जीवित निगल जाते, जब उनका क्रोध हम पर भड़का था,
- हम उसी समय जल में डूब जाते और धारा में बह जाते,
- उमड़ते जल में हम उसी समय ही बह जाते॥
- धन्य है यहोवा, जिसने हम को उनके दातों तले जाने न दिया.
- हमार जीव पक्षी की नाईं चिड़ीमार के जाल से छूट गया, जाल फट गया, हम बच निकले.
- यहोवा जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है, हमारी सहायता उसी के नाम से होती है।
भजन संहित 125 ↟↟
- जो यहोवा पर भरोसा रखते हैं, वे सिय्योन पर्वत के समान हैं, जो टलता नहीं, वरन सदा बना रहता है।
- जिस प्रकार यरूशलेम के चारों ओर पहाड़ हैं, उसी प्रकार यहोवा अपनी प्रजा के चारों ओर अब से लेकर सर्वदा तक बना रहेगा।
- क्योंकि दुष्टों का राजदण्ड धर्मियों के भाग पर बना न रहेगा, ऐसा न हो कि धर्मी अपने हाथ कुटिल काम की ओर बढ़ाएं॥
- हे यहोवा, भलों का, और सीधे मन वालों का भला कर.
- परन्तु जो मुड़ कर टेढ़े मार्गों में चलते हैं, उन को यहोवा अनर्थकारियों के संग निकाल देगा. इस्राएल को शान्ति मिले.
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