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भजनसंहिता 1 ↟↟
- क्या ही धन्य है वह पुरूष जो दुष्टों की युक्ति पर नहीं चलता, और न पापियों के मार्ग में खड़ा होता, और न ठट्ठा करने वालों की मण्डली में बैठता है.
- परन्तु वह तो यहोवा की व्यवस्था से प्रसन्न रहता, और उसकी व्यवस्था पर रात दिन ध्यान करता रहता है।
- वह उस वृक्ष के समान है, जो बहती नालियों के किनारे लगाया गया है। और अपनी ऋतु में फलता है, और जिसके पत्ते कभी मुरझाते नहीं। इसलिये जो कुछ वह पुरूष करे वह सफल होता है॥
- दुष्ट लोग ऐसे नहीं होते, वे उस भूसी के समान होते हैं, जो पवन से उड़ाई जाती है।
- इस कारण दुष्ट लोग अदालत में स्थिर न रह सकेंगे, और न पापी धर्मियों की मण्डली में ठहरेंगे,
- क्योंकि यहोवा धर्मियों का मार्ग जानता है, परन्तु दुष्टों का मार्ग नाश हो जाएगा॥
भजनसंहिता 2 ↟↟
- जाति जाति के लोग क्यों हुल्लड़ मचाते हैं, और देश देश के लोग व्यर्थ बातें क्यों सोच रहे हैं?
- यहोवा के और उसके अभिषिक्त के विरूद्ध पृथ्वी के राजा मिलकर, और हाकिम आपस में सम्मति करके कहते हैं, कि
- आओ, हम उनके बन्धन तोड़ डालें, और उनकी रस्सियों अपने ऊपर से उतार फेंके॥
- वह जो स्वर्ग में विराजमान है, हंसेगा, प्रभु उन को ठट्ठों में उड़ाएगा।
- तब वह उन से क्रोध करके बातें करेगा, और क्रोध में कहकर उन्हें घबरा देगा, कि
- मैं तो अपने ठहराए हुए राजा को अपने पवित्र पर्वत सिय्योन की राजगद्दी पर बैठा चुका हूं।
- मैं उस वचन का प्रचार करूंगा: जो यहोवा ने मुझ से कहा, तू मेरा पुत्रा है, आज तू मुझ से उत्पन्न हुआ।
- मुझ से मांग, और मैं जाति जाति के लोगों को तेरी सम्पत्ति होने के लिये, और दूर दूर के देशों को तेरी निज भूमि बनने के लिये दे दूंगा।
- तू उन्हें लोहे के डण्डे से टुकड़े टुकड़े करेगा। तू कुम्हार के बर्तन की नाईं उन्हें चकना चूर कर डालेगा॥
- 0इसलिये अब, हे राजाओं, बुद्धिमान बनो, हे पृथ्वी के न्यायियों, यह उपदेश ग्रहण करो।
- 1डरते हुए यहोवा की उपासना करो, और कांपते हुए मगन हो।
- 2पुत्र को चूमो ऐसा न हो कि वह क्रोध करे, और तुम मार्ग ही में नाश हो जाओ, क्योंकि क्षण भर में उसका क्रोध भड़कने को है॥ धन्य हैं वे जिनका भरोसा उस पर है॥
भजनसंहिता 3 ↟↟
- हे यहोवा मेरे सताने वाले कितने बढ़ गए हैं. वह जो मेरे विरूद्ध उठते हैं बहुत हैं।
- बहुत से मेरे प्राण के विषय में कहते हैं, कि उसका बचाव परमेश्वर की ओर से नहीं हो सकता।
- परन्तु हे यहोवा, तू तो मेरे चारों ओर मेरी ढ़ाल है, तू मेरी महिमा और मेरे मस्तिष्क का ऊंचा करने वाला है।
- मैं ऊंचे शब्द से यहोवा को पुकारता हूं, और वह अपने पवित्र पर्वत पर से मुझे उत्तर देता है।
- मैं लेटकर सो गया, फिर जाग उठा, क्योंकि यहोवा मुझे सम्हालता है।
- मैं उन दस हजार मनुष्यों से नहीं डरता, जो मेरे विरूद्ध चारों ओर पांति बान्धे खड़े हैं॥
- उठ, हे यहोवा. हे मेरे परमेश्वर मुझे बचा ले. क्योंकि तू ने मेरे सब शत्रुओं के जबड़ों पर मारा है और तू ने दुष्टों के दांत तोड़ डाले हैं॥
- उद्धार यहोवा ही की ओर से होता है, हे यहोवा तेरी आशीष तेरी प्रजा पर हो॥
भजनसंहिता 4 ↟↟
- हे मेरे धर्ममय परमेश्वर, जब मैं पुकारूं तब तू मुझे उत्तर दे, जब मैं सकेती में पड़ा तब तू ने मुझे विस्तार दिया। मुझ पर अनुग्रह कर और मेरी प्रार्थना सुन ले॥
- हे मनुष्यों के पुत्रों, कब तक मेरी महिमा के बदले अनादर होता रहेगा? तुम कब तक व्यर्थ बातों से प्रीति रखोगे और झूठी युक्ति की खोज में रहोगे?
- यह जान रखो कि यहोवा ने भक्त को अपने लिये अलग कर रखा है, जब मैं यहोवा को पुकारूंगा तब वह सुन लेगा॥
- कांपते रहो और पाप मत करो, अपने अपने बिछौने पर मन ही मन सोचो और चुपचाप रहो।
- धर्म के बलिदान चढ़ाओ, और यहोवा पर भरोसा रखो॥
- बहुत से हैं जो कहते हैं, कि कौन हम को कुछ भलाई दिखाएगा? हे यहोवा तू अपने मुख का प्रकाश हम पर चमका.
- तू ने मेरे मन में उससे कहीं अधिक आनन्द भर दिया है, जो उन को अन्न और दाखमधु की बढ़ती से होता था।
- मैं शान्ति से लेट जाऊंगा और सो जाऊंगा, क्योंकि, हे यहोवा, केवल तू ही मुझ को एकान्त में निश्चिन्त रहने देता है॥
भजनसंहिता 5 ↟↟
- े यहोवा, मेरे वचनों पर कान लगा, मेरे ध्यान करने की ओर मन लगा।
- हे मेरे राजा, हे मेरे परमेश्वर, मेरी दोहाई पर ध्यान दे, क्योंकि मैं तुझी से प्रार्थना करता हूं।
- हे यहोवा, भोर को मेरी वाणी तुझे सुनाई देगी, मैं भोर को प्रार्थना करके तेरी बाट जोहूंगा।
- क्योंकि तू ऐसा ईश्वर नहीं जो दुष्टता से प्रसन्न हो, बुराई तेरे साथ नहीं रह सकती।
- घमंडी तेरे सम्मुख खड़े होने न पांएगे, तुझे सब अनर्थकारियों से घृणा है।
- तू उन को जो झूठ बोलते हैं नाश करेगा, यहोवा तो हत्यारे और छली मनुष्य से घृणा करता है।
- परन्तु मैं तो तेरी अपार करूणा के कारण तेरे भवन में आऊंगा, मैं तेरा भय मानकर तेरे पवित्र मन्दिर की ओर दण्डवत् करूंगा।
- हे यहोवा, मेरे शत्रुओं के कारण अपने धर्म के मार्ग में मेरी अगुवाई कर, मेरे आगे आगे अपने सीधे मार्ग को दिखा।
- क्योंकि उनके मुंह में कोई सच्चाई नहीं, उनके मन में निरी दुष्टता है। उनका गला खुली हुई कब्र है, वे अपनी जीभ से चिकनी चुपड़ी बातें करते हैं।
- 0हे परमेश्वर तू उन को दोषी ठहरा, वे अपनी ही युक्तियों से आप ही गिर जाएं, उन को उनके अपराधों की अधिकाई के कारण निकाल बाहर कर, क्योंकि उन्होंने तुझ से बलवा किया है॥
- 1परन्तु जितने तुझ पर भरोसा रखते हैं वे सब आनन्द करें, वे सर्वदा ऊंचे स्वर से गाते रहें, क्योंकि तू उनकी रक्षा करता है, और जो तेरे नाम के प्रेमी हैं तुझ में प्रफुल्लित हों।
- 2क्योंकि तू धर्मी को आशिष देगा, हे यहोवा, तू उसको अपने अनुग्रहरूपी ढाल से घेरे रहेगा॥
भजनसंहिता 6 ↟↟
- हे यहोवा, तू मुझे अपने क्रोध में न डांट, और न झुंझलाहट में मुझे ताड़ना दे।
- हे यहोवा, मुझ पर अनुग्रह कर, क्योंकि मैं कुम्हला गया हूं, हे यहोवा, मुझे चंगा कर, क्योंकि मेरी हडि्डयों में बेचैनी है।
- मेरा प्राण भी बहुत खेदित है। और तू, हे यहोवा, कब तक?
- लौट आ, हे यहोवा, और मेरे प्राण बचा अपनी करूणा के निमित्त मेरा उद्धार कर।
- क्योंकि मृत्यु के बाद तेरा स्मरण नहीं होता, अधोलोक में कौन तेरा धन्यवाद करेगा?
- मैं कराहते कराहते थक गया, मैं अपनी खाट आंसुओं से भिगोता हूं, प्रति रात मेरा बिछौना भीगता है।
- मेरी आंखें शोक से बैठी जाती हैं, और मेरे सब सताने वालों के कारण वे धुन्धला गई हैं॥
- हे सब अनर्थकारियों मेरे पास से दूर हो, क्योंकि यहोवा ने मेरे रोने का शब्द सुन लिया है।
- यहोवा ने मेरा गिड़गिड़ाना सुना है, यहोवा मेरी प्रार्थना को ग्रहण भी करेगा।
- 0मेरे सब शत्रु लज्जित होंगे और बहुत घबराएंगे, वे लौट जाएंगे, और एकाएक लज्जित होंगे॥
भजनसंहिता 7 ↟↟
- हे मेरे परमेश्वर यहोवा, मेरा भरोसा तुझ पर है, सब पीछा करने वालों से मुझे बचा और छुटकारा दे,
- ऐसा न हो कि वे मुझ को सिंह की नाईं फाड़कर टुकड़े टुकड़े कर डालें, और कोई मेरा छुड़ाने वाला न हो॥
- हे मेरे परमेश्वर यहोवा, यदि मैं ने यह किया हो, यदि मेरे हाथों से कुटिल काम हुआ हो,
- यदि मैं ने अपने मेल रखने वालों से भलाई के बदले बुराई की हो, (वरन मैं ने उसको जो अकारण मेरा बैरी था बचाया है)
- तो शत्रु मेरे प्राण का पीछा करके मुझे आ पकड़े, वरन मेरे प्राण को भूमि पर रौंदे, और मेरी महिमा को मिट्टी में मिला दे॥
- हे यहोवा क्रोध करके उठ, मेरे क्रोध भरे सताने वाले के विरूद्ध तू खड़ा हो जा, मेरे लिये जाग. तू ने न्याय की आज्ञा तो दे दी है।
- देश देश के लोगों की मण्डली तेरे चारों ओर हो, और तू उनके ऊपर से होकर ऊंचे स्थानों पर लौट जा।
- यहोवा समाज समाज का न्याय करता है, यहोवा मेरे धर्म और खराई के अनुसार मेरा न्याय चुका दे॥
- भला हो कि दुष्टों की बुराई का अन्त हो जाए, परन्तु धर्म को तू स्थिर कर, क्योंकि धर्मी परमेश्वर मन और मर्म का ज्ञाता है।
- 0मेरी ढाल परमेश्वर के हाथ में है, वह सीधे मन वालों को बचाता है॥
- 1परमेश्वर धर्मी और न्यायी है, वरन ऐसा ईश्वर है जो प्रति दिन क्रोध करता है॥
- 2यदि मनुष्य न फिरे तो वह अपनी तलवार पर सान चढ़ाएगा, वह अपना धनुष चढ़ाकर तीर सन्धान चुका है।
- 3और उस मनुष्य के लिये उसने मृत्यु के हथियार तैयार कर लिए हैं: वह अपने तीरों को अग्निबाण बनाता है।
- 4देख दुष्ट को अनर्थ काम की पीड़ाएं हो रही हैं, उसको उत्पात का गर्भ है, और उससे झूठ उत्पन्न हुआ। उसने गड़हा खोदकर उसे गहिरा किया,
- 5और जो खाई उसने बनाई थी उस में वह आप ही गिरा।
- 6उसका उत्पात पलट कर उसी के सिर पर पड़ेगा, और उसका उपद्रव उसी के माथे पर पड़ेगा॥
- 7मैं यहोवा के धर्म के अनुसार उसका धन्यवाद करूंगा, और परमप्रधान यहोवा के नाम का भजन गाऊंगा॥
भजनसंहिता 8 ↟↟
- हे यहोवा हमारे प्रभु, तेरा नाम सारी पृथ्वी पर क्या ही प्रतापमय है. तू ने अपना वैभव स्वर्ग पर दिखाया है।
- तू ने अपने बैरियों के कारण बच्चोंऔर दूध पिउवों के द्वारा सामर्थ्य की नेव डाली है, ताकि तू शत्रु और पलटा लेने वालों को रोक रखे।
- जब मैं आकाश को, जो तेरे हाथों का कार्य है, और चंद्रमा और तरागण को जो तू ने नियुक्त किए हैं, देखता हूं,
- तो फिर मनुष्य क्या है कि तू उसका स्मरण रखे, और आदमी क्या है कि तू उसकी सुधि ले?
- क्योंकि तू ने उसको परमेश्वर से थोड़ा ही कम बनाया है, और महिमा और प्रताप का मुकुट उसके सिर पर रखा है।
- तू ने उसे अपने हाथों के कार्यों पर प्रभुता दी है, तू ने उसके पांव तले सब कुछ कर दिया है।
- सब भेड़- बकरी और गाय- बैल और जितने वनपशु हैं,
- आकाश के पक्षी और समुद्र की मछलियां, और जितने जीव- जन्तु समुद्रों में चलते फिरते हैं।
- हे यहोवा, हे हमारे प्रभु, तेरा नाम सारी पृथ्वी पर क्या ही प्रतापमय है॥
भजनसंहिता 9 ↟↟
- हे यहोवा परमेश्वर मैं अपने पूर्ण मन से तेरा धन्यवाद करूंगा, मैं तेरे सब आश्चर्य कर्मों का वर्णन करूंगा।
- मैं तेरे कारण आनन्दित और प्रफुल्लित होऊंगा, हे परमप्रधान, मैं तेरे नाम का भजन गाऊंगा॥
- जब मेरे शत्रु पीछे हटते हैं, तो वे तेरे साम्हने से ठोकर खाकर नाश होते हैं।
- क्योंकि तू ने मेरा न्याय और मुकद्दमा चुकाया है, तू ने सिंहासन पर विराजमान होकर धर्म से न्याय किया।
- तू ने अन्यजातियों को झिड़का और दुष्ट को नाश किया है, तू ने उनका नाम अनन्तकाल के लिये मिटा दिया है।
- शत्रु जो है, वह मर गए, वे अनन्तकाल के लिये उजड़ गए हैं, और जिन नगरों को तू ने ढा दिया, उनका नाम वा निशान भी मिट गया है।
- परन्तु यहोवा सदैव सिंहासन पर विराजमान है, उसने अपना सिंहासन न्याय के लिये सिद्ध किया है,
- और वह आप ही जगत का न्याय धर्म से करेगा, वह देश देश के लोगों का मुकद्दमा खराई से निपटाएगा॥
- यहोवा पिसे हुओं के लिये ऊंचा गढ़ ठहरेगा, वह संकट के समय के लिये भी ऊंचा गढ़ ठहरेगा।
- 0और तेरे नाम के जानने वाले तुझ पर भरोसा रखेंगे, क्योंकि हे यहोवा तू ने अपने खोजियों को त्याग नहीं दिया॥
- 1यहोवा जो सिय्योन में विराजमान है, उसका भजन गाओ. जाति जाति के लोगों के बीच में उसके महाकर्मों का प्रचार करो.
- 2क्योंकि खून का पलटा लेनेवाला उन को स्मरण करता है, वह दीन लोगों की दोहाई को नहीं भूलता॥
- 3हे यहोवा, मुझ पर अनुग्रह कर। तू जो मुझे मृत्यु के फाटकों के पास से उठाता है, मेरे दु:ख को देख जो मेरे बैरी मुझे दे रहे हैं,
- 4ताकि मैं सिय्योन के फाटकों के पास तेरे सब गुणों का वर्णन करूं, और तेरे किए हुए उद्धार से मगन होऊं॥
- 5अन्य जाति वालों ने जो गड़हा खोदा था, उसी में वे आप गिर पड़े, जो जाल उन्होंने लगाया था, उस में उन्हीं का पांव फंस गया।
- 6यहोवा ने अपने को प्रगट किया, उसने न्याय किया है, दुष्ट अपने किए हुए कामों में फंस जाता है।
- 7दुष्ट अधोलोक में लौट जाएंगे, तथा वे सब जातियां भी जा परमेश्वर को भूल जाती है।
- 8क्योंकि दरिद्र लोग अनन्तकाल तक बिसरे हुए न रहेंगे, और न तो नम्र लोगों की आशा सर्वदा के लिये नाश होगी।
- 9उठ, हे परमेश्वर, मनुष्य प्रबल न होने पाए. जातियों का न्याय तेरे सम्मुख किया जाए।
- 0हे परमेश्वर, उन को भय दिला. जातियां अपने को मनुष्य मात्र ही जानें।
भजनसंहिता 10 ↟↟
- हे यहोवा तू क्यों दूर खड़ा रहता है? संकट के समय में क्यों छिपा रहता है?
- दुष्टों के अहंकार के कारण दीन मनुष्य खदेड़े जाते हैं, वे अपनी ही निकाली हुई युक्तियों में फंस जाएं॥
- क्योंकि दुष्ट अपनी अभिलाषा पर घमण्ड करता है, और लोभी परमेश्वर को त्याग देता है और उसका तिरस्कार करता है॥
- दुष्ट अपने अभिमान के कारण कहता है कि वह लेखा नहीं लेने का, उसका पूरा विचार यही है कि कोई परमेश्वर है ही नहीं॥
- वह अपने मार्ग पर दृढ़ता से बना रहता है, तेरे न्याय के विचार ऐसे ऊंचे पर होते हैं, कि उसकी दृष्टि वहां तक नहीं पहुंचती, जितने उसके विरोधी हैं उन पर वह फुंकारता है।
- वह अपने मन में कहता है कि मैं कभी टलने का नहीं: मैं पीढ़ी से पीढ़ी तक दु:ख से बचा रहूंगा॥
- उसका मुंह शाप और छल और अन्धेर से भरा है, उत्पात और अनर्थ की बातें उसके मुंह में हैं।
- वह गांवों में घात लगाकर बैठा करता है, और गुप्त स्थानों में निर्दोष को घात करता है, उसकी आंखे लाचार की घात में लगी रहती है।
- जैसा सिंह अपनी झाड़ी में वैसा ही वह भी छिपकर घात में बैठा करता है, वह दीन को पकड़ने के लिये घात लगाए रहता है, वह दीन को अपने जाल में फंसाकर घसीट लाता है, तब उसे पकड़ लेता है।
- 0वह झुक जाता है और वह दुबक कर बैठता है, और लाचार लोग उसके महाबली हाथों से पटके जाते हैं।
- 1वह अपने मन में सोचता है, कि ईश्वर भूल गया, वह अपना मुंह छिपाता है, वह कभी नहीं देखेगा॥
- 2उठ, हे यहोवा, हे ईश्वर, अपना हाथ बढ़ा, और दीनों को न भूल।
- 3परमेश्वर को दुष्ट क्यों तुच्छ जानता है, और अपने मन में कहता है कि तू लेखा न लेगा?
- 4तू ने देख लिया है, क्योंकि तू उत्पात और कलपाने पर दुष्टि रखता है, ताकि उसका पलटा अपने हाथ में रखे, लाचार अपने को तेरे हाथ में सौंपता है, अनाथों का तू ही सहायक रहा है।
- 5 दुष्ट की भुजा को तोड़ डाल, और दुर्जन की दुष्टता को ढूँढ़ ढूँढ़ कर निकाल जब तक कि सब उसमें से दूर न हो जाए
- 6यहोवा अनन्तकाल के लिये महाराज है, उसके देश में से अन्यजाति लोग नाश हो गए हैं॥
- 7हे यहोवा, तू ने नम्र लोगों की अभिलाषा सुनी है, तू उनका मन तैयार करेगा, तू कान लगाकर सुनेगा
- 8कि अनाथ और पिसे हुए का न्याय करे, ताकि मनुष्य जो मिट्टी से बना है फिर भय दिखाने न पाए॥
भजनसंहिता 11 ↟↟
- मेरा भरोसा परमेश्वर पर है, तुम क्योंकर मेरे प्राण से कह सकते हो कि पक्षी की नाईं अपने पहाड़ पर उड़ जा?
- क्योंकि देखो, दुष्ट अपना धनुष चढ़ाते हैं, और अपना तीर धनुष की डोरी पर रखते हैं, कि सीधे मन वालों पर अन्धियारे में तीर चलाएं।
- यदि नेवें ढ़ा दी जाएं तो धर्मी क्या कर सकता है?
- परमेश्वर अपने पवित्र भवन में है, परमेश्वर का सिंहासन स्वर्ग में है, उसकी आंखें मनुष्य की सन्तान को नित देखती रहती हैं और उसकी पलकें उन को जांचती हैं।
- यहोवा धर्मी को परखता है, परन्तु वह उन से जो दुष्ट हैं और उपद्रव से प्रीति रखते हैं अपनी आत्मा में घृणा करता है।
- वह दुष्टों पर फन्दे बरसाएगा, आग और गन्धक और प्रचण्ड लूह उनके कटोरों में बांट दी जाएंगी।
- क्योंकि यहोवा धर्मी है, वह धर्म के ही कामों से प्रसन्न रहता है, धर्मी जन उसका दर्शन पाएंगे॥
भजनसंहिता 12 ↟↟
- .हे परमेश्वर बचा ले, क्योंकि एक भी भक्त नहीं रहा, मनुष्यों में से विश्वास योग्य लोग मर मिटे हैं।
- उन में से प्रत्येक अपने पड़ोसी से झूठी बातें कहता है, वे चापलूसी के ओठों से दो रंगी बातें करते हैं॥
- प्रभु सब चापलूस ओठों को और उस जीभ को जिस से बड़ा बोल निकलता है काट डालेगा।
- वे कहते हैं कि हम अपनी जीभ ही से जीतेंगे, हमारे ओंठ हमारे ही वश में हैं, हमारा प्रभु कौन है?
- दीन लोगों के लुट जाने, और दरिद्रों के कराहने के कारण, परमेश्वर कहता है, अब मैं उठूंगा, जिस पर वे फुंकारते हैं उसे मैं चैन विश्राम दूंगा।
- परमेश्वर का वचन पवित्र है, उस चान्दि के समान जो भट्टी में मिट्टी पर ताई गई, और सात बार निर्मल की गई हो॥
- तू ही हे परमेश्वर उनकी रक्षा करेगा, उन को इस काल के लोगों से सर्वदा के लिये बचाए रखेगा।
- जब मनुष्यों में नीचपन का आदर होता है, तब दुष्ट लोग चारों ओर अकड़ते फिरते हैं॥
भजनसंहिता 13 ↟↟
- हे परमेश्वर तू कब तक? क्या सदैव मुझे भूला रहेगा? तू कब तक अपना मुखड़ा मुझ से छिपाए रहेगा?
- मैं कब तक अपने मन ही मन में युक्तियां करता रहूं, और दिन भर अपने हृदय में दुखित रहा करूं, कब तक मेरा शत्रु मुझ पर प्रबल रहेगा?
- हे मेरे परमेश्वर यहोवा मेरी ओर ध्यान दे और मुझे उत्तर दे, मेरी आंखों में ज्योति आने दे, नहीं तो मुझे मृत्यु की नींद आ जाएगी,
- ऐसा न हो कि मेरा शत्रु कहे, कि मैं उस पर प्रबल हो गया, और ऐसा न हो कि जब मैं डगमगाने लगूं तो मेरे शत्रु मगन हों॥
- परन्तु मैं ने तो तेरी करूणा पर भरोसा रखा है, मेरा हृदय तेरे उद्धार से मगन होगा।
- मैं परमेश्वर के नाम का भजन गाऊंगा, क्योंकि उसने मेरी भलाई की है॥
भजनसंहिता 14 ↟↟
- मूर्ख ने अपने मन में कहा है, कोई परमेश्वर है ही नहीं। वे बिगड़ गए, उन्होंने घिनौने काम किए हैं, कोई सुकर्मी नहीं।
- परमेश्वर ने स्वर्ग में से मनुष्यों पर दृष्टि की है, कि देखे कि कोई बुद्धिमान, कोई परमेश्वर का खोजी है या नहीं।
- वे सब के सब भटक गए, वे सब भ्रष्ट हो गए, कोई सुकर्मी नहीं, एक भी नहीं।
- क्या किसी अनर्थकारी को कुछ भी ज्ञान नहीं रहता, जो मेरे लोगों को ऐसे खा जाते हैं जैसे रोटी, और परमेश्वर का नाम नहीं लेते?
- वहां उन पर भय छा गया, क्योंकि परमेश्वर धर्मी लोगों के बीच में निरन्तर रहता है।
- तुम तो दीन की युक्ति की हंसी उड़ाते हो इसलिये कि यहोवा उसका शरणस्थान है।
- भला हो कि इस्राएल का उद्धार सिय्योन से प्रगट होता. जब यहोवा अपनी प्रजा को दासत्व से लौटा ले आएगा, तब याकूब मगन और इस्राएल आनन्दित होगा॥
भजनसंहिता 15 ↟↟
- हे परमेश्वर तेरे तम्बू में कौन रहेगा? तेरे पवित्र पर्वत पर कौन बसने पाएगा?
- वह जो खराई से चलता और धर्म के काम करता है, और हृदय से सच बोलता है,
- जो अपनी जीभ से निन्दा नहीं करता, और न अपने मित्र की बुराई करता, और न अपने पड़ोसी की निन्दा सुनता है,
- वह जिसकी दृष्टि में निकम्मा मनुष्य तुच्छ है, और जो यहोवा के डरवैयों का आदर करता है, जो शपथ खाकर बदलता नहीं चाहे हानि उठानी पड़े,
- जो अपना रूपया ब्याज पर नहीं देता, और निर्दोष की हानि करने के लिये घूस नहीं लेता है। जो कोई ऐसी चाल चलता है वह कभी न डगमगाएगा॥
भजनसंहिता 16 ↟↟
- हे ईश्वर मेरी रक्षा कर, क्योंकि मैं तेरा ही शरणागत हूं।
- मैं ने परमेश्वर से कहा है, कि तू ही मेरा प्रभु है, तेरे सिवाए मेरी भलाई कहीं नहीं।
- पृथ्वी पर जो पवित्र लोग हैं, वे ही आदर के योग्य हैं, और उन्हीं से मैं प्रसन्न रहता हूं।
- जो पराए देवता के पीछे भागते हैं उनका दु:ख बढ़ जाएगा, मैं उनके लोहू वाले तपावन नहीं तपाऊंगा और उनका नाम अपने ओठों से नहीं लूंगा॥
- यहोवा मेरा भाग और मेरे कटोरे का हिस्सा है, मेरे बाट को तू स्थिर रखता है।
- मेरे लिये माप की डोरी मनभावने स्थान में पड़ी, और मेरा भाग मनभावना है॥
- मैं यहोवा को धन्य कहता हूं, क्योंकि उसने मुझे सम्मत्ति दी है, वरन मेरा मन भी रात में मुझे शिक्षा देता है।
- मैं ने यहोवा को निरन्तर अपने सम्मुख रखा है: इसलिये कि वह मेरे दाहिने हाथ रहता है मैं कभी न डगमगाऊंगा॥
- इस कारण मेरा हृदय आनन्दित और मेरी आत्मा मगन हुई, मेरा शरीर भी चैन से रहेगा।
- 0क्योंकि तू मेरे प्राण को अधोलोक में न छोड़ेगा, न अपने पवित्र भक्त को सड़ने देगा॥
- 1तू मुझे जीवन का रास्ता दिखाएगा, तेरे निकट आनन्द की भरपूरी है, तेरे दाहिने हाथ में सुख सर्वदा बना रहता है॥
भजनसंहिता 17 ↟↟
- हे यहोवा परमेश्वर सच्चाई के वचन सुन, मेरी पुकार की ओर ध्यान दे। मेरी प्रार्थना की ओर जो निष्कपट मुंह से निकलती है कान लगा।
- मेरे मुकद्दमे का निर्णय तेरे सम्मुख हो. तेरी आंखें न्याय पर लगी रहें.
- तू ने मेरे हृदय को जांचा है, तू ने रात को मेरी देखभाल की, तू ने मुझे परखा परन्तु कुछ भी खोटापन नहीं पाया, मैं ने ठान लिया है कि मेरे मुंह से अपराध की बात नहीं निकलेगी।
- मानवी कामों में मैं तेरे मुंह के वचन के द्वारा क्रूरों की सी चाल से अपने को बचाए रहा।
- मेरे पांव तेरे पथों में स्थिर रहे, फिसले नहीं॥
- हे ईश्वर, मैं ने तुझ से प्रार्थना की है, क्योंकि तू मुझे उत्तर देगा। अपना कान मेरी ओर लगाकर मेरी बिनती सुन ले।
- तू जो अपने दाहिने हाथ के द्वारा अपने शरणगतों को उनके विरोधियों से बचाता है, अपनी अद्भुत करूणा दिखा।
- अपने आंखो की पुतली की नाईं सुरक्षित रख, अपने पंखों के तले मुझे छिपा रख,
- उन दुष्टों से जो मुझ पर अत्याचार करते हैं, मेरे प्राण के शत्रुओं से जो मुझे घेरे हुए हैं॥
- 0उन्होंने अपने हृदयों को कठोर किया है, उनके मुंह से घमंड की बातें निकलती हैं।
- 1उन्होंने पग पग पर हम को घेरा है, वे हम को भूमि पर पटक देने के लिये घात लगाए हुए हैं।
- 2वह उस सिंह की नाईं है जो अपने शिकार की लालसा करता है, और जवान सिंह की नाईं घात लगाने के स्थानों में बैठा रहता है॥
- 3उठ, हे यहोवा उसका सामना कर और उसे पटक दे. अपनी तलवार के बल से मेरे प्राण को दुष्ट से बचा ले।
- 4अपना हाथ बढ़ाकर हे यहोवा, मुझे मनुष्यों से बचा, अर्थात संसारी मनुष्यों से जिनका भाग इसी जीवन में है, और जिनका पेट तू अपने भण्डार से भरता है। वे बाल-बच्चों से सन्तुष्ट हैं, और शेष सम्पति अपने बच्चों के लिये छोड़ जाते हैं॥
- 5परन्तु मैं तो धर्मी होकर तेरे मुख का दर्शन करूंगा जब मैं जानूंगा तब तेरे स्वरूप से सन्तुष्ट हूंगा॥
भजनसंहिता 18 ↟↟
- हे परमेश्वर, हे मेरे बल, मैं तुझ से प्रेम करता हूं।
- यहोवा मेरी चट्टान, और मेरा गढ़ और मेरा छुड़ाने वाला है, मेरा ईश्वर, मेरी चट्टान है, जिसका मैं शरणागत हूं, वह मेरी ढ़ाल और मेरी मुक्ति का सींग, और मेरा ऊँचा गढ़ है।
- मैं यहोवा को जो स्तुति के योग्य है पुकारूंगा, इस प्रकार मैं अपने शत्रुओं से बचाया जाऊंगा॥
- मृत्यु की रस्सियों से मैं चारो ओर से घिर गया हूं, और अधर्म की बाढ़ ने मुझ को भयभीत कर दिया,
- पाताल की रस्सियां मेरे चारो ओर थीं, और मृत्यु के फन्दे मुझ पर आए थे।
- अपने संकट में मैं ने यहोवा परमेश्वर को पुकारा, मैं ने अपने परमेश्वर की दोहाई दी। और उसने अपने मन्दिर में से मेरी बातें सुनी। और मेरी दोहाई उसके पास पहुंचकर उसके कानों में पड़ी॥
- तब पृथ्वी हिल गई, और कांप उठी और पहाड़ों की नेवे कंपित होकर हिल गई क्योंकि वह अति क्रोधित हुआ था।
- उसके नथनों से धुआं निकला, और उसके मुंह से आग निकलकर भस्म करने लगी, जिस से कोएले दहक उठे।
- और वह स्वर्ग को नीचे झुकाकर उतर आया, और उसके पांवों तले घोर अन्धकार था।
- 0और वह करूब पर सवार होकर उड़ा, वरन पवन के पंखों पर सवारी करके वेग से उड़ा।
- 1उसने अन्धियारे को अपने छिपने का स्थान और अपने चारों ओर मेघों के अन्धकार और आकाश की काली घटाओं का मण्डप बनाया।
- 2उसकी उपस्थिति की झलक से उसकी काली घटाएं फट गई, ओले और अंगारे।
- 3तब यहोवा आकाश में गरजा, और परमप्रधान ने अपनी वाणी सुनाई, ओले ओर अंगारे॥
- 4उसने अपने तीर चला चलाकर उन को तितर बितर किया, वरन बिजलियां गिरा गिराकर उन को परास्त किया।
- 5तब जल के नाले देख पड़े, और जगत की नेवें प्रगट हुई, यह तो यहोवा तेरी डांट से, और तेरे नथनों की सांस की झोंक से हुआ॥
- 6उसने ऊपर से हाथ बढ़ाकर मुझे थाम लिया, और गहिरे जल में से खींच लिया।
- 7उसने मेरे बलवन्त शत्रु से, और उन से जो मुझ से घृणा करते थे मुझे छुड़ाया, क्योंकि वे अधिक सामर्थी थे।
- 8मेरी विपत्ति के दिन वे मुझ पर आ पड़े। परन्तु यहोवा मेरा आश्रय था।
- 9और उसने मुझे निकाल कर चौड़े स्थान में पहुंचाया, उसने मुझ को छुड़ाया, क्योंकि वह मुझ से प्रसन्न था।
- 0यहोवा ने मुझ से मेरे धर्म के अनुसार व्यवहार किया, और मेरे हाथों की शुद्धता के अनुसार उसने मुझे बदला दिया।
- 1क्योंकि मैं यहोवा के मार्गों पर चलता रहा, और दुष्टता के कारण अपने परमेश्वर से दूर न हुआ।
- 2क्योंकि उसके सारे निर्णय मेरे सम्मुख बने रहे और मैं ने उसकी विधियों को न त्यागा।
- 3और मैं उसके सम्मुख सिद्ध बना रहा, और अधर्म से अपने को बचाए रहा।
- 4यहोवा ने मुझे मेरे धर्म के अनुसार बदला दिया, और मेरे हाथों की उस शुद्धता के अनुसार जिसे वह देखता था॥
- 5दयावन्त के साथ तू अपने को दयावन्त दिखाता, और खरे पुरूष के साथ तू अपने को खरा दिखाता है।
- 6शुद्ध के साथ तू अपने को शुद्ध दिखाता, और टेढ़े के साथ तू तिर्छा बनता है।
- 7क्योंकि तू दीन लोगों को तो बचाता है, परन्तु घमण्ड भरी आंखों को नीची करता है।
- 8हां, तू ही मेरे दीपक को जलाता है, मेरा परमेश्वर यहोवा मेरे अन्धियारे को उजियाला कर देता है।
- 9क्योंकि तेरी सहायता से मैं सेना पर धावा करता हूं, और अपने परमेश्वर की सहायता से शहरपनाह को लांघ जाता हूं।
- 0ईश्वर का मार्ग सच्चाई, यहोवा का वचन ताया हुआ है, वह अपने सब शरणागतों की ढाल है॥
- 1यहोवा को छोड़ क्या कोई ईश्वर है? हमारे परमेश्वर को छोड़ क्या और कोई चट्टान है?
- 2यह वही ईश्वर है, जो सामर्थ से मेरा कटिबन्ध बान्धता है, और मेरे मार्ग को सिद्ध करता है।
- 3वही मेरे पैरों को हरिणियों के पैरों के समान बनाता है, और मुझे मेरे ऊंचे स्थानों पर खड़ा करता है।
- 4वह मेरे हाथों को युद्ध करना सिखाता है, इसलिये मेरी बाहों से पीतल का धनुष झुक जाता है।
- 5तू ने मुझ को अपने बचाव की ढाल दी है, तू अपने दाहिने हाथ से मुझे सम्भाले हुए है, और मेरी नम्रता ने महत्व दिया है।
- 6तू ने मेरे पैरों के लिये स्थान चौड़ा कर दिया, और मेरे पैर नहीं फिसले।
- 7मैं अपने शत्रुओं का पीछा करके उन्हें पकड़ लूंगा, और जब तक उनका अन्त न करूं तब तक न लौटूंगा।
- 8मैं उन्हें ऐसा बेधूंगा कि वे उठ न सकेंगे, वे मेरे पांवों के नीचे गिर पड़ेंगे।
- 9क्योंकि तू ने युद्ध के लिये मेरी कमर में शक्ति का पटुका बान्धा है, और मेरे विरोधियों को मेरे सम्मुख नीचा कर दिया।
- 0तू ने मेरे शत्रुओं की पीठ मेरी ओर फेर दी, ताकि मैं उन को काट डालूं जो मुझ से द्वेष रखते हैं।
- 1उन्होंने दोहाई तो दी परन्तु उन्हें कोई भी बचाने वाला न मिला, उन्होंने यहोवा की भी दोहाई दी, परन्तु उसने भी उन को उत्तर न दिया।
- 2तब मैं ने उन को कूट कूटकर पवन से उड़ाई हुई धूलि के समान कर दिया, मैं ने उन को गली कूचों की कीचड़ के समान निकाल फेंका॥
- 3तू ने मुझे प्रजा के झगड़ों से भी छुड़ाया, तू ने मुझे अन्यजातियों का प्रधान बनाया है, जिन लोगों को मैं जानता भी न था वे मेरे आधीन हो गये।
- 4मेरा नाम सुनते ही वे मेरी आज्ञा का पालन करेंगे, परदेशी मेरे वश में हो जाएंगे।
- 5परदेशी मुर्झा जाएंगे, और अपने किलों में से थरथराते हुए निकलेंगे॥
- 6यहोवा परमेश्वर जीवित है, मेरी चट्टान धन्य है, और मेरे मुक्तिदाता परमेश्वर की बड़ाई हो।
- 7धन्य है मेरा पलटा लेने वाला ईश्वर. जिसने देश देश के लोगों को मेरे वश में कर दिया है,
- 8और मुझे मेरे शत्रुओं से छुड़ाया है, तू मुझ को मेरे विरोधियों से ऊंचा करता, और उपद्रवी पुरूष से बचाता है॥
- 9इस कारण मैं जाति जाति के साम्हने तेरा धन्यवाद करूंगा, और तेरे नाम का भजन गाऊंगा।
- 0वह अपने ठहराए हुए राजा का बड़ा उद्धार करता है, वह अपने अभिषिक्त दाऊद पर और उसके वंश पर युगानुयुग करूणा करता रहेगा॥
भजनसंहिता 19 ↟↟
- आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है, और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है।
- दिन से दिन बातें करता है, और रात को रात ज्ञान सिखाती है।
- न तोकोई बोली है और न कोई भाषा जहां उनका शब्द सुनाई नहीं देता है।
- उनका स्वर सारी पृथ्वी पर गूंज गया है, और उनके वचन जगत की छोर तक पहुंच गए हैं। उन में उसने सूर्य के लिये एक मण्डप खड़ा किया है,
- जो दुल्हे के समान अपने महल से निकलता है। वह शूरवीर की नाईं अपनी दौड़ दौड़ने को हर्षित होता है।
- वह आकाश की एक छोर से निकलता है, और वह उसकी दूसरी छोर तक चक्कर मारता है, और उसकी गर्मी सब को पहुंचती है॥
- यहोवा की व्यवस्था खरी है, वह प्राण को बहाल कर देती है, यहोवा के नियम विश्वासयोग्य हैं, साधारण लोगों को बुद्धिमान बना देते हैं,
- यहोवा के उपदेश सिद्ध हैं, हृदय को आनन्दित कर देते हैं, यहोवा की आज्ञा निर्मल है, वह आंखों में ज्योति ले आती है,
- यहोवा का भय पवित्र है, वह अनन्तकाल तक स्थिर रहता है, यहोवा के नियम सत्य और पूरी रीति से धर्ममय हैं।
- 0वे तो सोने से और बहुत कुन्दन से भी बढ़कर मनोहर हैं, वे मधु से और टपकने वाले छत्ते से भी बढ़कर मधुर हैं।
- 1और उन्हीं से तेरा दास चिताया जाता है, उनके पालन करने से बड़ा ही प्रतिफल मिलता है।
- 2अपनी भूलचूक को कौन समझ सकता है? मेरे गुप्त पापों से तू मुझे पवित्र कर।
- 3तू अपने दास को ढिठाई के पापों से भी बचाए रख, वह मुझ पर प्रभुता करने न पाएं. तब मैं सिद्ध हो जाऊंगा, और बड़े अपराधों से बचा रहूंगा॥
- 4मेरे मुंह के वचन और मेरे हृदय का ध्यान तेरे सम्मुख ग्रहण योग्य हों, हे यहोवा परमेश्वर, मेरी चट्टान और मेरे उद्धार करने वाले.
भजनसंहिता 20 ↟↟
- संकट के दिन यहोवा तेरी सुन ले. याकूब के परमेश्वर का नाम तुझे ऊंचे स्थान पर नियुक्त करे.
- वह पवित्र स्थान से तेरी सहायता करे, और सिय्योन से तुझे सम्भाल ले.
- वह तेरे सब अन्नबलियों को स्मरण करे, और तेरे होमबलि को ग्रहण करे।
- वह तेरे मन की इच्छा को पूरी करे, और तेरी सारी युक्ति को सुफल करे.
- तब हम तेरे उद्धार के कारण ऊंचे स्वर से हर्षित होकर गाएंगे, और अपने परमेश्वर के नाम से झण्डे खड़े करेंगे। यहोवा तुझे मुंह मांगा वरदान दे्
- अब मैं जान गया कि यहोवा अपने अभिषिक्त का उद्धार करता है, वह अपने दाहिने हाथ के उद्धार करने वाले पराक्रम से अपने पवित्र स्वर्ग पर से सुनकर उसे उत्तर देगा।
- किसी को रथों को, और किसी को घोड़ों का भरोसा है, परन्तु हम तो अपने परमेश्वर यहोवा ही का नाम लेंगे।
- वे तो झुक गए और गिर पड़े परन्तु हम उठे और सीधे खड़े हैं॥
- हे यहोवा, बचा ले, जिस दिन हम पुकारें तो महाराजा हमें उत्तर दे॥
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