भजन संहिता 
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भजन संहिता 1
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<li class="ltr" id="">क्या ही धन्य है वह पुरूष जो दुष्टों की युक्ति पर नहीं चलता, और न पापियों के मार्ग में खड़ा होता, और न ठट्ठा करने वालों की मण्डली में बैठता है.</li>
<li class="ltr" id="">परन्तु वह तो यहोवा की व्यवस्था से प्रसन्न रहता, और उसकी व्यवस्था पर रात दिन ध्यान करता रहता है।</li>
<li class="ltr" id="">वह उस वृक्ष के समान है, जो बहती नालियों के किनारे लगाया गया है। और अपनी ऋतु में फलता है, और जिसके पत्ते कभी मुरझाते नहीं। इसलिये जो कुछ वह पुरूष करे वह सफल होता है॥</li>
<li class="ltr" id="">दुष्ट लोग ऐसे नहीं होते, वे उस भूसी के समान होते हैं, जो पवन से उड़ाई जाती है।</li>
<li class="ltr" id="">इस कारण दुष्ट लोग अदालत में स्थिर न रह सकेंगे, और न पापी धर्मियों की मण्डली में ठहरेंगे,</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि यहोवा धर्मियों का मार्ग जानता है, परन्तु दुष्टों का मार्ग नाश हो जाएगा॥</li>

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भजन संहिता 2
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<li class="ltr" id="">जाति जाति के लोग क्यों हुल्लड़ मचाते हैं, और देश देश के लोग व्यर्थ बातें क्यों सोच रहे हैं?</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा के और उसके अभिषिक्त के विरूद्ध पृथ्वी के राजा मिलकर, और हाकिम आपस में सम्मति करके कहते हैं, कि</li>
<li class="ltr" id="">आओ, हम उनके बन्धन तोड़ डालें, और उनकी रस्सियों अपने ऊपर से उतार फेंके॥</li>
<li class="ltr" id="">वह जो स्वर्ग में विराजमान है, हंसेगा, प्रभु उन को ठट्ठों में उड़ाएगा।</li>
<li class="ltr" id="">तब वह उन से क्रोध करके बातें करेगा, और क्रोध में कहकर उन्हें घबरा देगा, कि</li>
<li class="ltr" id="">मैं तो अपने ठहराए हुए राजा को अपने पवित्र पर्वत सिय्योन की राजगद्दी पर बैठा चुका हूं।</li>
<li class="ltr" id="">मैं उस वचन का प्रचार करूंगा: जो यहोवा ने मुझ से कहा, तू मेरा पुत्रा है, आज तू मुझ से उत्पन्न हुआ।</li>
<li class="ltr" id="">मुझ से मांग, और मैं जाति जाति के लोगों को तेरी सम्पत्ति होने के लिये, और दूर दूर के देशों को तेरी निज भूमि बनने के लिये दे दूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">तू उन्हें लोहे के डण्डे से टुकड़े टुकड़े करेगा। तू कुम्हार के बर्तन की नाईं उन्हें चकना चूर कर डालेगा॥</li>
<li class="ltr" id="">0इसलिये अब, हे राजाओं, बुद्धिमान बनो, हे पृथ्वी के न्यायियों, यह उपदेश ग्रहण करो।</li>
<li class="ltr" id="">1डरते हुए यहोवा की उपासना करो, और कांपते हुए मगन हो।</li>
<li class="ltr" id="">2पुत्र को चूमो ऐसा न हो कि वह क्रोध करे, और तुम मार्ग ही में नाश हो जाओ, क्योंकि क्षण भर में उसका क्रोध भड़कने को है॥ धन्य हैं वे जिनका भरोसा उस पर है॥</li>

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भजन संहिता 3
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<li class="ltr" id="">हे यहोवा मेरे सताने वाले कितने बढ़ गए हैं. वह जो मेरे विरूद्ध उठते हैं बहुत हैं।</li>
<li class="ltr" id="">बहुत से मेरे प्राण के विषय में कहते हैं, कि उसका बचाव परमेश्वर की ओर से नहीं हो सकता।</li>
<li class="ltr" id="">परन्तु हे यहोवा, तू तो मेरे चारों ओर मेरी ढ़ाल है, तू मेरी महिमा और मेरे मस्तिष्क का ऊंचा करने वाला है।</li>
<li class="ltr" id="">मैं ऊंचे शब्द से यहोवा को पुकारता हूं, और वह अपने पवित्र पर्वत पर से मुझे उत्तर देता है।</li>
<li class="ltr" id="">मैं लेटकर सो गया, फिर जाग उठा, क्योंकि यहोवा मुझे सम्हालता है।</li>
<li class="ltr" id="">मैं उन दस हजार मनुष्यों से नहीं डरता, जो मेरे विरूद्ध चारों ओर पांति बान्धे खड़े हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">उठ, हे यहोवा. हे मेरे परमेश्वर मुझे बचा ले. क्योंकि तू ने मेरे सब शत्रुओं के जबड़ों पर मारा है और तू ने दुष्टों के दांत तोड़ डाले हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">उद्धार यहोवा ही की ओर से होता है, हे यहोवा तेरी आशीष तेरी प्रजा पर हो॥</li>

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भजन संहिता 4
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<li class="ltr" id="">हे मेरे धर्ममय परमेश्वर, जब मैं पुकारूं तब तू मुझे उत्तर दे, जब मैं सकेती में पड़ा तब तू ने मुझे विस्तार दिया। मुझ पर अनुग्रह कर और मेरी प्रार्थना सुन ले॥</li>
<li class="ltr" id="">हे मनुष्यों के पुत्रों, कब तक मेरी महिमा के बदले अनादर होता रहेगा? तुम कब तक व्यर्थ बातों से प्रीति रखोगे और झूठी युक्ति की खोज में रहोगे?</li>
<li class="ltr" id="">यह जान रखो कि यहोवा ने भक्त को अपने लिये अलग कर रखा है, जब मैं यहोवा को पुकारूंगा तब वह सुन लेगा॥</li>
<li class="ltr" id="">कांपते रहो और पाप मत करो, अपने अपने बिछौने पर मन ही मन सोचो और चुपचाप रहो।</li>
<li class="ltr" id="">धर्म के बलिदान चढ़ाओ, और यहोवा पर भरोसा रखो॥</li>
<li class="ltr" id="">बहुत से हैं जो कहते हैं, कि कौन हम को कुछ भलाई दिखाएगा? हे यहोवा तू अपने मुख का प्रकाश हम पर चमका.</li>
<li class="ltr" id="">तू ने मेरे मन में उससे कहीं अधिक आनन्द भर दिया है, जो उन को अन्न और दाखमधु की बढ़ती से होता था।</li>
<li class="ltr" id="">मैं शान्ति से लेट जाऊंगा और सो जाऊंगा, क्योंकि, हे यहोवा, केवल तू ही मुझ को एकान्त में निश्चिन्त रहने देता है॥</li>

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भजन संहिता 5
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<li class="ltr" id="">े यहोवा, मेरे वचनों पर कान लगा, मेरे ध्यान करने की ओर मन लगा।</li>
<li class="ltr" id="">हे मेरे राजा, हे मेरे परमेश्वर, मेरी दोहाई पर ध्यान दे, क्योंकि मैं तुझी से प्रार्थना करता हूं।</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा, भोर को मेरी वाणी तुझे सुनाई देगी, मैं भोर को प्रार्थना करके तेरी बाट जोहूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि तू ऐसा ईश्वर नहीं जो दुष्टता से प्रसन्न हो, बुराई तेरे साथ नहीं रह सकती।</li>
<li class="ltr" id="">घमंडी तेरे सम्मुख खड़े होने न पांएगे, तुझे सब अनर्थकारियों से घृणा है।</li>
<li class="ltr" id="">तू उन को जो झूठ बोलते हैं नाश करेगा, यहोवा तो हत्यारे और छली मनुष्य से घृणा करता है।</li>
<li class="ltr" id="">परन्तु मैं तो तेरी अपार करूणा के कारण तेरे भवन में आऊंगा, मैं तेरा भय मानकर तेरे पवित्र मन्दिर की ओर दण्डवत् करूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा, मेरे शत्रुओं के कारण अपने धर्म के मार्ग में मेरी अगुवाई कर, मेरे आगे आगे अपने सीधे मार्ग को दिखा।</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि उनके मुंह में कोई सच्चाई नहीं, उनके मन में निरी दुष्टता है। उनका गला खुली हुई कब्र है, वे अपनी जीभ से चिकनी चुपड़ी बातें करते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">0हे परमेश्वर तू उन को दोषी ठहरा, वे अपनी ही युक्तियों से आप ही गिर जाएं, उन को उनके अपराधों की अधिकाई के कारण निकाल बाहर कर, क्योंकि उन्होंने तुझ से बलवा किया है॥</li>
<li class="ltr" id="">1परन्तु जितने तुझ पर भरोसा रखते हैं वे सब आनन्द करें, वे सर्वदा ऊंचे स्वर से गाते रहें, क्योंकि तू उनकी रक्षा करता है, और जो तेरे नाम के प्रेमी हैं तुझ में प्रफुल्लित हों।</li>
<li class="ltr" id="">2क्योंकि तू धर्मी को आशिष देगा, हे यहोवा, तू उसको अपने अनुग्रहरूपी ढाल से घेरे रहेगा॥</li>

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भजन संहिता 6
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<li class="ltr" id="">हे यहोवा, तू मुझे अपने क्रोध में न डांट, और न झुंझलाहट में मुझे ताड़ना दे।</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा, मुझ पर अनुग्रह कर, क्योंकि मैं कुम्हला गया हूं, हे यहोवा, मुझे चंगा कर, क्योंकि मेरी हडि्डयों में बेचैनी है।</li>
<li class="ltr" id="">मेरा प्राण भी बहुत खेदित है। और तू, हे यहोवा, कब तक?</li>
<li class="ltr" id="">लौट आ, हे यहोवा, और मेरे प्राण बचा अपनी करूणा के निमित्त मेरा उद्धार कर।</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि मृत्यु के बाद तेरा स्मरण नहीं होता, अधोलोक में कौन तेरा धन्यवाद करेगा?</li>
<li class="ltr" id="">मैं कराहते कराहते थक गया, मैं अपनी खाट आंसुओं से भिगोता हूं, प्रति रात मेरा बिछौना भीगता है।</li>
<li class="ltr" id="">मेरी आंखें शोक से बैठी जाती हैं, और मेरे सब सताने वालों के कारण वे धुन्धला गई हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">हे सब अनर्थकारियों मेरे पास से दूर हो, क्योंकि यहोवा ने मेरे रोने का शब्द सुन लिया है।</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा ने मेरा गिड़गिड़ाना सुना है, यहोवा मेरी प्रार्थना को ग्रहण भी करेगा।</li>
<li class="ltr" id="">0मेरे सब शत्रु लज्जित होंगे और बहुत घबराएंगे, वे लौट जाएंगे, और एकाएक लज्जित होंगे॥</li>

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भजन संहिता 7
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<li class="ltr" id="">हे मेरे परमेश्वर यहोवा, मेरा भरोसा तुझ पर है, सब पीछा करने वालों से मुझे बचा और छुटकारा दे,</li>
<li class="ltr" id="">ऐसा न हो कि वे मुझ को सिंह की नाईं फाड़कर टुकड़े टुकड़े कर डालें, और कोई मेरा छुड़ाने वाला न हो॥</li>
<li class="ltr" id="">हे मेरे परमेश्वर यहोवा, यदि मैं ने यह किया हो, यदि मेरे हाथों से कुटिल काम हुआ हो,</li>
<li class="ltr" id="">यदि मैं ने अपने मेल रखने वालों से भलाई के बदले बुराई की हो, (वरन मैं ने उसको जो अकारण मेरा बैरी था बचाया है)</li>
<li class="ltr" id="">तो शत्रु मेरे प्राण का पीछा करके मुझे आ पकड़े, वरन मेरे प्राण को भूमि पर रौंदे, और मेरी महिमा को मिट्टी में मिला दे॥</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा क्रोध करके उठ, मेरे क्रोध भरे सताने वाले के विरूद्ध तू खड़ा हो जा, मेरे लिये जाग. तू ने न्याय की आज्ञा तो दे दी है।</li>
<li class="ltr" id="">देश देश के लोगों की मण्डली तेरे चारों ओर हो, और तू उनके ऊपर से होकर ऊंचे स्थानों पर लौट जा।</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा समाज समाज का न्याय करता है, यहोवा मेरे धर्म और खराई के अनुसार मेरा न्याय चुका दे॥</li>
<li class="ltr" id="">भला हो कि दुष्टों की बुराई का अन्त हो जाए, परन्तु धर्म को तू स्थिर कर, क्योंकि धर्मी परमेश्वर मन और मर्म का ज्ञाता है।</li>
<li class="ltr" id="">0मेरी ढाल परमेश्वर के हाथ में है, वह सीधे मन वालों को बचाता है॥</li>
<li class="ltr" id="">1परमेश्वर धर्मी और न्यायी है, वरन ऐसा ईश्वर है जो प्रति दिन क्रोध करता है॥</li>
<li class="ltr" id="">2यदि मनुष्य न फिरे तो वह अपनी तलवार पर सान चढ़ाएगा, वह अपना धनुष चढ़ाकर तीर सन्धान चुका है।</li>
<li class="ltr" id="">3और उस मनुष्य के लिये उसने मृत्यु के हथियार तैयार कर लिए हैं: वह अपने तीरों को अग्निबाण बनाता है।</li>
<li class="ltr" id="">4देख दुष्ट को अनर्थ काम की पीड़ाएं हो रही हैं, उसको उत्पात का गर्भ है, और उससे झूठ उत्पन्न हुआ। उसने गड़हा खोदकर उसे गहिरा किया,</li>
<li class="ltr" id="">5और जो खाई उसने बनाई थी उस में वह आप ही गिरा।</li>
<li class="ltr" id="">6उसका उत्पात पलट कर उसी के सिर पर पड़ेगा, और उसका उपद्रव उसी के माथे पर पड़ेगा॥</li>
<li class="ltr" id="">7मैं यहोवा के धर्म के अनुसार उसका धन्यवाद करूंगा, और परमप्रधान यहोवा के नाम का भजन गाऊंगा॥</li>

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भजन संहिता 8
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<li class="ltr" id="">हे यहोवा हमारे प्रभु, तेरा नाम सारी पृथ्वी पर क्या ही प्रतापमय है. तू ने अपना वैभव स्वर्ग पर दिखाया है।</li>
<li class="ltr" id="">तू ने अपने बैरियों के कारण बच्चोंऔर दूध पिउवों के द्वारा सामर्थ्य की नेव डाली है, ताकि तू शत्रु और पलटा लेने वालों को रोक रखे।</li>
<li class="ltr" id="">जब मैं आकाश को, जो तेरे हाथों का कार्य है, और चंद्रमा और तरागण को जो तू ने नियुक्त किए हैं, देखता हूं,</li>
<li class="ltr" id="">तो फिर मनुष्य क्या है कि तू उसका स्मरण रखे, और आदमी क्या है कि तू उसकी सुधि ले?</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि तू ने उसको परमेश्वर से थोड़ा ही कम बनाया है, और महिमा और प्रताप का मुकुट उसके सिर पर रखा है।</li>
<li class="ltr" id="">तू ने उसे अपने हाथों के कार्यों पर प्रभुता दी है, तू ने उसके पांव तले सब कुछ कर दिया है।</li>
<li class="ltr" id="">सब भेड़- बकरी और गाय- बैल और जितने वनपशु हैं,</li>
<li class="ltr" id="">आकाश के पक्षी और समुद्र की मछलियां, और जितने जीव- जन्तु समुद्रों में चलते फिरते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा, हे हमारे प्रभु, तेरा नाम सारी पृथ्वी पर क्या ही प्रतापमय है॥</li>

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भजन संहिता 9
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<li class="ltr" id="">हे यहोवा परमेश्वर मैं अपने पूर्ण मन से तेरा धन्यवाद करूंगा, मैं तेरे सब आश्चर्य कर्मों का वर्णन करूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">मैं तेरे कारण आनन्दित और प्रफुल्लित होऊंगा, हे परमप्रधान, मैं तेरे नाम का भजन गाऊंगा॥</li>
<li class="ltr" id="">जब मेरे शत्रु पीछे हटते हैं, तो वे तेरे साम्हने से ठोकर खाकर नाश होते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि तू ने मेरा न्याय और मुकद्दमा चुकाया है, तू ने सिंहासन पर विराजमान होकर धर्म से न्याय किया।</li>
<li class="ltr" id="">तू ने अन्यजातियों को झिड़का और दुष्ट को नाश किया है, तू ने उनका नाम अनन्तकाल के लिये मिटा दिया है।</li>
<li class="ltr" id="">शत्रु जो है, वह मर गए, वे अनन्तकाल के लिये उजड़ गए हैं, और जिन नगरों को तू ने ढा दिया, उनका नाम वा निशान भी मिट गया है।</li>
<li class="ltr" id="">परन्तु यहोवा सदैव सिंहासन पर विराजमान है, उसने अपना सिंहासन न्याय के लिये सिद्ध किया है,</li>
<li class="ltr" id="">और वह आप ही जगत का न्याय धर्म से करेगा, वह देश देश के लोगों का मुकद्दमा खराई से निपटाएगा॥</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा पिसे हुओं के लिये ऊंचा गढ़ ठहरेगा, वह संकट के समय के लिये भी ऊंचा गढ़ ठहरेगा।</li>
<li class="ltr" id="">0और तेरे नाम के जानने वाले तुझ पर भरोसा रखेंगे, क्योंकि हे यहोवा तू ने अपने खोजियों को त्याग नहीं दिया॥</li>
<li class="ltr" id="">1यहोवा जो सिय्योन में विराजमान है, उसका भजन गाओ. जाति जाति के लोगों के बीच में उसके महाकर्मों का प्रचार करो.</li>
<li class="ltr" id="">2क्योंकि खून का पलटा लेनेवाला उन को स्मरण करता है, वह दीन लोगों की दोहाई को नहीं भूलता॥</li>
<li class="ltr" id="">3हे यहोवा, मुझ पर अनुग्रह कर। तू जो मुझे मृत्यु के फाटकों के पास से उठाता है, मेरे दु:ख को देख जो मेरे बैरी मुझे दे रहे हैं,</li>
<li class="ltr" id="">4ताकि मैं सिय्योन के फाटकों के पास तेरे सब गुणों का वर्णन करूं, और तेरे किए हुए उद्धार से मगन होऊं॥</li>
<li class="ltr" id="">5अन्य जाति वालों ने जो गड़हा खोदा था, उसी में वे आप गिर पड़े, जो जाल उन्होंने लगाया था, उस में उन्हीं का पांव फंस गया।</li>
<li class="ltr" id="">6यहोवा ने अपने को प्रगट किया, उसने न्याय किया है, दुष्ट अपने किए हुए कामों में फंस जाता है।</li>
<li class="ltr" id="">7दुष्ट अधोलोक में लौट जाएंगे, तथा वे सब जातियां भी जा परमेश्वर को भूल जाती है।</li>
<li class="ltr" id="">8क्योंकि दरिद्र लोग अनन्तकाल तक बिसरे हुए न रहेंगे, और न तो नम्र लोगों की आशा सर्वदा के लिये नाश होगी।</li>
<li class="ltr" id="">9उठ, हे परमेश्वर, मनुष्य प्रबल न होने पाए. जातियों का न्याय तेरे सम्मुख किया जाए।</li>
<li class="ltr" id="">0हे परमेश्वर, उन को भय दिला. जातियां अपने को मनुष्य मात्र ही जानें।</li>

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भजन संहिता 10
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<li class="ltr" id="">हे यहोवा तू क्यों दूर खड़ा रहता है? संकट के समय में क्यों छिपा रहता है?</li>
<li class="ltr" id="">दुष्टों के अहंकार के कारण दीन मनुष्य खदेड़े जाते हैं, वे अपनी ही निकाली हुई युक्तियों में फंस जाएं॥</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि दुष्ट अपनी अभिलाषा पर घमण्ड करता है, और लोभी परमेश्वर को त्याग देता है और उसका तिरस्कार करता है॥</li>
<li class="ltr" id="">दुष्ट अपने अभिमान के कारण कहता है कि वह लेखा नहीं लेने का, उसका पूरा विचार यही है कि कोई परमेश्वर है ही नहीं॥</li>
<li class="ltr" id="">वह अपने मार्ग पर दृढ़ता से बना रहता है, तेरे न्याय के विचार ऐसे ऊंचे पर होते हैं, कि उसकी दृष्टि वहां तक नहीं पहुंचती, जितने उसके विरोधी हैं उन पर वह फुंकारता है।</li>
<li class="ltr" id="">वह अपने मन में कहता है कि मैं कभी टलने का नहीं: मैं पीढ़ी से पीढ़ी तक दु:ख से बचा रहूंगा॥</li>
<li class="ltr" id="">उसका मुंह शाप और छल और अन्धेर से भरा है, उत्पात और अनर्थ की बातें उसके मुंह में हैं।</li>
<li class="ltr" id="">वह गांवों में घात लगाकर बैठा करता है, और गुप्त स्थानों में निर्दोष को घात करता है, उसकी आंखे लाचार की घात में लगी रहती है।</li>
<li class="ltr" id="">जैसा सिंह अपनी झाड़ी में वैसा ही वह भी छिपकर घात में बैठा करता है, वह दीन को पकड़ने के लिये घात लगाए रहता है, वह दीन को अपने जाल में फंसाकर घसीट लाता है, तब उसे पकड़ लेता है।</li>
<li class="ltr" id="">0वह झुक जाता है और वह दुबक कर बैठता है, और लाचार लोग उसके महाबली हाथों से पटके जाते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">1वह अपने मन में सोचता है, कि ईश्वर भूल गया, वह अपना मुंह छिपाता है, वह कभी नहीं देखेगा॥</li>
<li class="ltr" id="">2उठ, हे यहोवा, हे ईश्वर, अपना हाथ बढ़ा, और दीनों को न भूल।</li>
<li class="ltr" id="">3परमेश्वर को दुष्ट क्यों तुच्छ जानता है, और अपने मन में कहता है कि तू लेखा न लेगा?</li>
<li class="ltr" id="">4तू ने देख लिया है, क्योंकि तू उत्पात और कलपाने पर दुष्टि रखता है, ताकि उसका पलटा अपने हाथ में रखे, लाचार अपने को तेरे हाथ में सौंपता है, अनाथों का तू ही सहायक रहा है।</li>
<li class="ltr" id="">5 दुष्ट की भुजा को तोड़ डाल, और दुर्जन की दुष्टता को ढूँढ़ ढूँढ़ कर निकाल जब तक कि सब उसमें से दूर न हो जाए</li>
<li class="ltr" id="">6यहोवा अनन्तकाल के लिये महाराज है, उसके देश में से अन्यजाति लोग नाश हो गए हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">7हे यहोवा, तू ने नम्र लोगों की अभिलाषा सुनी है, तू उनका मन तैयार करेगा, तू कान लगाकर सुनेगा</li>
<li class="ltr" id="">8कि अनाथ और पिसे हुए का न्याय करे, ताकि मनुष्य जो मिट्टी से बना है फिर भय दिखाने न पाए॥</li>

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भजन संहिता 11
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<li class="ltr" id="">मेरा भरोसा परमेश्वर पर है, तुम क्योंकर मेरे प्राण से कह सकते हो कि पक्षी की नाईं अपने पहाड़ पर उड़ जा?</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि देखो, दुष्ट अपना धनुष चढ़ाते हैं, और अपना तीर धनुष की डोरी पर रखते हैं, कि सीधे मन वालों पर अन्धियारे में तीर चलाएं।</li>
<li class="ltr" id="">यदि नेवें ढ़ा दी जाएं तो धर्मी क्या कर सकता है?</li>
<li class="ltr" id="">परमेश्वर अपने पवित्र भवन में है, परमेश्वर का सिंहासन स्वर्ग में है, उसकी आंखें मनुष्य की सन्तान को नित देखती रहती हैं और उसकी पलकें उन को जांचती हैं।</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा धर्मी को परखता है, परन्तु वह उन से जो दुष्ट हैं और उपद्रव से प्रीति रखते हैं अपनी आत्मा में घृणा करता है।</li>
<li class="ltr" id="">वह दुष्टों पर फन्दे बरसाएगा, आग और गन्धक और प्रचण्ड लूह उनके कटोरों में बांट दी जाएंगी।</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि यहोवा धर्मी है, वह धर्म के ही कामों से प्रसन्न रहता है, धर्मी जन उसका दर्शन पाएंगे॥</li>

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भजन संहिता 12
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<li class="ltr" id="">.हे परमेश्वर बचा ले, क्योंकि एक भी भक्त नहीं रहा, मनुष्यों में से विश्वास योग्य लोग मर मिटे हैं।</li>
<li class="ltr" id="">उन में से प्रत्येक अपने पड़ोसी से झूठी बातें कहता है, वे चापलूसी के ओठों से दो रंगी बातें करते हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">प्रभु सब चापलूस ओठों को और उस जीभ को जिस से बड़ा बोल निकलता है काट डालेगा।</li>
<li class="ltr" id="">वे कहते हैं कि हम अपनी जीभ ही से जीतेंगे, हमारे ओंठ हमारे ही वश में हैं, हमारा प्रभु कौन है?</li>
<li class="ltr" id="">दीन लोगों के लुट जाने, और दरिद्रों के कराहने के कारण, परमेश्वर कहता है, अब मैं उठूंगा, जिस पर वे फुंकारते हैं उसे मैं चैन विश्राम दूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">परमेश्वर का वचन पवित्र है, उस चान्दि के समान जो भट्टी में मिट्टी पर ताई गई, और सात बार निर्मल की गई हो॥</li>
<li class="ltr" id="">तू ही हे परमेश्वर उनकी रक्षा करेगा, उन को इस काल के लोगों से सर्वदा के लिये बचाए रखेगा।</li>
<li class="ltr" id="">जब मनुष्यों में नीचपन का आदर होता है, तब दुष्ट लोग चारों ओर अकड़ते फिरते हैं॥</li>

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भजन संहिता 13
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<li class="ltr" id="">हे परमेश्वर तू कब तक? क्या सदैव मुझे भूला रहेगा? तू कब तक अपना मुखड़ा मुझ से छिपाए रहेगा?</li>
<li class="ltr" id="">मैं कब तक अपने मन ही मन में युक्तियां करता रहूं, और दिन भर अपने हृदय में दुखित रहा करूं, कब तक मेरा शत्रु मुझ पर प्रबल रहेगा?</li>
<li class="ltr" id="">हे मेरे परमेश्वर यहोवा मेरी ओर ध्यान दे और मुझे उत्तर दे, मेरी आंखों में ज्योति आने दे, नहीं तो मुझे मृत्यु की नींद आ जाएगी,</li>
<li class="ltr" id="">ऐसा न हो कि मेरा शत्रु कहे, कि मैं उस पर प्रबल हो गया, और ऐसा न हो कि जब मैं डगमगाने लगूं तो मेरे शत्रु मगन हों॥</li>
<li class="ltr" id="">परन्तु मैं ने तो तेरी करूणा पर भरोसा रखा है, मेरा हृदय तेरे उद्धार से मगन होगा।</li>
<li class="ltr" id="">मैं परमेश्वर के नाम का भजन गाऊंगा, क्योंकि उसने मेरी भलाई की है॥</li>

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भजन संहिता 14
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<li class="ltr" id="">मूर्ख ने अपने मन में कहा है, कोई परमेश्वर है ही नहीं। वे बिगड़ गए, उन्होंने घिनौने काम किए हैं, कोई सुकर्मी नहीं।</li>
<li class="ltr" id="">परमेश्वर ने स्वर्ग में से मनुष्यों पर दृष्टि की है, कि देखे कि कोई बुद्धिमान, कोई परमेश्वर का खोजी है या नहीं।</li>
<li class="ltr" id="">वे सब के सब भटक गए, वे सब भ्रष्ट हो गए, कोई सुकर्मी नहीं, एक भी नहीं।</li>
<li class="ltr" id="">क्या किसी अनर्थकारी को कुछ भी ज्ञान नहीं रहता, जो मेरे लोगों को ऐसे खा जाते हैं जैसे रोटी, और परमेश्वर का नाम नहीं लेते?</li>
<li class="ltr" id="">वहां उन पर भय छा गया, क्योंकि परमेश्वर धर्मी लोगों के बीच में निरन्तर रहता है।</li>
<li class="ltr" id="">तुम तो दीन की युक्ति की हंसी उड़ाते हो इसलिये कि यहोवा उसका शरणस्थान है।</li>
<li class="ltr" id="">भला हो कि इस्राएल का उद्धार सिय्योन से प्रगट होता. जब यहोवा अपनी प्रजा को दासत्व से लौटा ले आएगा, तब याकूब मगन और इस्राएल आनन्दित होगा॥</li>

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भजन संहिता 15
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<li class="ltr" id="">हे परमेश्वर तेरे तम्बू में कौन रहेगा? तेरे पवित्र पर्वत पर कौन बसने पाएगा?</li>
<li class="ltr" id="">वह जो खराई से चलता और धर्म के काम करता है, और हृदय से सच बोलता है,</li>
<li class="ltr" id="">जो अपनी जीभ से निन्दा नहीं करता, और न अपने मित्र की बुराई करता, और न अपने पड़ोसी की निन्दा सुनता है,</li>
<li class="ltr" id="">वह जिसकी दृष्टि में निकम्मा मनुष्य तुच्छ है, और जो यहोवा के डरवैयों का आदर करता है, जो शपथ खाकर बदलता नहीं चाहे हानि उठानी पड़े,</li>
<li class="ltr" id="">जो अपना रूपया ब्याज पर नहीं देता, और निर्दोष की हानि करने के लिये घूस नहीं लेता है। जो कोई ऐसी चाल चलता है वह कभी न डगमगाएगा॥</li>

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भजन संहिता 16
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<li class="ltr" id="">हे ईश्वर मेरी रक्षा कर, क्योंकि मैं तेरा ही शरणागत हूं।</li>
<li class="ltr" id="">मैं ने परमेश्वर से कहा है, कि तू ही मेरा प्रभु है, तेरे सिवाए मेरी भलाई कहीं नहीं।</li>
<li class="ltr" id="">पृथ्वी पर जो पवित्र लोग हैं, वे ही आदर के योग्य हैं, और उन्हीं से मैं प्रसन्न रहता हूं।</li>
<li class="ltr" id="">जो पराए देवता के पीछे भागते हैं उनका दु:ख बढ़ जाएगा, मैं उनके लोहू वाले तपावन नहीं तपाऊंगा और उनका नाम अपने ओठों से नहीं लूंगा॥</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा मेरा भाग और मेरे कटोरे का हिस्सा है, मेरे बाट को तू स्थिर रखता है।</li>
<li class="ltr" id="">मेरे लिये माप की डोरी मनभावने स्थान में पड़ी, और मेरा भाग मनभावना है॥</li>
<li class="ltr" id="">मैं यहोवा को धन्य कहता हूं, क्योंकि उसने मुझे सम्मत्ति दी है, वरन मेरा मन भी रात में मुझे शिक्षा देता है।</li>
<li class="ltr" id="">मैं ने यहोवा को निरन्तर अपने सम्मुख रखा है: इसलिये कि वह मेरे दाहिने हाथ रहता है मैं कभी न डगमगाऊंगा॥</li>
<li class="ltr" id="">इस कारण मेरा हृदय आनन्दित और मेरी आत्मा मगन हुई, मेरा शरीर भी चैन से रहेगा।</li>
<li class="ltr" id="">0क्योंकि तू मेरे प्राण को अधोलोक में न छोड़ेगा, न अपने पवित्र भक्त को सड़ने देगा॥</li>
<li class="ltr" id="">1तू मुझे जीवन का रास्ता दिखाएगा, तेरे निकट आनन्द की भरपूरी है, तेरे दाहिने हाथ में सुख सर्वदा बना रहता है॥</li>

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भजन संहिता 17
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<li class="ltr" id="">हे यहोवा परमेश्वर सच्चाई के वचन सुन, मेरी पुकार की ओर ध्यान दे। मेरी प्रार्थना की ओर जो निष्कपट मुंह से निकलती है कान लगा।</li>
<li class="ltr" id="">मेरे मुकद्दमे का निर्णय तेरे सम्मुख हो. तेरी आंखें न्याय पर लगी रहें.</li>
<li class="ltr" id="">तू ने मेरे हृदय को जांचा है, तू ने रात को मेरी देखभाल की, तू ने मुझे परखा परन्तु कुछ भी खोटापन नहीं पाया, मैं ने ठान लिया है कि मेरे मुंह से अपराध की बात नहीं निकलेगी।</li>
<li class="ltr" id="">मानवी कामों में मैं तेरे मुंह के वचन के द्वारा क्रूरों की सी चाल से अपने को बचाए रहा।</li>
<li class="ltr" id="">मेरे पांव तेरे पथों में स्थिर रहे, फिसले नहीं॥</li>
<li class="ltr" id="">हे ईश्वर, मैं ने तुझ से प्रार्थना की है, क्योंकि तू मुझे उत्तर देगा। अपना कान मेरी ओर लगाकर मेरी बिनती सुन ले।</li>
<li class="ltr" id="">तू जो अपने दाहिने हाथ के द्वारा अपने शरणगतों को उनके विरोधियों से बचाता है, अपनी अद्भुत करूणा दिखा।</li>
<li class="ltr" id="">अपने आंखो की पुतली की नाईं सुरक्षित रख, अपने पंखों के तले मुझे छिपा रख,</li>
<li class="ltr" id="">उन दुष्टों से जो मुझ पर अत्याचार करते हैं, मेरे प्राण के शत्रुओं से जो मुझे घेरे हुए हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">0उन्होंने अपने हृदयों को कठोर किया है, उनके मुंह से घमंड की बातें निकलती हैं।</li>
<li class="ltr" id="">1उन्होंने पग पग पर हम को घेरा है, वे हम को भूमि पर पटक देने के लिये घात लगाए हुए हैं।</li>
<li class="ltr" id="">2वह उस सिंह की नाईं है जो अपने शिकार की लालसा करता है, और जवान सिंह की नाईं घात लगाने के स्थानों में बैठा रहता है॥</li>
<li class="ltr" id="">3उठ, हे यहोवा उसका सामना कर और उसे पटक दे. अपनी तलवार के बल से मेरे प्राण को दुष्ट से बचा ले।</li>
<li class="ltr" id="">4अपना हाथ बढ़ाकर हे यहोवा, मुझे मनुष्यों से बचा, अर्थात संसारी मनुष्यों से जिनका भाग इसी जीवन में है, और जिनका पेट तू अपने भण्डार से भरता है। वे बाल-बच्चों से सन्तुष्ट हैं, और शेष सम्पति अपने बच्चों के लिये छोड़ जाते हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">5परन्तु मैं तो धर्मी होकर तेरे मुख का दर्शन करूंगा जब मैं जानूंगा तब तेरे स्वरूप से सन्तुष्ट हूंगा॥</li>

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भजन संहिता 18
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<li class="ltr" id="">हे परमेश्वर, हे मेरे बल, मैं तुझ से प्रेम करता हूं।</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा मेरी चट्टान, और मेरा गढ़ और मेरा छुड़ाने वाला है, मेरा ईश्वर, मेरी चट्टान है, जिसका मैं शरणागत हूं, वह मेरी ढ़ाल और मेरी मुक्ति का सींग, और मेरा ऊँचा गढ़ है।</li>
<li class="ltr" id="">मैं यहोवा को जो स्तुति के योग्य है पुकारूंगा, इस प्रकार मैं अपने शत्रुओं से बचाया जाऊंगा॥</li>
<li class="ltr" id="">मृत्यु की रस्सियों से मैं चारो ओर से घिर गया हूं, और अधर्म की बाढ़ ने मुझ को भयभीत कर दिया,</li>
<li class="ltr" id="">पाताल की रस्सियां मेरे चारो ओर थीं, और मृत्यु के फन्दे मुझ पर आए थे।</li>
<li class="ltr" id="">अपने संकट में मैं ने यहोवा परमेश्वर को पुकारा, मैं ने अपने परमेश्वर की दोहाई दी। और उसने अपने मन्दिर में से मेरी बातें सुनी। और मेरी दोहाई उसके पास पहुंचकर उसके कानों में पड़ी॥</li>
<li class="ltr" id="">तब पृथ्वी हिल गई, और कांप उठी और पहाड़ों की नेवे कंपित होकर हिल गई क्योंकि वह अति क्रोधित हुआ था।</li>
<li class="ltr" id="">उसके नथनों से धुआं निकला, और उसके मुंह से आग निकलकर भस्म करने लगी, जिस से कोएले दहक उठे।</li>
<li class="ltr" id="">और वह स्वर्ग को नीचे झुकाकर उतर आया, और उसके पांवों तले घोर अन्धकार था।</li>
<li class="ltr" id="">0और वह करूब पर सवार होकर उड़ा, वरन पवन के पंखों पर सवारी करके वेग से उड़ा।</li>
<li class="ltr" id="">1उसने अन्धियारे को अपने छिपने का स्थान और अपने चारों ओर मेघों के अन्धकार और आकाश की काली घटाओं का मण्डप बनाया।</li>
<li class="ltr" id="">2उसकी उपस्थिति की झलक से उसकी काली घटाएं फट गई, ओले और अंगारे।</li>
<li class="ltr" id="">3तब यहोवा आकाश में गरजा, और परमप्रधान ने अपनी वाणी सुनाई, ओले ओर अंगारे॥</li>
<li class="ltr" id="">4उसने अपने तीर चला चलाकर उन को तितर बितर किया, वरन बिजलियां गिरा गिराकर उन को परास्त किया।</li>
<li class="ltr" id="">5तब जल के नाले देख पड़े, और जगत की नेवें प्रगट हुई, यह तो यहोवा तेरी डांट से, और तेरे नथनों की सांस की झोंक से हुआ॥</li>
<li class="ltr" id="">6उसने ऊपर से हाथ बढ़ाकर मुझे थाम लिया, और गहिरे जल में से खींच लिया।</li>
<li class="ltr" id="">7उसने मेरे बलवन्त शत्रु से, और उन से जो मुझ से घृणा करते थे मुझे छुड़ाया, क्योंकि वे अधिक सामर्थी थे।</li>
<li class="ltr" id="">8मेरी विपत्ति के दिन वे मुझ पर आ पड़े। परन्तु यहोवा मेरा आश्रय था।</li>
<li class="ltr" id="">9और उसने मुझे निकाल कर चौड़े स्थान में पहुंचाया, उसने मुझ को छुड़ाया, क्योंकि वह मुझ से प्रसन्न था।</li>
<li class="ltr" id="">0यहोवा ने मुझ से मेरे धर्म के अनुसार व्यवहार किया, और मेरे हाथों की शुद्धता के अनुसार उसने मुझे बदला दिया।</li>
<li class="ltr" id="">1क्योंकि मैं यहोवा के मार्गों पर चलता रहा, और दुष्टता के कारण अपने परमेश्वर से दूर न हुआ।</li>
<li class="ltr" id="">2क्योंकि उसके सारे निर्णय मेरे सम्मुख बने रहे और मैं ने उसकी विधियों को न त्यागा।</li>
<li class="ltr" id="">3और मैं उसके सम्मुख सिद्ध बना रहा, और अधर्म से अपने को बचाए रहा।</li>
<li class="ltr" id="">4यहोवा ने मुझे मेरे धर्म के अनुसार बदला दिया, और मेरे हाथों की उस शुद्धता के अनुसार जिसे वह देखता था॥</li>
<li class="ltr" id="">5दयावन्त के साथ तू अपने को दयावन्त दिखाता, और खरे पुरूष के साथ तू अपने को खरा दिखाता है।</li>
<li class="ltr" id="">6शुद्ध के साथ तू अपने को शुद्ध दिखाता, और टेढ़े के साथ तू तिर्छा बनता है।</li>
<li class="ltr" id="">7क्योंकि तू दीन लोगों को तो बचाता है, परन्तु घमण्ड भरी आंखों को नीची करता है।</li>
<li class="ltr" id="">8हां, तू ही मेरे दीपक को जलाता है, मेरा परमेश्वर यहोवा मेरे अन्धियारे को उजियाला कर देता है।</li>
<li class="ltr" id="">9क्योंकि तेरी सहायता से मैं सेना पर धावा करता हूं, और अपने परमेश्वर की सहायता से शहरपनाह को लांघ जाता हूं।</li>
<li class="ltr" id="">0ईश्वर का मार्ग सच्चाई, यहोवा का वचन ताया हुआ है, वह अपने सब शरणागतों की ढाल है॥</li>
<li class="ltr" id="">1यहोवा को छोड़ क्या कोई ईश्वर है? हमारे परमेश्वर को छोड़ क्या और कोई चट्टान है?</li>
<li class="ltr" id="">2यह वही ईश्वर है, जो सामर्थ से मेरा कटिबन्ध बान्धता है, और मेरे मार्ग को सिद्ध करता है।</li>
<li class="ltr" id="">3वही मेरे पैरों को हरिणियों के पैरों के समान बनाता है, और मुझे मेरे ऊंचे स्थानों पर खड़ा करता है।</li>
<li class="ltr" id="">4वह मेरे हाथों को युद्ध करना सिखाता है, इसलिये मेरी बाहों से पीतल का धनुष झुक जाता है।</li>
<li class="ltr" id="">5तू ने मुझ को अपने बचाव की ढाल दी है, तू अपने दाहिने हाथ से मुझे सम्भाले हुए है, और मेरी नम्रता ने महत्व दिया है।</li>
<li class="ltr" id="">6तू ने मेरे पैरों के लिये स्थान चौड़ा कर दिया, और मेरे पैर नहीं फिसले।</li>
<li class="ltr" id="">7मैं अपने शत्रुओं का पीछा करके उन्हें पकड़ लूंगा, और जब तक उनका अन्त न करूं तब तक न लौटूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">8मैं उन्हें ऐसा बेधूंगा कि वे उठ न सकेंगे, वे मेरे पांवों के नीचे गिर पड़ेंगे।</li>
<li class="ltr" id="">9क्योंकि तू ने युद्ध के लिये मेरी कमर में शक्ति का पटुका बान्धा है, और मेरे विरोधियों को मेरे सम्मुख नीचा कर दिया।</li>
<li class="ltr" id="">0तू ने मेरे शत्रुओं की पीठ मेरी ओर फेर दी, ताकि मैं उन को काट डालूं जो मुझ से द्वेष रखते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">1उन्होंने दोहाई तो दी परन्तु उन्हें कोई भी बचाने वाला न मिला, उन्होंने यहोवा की भी दोहाई दी, परन्तु उसने भी उन को उत्तर न दिया।</li>
<li class="ltr" id="">2तब मैं ने उन को कूट कूटकर पवन से उड़ाई हुई धूलि के समान कर दिया, मैं ने उन को गली कूचों की कीचड़ के समान निकाल फेंका॥</li>
<li class="ltr" id="">3तू ने मुझे प्रजा के झगड़ों से भी छुड़ाया, तू ने मुझे अन्यजातियों का प्रधान बनाया है, जिन लोगों को मैं जानता भी न था वे मेरे आधीन हो गये।</li>
<li class="ltr" id="">4मेरा नाम सुनते ही वे मेरी आज्ञा का पालन करेंगे, परदेशी मेरे वश में हो जाएंगे।</li>
<li class="ltr" id="">5परदेशी मुर्झा जाएंगे, और अपने किलों में से थरथराते हुए निकलेंगे॥</li>
<li class="ltr" id="">6यहोवा परमेश्वर जीवित है, मेरी चट्टान धन्य है, और मेरे मुक्तिदाता परमेश्वर की बड़ाई हो।</li>
<li class="ltr" id="">7धन्य है मेरा पलटा लेने वाला ईश्वर. जिसने देश देश के लोगों को मेरे वश में कर दिया है,</li>
<li class="ltr" id="">8और मुझे मेरे शत्रुओं से छुड़ाया है, तू मुझ को मेरे विरोधियों से ऊंचा करता, और उपद्रवी पुरूष से बचाता है॥</li>
<li class="ltr" id="">9इस कारण मैं जाति जाति के साम्हने तेरा धन्यवाद करूंगा, और तेरे नाम का भजन गाऊंगा।</li>
<li class="ltr" id="">0वह अपने ठहराए हुए राजा का बड़ा उद्धार करता है, वह अपने अभिषिक्त दाऊद पर और उसके वंश पर युगानुयुग करूणा करता रहेगा॥</li>

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भजन संहिता 19
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<li class="ltr" id="">आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है, और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है।</li>
<li class="ltr" id="">दिन से दिन बातें करता है, और रात को रात ज्ञान सिखाती है।</li>
<li class="ltr" id="">न तोकोई बोली है और न कोई भाषा जहां उनका शब्द सुनाई नहीं देता है।</li>
<li class="ltr" id="">उनका स्वर सारी पृथ्वी पर गूंज गया है, और उनके वचन जगत की छोर तक पहुंच गए हैं। उन में उसने सूर्य के लिये एक मण्डप खड़ा किया है,</li>
<li class="ltr" id="">जो दुल्हे के समान अपने महल से निकलता है। वह शूरवीर की नाईं अपनी दौड़ दौड़ने को हर्षित होता है।</li>
<li class="ltr" id="">वह आकाश की एक छोर से निकलता है, और वह उसकी दूसरी छोर तक चक्कर मारता है, और उसकी गर्मी सब को पहुंचती है॥</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा की व्यवस्था खरी है, वह प्राण को बहाल कर देती है, यहोवा के नियम विश्वासयोग्य हैं, साधारण लोगों को बुद्धिमान बना देते हैं,</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा के उपदेश सिद्ध हैं, हृदय को आनन्दित कर देते हैं, यहोवा की आज्ञा निर्मल है, वह आंखों में ज्योति ले आती है,</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा का भय पवित्र है, वह अनन्तकाल तक स्थिर रहता है, यहोवा के नियम सत्य और पूरी रीति से धर्ममय हैं।</li>
<li class="ltr" id="">0वे तो सोने से और बहुत कुन्दन से भी बढ़कर मनोहर हैं, वे मधु से और टपकने वाले छत्ते से भी बढ़कर मधुर हैं।</li>
<li class="ltr" id="">1और उन्हीं से तेरा दास चिताया जाता है, उनके पालन करने से बड़ा ही प्रतिफल मिलता है।</li>
<li class="ltr" id="">2अपनी भूलचूक को कौन समझ सकता है? मेरे गुप्त पापों से तू मुझे पवित्र कर।</li>
<li class="ltr" id="">3तू अपने दास को ढिठाई के पापों से भी बचाए रख, वह मुझ पर प्रभुता करने न पाएं. तब मैं सिद्ध हो जाऊंगा, और बड़े अपराधों से बचा रहूंगा॥</li>
<li class="ltr" id="">4मेरे मुंह के वचन और मेरे हृदय का ध्यान तेरे सम्मुख ग्रहण योग्य हों, हे यहोवा परमेश्वर, मेरी चट्टान और मेरे उद्धार करने वाले.</li>

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भजन संहिता 20
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<li class="ltr" id="">संकट के दिन यहोवा तेरी सुन ले. याकूब के परमेश्वर का नाम तुझे ऊंचे स्थान पर नियुक्त करे.</li>
<li class="ltr" id="">वह पवित्र स्थान से तेरी सहायता करे, और सिय्योन से तुझे सम्भाल ले.</li>
<li class="ltr" id="">वह तेरे सब अन्नबलियों को स्मरण करे, और तेरे होमबलि को ग्रहण करे।</li>
<li class="ltr" id="">वह तेरे मन की इच्छा को पूरी करे, और तेरी सारी युक्ति को सुफल करे.</li>
<li class="ltr" id="">तब हम तेरे उद्धार के कारण ऊंचे स्वर से हर्षित होकर गाएंगे, और अपने परमेश्वर के नाम से झण्डे खड़े करेंगे। यहोवा तुझे मुंह मांगा वरदान दे्</li>
<li class="ltr" id="">अब मैं जान गया कि यहोवा अपने अभिषिक्त का उद्धार करता है, वह अपने दाहिने हाथ के उद्धार करने वाले पराक्रम से अपने पवित्र स्वर्ग पर से सुनकर उसे उत्तर देगा।</li>
<li class="ltr" id="">किसी को रथों को, और किसी को घोड़ों का भरोसा है, परन्तु हम तो अपने परमेश्वर यहोवा ही का नाम लेंगे।</li>
<li class="ltr" id="">वे तो झुक गए और गिर पड़े परन्तु हम उठे और सीधे खड़े हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा, बचा ले, जिस दिन हम पुकारें तो महाराजा हमें उत्तर दे॥</li>

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भजन संहिता 21
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<li class="ltr" id="">हे यहोवा तेरी सामर्थ्य से राजा आनन्दित होगा, और तेरे किए हुए उद्धार से वह अति मगन होगा।</li>
<li class="ltr" id="">तू ने उसके मनोरथ को पूरा किया है, और उसके मुंह की बिनती को तू ने अस्वीकार नहीं किया।</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि तू उत्तम आशीषें देता हुआ उससे मिलता है और तू उसके सिर पर कुन्दन का मुकुट पहिनाता है।</li>
<li class="ltr" id="">उसने तुझ से जीवन मांगा, ओर तू ने जीवन दान दिया, तू ने उसको युगानुयुग का जीवन दिया है।</li>
<li class="ltr" id="">तेरे उद्धार के कारण उसकी महिमा अधिक है, तू उसको वैभव और ऐश्वर्य से आभूषित कर देता है।</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि तू ने उसको सर्वदा के लिये आशीषित किया है, तू अपने सम्मुख उसको हर्ष और आनन्द से भर देता है।</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि राजा का भरोसा यहोवा के ऊपर है, और परमप्रधान की करूणा से वह कभी नहीं टलने का॥</li>
<li class="ltr" id="">तेरा हाथ तेरे सब शत्रुओं को ढूंढ़ निकालेगा, तेरा दहिना हाथ तेरे सब बैरियों का पता लगा लेगा।</li>
<li class="ltr" id="">तू अपने मुख के सम्मुख उन्हें जलते हुए भट्टे की नाईं जलाएगा। यहोवा अपने क्रोध में उन्हें निगल जाएगा, और आग उन को भस्म कर डालेगी।</li>
<li class="ltr" id="">0तू उनके फलों को पृथ्वी पर से, और उनके वंश को मनुष्यों में से नष्ट करेगा।</li>
<li class="ltr" id="">1क्योंकि उन्होंने तेरी हानि ठानी है, उन्होंने ऐसी युक्ति निकाली है जिसे वे पूरी न कर सकेंगे।</li>
<li class="ltr" id="">2क्योंकि तू अपना धुनष उनके विरूद्ध चढ़ाएगा, और वे पीठ दिखाकर भागेंगे॥</li>
<li class="ltr" id="">3हे यहोवा, अपनी सामर्थ्य में महान हो. और हम गा गाकर तेरे पराक्रम का भजन सुनाएंगे॥</li>

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भजन संहिता 22
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<li class="ltr" id=""> हे मेरे परमेश्वर, हे मेरे परमेश्वर, तू ने मुझे क्यों छोड़ दिया? तू मेरी पुकार से और मेरी सहायता करने से क्यों दूर रहता है? मेरा उद्धार कहां है?</li>
<li class="ltr" id="">हे मेरे परमेश्वर, मैं दिन को पुकारता हूं परन्तु तू उत्तर नहीं देता, और रात को भी मैं चुप नहीं रहता।</li>
<li class="ltr" id="">परन्तु हे तू जो इस्राएल की स्तुति के सिहांसन पर विराजमान है, तू तो पवित्र है।</li>
<li class="ltr" id="">हमारे पुरखा तुझी पर भरोसा रखते थे, वे भरोसा रखते थे, और तू उन्हें छुड़ाता था।</li>
<li class="ltr" id="">उन्होंने तेरी दोहाई दी और तू ने उन को छुड़ाया वे तुझी पर भरोसा रखते थे और कभी लज्जित न हुए॥</li>
<li class="ltr" id="">परन्तु मैं तो कीड़ा हूं, मनुष्य नहीं, मनुष्यों में मेरी नामधराई है, और लोगों में मेरा अपमान होता है।</li>
<li class="ltr" id="">वह सब जो मुझे देखते हैं मेरा ठट्ठा करते हैं, और ओंठ बिचकाते और यह कहते हुए सिर हिलाते हैं,</li>
<li class="ltr" id="">कि अपने को यहोवा के वश में कर दे वही उसको छुड़ाए, वह उसको उबारे क्योंकि वह उससे प्रसन्न है।</li>
<li class="ltr" id="">परन्तु तू ही ने मुझे गर्भ से निकाला, जब मैं दूधपिउवा बच्च था, तब ही से तू ने मुझे भरोसा रखना सिखलाया।</li>
<li class="ltr" id="">0मैं जन्मते ही तुझी पर छोड़ दिया गया, माता के गर्भ ही से तू मेरा ईश्वर है।</li>
<li class="ltr" id="">1मुझ से दूर न हो क्योंकि संकट निकट है, और कोई सहायक नहीं।</li>
<li class="ltr" id="">2बहुत से सांढ़ों ने मुझे घेर लिया है, बाशान के बलवन्त सांढ़ मेरे चारों ओर मुझे घेरे हुए हैं।</li>
<li class="ltr" id="">3वह फाड़ने और गरजने वाले सिंह की नाईं मुझ पर अपना मुंह पसारे हुए है॥</li>
<li class="ltr" id="">4मैं जल की नाईं बह गया, और मेरी सब हडि्डयों के जोड़ उखड़ गए: मेरा हृदय मोम हो गया, वह मेरी देह के भीतर पिघल गया।</li>
<li class="ltr" id="">5मेरा बल टूट गया, मैं ठीकरा हो गया, और मेरी जीभ मेरे तालू से चिपक गई, और तू मुझे मारकर मिट्टी में मिला देता है।</li>
<li class="ltr" id="">6क्योंकि कुत्तों ने मुझे घेर लिया है, कुकर्मियों की मण्डली मेरी चारों ओर मुझे घेरे हुए है, वह मेरे हाथ और मेरे पैर छेदते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">7मैं अपनी सब हडि्डयां गिन सकता हूं, वे मुझे देखते और निहारते हैं,</li>
<li class="ltr" id="">8वे मेरे वस्त्र आपस में बांटते हैं, और मेरे पहिरावे पर चिट्ठी डालते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">9परन्तु हे यहोवा तू दूर न रह. हे मेरे सहायक, मेरी सहायता के लिये फुर्ती कर.</li>
<li class="ltr" id="">0मेरे प्राण को तलवार से बचा, मेरे प्राण को कुत्ते के पंजे से बचा ले.</li>
<li class="ltr" id="">1मुझे सिंह के मुंह से बचा, हां, जंगली सांढ़ों के सींगो में से तू ने मुझे बचा लिया है॥</li>
<li class="ltr" id="">2मैं अपने भाइयों के साम्हने तेरे नाम का प्रचार करूंगा, सभा के बीच में तेरी प्रशंसा करूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">3हे यहोवा के डरवैयों उसकी स्तुति करो. हे याकूब के वंश, तुम सब उसकी महिमा करो. हे इस्त्राएल के वंश, तुम उसका भय मानो.</li>
<li class="ltr" id="">4क्योंकि उसने दु:खी को तुच्छ नहीं जाना और न उससे घृणा करता है, ओर न उससे अपना मुख छिपाता है, पर जब उसने उसकी दोहाई दी, तब उसकी सुन ली॥</li>
<li class="ltr" id="">5बड़ी सभा में मेरा स्तुति करना तेरी ही ओर से होता है, मैं अपने प्रण को उससे भय रखने वालों के साम्हने पूरा करूंगा</li>
<li class="ltr" id="">6नम्र लोग भोजन करके तृप्त होंगे, जो यहोवा के खोजी हैं, वे उसकी स्तुति करेंगे। तुम्हारे प्राण सर्वदा जीवित रहें.</li>
<li class="ltr" id="">7पृथ्वी के सब दूर दूर देशों के लोग उसको स्मरण करेंगे और उसकी ओर फिरेंगे, और जाति जाति के सब कुल तेरे साम्हने दण्डवत करेंगे।</li>
<li class="ltr" id="">8क्योंकि राज्य यहोवा की का है, और सब जातियों पर वही प्रभुता करता है॥</li>
<li class="ltr" id="">9पृथ्वी के सब हृष्टपुष्ट लोग भोजन करके दण्डवत करेंगे, वह सब जितने मिट्टी में मिल जाते हैं और अपना अपना प्राण नहीं बचा सकते, वे सब उसी के साम्हने घुटने टेकेंगे।</li>
<li class="ltr" id="">0एक वंश उसकी सेवा करेगा, दूसरा पीढ़ी से प्रभु का वर्णन किया जाएगा।</li>
<li class="ltr" id="">1वह आएंगे और उसके धर्म के कामों को एक वंश पर जो उत्पन्न होगा यह कहकर प्रगट करेंगे कि उसने ऐसे ऐसे अद्भुत काम किए॥</li>

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भजन संहिता 23
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<li class="ltr" id="">यहोवा मेरा चरवाहा है, मुझे कुछ घटी न होगी।</li>
<li class="ltr" id="">वह मुझे हरी हरी चराइयों में बैठाता है, वह मुझे सुखदाई जल के झरने के पास ले चलता है,</li>
<li class="ltr" id="">वह मेरे जी में जी ले आता है। धर्म के मार्गो में वह अपने नाम के निमित्त मेरी अगुवाई करता है।</li>
<li class="ltr" id="">चाहे मैं घोर अन्धकार से भरी हुई तराई में होकर चलूं, तौभी हानि से न डरूंगा, क्योंकि तू मेरे साथ रहता है, तेरे सोंटे और तेरी लाठी से मुझे शान्ति मिलती है॥</li>
<li class="ltr" id="">तू मेरे सताने वालों के साम्हने मेरे लिये मेज बिछाता है, तू ने मेरे सिर पर तेल मला है, मेरा कटोरा उमण्ड रहा है।</li>
<li class="ltr" id="">निश्चय भलाई और करूणा जीवन भर मेरे साथ साथ बनी रहेंगी, और मैं यहोवा के धाम में सर्वदा वास करूंगा॥</li>

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भजन संहिता 24
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<li class="ltr" id="">पृथ्वी और जो कुछ उस में है यहोवा ही का है, जगत और उस में निवास करने वाले भी।</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि उसी ने उसकी नींव समुद्रों के ऊपर दृढ़ करके रखी, और महानदों के ऊपर स्थिर किया है॥</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा के पर्वत पर कौन चढ़ सकता है? और उसके पवित्र स्थान में कौन खड़ा हो सकता है?</li>
<li class="ltr" id="">जिसके काम निर्दोष और हृदय शुद्ध है, जिसने अपने मन को व्यर्थ बात की ओर नहीं लगाया, और न कपट से शपथ खाई है।</li>
<li class="ltr" id="">वह यहोवा की ओर से आशीष पाएगा, और अपने उद्धार करने वाले परमेश्वर की ओर से धर्मी ठहरेगा।</li>
<li class="ltr" id="">ऐसे ही लोग उसके खोजी हैं, वे तेरे दर्शन के खोजी याकूब वंशी हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">हे फाटकों, अपने सिर ऊंचे करो। हे सनातन के द्वारों, ऊंचे हो जाओ। क्योंकि प्रतापी राजा प्रवेश करेगा।</li>
<li class="ltr" id="">वह प्रतापी राजा कौन है? परमेश्वर जो सामर्थी और पराक्रमी है, परमेश्वर जो युद्ध में पराक्रमी है.</li>
<li class="ltr" id="">हे फाटकों, अपने सिर ऊंचे करो हे सनातन के द्वारों तुम भी खुल जाओ. क्योंकि प्रतापी राजा प्रवेश करेगा.</li>
<li class="ltr" id="">0वह प्रतापी राजा कौन है? सेनाओं का यहोवा, वही प्रतापी राजा है॥</li>

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भजन संहिता 25
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<li class="ltr" id="">हे यहोवा मैं अपने मन को तेरी ओर उठाता हूं।</li>
<li class="ltr" id="">हे मेरे परमेश्वर, मैं ने तुझी पर भरोसा रखा है, मुझे लज्जित होने न दे, मेरे शत्रु मुझ पर जयजयकार करने न पाएं।</li>
<li class="ltr" id="">वरन जितने तेरी बाट जोहते हैं उन में से कोई लज्जित न होगा, परन्तु जो अकारण विश्वासघाती हैं वे ही लज्जित होंगे॥</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा अपने मार्ग मुझ को दिखला, अपना पथ मुझे बता दे।</li>
<li class="ltr" id="">मुझे अपने सत्य पर चला और शिक्षा दे, क्योंकि तू मेरा उद्धार करने वाला परमेश्वर है, मैं दिन भर तेरी ही बाट जोहता रहता हूं।</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा अपनी दया और करूणा के कामों को स्मरण कर, क्योंकि वे तो अनन्तकाल से होते आए हैं।</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा अपनी भलाई के कारण मेरी जवानी के पापों और मेरे अपराधों को स्मरण न कर, अपनी करूणा ही के अनुसार तू मुझे स्मरण कर॥</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा भला और सीधा है, इसलिये वह पापियों को अपना मार्ग दिखलाएगा।</li>
<li class="ltr" id="">वह नम्र लोगों को न्याय की शिक्षा देगा, हां वह नम्र लोगों को अपना मार्ग दिखलाएगा।</li>
<li class="ltr" id="">0जो यहोवा की वाचा और चितौनियों को मानते हैं, उनके लिये उसके सब मार्ग करूणा और सच्चाई हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">1हे यहोवा अपने नाम के निमित्त मेरे अधर्म को जो बहुत हैं क्षमा कर॥</li>
<li class="ltr" id="">2वह कौन है जो यहोवा का भय मानता है? यहोवा उसको उसी मार्ग पर जिस से वह प्रसन्न होता है चलाएगा।</li>
<li class="ltr" id="">3वह कुशल से टिका रहेगा, और उसका वंश पृथ्वी पर अधिकारी होगा।</li>
<li class="ltr" id="">4यहोवा के भेद को वही जानते हैं जो उससे डरते हैं, और वह अपनी वाचा उन पर प्रगट करेगा।</li>
<li class="ltr" id="">5मेरी आंखे सदैव यहोवा पर टकटकी लगाए रहती हैं, क्योंकि वही मेरे पांवों को जाल में से छुड़ाएगा॥</li>
<li class="ltr" id="">6हे यहोवा मेरी ओर फिरकर मुझ पर अनुग्रह कर, क्योंकि मैं अकेला और दीन हूं।</li>
<li class="ltr" id="">7मेरे हृदय का क्लेश बढ़ गया है, तू मुझ को मेरे दु:खों से छुड़ा ले।</li>
<li class="ltr" id="">8तू मेरे दु:ख और कष्ट पर दृष्टि कर, और मेरे सब पापों को क्षमा कर॥</li>
<li class="ltr" id="">9मेरे शत्रुओं को देख कि वे कैसे बढ़ गए हैं, और मुझ से बड़ा बैर रखते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">0मेरे प्राण की रक्षा कर, और मुझे छुड़ा, मुझे लज्जित न होने दे, क्योंकि मैं तेरा शरणागत हूं।</li>
<li class="ltr" id="">1खराई और सीधाई मुझे सुरक्षित रखें, क्योंकि मुझे तेरे ही आशा है॥</li>
<li class="ltr" id="">2हे परमेश्वर इस्राएल को उसके सारे संकटों से छुड़ा ले॥</li>

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भजन संहिता 26
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<li class="ltr" id="">हे यहोवा, मेरा न्याय कर, क्योंकि मैं खराई से चलता रहा हूं, और मेरा भरोसा यहोवा पर अटल बना है।</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा, मुझ को जांच और परख, मेरे मन और हृदय को परख।</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि तेरी करूणा तो मेरी आंखों के साम्हने है, और मैं तेरे सत्य मार्ग पर चलता रहा हूं॥</li>
<li class="ltr" id="">मैं निकम्मी चाल चलने वालों के संग नहीं बैठा, और न मैं कपटियों के साथ कहीं जाऊंगा,</li>
<li class="ltr" id="">मैं कुकर्मियों की संगति से घृणा रखता हूं, और दुष्टों के संग न बैठूंगा॥</li>
<li class="ltr" id="">मैं अपने हाथों को निर्दोषता के जल से धोऊंगा, तब हे यहोवा मैं तेरी वेदी की प्रदक्षिणा करूंगा,</li>
<li class="ltr" id="">ताकि तेरा धन्यवाद ऊंचे शब्द से करूं,</li>
<li class="ltr" id="">और तेरे सब आश्चर्यकर्मों का वर्णन करूं॥ हे यहोवा, मैं तेरे धाम से तेरी महिमा के निवास स्थान से प्रीति रखता हूं।</li>
<li class="ltr" id="">मेरे प्राण को पापियों के साथ, और मेरे जीवन को हत्यारों के साथ न मिला।</li>
<li class="ltr" id="">0वे तो ओछापन करने में लगे रहते हैं, और उनका दाहिना हाथ घूस से भरा रहता है॥</li>
<li class="ltr" id="">1परन्तु मैं तो खराई से चलता रहूंगा। तू मुझे छुड़ा ले, और मुझ पर अनुग्रह कर।</li>
<li class="ltr" id="">2मेरे पांव चौरस स्थान में स्थिर है, सभाओं में मैं यहोवा को धन्य कहा करूंगा॥</li>

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भजन संहिता 27
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<li class="ltr" id="">यहोवा परमेश्वर मेरी ज्योति और मेरा उद्धार है, मैं किस से डरूं? यहोवा मेरे जीवन का दृढ़ गढ़ ठहरा है, मैं किस का भय खाऊं?</li>
<li class="ltr" id="">जब कुकर्मियों ने जो मुझे सताते और मुझी से बैर रखते थे, मुझे खा डालने के लिये मुझ पर चढ़ाई की, तब वे ही ठोकर खाकर गिर पड़े॥</li>
<li class="ltr" id="">चाहे सेना भी मेरे विरुद्ध छावनी डाले, तौभी मैं न डरूंगा, चाहे मेरे विरुद्ध लड़ाई ठन जाए, उस दशा में भी मैं हियाव बान्धे निशचिंत रहूंगा॥</li>
<li class="ltr" id="">एक वर मैं ने यहोवा से मांगा है, उसी के यत्न में लगा रहूंगा, कि मैं जीवन भर यहोवा के भवन में रहने पाऊं, जिस से यहोवा की मनोहरता पर दृष्टि लगाए रहूं, और उसके मन्दिर में ध्यान किया करूं॥</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि वह तो मुझे विपत्ति के दिन में अपने मण्डप में छिपा रखेगा, अपने तम्बू के गुप्त स्थान में वह मुझे छिपा लेगा, और चट्टान पर चढ़ाएगा।</li>
<li class="ltr" id="">अब मेरा सिर मेरे चारों ओर के शत्रुओं से ऊंचा होगा, और मैं यहोवा के तम्बू में जयजयकार के साथ बलिदान चढ़ाऊंगा, और उसका भजन गाऊंगा॥</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा, मेरा शब्द सुन, मैं पुकारता हूं, तू मुझ पर अनुग्रह कर और मुझे उत्तर दे।</li>
<li class="ltr" id="">तू ने कहा है, कि मेरे दर्शन के खोजी हो। इसलिये मेरा मन तुझ से कहता है, कि हे यहोवा, तेरे दर्शन का मैं खोजी रहूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">अपना मुख मुझ से न छिपा॥ अपने दास को क्रोध करके न हटा, तू मेरा सहायक बना है। हे मेरे उद्धार करने वाले परमेश्वर मुझे त्याग न दे, और मुझे छोड़ न दे.</li>
<li class="ltr" id="">0मेरे माता पिता ने तो मुझे छोड़ दिया है, परन्तु यहोवा मुझे सम्भाल लेगा॥</li>
<li class="ltr" id="">1हे यहोवा, अपने मार्ग में मेरी अगुवाई कर, और मेरे द्रोहियों के कारण मुझ को चौरस रास्ते पर ले चल।</li>
<li class="ltr" id="">2मुझ को मेरे सताने वालों की इच्छा पर न छोड़, क्योंकि झूठे साक्षी जो उपद्रव करने की धुन में हैं मेरे विरुद्ध उठे हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">3यदि मुझे विश्वास न होता कि जीवितों की पृथ्वी पर यहोवा की भलाई को देखूंगा, तो मैं मूर्च्छित हो जाता।</li>
<li class="ltr" id="">4यहोवा की बाट जोहता रह, हियाव बान्ध और तेरा हृदय दृढ़ रहे, हां, यहोवा ही की बाट जोहता रह.</li>

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भजन संहिता 28
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<li class="ltr" id="">हे यहोवा, मैं तुझी को पुकारूंगा, हे मेरी चट्टान, मेरी सुनी अनसुनी न कर, ऐसा न हो कि तेरे चुप रहने से मैं कब्र में पड़े हुओं के समान हो जाऊं जो पाताल में चले जाते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">जब मैं तेरी दोहाई दूं, और तेरे पवित्र स्थान की भीतरी कोठरी की ओर अपने हाथ उठाऊं, तब मेरी गिड़गिड़ाहट की बात सुन ले।</li>
<li class="ltr" id="">उन दुष्टों और अनर्थकारियों के संग मुझे न घसीट, जो अपने पड़ोसियों बातें तो मेल की बोलते हैं परन्तु हृदय में बुराई रखते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">उनके कामों के और उनकी करनी की बुराई के अनुसार उन से बर्ताव कर, उनके हाथों के काम के अनुसार उन्हें बदला दे, उनके कामों का पलटा उन्हें दे।</li>
<li class="ltr" id="">वे यहोवा के कामों पर और उसके हाथों के कामों पर ध्यान नहीं करते, इसलिये वह उन्हें पछाड़ेगा और फिर न उठाएगा॥</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा धन्य है, क्योंकि उसने मेरी गिड़गिड़ाहट को सुना है।</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा मेरा बल और मेरी ढ़ाल है, उस पर भरोसा रखने से मेरे मन को सहायता मिली है, इसलिये मेरा हृदय प्रफुल्लित है, और मैं गीत गाकर उसका धन्यवाद करूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा उनका बल है, वह अपने अभिषिक्त के लिये उद्धार का दृढ़ गढ़ है।</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा अपनी प्रजा का उद्धार कर, और अपने निज भाग के लोगों को आशीष दे, और उनकी चरवाही कर और सदैव उन्हें सम्भाले रह॥</li>

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भजन संहिता 29
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<li class="ltr" id="">हे परमेश्वर के पुत्रों यहोवा का, हां यहोवा ही का गुणानुवाद करो, यहोवा की महिमा और सामर्थ को सराहो।</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा के नाम की महिमा करो, पवित्रता से शोभायमान होकर यहोवा को दण्डवत् करो।</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा की वाणी मेघों के ऊपर सुन पड़ती है, प्रतापी ईश्वर गरजता है, यहोवा घने मेघों के ऊपर रहता है।</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा की वाणी शक्तिशाली है, यहोवा की वाणी प्रतापमय है।</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा की वाणी देवदारों को तोड़ डालती है, यहोवा लबानोन के देवदारों को भी तोड़ डालता है।</li>
<li class="ltr" id="">वह उन्हें बछड़े की नाईं और लबानोन और शिर्योन को जंगली बछड़े के समान उछालता है॥</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा की वाणी आग की लपटों को चीरती है।</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा की वाणी वन को हिला देती है, यहोवा कादेश के वन को भी कंपाता है॥</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा की वाणी से हरिणियों का गर्भपात हो जाता है। और अरण्य में पतझड़ होती है, और उसके मन्दिर में सब कोई महिमा ही महिमा बोलता रहता है॥</li>
<li class="ltr" id="">0जलप्रलय के समय यहोवा विराजमान था, और यहोवा सर्वदा के लिये राजा होकर विराजमान रहता है।</li>
<li class="ltr" id="">1यहोवा अपनी प्रजा को बल देगा, यहोवा अपनी प्रजा को शान्ति की आशीष देगा॥</li>

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भजन संहिता 30
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<li class="ltr" id="">हे यहोवा मैं तुझे सराहूंगा, क्योंकि तू ने मुझे खींचकर निकाला है, और मेरे शत्रुओं को मुझ पर आनन्द करने नहीं दिया।</li>
<li class="ltr" id="">हे मेरे परमेश्वर यहोवा, मैं ने तेरी दोहाई दी और तू ने मुझे चंगा किया है।</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा, तू ने मेरा प्राण अधोलोक में से निकाला है, तू ने मुझ को जीवित रखा और कब्र में पड़ने से बचाया है॥</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा के भक्तों, उसका भजन गाओ, और जिस पवित्र नाम से उसका स्मरण होता है, उसका धन्यवाद करो।</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि उसका क्रोध, तो क्षण भर का होता है, परन्तु उसकी प्रसन्नता जीवन भर की होती है। कदाचित् रात को रोना पड़े, परन्तु सबेरे आनन्द पहुंचेगा॥</li>
<li class="ltr" id="">मैं ने तो अपने चैन के समय कहा था, कि मैं कभी नहीं टलने का।</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा अपनी प्रसन्नता से तू ने मेरे पहाड़ को दृढ़ और स्थिर किया था, जब तू ने अपना मुख फेर लिया तब मैं घबरा गया॥</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा मैं ने तुझी को पुकारा, और यहोवा से गिड़गिड़ाकर यह बिनती की, कि</li>
<li class="ltr" id="">जब मैं कब्र में चला जाऊंगा तब मेरे लोहू से क्या लाभ होगा? क्या मिट्टी तेरा धन्यवाद कर सकती है? क्या वह तेरी सच्चाई का प्रचार कर सकती है?</li>
<li class="ltr" id="">0हे यहोवा, सुन, मुझ पर अनुग्रह कर, हे यहोवा, तू मेरा सहायक हो॥</li>
<li class="ltr" id="">1तू ने मेरे लिये विलाप को नृत्य में बदल डाला, तू ने मेरा टाट उतरवाकर मेरी कमर में आनन्द का पटुका बान्धा है,</li>
<li class="ltr" id="">2ताकि मेरी आत्मा तेरा भजन गाती रहे और कभी चुप न हो। हे मेरे परमेश्वर यहोवा, मैं सर्वदा तेरा धन्यवाद करता रहूंगा॥</li>

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भजन संहिता 31
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<li class="ltr" id="">हे यहोवा मेरा भरोसा तुझ पर है, मुझे कभी लज्जित होना न पड़े, तू अपने धर्मी होने के कारण मुझे छुड़ा ले.</li>
<li class="ltr" id="">अपना कान मेरी ओर लगाकर तुरन्त मुझे छुड़ा ले.</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि तू मेरे लिये चट्टान और मेरा गढ़ है, इसलिये अपने नाम के निमित्त मेरी अगुवाई कर, और मुझे आगे ले चल।</li>
<li class="ltr" id="">जो जाल उन्होंने मेरे लिये बिछाया है उससे तू मुझ को छुड़ा ले, क्योंकि तू ही मेरा दृढ़ गढ़ है।</li>
<li class="ltr" id="">मैं अपनी आत्मा को तेरे ही हाथ में सौंप देता हूं, हे यहोवा, हे सत्यवादी ईश्वर, तू ने मुझे मोल लेकर मुक्त किया है॥</li>
<li class="ltr" id="">जो व्यर्थ वस्तुओं पर मन लगाते हैं, उन से मैं घृणा करता हूं, परन्तु मेरा भरोसा यहोवा ही पर है।</li>
<li class="ltr" id="">मैं तेरी करूणा से मगन और आनन्दित हूं, क्योंकि तू ने मेरे दु:ख पर दृष्टि की है, मेरे कष्ट के समय तू ने मेरी सुधि ली है,</li>
<li class="ltr" id="">और तू ने मुझे शत्रु के हाथ में पड़ने नहीं दिया, तू ने मेरे पांवों को चौड़े स्थान में खड़ा किया है॥</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा, मुझ पर अनुग्रह कर क्योंकि मैं संकट में हूं, मेरी आंखे वरन मेरा प्राण और शरीर सब शोक के मारे घुले जाते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">0मेरा जीवन शोक के मारे और मेरी अवस्था कराहते कराहते घट चली है, मेरा बल मेरे अधर्म के कारण जाता रह, और मेरी हडि्डयां घुल गई॥</li>
<li class="ltr" id="">1अपने सब विरोधियों के कारण मेरे पड़ोसियों में मेरी नामधराई हुई है, अपने जान पहिचान वालों के लिये डर का कारण हूं, जो मुझ को सड़क पर देखते है वह मुझ से दूर भाग जाते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">2मैं मृतक की नाईं लोगों के मन से बिसर गया, मैं टूटे बर्तन के समान हो गया हूं।</li>
<li class="ltr" id="">3मैं ने बहुतों के मुंह से अपना अपवाद सुना, चारों ओर भय ही भय है. जब उन्होंने मेरे विरुद्ध आपस में सम्मति की तब मेरे प्राण लेने की युक्ति की॥</li>
<li class="ltr" id="">4परन्तु हे यहोवा मैं ने तो तुझी पर भरोसा रखा है, मैं ने कहा, तू मेरा परमेश्वर है।</li>
<li class="ltr" id="">5मेरे दिन तेरे हाथ में है, तू मुझे मेरे शत्रुओं और मेरे सताने वालों के हाथ से छुड़ा।</li>
<li class="ltr" id="">6अपने दास पर अपने मुंह का प्रकाश चमका, अपनी करूणा से मेरा उद्धार कर॥</li>
<li class="ltr" id="">7हे यहोवा, मुझे लज्जित न होने दे क्योंकि मैं ने तुझ को पुकारा है, दुष्ट लज्जित हों और वे पाताल में चुपचाप पड़े रहें।</li>
<li class="ltr" id="">8जो अंहकार और अपमान से धर्मी की निन्दा करते हैं, उनके झूठ बोलने वाले मुंह बन्द किए जाएं॥</li>
<li class="ltr" id="">9आहा, तेरी भलाई क्या ही बड़ी है जो तू ने अपने डरवैयों के लिये रख छोड़ी है, और अपने शरणागतों के लिये मनुष्यों के साम्हने प्रगट भी की है.</li>
<li class="ltr" id="">0तू उन्हें दर्शन देने के गुप्त स्थान में मनुष्यों की बुरी गोष्ठी से गुप्त रखेगा, तू उन को अपने मण्डप में झगड़े-रगड़े से छिपा रखेगा॥</li>
<li class="ltr" id="">1यहोवा धन्य है, क्योंकि उसने मुझे गढ़ वाले नगर में रखकर मुझ पर अद्धभुत करूणा की है।</li>
<li class="ltr" id="">2मैं ने तो घबराकर कहा था कि मैं यहोवा की दृष्टि से दूर हो गया। तौभी जब मैं ने तेरी दोहाई दी, तब तू ने मेरी गिड़गिड़ाहट को सुन लिया॥</li>
<li class="ltr" id="">3हे यहोवा के सब भक्तों उससे प्रेम रखो. यहोवा सच्चे लोगों की तो रक्षा करता है, परन्तु जो अहंकार करता है, उसको वह भली भांति बदला देता है।</li>
<li class="ltr" id="">4हे यहोवा परआशा रखने वालों हियाव बान्धो और तुम्हारे हृदय दृढ़ रहें.</li>

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भजन संहिता 32
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<li class="ltr" id="">क्या ही धन्य है वह जिसका अपराध क्षमा किया गया, और जिसका पाप ढ़ाँपा गया हो।</li>
<li class="ltr" id="">क्या ही धन्य है वह मनुष्य जिसके अधर्म का यहोवा लेखा न ले, और जिसकी आत्मा में कपट न हो॥</li>
<li class="ltr" id="">जब मैं चुप रहा तब दिन भर कराहते कराहते मेरी हडि्डयां पिघल गई।</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि रात दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा, और मेरी तरावट धूप काल की सी झुर्राहट बनती गई॥</li>
<li class="ltr" id="">जब मैं ने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया और अपना अधर्म न छिपाया, और कहा, मैं यहोवा के साम्हने अपने अपराधों को मान लूंगा, तब तू ने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया॥</li>
<li class="ltr" id="">इस कारण हर एक भक्त तुझ से ऐसे समय में प्रार्थना करे जब कि तू मिल सकता है। निश्चय जब जल की बड़ी बाढ़ आए तौभी उस भक्त के पास न पहुंचेगी।</li>
<li class="ltr" id="">तू मेरे छिपने का स्थान है, तू संकट से मेरी रक्षा करेगा, तू मुझे चारों ओर से छुटकारे के गीतों से घेर लेगा॥</li>
<li class="ltr" id="">मैं तुझे बुद्धि दूंगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उस में तेरी अगुवाई करूंगा, मैं तुझ पर कृपा दृष्टि रखूंगा और सम्मत्ति दिया करूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">तुम घोड़े और खच्चर के समान न बनो जो समझ नहीं रखते, उनकी उमंग लगाम और बाग से रोकनी पड़ती है, नहीं तो वे तेरे वश में नहीं आने के॥</li>
<li class="ltr" id="">0दुष्ट को तो बहुत पीड़ा होगी, परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह करूणा से घिरा रहेगा।</li>
<li class="ltr" id="">1हे धर्मियों यहोवा के कारण आनन्दित और मगन हो, और हे सब सीधे मन वालों आनन्द से जयजयकार करो.</li>

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भजन संहिता 33
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<li class="ltr" id="">हे धर्मियों यहोवा के कारण जयजयकार करो क्योंकि धर्मी लोगों को स्तुति करनी सोहती है।</li>
<li class="ltr" id="">वीणा बजा बजाकर यहोवा का धन्यवाद करो, दस तार वाली सारंगी बजा बजाकर उसका भजन गाओ।</li>
<li class="ltr" id="">उसके लिये नया गीत गाओ, जयजयकार के साथ भली भांति बजाओ॥</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि यहोवा का वचन सीधा है, और उसका सब काम सच्चाई से होता है।</li>
<li class="ltr" id="">वह धर्म और न्याय से प्रीति रखता है, यहोवा की करूणा से पृथ्वी भरपूर है॥</li>
<li class="ltr" id="">आकाशमण्डल यहोवा के वचन से, और उसके सारे गण उसके मुंह ही श्वास से बने।</li>
<li class="ltr" id="">वह समुद्र का जल ढेर की नाईं इकट्ठा करता, वह गहिरे सागर को अपने भण्डार में रखता है॥</li>
<li class="ltr" id="">सारी पृथ्वी के लोग यहोवा से डरें, जगत के सब निवासी उसका भय मानें.</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि जब उसने कहा, तब हो गया, जब उसने आज्ञा दी, तब वास्तव में वैसा ही हो गया॥</li>
<li class="ltr" id="">0यहोवा अन्य अन्य जातियों की युक्ति को व्यर्थ कर देता है, वह देश देश के लोगों की कल्पनाओं को निष्फल करता है।</li>
<li class="ltr" id="">1यहोवा की युक्ति सर्वदा स्थिर रहेगी, उसके मन की कल्पनाएं पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहेंगी।</li>
<li class="ltr" id="">2क्या ही धन्य है वह जाति जिसका परमेश्वर यहोवा है, और वह समाज जिसे उसने अपना निज भाग होने के लिये चुन लिया हो.</li>
<li class="ltr" id="">3यहोवा स्वर्ग से दृष्टि करता है, वह सब मनुष्यों को निहारता है,</li>
<li class="ltr" id="">4अपने निवास के स्थान से वह पृथ्वी के सब रहने वालों को देखता है,</li>
<li class="ltr" id="">5वही जो उन सभों के हृदयों को गढ़ता, और उनके सब कामों का विचार करता है।</li>
<li class="ltr" id="">6कोई ऐसा राजा नहीं, जो सेना की बहुतायत के कारण बच सके, वीर अपनी बड़ी शक्ति के कारण छूट नहीं जाता।</li>
<li class="ltr" id="">7बच निकलने के लिये घोड़ा व्यर्थ है, वह अपने बड़े बल के द्वारा किसी को नहीं बचा सकता है॥</li>
<li class="ltr" id="">8देखो, यहोवा की दृष्टि उसके डरवैयों पर और उन पर जो उसकी करूणा की आशा रखते हैं बनी रहती है,</li>
<li class="ltr" id="">9कि वह उनके प्राण को मृत्यु से बचाए, और अकाल के समय उन को जीवित रखे॥</li>
<li class="ltr" id="">0हम यहोवा का आसरा देखते आए हैं, वह हमारा सहायक और हमारी ढाल ठहरा है।</li>
<li class="ltr" id="">1हमारा हृदय उसके कारण आनन्दित होगा, क्योंकि हम ने उसके पवित्र नाम का भरोसा रखा है।</li>
<li class="ltr" id="">2हे यहोवा जैसी तुझ पर हमारी आशा है, वैसी ही तेरी करूणा भी हम पर हो॥</li>

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भजन संहिता 34
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<li class="ltr" id="">मैं हर समय यहोवा को धन्य कहा करूंगा, उसकी स्तुति निरन्तर मेरे मुख से होती रहेगी।</li>
<li class="ltr" id="">मैं यहोवा पर घमण्ड करूंगा, नम्र लोग यह सुनकर आनन्दित होंगे।</li>
<li class="ltr" id="">मेरे साथ यहोवा की बड़ाई करो, और आओ हम मिलकर उसके नाम की स्तुति करें।</li>
<li class="ltr" id="">मैं यहोवा के पास गया, तब उसने मेरी सुन ली, और मुझे पूरी रीति से निर्भय किया।</li>
<li class="ltr" id="">जिन्होंने उसकी ओर दृष्टि की उन्होंने ज्योति पाई, और उनका मुंह कभी काला न होने पाया।</li>
<li class="ltr" id="">इस दीन जन ने पुकारा तब यहोवा ने सुन लिया, और उसको उसके सब कष्टों से छुड़ा लिया॥</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा के डरवैयों के चारों ओर उसका दूत छावनी किए हुए उन को बचाता है।</li>
<li class="ltr" id="">परखकर देखो कि यहोवा कैसा भला है. क्या ही धन्य है वह पुरूष जो उसकी शरण लेता है।</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा के पवित्र लोगो, उसका भय मानो, क्योंकि उसके डरवैयों को किसी बात की घटी नहीं होती.</li>
<li class="ltr" id="">0जवान सिंहों तो घटी होती और वे भूखे भी रह जाते हैं, परन्तु यहोवा के खोजियों को किसी भली वस्तु की घटी न होवेगी॥</li>
<li class="ltr" id="">1हे लड़कों, आओ, मेरी सुनो, मैं तुम को यहोवा का भय मानना सिखाऊंगा।</li>
<li class="ltr" id="">2वह कौन मनुष्य है जो जीवन की इच्छा रखता, और दीर्घायु चाहता है ताकि भलाई देखे?</li>
<li class="ltr" id="">3अपनी जीभ को बुराई से रोक रख, और अपने मुंह की चौकसी कर कि उससे छल की बात न निकले।</li>
<li class="ltr" id="">4बुराई को छोड़ और भलाई कर, मेल को ढूंढ और उसी का पीछा कर॥</li>
<li class="ltr" id="">5यहोवा की आंखे धर्मियों पर लगी रहती हैं, और उसके कान भी उसकी दोहाई की ओर लगे रहते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">6यहोवा बुराई करने वालों के विमुख रहता है, ताकि उनका स्मरण पृथ्वी पर से मिटा डाले।</li>
<li class="ltr" id="">7धर्मी दोहाई देते हैं और यहोवा सुनता है, और उन को सब विपत्तियों से छुड़ाता है।</li>
<li class="ltr" id="">8यहोवा टूटे मन वालों के समीप रहता है, और पिसे हुओं का उद्धार करता है॥</li>
<li class="ltr" id="">9धर्मी पर बहुत सी विपत्तियां पड़ती तो हैं, परन्तु यहोवा उसको उन सब से मुक्त करता है।</li>
<li class="ltr" id="">0वह उसकी हड्डी हड्डी की रक्षा करता है, और उन में से एक भी टूटने नहीं पाती।</li>
<li class="ltr" id="">1दुष्ट अपनी बुराई के द्वारा मारा जाएगा, और धर्मी के बैरी दोषी ठहरेंगे।</li>
<li class="ltr" id="">2यहोवा अपने दासों का प्राण मोल लेकर बचा लेता है, और जितने उसके शरणागत हैं उन में से कोई भी दोषी न ठहरेगा॥</li>

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भजन संहिता 35
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<li class="ltr" id="">हे यहोवा जो मेरे साथ मुकद्दमा लड़ते हैं, उनके साथ तू भी मुकद्दमा लड़, जो मुझ से युद्ध करते हैं, उन से तू युद्ध कर।</li>
<li class="ltr" id="">ढाल और भाला लेकर मेरी सहायता करने को खड़ा हो।</li>
<li class="ltr" id="">बर्छी को खींच और मेरा पीछा करने वालों के साम्हने आकर उन को रोक, और मुझ से कह, कि मैं तेरा उद्धार हूं॥</li>
<li class="ltr" id="">जो मेरे प्राण के ग्राहक हैं वे लज्जित और निरादर हों. जो मेरी हानि की कल्पना करते हैं, वह पीछे हटाए जाएं और उनका मुंह काला हो.</li>
<li class="ltr" id="">वे वायु से उड़ जाने वाली भूसी के समान हों, और यहोवा का दूत उन्हें हांकता जाए.</li>
<li class="ltr" id="">उनका मार्ग अन्धियारा और फिसलन भरा हो, और यहोवा का दूत उन को खदेड़ता जाए॥</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि अकारण उन्होंने मेरे लिये अपना जाल गड़हे में बिछाया, अकारण ही उन्होंने मेरा प्राण लेने के लिये गड़हा खोदा है।</li>
<li class="ltr" id="">अचानक उन पर विपत्ति आ पड़े. और जो जाल उन्होंने बिछाया है उसी में वे आप ही फंसे, और उसी विपत्ति में वे आप ही पड़ें.</li>
<li class="ltr" id="">परन्तु मैं यहोवा के कारण अपने मन में मगन होऊंगा, मैं उसके किए हुए उद्धार से हर्षित होऊंगा।</li>
<li class="ltr" id="">0मेरी हड्डी हड्डी कहेगी, हे यहोवा तेरे तुल्य कौन है, जो दीन को बड़े बड़े बलवन्तों से बचाता है, और लुटेरों से दीन दरिद्र लोगों की रक्षा करता है?</li>
<li class="ltr" id="">1झूठे साक्षी खड़े होते हैं, और जो बात मैं नहीं जानता, वही मुझ से पूछते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">2वे मुझ से भलाई के बदले बुराई करते हैं, यहां तक कि मेरा प्राण ऊब जाता है।</li>
<li class="ltr" id="">3जब वे रोगी थे तब तो मैं टाट पहिने रहा, और उपवास कर करके दु:ख उठाता रहा, और मेरी प्रार्थना का फल मेरी गोद में लौट आया।</li>
<li class="ltr" id="">4मैं ऐसा भाव रखता था कि मानो वे मेरे संगी वा भाई हैं, जैसा कोई माता के लिये विलाप करता हो, वैसा ही मैं ने शोक का पहिरावा पहिने हुए सिर झुकाकर शोक किया॥</li>
<li class="ltr" id="">5परन्तु जब मैं लंगड़ाने लगा तब वे लोग आनन्दित होकर इकट्ठे हुए, नीच लोग और जिन्हें मैं जानता भी न था वे मेरे विरुद्ध इकट्ठे हुए, वे मुझे लगातार फाड़ते रहे,</li>
<li class="ltr" id="">6उन पाखण्डी भांड़ों की नाईं जो पेट के लिये उपहास करते हैं, वे भी मुझ पर दांत पीसते हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">7हे प्रभु तू कब तक देखता रहेगा? इस विपत्ति से, जिस में उन्होंने मुझे डाला है मुझ को छुड़ा. जवान सिंहों से मेरे प्राण को बचा ले.</li>
<li class="ltr" id="">8मैं बड़ी सभा में तेरा धन्यवाद करूंगा, बहुतेरे लोगों के बीच में तेरी स्तुति करूंगा॥</li>
<li class="ltr" id="">9मेरे झूठ बोलने वाले शत्रु मेरे विरुद्ध आनन्द न करने पाएं, जो अकारण मेरे बैरी हैं, वे आपस में नैन से सैन न करने पांए।</li>
<li class="ltr" id="">0क्योंकि वे मेल की बातें नहीं बोलते, परन्तु देश में जो चुपचाप रहते हैं, उनके विरुद्ध छल की कल्पनाएं करते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">1और उन्होंने मेरे विरुद्ध मुंह पसार के कहा, आहा, आहा, हम ने अपनी आंखों से देखा है.</li>
<li class="ltr" id="">2हे यहोवा, तू ने तो देखा है, चुप न रह. हे प्रभु, मुझ से दूर न रह.</li>
<li class="ltr" id="">3उठ, मेरे न्याय के लिये जाग, हे मेरे परमेश्वर, हे मेरे प्रभु, मेरे मुकद्दमा निपटाने के लिये आ.</li>
<li class="ltr" id="">4हे मेरे परमेश्वर यहोवा, तू अपने धर्म के अनुसार मेरा न्याय चुका, और उन्हें मेरे विरुद्ध आनन्द करने न दे.</li>
<li class="ltr" id="">5वे मन में न कहने पाएं, कि आहा. हमारी तो इच्छा पूरी हुई. वह यह न कहें कि हम उसे निगल गए हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">6जो मेरी हानि से आनन्दित होते हैं उनके मुंह लज्जा के मारे एक साथ काले हों. जो मेरे विरुद्ध बड़ाई मारते हैं वह लज्जा और अनादर से ढ़ंप जाएं.</li>
<li class="ltr" id="">7जो मेरे धर्म से प्रसन्न रहते हैं, वह जयजयकार और आनन्द करें, और निरन्तर कहते रहें, यहोवा की बड़ाई हो, जो अपने दास के कुशल से प्रसन्न होता है.</li>
<li class="ltr" id="">8तब मेरे मुंह से तेरे धर्म की चर्चा होगी, और दिन भर तेरी स्तुति निकलेगी॥</li>

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भजन संहिता 36
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<li class="ltr" id="">दुष्ट जन का अपराध मेरे हृदय के भीतर यह कहता है कि परमेश्वर का भय उसकी दृष्टि में नहीं है।</li>
<li class="ltr" id="">वह अपने अधर्म के प्रगट होने और घृणित ठहरने के विषय अपने मन में चिकनी चुपड़ी बातें विचारता है।</li>
<li class="ltr" id="">उसकी बातें अनर्थ और छल की हैं, उसने बुद्धि और भलाई के काम करने से हाथ उठाया है।</li>
<li class="ltr" id="">वह अपने बिछौने पर पड़े पड़े अनर्थ की कल्पना करता है, वह अपने कुमार्ग पर दृढ़ता से बना रहता है, बुराई से वह हाथ नहीं उठाता॥</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा तेरी करूणा स्वर्ग में है, तेरी सच्चाई आकाश मण्डल तक पहुंची है।</li>
<li class="ltr" id="">तेरा धर्म ऊंचे पर्वतों के समान है, तेरे नियम अथाह सागर ठहरे हैं, हे यहोवा तू मनुष्य और पशु दोनों की रक्षा करता है॥</li>
<li class="ltr" id="">हे परमेश्वर तेरी करूणा, कैसी अनमोल है. मनुष्य तेरे पंखो के तले शरण लेते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">वे तेरे भवन के चिकने भोजन से तृप्त होंगे, और तू अपनी सुख की नदी में से उन्हें पिलाएगा।</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि जीवन का सोता तेरे ही पास है, तेरे प्रकाश के द्वारा हम प्रकाश पाएंगे॥</li>
<li class="ltr" id="">0अपने जानने वालों पर करूणा करता रह, और अपने धर्म के काम सीधे मन वालों में करता रह.</li>
<li class="ltr" id="">1अहंकारी मुझ पर लात उठाने न पाए, और न दुष्ट अपने हाथ के बल से मुझे भगाने पाए।</li>
<li class="ltr" id="">2वहां अनर्थकारी गिर पड़े हैं, वे ढकेल दिए गए, और फिर उठ न सकेंगे॥</li>

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भजन संहिता 37
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<li class="ltr" id="">कुकर्मियों के कारण मत कुढ़, कुटिल काम करने वालों के विषय डाह न कर.</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि वे घास की नाईं झट कट जाएंगे, और हरी घास की नाईं मुर्झा जाएंगे।</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा पर भरोसा रख, और भला कर, देश में बसा रह, और सच्चाई में मन लगाए रह।</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा को अपने सुख का मूल जान, और वह तेरे मनोरथों को पूरा करेगा॥</li>
<li class="ltr" id="">अपने मार्ग की चिन्ता यहोवा पर छोड़, और उस पर भरोसा रख, वही पूरा करेगा।</li>
<li class="ltr" id="">और वह तेरा धर्म ज्योति की नाईं, और तेरा न्याय दोपहर के उजियाले की नाईं प्रगट करेगा॥</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा के साम्हने चुपचाप रह, और धीरज से उसका आसरा रख, उस मनुष्य के कारण न कुढ़, जिसके काम सुफल होते हैं, और वह बुरी युक्तियों को निकालता है.</li>
<li class="ltr" id="">क्रोध से परे रह, और जलजलाहट को छोड़ दे. मत कुढ़, उससे बुराई ही निकलेगी।</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि कुकर्मी लोग काट डाले जाएंगे, और जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वही पृथ्वी के अधिकारी होंगे।</li>
<li class="ltr" id="">0थोड़े दिन के बीतने पर दुष्ट रहेगा ही नहीं, और तू उसके स्थान को भलीं भांति देखने पर भी उसको न पाएगा।</li>
<li class="ltr" id="">1परन्तु नम्र लोग पृथ्वी के अधिकारी होंगे, और बड़ी शान्ति के कारण आनन्द मनाएंगे।</li>
<li class="ltr" id="">2दुष्ट धर्मी के विरुद्ध बुरी युक्ति निकालता है, और उस पर दांत पीसता है,</li>
<li class="ltr" id="">3परन्तु प्रभु उस पर हंसेगा, क्योंकि वह देखता है कि उसका दिन आने वाला है॥</li>
<li class="ltr" id="">4दुष्ट लोग तलवार खींचे और धनुष बढ़ाए हुए हैं, ताकि दीन दरिद्र को गिरा दें, और सीधी चाल चलने वालों को वध करें।</li>
<li class="ltr" id="">5उनकी तलवारों से उन्हीं के हृदय छिदेंगे, और उनके धनुष तोड़े जाएंगे॥</li>
<li class="ltr" id="">6धर्मी का थोड़ा से माल दुष्टों के बहुत से धन से उत्तम है।</li>
<li class="ltr" id="">7क्योंकि दुष्टोंकी भुजाएं तो तोड़ी जाएंगी, परन्तु यहोवा धर्मियों को सम्भालता है॥</li>
<li class="ltr" id="">8यहोवा खरे लोगों की आयु की सुधि रखता है, और उनका भाग सदैव बना रहेगा।</li>
<li class="ltr" id="">9विपत्ति के समय, उनकी आशा न टूटेगी और न वे लज्जित होंगे, और अकाल के दिनों में वे तृप्त रहेंगे॥</li>
<li class="ltr" id="">0दुष्ट लोग नाश हो जाएंगे, और यहोवा के शत्रु खेत की सुथरी घास की नाईं नाश होंगे, वे धूएं की नाईं बिलाय जाएंगे॥</li>
<li class="ltr" id="">1दुष्ट ऋण लेता है, और भरता नहीं परन्तु धर्मीं अनुग्रह करके दान देता है,</li>
<li class="ltr" id="">2क्योंकि जो उससे आशीष पाते हैं वे तो पृथ्वी के अधिकारी होंगे, परन्तु जो उससे शापित होते हैं, वे नाश को जाएंगे॥</li>
<li class="ltr" id="">3मनुष्य की गति यहोवा की ओर से दृढ़ होती है, और उसके चलन से वह प्रसन्न रहता है,</li>
<li class="ltr" id="">4चाहे वह गिरे तौभी पड़ा न रह जाएगा, क्योंकि यहोवा उसका हाथ थामे रहता है॥</li>
<li class="ltr" id="">5मैं लड़कपन से लेकर बुढ़ापे तक देखता आया हूं, परन्तु न तो कभी धर्मी को त्यागा हुआ, और न उसके वंश को टुकड़े मांगते देखा है।</li>
<li class="ltr" id="">6वह तो दिन भर अनुग्रह कर करके ऋण देता है, और उसके वंश पर आशीष फलती रहती है॥</li>
<li class="ltr" id="">7बुराई को छोड़ भलाई कर, और तू सर्वदा बना रहेगा।</li>
<li class="ltr" id="">8क्योंकि यहोवा न्याय से प्रीति रखता, और अपने भक्तों को न तजेगा। उनकी तो रक्षा सदा होती है, परन्तु दुष्टों का वंश काट डाला जाएगा।</li>
<li class="ltr" id="">9धर्मी लोग पृथ्वी के अधिकारी होंगे, और उस में सदा बसे रहेंगे॥</li>
<li class="ltr" id="">0धर्मी अपने मुंह से बुद्धि की बातें करता, और न्याय का वचन कहता है।</li>
<li class="ltr" id="">1उसके परमेश्वर की व्यवस्था उसके हृदय में बनी रहती है, उसके पैर नहीं फिसलते॥</li>
<li class="ltr" id="">2दुष्ट धर्मी की ताक में रहता है। और उसके मार डालने का यत्न करता है।</li>
<li class="ltr" id="">3यहोवा उसको उसके हाथ में न छोड़ेगा, और जब उसका विचार किया जाए तब वह उसे दोषी न ठहराएगा॥</li>
<li class="ltr" id="">4यहोवा की बाट जोहता रह, और उसके मार्ग पर बना रह, और वह तुझे बढ़ाकर पृथ्वी का अधिकारी कर देगा, जब दुष्ट काट डाले जाएंगे, तब तू देखेगा॥</li>
<li class="ltr" id="">5मैं ने दुष्ट को बड़ा पराक्रमी और ऐसा फैलता हुए देखा, जैसा कोई हरा पेड़ अपने निज भूमि में फैलता है।</li>
<li class="ltr" id="">6परन्तु जब कोई उधर से गया तो देखा कि वह वहां है ही नहीं, और मैं ने भी उसे ढूंढ़ा, परन्तु कहीं न पाया॥</li>
<li class="ltr" id="">7खरे मनुष्य पर दृष्टि कर और धर्मी को देख, क्योंकि मेल से रहने वाले पुरूष का अन्तफल अच्छा है।</li>
<li class="ltr" id="">8परन्तु अपराधी एक साथ सत्यानाश किए जाएंगे, दुष्टों का अन्तफल सर्वनाश है॥</li>
<li class="ltr" id="">9धर्मियों की मुक्ति यहोवा की ओर से होती है, संकट के समय वह उनका दृढ़ गढ़ है।</li>
<li class="ltr" id="">0और यहोवा उनकी सहायता करके उन को बचाता है, वह उन को दुष्टों से छुड़ाकर उनका उद्धार करता है, इसलिये कि उन्होंने उस में अपनी शरण ली है॥</li>

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भजन संहिता 38
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<li class="ltr" id="">हे यहोवा क्रोध में आकर मुझे झिड़क न दे, और न जलजलाहट में आकर मेरी ताड़ना कर.</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि तेरे तीर मुझ में लगे हैं, और मैं तेरे हाथ के नीचे दबा हूं।</li>
<li class="ltr" id="">तेरे क्रोध के कारण मेरे शरीर में कुछ भी आरोग्यता नहीं, और मेरे पाप के कारण मेरी हडि्डयों में कुछ भी चैन नहीं।</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि मेरे अधर्म के कामों में मेरा सिर डूब गया, और वे भारी बोझ की नाईं मेरे सहने से बाहर हो गए हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">मेरी मूढ़ता के कारण से मेरे कोड़े खाने के घाव बसाते हैं और सड़ गए हैं।</li>
<li class="ltr" id="">मैं बहुत दुखी हूं और झुक गया हूं, दिन भर मैं शोक का पहिरावा पहिने हुए चलता फिरता हूं।</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि मेरी कमर में जलन है, और मेरे शरीर में आरोग्यता नहीं।</li>
<li class="ltr" id="">मैं निर्बल और बहुत ही चूर हो गया हूं, मैं अपने मन की घबराहट से कराहता हूं॥</li>
<li class="ltr" id="">हे प्रभु मेरी सारी अभिलाषा तेरे सम्मुख है, और मेरा कराहना तुझ से छिपा नहीं।</li>
<li class="ltr" id="">0मेरा हृदय धड़कता है, मेरा बल घटता जाता है, और मेरी आंखों की ज्योति भी मुझ से जाती रही।</li>
<li class="ltr" id="">1मेरे मित्र और मेरे संगी मेरी विपत्ति में अलग हो गए, और मेरे कुटुम्बी भी दूर जा खड़े हुए॥</li>
<li class="ltr" id="">2मेरे प्राण के ग्राहक मेरे लिये जाल बिछाते हैं, और मेरी हानि के यत्न करने वाले दुष्टता की बातें बोलते, और दिन भर छल की युक्ति सोचते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">3परन्तु मैं बहिरे की नाईं सुनता ही नहीं, और मैं गूंगे के समान मूंह नहीं खोलता।</li>
<li class="ltr" id="">4वरन मैं ऐसे मनुष्य के तुल्य हूं जो कुछ नहीं सुनता, और जिसके मुंह से विवाद की कोई बात नहीं निकलती॥</li>
<li class="ltr" id="">5परन्तु हे यहोवा, मैं ने तुझ ही पर अपनी आशा लगाई है, हे प्रभु, मेरे परमेश्वर, तू ही उत्तर देगा।</li>
<li class="ltr" id="">6क्योंकि मैं ने कहा, ऐसा न हो कि वे मुझ पर आनन्द करें, जब मेरा पांव फिसल जाता है, तब मुझ पर अपनी बड़ाई मारते हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">7क्योंकि मैं तो अब गिरने ही पर हूं, और मेरा शोक निरन्तर मेरे साम्हने है।</li>
<li class="ltr" id="">8इसलिये कि मैं तो अपने अधर्म को प्रगट करूंगा, और अपने पाप के कारण खेदित रहूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">9परन्तु मेरे शत्रु फुर्तीले और सामर्थी हैं, और मेरे विरोधी बैरी बहुत हो गए हैं।</li>
<li class="ltr" id="">0जो भलाई के बदले में बुराई करते हैं, वह भी मेरे भलाई के पीछे चलने के कारण मुझ से विरोध करते हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">1हे यहोवा, मुझे छोड़ न दे. हे मेरे परमेश्वर, मुझ से दूर न हो.</li>
<li class="ltr" id="">2हे यहोवा, हे मेरे उद्धारकर्त्ता, मेरी सहायता के लिये फुर्ती कर.</li>

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भजन संहिता 39
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<li class="ltr" id="">मैं ने कहा, मैं अपनी चाल चलन में चौकसी करूंगा, ताकि मेरी जीभ से पाप न हो, जब तक दुष्ट मेरे साम्हने है, तब तक मैं लगाम लगाए अपना मुंह बन्द किए रहूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">मैं मौन धारण कर गूंगा बन गया, और भलाई की ओर से भी चुप्पी साधे रहा, और मेरी पीड़ा बढ़ गई,</li>
<li class="ltr" id="">मेरा हृदय अन्दर ही अन्दर जल रहा था। सोचते सोचते आग भड़क उठी, तब मैं अपनी जीभ से बोल उठा,</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा ऐसा कर कि मेरा अन्त मुझे मालुम हो जाए, और यह भी कि मेरी आयु के दिन कितने हैं, जिस से मैं जान लूं कि कैसा अनित्य हूं.</li>
<li class="ltr" id="">देख, तू ने मेरे आयु बालिश्त भर की रखी है, और मेरी अवस्था तेरी दृष्टि में कुछ है ही नहीं। सचमुच सब मनुष्य कैसे ही स्थिर क्यों न हों तौभी व्यर्थ ठहरे हैं।</li>
<li class="ltr" id="">सचमुच मनुष्य छाया सा चलता फिरता है, सचमुच वे व्यर्थ घबराते हैं, वह धन का संचय तो करता है परन्तु नहीं जानता कि उसे कौन लेगा.</li>
<li class="ltr" id="">और अब हे प्रभु, मैं किस बात की बाट जोहूं? मेरी आशा तो तेरी ओर लगी है।</li>
<li class="ltr" id="">मुझे मेरे सब अपराधों के बन्धन से छुड़ा ले। मूढ़ मेरी निन्दा न करने पाए।</li>
<li class="ltr" id="">मैं गूंगा बन गया और मुंह न खोला, क्योंकि यह काम तू ही ने किया है।</li>
<li class="ltr" id="">0तू ने जो विपत्ति मुझ पर डाली है उसे मुझ से दूर कर दे, क्योंकि मैं तो तरे हाथ की मार से भस्म हुआ जाता हूं।</li>
<li class="ltr" id="">1जब तू मनुष्य को अधर्म के कारण डाँट डपटकर ताड़ना देता है, तब तू उसकी सुन्दरता को पतंगे की नाईं नाश करता है, सचमुच सब मनुष्य व्यर्थअभिमान करते हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">2हे यहोवा, मेरी प्रार्थना सुन, और मेरी दोहाई पर कान लगा, मेरा रोना सुनकर शांत न रह. क्योंकि मैं तेरे संग एक परदेशी यात्री की नाईं रहता हूं, और अपने सब पुरखाओं के समान परदेशी हूं।</li>
<li class="ltr" id="">3आह. इस से पहिले कि मैं यहां से चला जाऊं और न रह जाऊं, मुझे बचा ले जिस से मैं प्रदीप्त जीवन प्राप्त करूं.</li>

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भजन संहिता 40
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<li class="ltr" id="">मैं धीरज से यहोवा की बाट जोहता रहा, और उसने मेरी ओर झुककर मेरी दोहाई सुनी।</li>
<li class="ltr" id="">उसने मुझे सत्यानाश के गड़हे और दलदल की कीच में से उबारा, और मुझ को चट्टान पर खड़ा करके मेरे पैरों को दृढ़ किया है।</li>
<li class="ltr" id="">और उसने मुझे एक नया गीत सिखाया जो हमारे परमेश्वर की स्तुति का है। बहुतेरे यह देखकर डरेंगे, और यहोवा पर भरोसा रखेंगे॥</li>
<li class="ltr" id="">क्या ही धन्य है वह पुरूष, जो यहोवा पर भरोसा करता है, और अभिमानियों और मिथ्या की ओर मुड़ने वालों की ओर मुंह न फेरता हो।</li>
<li class="ltr" id="">हे मेरे परमेश्वर यहोवा, तू ने बहुत से काम किए हैं. जो आश्चर्यकर्म और कल्पनाएं तू हमारे लिये करता है वह बहुत सी हैं, तेरे तुल्य कोई नहीं. मैं तो चाहता हूं की खोलकर उनकी चर्चा करूं, परन्तु उनकी गिनती नहीं हो सकती॥</li>
<li class="ltr" id="">मेलबलि और अन्नबलि से तू प्रसन्न नहीं होता तू ने मेरे कान खोदकर खोले हैं। होमबलि और पापबलि तू ने नहीं चाहा।</li>
<li class="ltr" id="">तब मैं ने कहा, देख, मैं आया हूं, क्योंकि पुस्तक में मेरे विषय ऐसा ही लिखा हुआ है।</li>
<li class="ltr" id="">हे मेरे परमेश्वर मैं तेरी इच्छा पूरी करने से प्रसन्न हूं, और तेरी व्यवस्था मेरे अन्त:करण में बनी है॥</li>
<li class="ltr" id="">मैं ने बड़ी सभा में धर्म के शुभ समाचार का प्रचार किया है, देख, मैं ने अपना मुंह बन्द नहीं किया हे यहोवा, तू इसे जानता है।</li>
<li class="ltr" id="">0मैं ने तेरा धर्म मन ही में नहीं रखा, मैं ने तेरी सच्चाई और तेरे किए हुए उधार की चर्चा की है, मैं ने तेरी करूणा और सत्यता बड़ी सभा से गुप्त नहीं रखी॥</li>
<li class="ltr" id="">1हे यहोवा, तू भी अपनी बड़ी दया मुझ पर से न हटा ले, तेरी करूणा और सत्यता से निरन्तर मेरी रक्षा होती रहे.</li>
<li class="ltr" id="">2क्योंकि मैं अनगिनत बुराइयों से घिरा हुआ हूं, मेरे अधर्म के कामों ने मुझे आ पकड़ा और मैं दृष्टि नहीं उठा सकता, वे गिनती में मेरे सिर के बालों से भी अधिक हैं, इसलिये मेरा हृदय टूट गया॥</li>
<li class="ltr" id="">3हे यहोवा, कृपा करके मुझे छुड़ा ले. हे यहोवा, मेरी सहायता के लिये फुर्ती कर.</li>
<li class="ltr" id="">4जो मेरे प्राण की खोज में हैं, वे सब लज्जित हों, और उनके मुंह काले हों और वे पीछे हटाए और निरादर किए जाएं जो मेरी हानि से प्रसन्न होते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">5जो मुझ से आहा, आहा, कहते हैं, वे अपनी लज्जा के मारे विस्मित हों॥</li>
<li class="ltr" id="">6परन्तु जितने तुझे ढूंढ़ते हैं, वह सब तेरे कारण हर्षित और आनन्दित हों, जो तेरा किया हुआ उद्धार चाहते हैं, वे निरन्तर कहते रहें, यहोवा की बड़ाई हो.</li>
<li class="ltr" id="">7मैं तो दीन और दरिद्र हूं, तौभी प्रभु मेरी चिन्ता करता है। तू मेरा सहायक और छुड़ाने वाला है, हे मेरे परमेश्वर विलम्ब न कर॥</li>

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भजन संहिता 41
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<li class="ltr" id="">क्या ही धन्य है वह, जो कंगाल की सुधि रखता है. विपत्ति के दिन यहोवा उसको बचाएगा।</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा उसकी रक्षा करके उसको जीवित रखेगा, और वह पृथ्वी पर भाग्यवान होगा। तू उसको शत्रुओं की इच्छा पर न छोड़।</li>
<li class="ltr" id="">जब वह व्याधि के मारे सेज पर पड़ा हो, तब यहोवा उसे सम्भालेगा, तू रोग में उसके पूरे बिछौने को उलटकर ठीक करेगा॥</li>
<li class="ltr" id="">मैं ने कहा, हे यहोवा, मुझ पर अनुग्रह कर, मुझ को चंगा कर, क्योंकि मैं ने तो तेरे विरुद्ध पाप किया है.</li>
<li class="ltr" id="">मेरे शत्रु यह कहकर मेरी बुराई करते हैं: वह कब मरेगा, और उसका नाम कब मिटेगा?</li>
<li class="ltr" id="">और जब वह मुझ से मिलने को आता है, तब वह व्यर्थ बातें बकता है, जब कि उसका मन अपने अन्दर अधर्म की बातें संचय करता है, और बाहर जाकर उनकी चर्चा करता है।</li>
<li class="ltr" id="">मेरे सब बैरी मिलकर मेरे विरुद्ध कानाफूसी करते हैं, वे मेरे विरुद्ध होकर मेरी हानि की कल्पना करते हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">वे कहते हैं कि इसे तो कोई बुरा रोग लग गया है, अब जो यह पड़ा है, तो फिर कभी उठने का नहीं।</li>
<li class="ltr" id="">मेरा परम मित्र जिस पर मैं भरोसा रखता था, जो मेरी रोटी खाता था, उसने भी मेरे विरुद्ध लात उठाई है।</li>
<li class="ltr" id="">0परन्तु हे यहोवा, तु मुझ पर अनुग्रह करके मुझ को उठा ले कि मैं उन को बदला दूं.</li>
<li class="ltr" id="">1मेरा शत्रु जो मुझ पर जयवन्त नहीं हो पाता, इस से मैं ने जान लिया है कि तू मुझ से प्रसन्न है।</li>
<li class="ltr" id="">2और मुझे तो तू खराई से सम्भालता, और सर्वदा के लिये अपने सम्मुख स्थिर करता है॥</li>
<li class="ltr" id="">3इस्राएल का परमेश्वर यहोवा आदि से अनन्तकाल तक धन्य है आमीन, फिर आमीन॥</li>

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भजन संहिता 42
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<li class="ltr" id="">जैसे हरिणी नदी के जल के लिये हांफती है, वैसे ही, हे परमेश्वर, मैं तेरे लिये हांफता हूं।</li>
<li class="ltr" id="">जीवते ईश्वर परमेश्वर का मैं प्यासा हूं, मैं कब जाकर परमेश्वर को अपना मुंह दिखाऊंगा?</li>
<li class="ltr" id="">मेरे आंसू दिन और रात मेरा आहार हुए हैं, और लोग दिन भर मुझ से कहते रहते हैं, तेरा परमेश्वर कहां है?</li>
<li class="ltr" id="">मैं भीड़ के संग जाया करता था, मैं जयजयकार और धन्यवाद के साथ उत्सव करने वाली भीड़ के बीच में परमेश्वर के भवन को धीरे धीरे जाया करता था, यह स्मरण करके मेरा प्राण शोकित हो जाता है।</li>
<li class="ltr" id="">हे मेरे प्राण, तू क्यों गिरा जाता है? और तू अन्दर ही अन्दर क्यों व्याकुल है? परमेश्वर पर आशा लगाए रह, क्योंकि मैं उसके दर्शन से उद्धार पाकर फिर उसका धन्यवाद करूंगा॥</li>
<li class="ltr" id="">हे मेरे परमेश्वर, मेरा प्राण मेरे भीतर गिरा जाता है, इसलिये मैं यर्दन के पास के देश से और हर्मोन के पहाड़ों और मिसगार की पहाड़ी के ऊपर से तुझे स्मरण करता हूं।</li>
<li class="ltr" id="">तेरी जलधाराओं का शब्द सुनकर जल, जल को पुकारता है, तेरी सारी तरंगों और लहरों में मैं डूब गया हूं।</li>
<li class="ltr" id="">तौभी दिन को यहोवा अपनी शक्ति और करूणा प्रगट करेगा, और रात को भी मैं उसका गीत गाऊंगा, और अपने जीवन दाता ईश्वर से प्रार्थना करूंगा॥</li>
<li class="ltr" id="">मैं ईश्वर से जो मेरी चट्टान है कहूंगा, तू मुझे क्यों भूल गया? मैं शत्रु के अन्धेर के मारे क्यों शोक का पहिरावा पहिने हुए चलता फिरता हूं?</li>
<li class="ltr" id="">0मेरे सताने वाले जो मेरी निन्दा करते हैं मानो उस में मेरी हडि्डयां चूर चूर होती हैं, मानो कटार से छिदी जाती हैं, क्योंकि वे दिन भर मुझ से कहते रहते हैं, तेरा परमेश्वर कहां है?</li>
<li class="ltr" id="">1हे मेरे प्राण तू क्यों गिरा जाता है? तू अन्दर ही अन्दर क्यों व्याकुल है? परमेश्वर पर भरोसा रख, क्योंकि वह मेरे मुख की चमक और मेरा परमेश्वर है, मैं फिर उसका धन्यवाद करूंगा॥</li>

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भजन संहिता 43
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<li class="ltr" id="">हे परमेश्वर, मेरा न्याय चुका और विधर्मी जाति से मेरा मुकद्दमा लड़, मुझ को छली और कुटिल पुरूष से बचा।</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि हे परमेश्वर, तू ही मेरी शरण है, तू ने क्यों मुझे त्याग दिया है? मैं शत्रु के अन्धेर के मारे शोक का पहिरावा पहिने हुए क्यों फिरता रहूं?</li>
<li class="ltr" id="">अपने प्रकाश और अपनी सच्चाई को भेज, वे मेरी अगुवाई करें, वे ही मुझ को तेरे पवित्र पर्वत पर और तेरे निवास स्थान में पहुंचाएँ.</li>
<li class="ltr" id="">तब मैं परमेश्वर की वेदी के पास जाऊंगा, उस ईश्वर के पास जो मेरे अति आनन्द का कुण्ड है, और हे परमेश्वर, हे मेरे परमेश्वर मैं वीणा बजा बजाकर तेरा धन्यवाद करूंगा॥</li>
<li class="ltr" id="">हे मेरे प्राण तू क्यों गिरा जाता है? तू अन्दर ही अन्दर क्यों व्याकुल है? परमेश्वर पर भरोसा रख, क्योंकि वह मेरे मुख की चमक और मेरा परमेश्वर है, मैं फिर उसका धन्यवाद करूंगा॥</li>

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भजन संहिता 44
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<li class="ltr" id="">हे परमेश्वर हम ने अपने कानों से सुना, हमारे बापदादों ने हम से वर्णन किया है, कि तू ने उनके दिनों में और प्राचीनकाल में क्या क्या काम किए हैं।</li>
<li class="ltr" id="">तू ने अपने हाथ से जातियों को निकाल दिया, और इन को बसाया, तू ने देश देश के लोगों को दु:ख दिया, और इन को चारों ओर फैला दिया,</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि वे न तो अपनी तलवार के बल से इस देश के अधिकारी हुए, और न अपने बाहुबल से, परन्तु तेरे दाहिने हाथ और तेरी भुजा और तेरे प्रसन्न मुख के कारण जयवन्त हुए, क्योंकि तू उन को चाहता था॥</li>
<li class="ltr" id="">हे परमेश्वर, तू ही हमारा महाराजा है, तू याकूब के उद्धार की आज्ञा देता है।</li>
<li class="ltr" id="">तेरे सहारे से हम अपने द्रोहियों को ढकेलकर गिरा देंगे, तेरे नाम के प्रताप से हम अपने विरोधियों को रौंदेंगे।</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि मैं अपने धनुष पर भरोसा न रखूंगा, और न अपनी तलवार के बल से बचूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">परन्तु तू ही ने हम को द्रोहियोंसे बचाया है, और हमारे बैरियों को निराश और लज्जित किया है।</li>
<li class="ltr" id="">हम परमेश्वर की बड़ाई दिन भर करते रहते हैं, और सदैव तेरे नाम का धन्यवाद करते रहेंगे॥</li>
<li class="ltr" id="">तौभी तू ने अब हम को त्याग दिया और हमारा अनादर किया है, और हमारे दलों के साथ आगे नहीं जाता।</li>
<li class="ltr" id="">0तू हम को शत्रु के साम्हने से हटा देता है, और हमारे बैरी मनमाने लूट मार करते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">1तू ने हमें कसाई की भेडों के समान कर दिया है, और हम को अन्य जातियों में तित्तर बित्तर किया है।</li>
<li class="ltr" id="">2तू अपनी प्रजा को सेंत मेंत बेच डालता है, परन्तु उनके मोल से तू धनी नहीं होता॥</li>
<li class="ltr" id="">3तू हमारे पड़ोसियों में हमारी नामधराई कराता है, और हमारे चारों ओर से रहने वाले हम से हंसी ठट्ठा करते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">4तू हम को अन्यजातियों के बीच में उपमा ठहराता है, और देश देश के लोग हमारे कारण सिर हिलाते हैं। दिन भर हमें तिरस्कार सहना पड़ता है,</li>
<li class="ltr" id="">5और कलंक लगाने और निन्दा करने वाले के बोल से,</li>
<li class="ltr" id="">6और शत्रु और बदला लेने वालों के कारण, बुरा- भला कहने वालों और निन्दा करने वालों के कारण।</li>
<li class="ltr" id="">7यह सब कुछ हम पर बीता तौभी हम तुझे नहीं भूले, न तेरी वाचा के विषय विश्वासघात किया है।</li>
<li class="ltr" id="">8हमारे मन न बहके, न हमारे पैर तरी बाट से मुड़े,</li>
<li class="ltr" id="">9तौभी तू ने हमें गीदड़ों के स्थान में पीस डाला, और हम को घोर अन्धकार में छिपा दिया है॥</li>
<li class="ltr" id="">0यदि हम अपने परमेश्वर का नाम भूल जाते, वा किसी पराए देवता की ओर अपने हाथ फैलाते,</li>
<li class="ltr" id="">1तो क्या परमेश्वर इसका विचार न करता? क्योंकि वह तो मन की गुप्त बातों को जानता है।</li>
<li class="ltr" id="">2परन्तु हम दिन भर तेरे निमित्त मार डाले जाते हैं, और उन भेड़ों के समान समझे जाते हैं जो वध होने पर हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">3हे प्रभु, जाग. तू क्यों सोता है? उठ. हम को सदा के लिये त्याग न दे.</li>
<li class="ltr" id="">4तू क्यों अपना मुंह छिपा लेता है? और हमारा दु:ख और सताया जाना भूल जाता है?</li>
<li class="ltr" id="">5हमारा प्राण मिट्टी से लग गया, हमारा पेट भूमि से सट गया है।</li>
<li class="ltr" id="">6हमारी सहायता के लिये उठ खड़ा हो. और अपनी करूणा के निमित्त हम को छुड़ा ले॥</li>

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भजन संहिता 45
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<li class="ltr" id="">मेरा हृदय एक सुन्दर विषय की उमंग से उमण्ड रहा है, जो बात मैं ने राजा के विषय रची है उसको सुनाता हूं, मेरी जीभ निपुण लेखक की लेखनी बनी है।</li>
<li class="ltr" id="">तू मनुष्य की सन्तानों में परम सुन्दर है, तेरे ओठों में अनुग्रह भरा हुआ है, इसलिये परमेश्वर ने तुझे सदा के लिये आशीष दी है।</li>
<li class="ltr" id="">हे वीर, तू अपनी तलवार को जो तेरा वैभव और प्रताप है अपनी कटि पर बान्ध.</li>
<li class="ltr" id="">सत्यता, नम्रता और धर्म के निमित्त अपने ऐश्वर्य और प्रताप पर सफलता से सवार हो, तेरा दहिना हाथ तुझे भयानक काम सिखलाए.</li>
<li class="ltr" id="">तेरे तीर तो तेज हैं, तेरे साम्हने देश देश के लोग गिरेंगे, राजा के शत्रुओं के हृदय उन से छिदेंगे॥</li>
<li class="ltr" id="">हे परमेश्वर, तेरा सिंहासन सदा सर्वदा बना रहेगा, तेरा राजदण्ड न्याय का है।</li>
<li class="ltr" id="">तू ने धर्म से प्रीति और दुष्टता से बैर रखा है। इस कारण परमेश्वर ने हां तेरे परमेश्वर ने तुझ को तेरे साथियों से अधिक हर्ष के तेल से अभिषेक किया है।</li>
<li class="ltr" id="">तेरे सारे वस्त्र, गन्धरस, अगर, और तेल से सुगन्धित हैं, तू हाथीदांत के मन्दिरों में तार वाले बाजों के कारण आनन्दित हुआ है।</li>
<li class="ltr" id="">तेरी प्रतिष्ठित स्त्रियों में राजकुमारियां भी हैं, तेरी दाहिनी ओर पटरानी, ओपीर के कुन्दन से विभूषित खड़ी है॥</li>
<li class="ltr" id="">0हे राजकुमारी सुन, और कान लगाकर ध्यान दे, अपने लोगों और अपने पिता के घर को भूल जा,</li>
<li class="ltr" id="">1और राजा तेरे रूप की चाह करेगा। क्योंकि वह तो तेरा प्रभु है, तू उसे दण्डवत कर।</li>
<li class="ltr" id="">2सोर की राजकुमारी भी भेंट करने के लिये उपस्थित होगी, प्रजा के धनवान लोग तुझे प्रसन्न करने का यत्न करेंगे॥</li>
<li class="ltr" id="">3राजकुमारी महल में अति शोभायमान है, उसके वस्त्र में सुनहले बूटे कढ़े हुए हैं,</li>
<li class="ltr" id="">4वह बूटेदार वस्त्र पहिने हुए राजा के पास पहुंचाई जाएगी। जो कुमारियां उसकी सहेलियां हैं, वे उसके पीछे पीछे चलती हुई तेरे पास पहुंचाई जाएंगी।</li>
<li class="ltr" id="">5वे आनन्दित और मगन होकर पहुंचाई जाएंगी, और वे राजा के महल में प्रवेश करेंगी॥</li>
<li class="ltr" id="">6तेरे पितरों के स्थान पर तेरे पुत्र होंगे, जिन को तू सारी पृथ्वी पर हाकिम ठहराएगा।</li>
<li class="ltr" id="">7मैं ऐसा करूंगा, कि तेरी नाम की चर्चा पीढ़ी से पीढ़ी तक होती रहेगी, इस कारण देश देश के लोग सदा सर्वदा तेरा धन्यवाद करते रहेंगे॥</li>

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भजन संहिता 46
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<li class="ltr" id="">परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक।</li>
<li class="ltr" id="">इस कारण हम को कोई भय नहीं चाहे पृथ्वी उलट जाए, और पहाड़ समुद्र के बीच में डाल दिए जाएं,</li>
<li class="ltr" id="">चाहे समुद्र गरजे और फेन उठाए, और पहाड़ उसकी बाढ़ से कांप उठें॥</li>
<li class="ltr" id="">एक नदी है जिसकी नहरों से परमेश्वर के नगर में अर्थात परमप्रधान के पवित्र निवास भवन में आनन्द होता है।</li>
<li class="ltr" id="">परमेश्वर उस नगर के बीच में है, वह कभी टलने का नहीं, पौ फटते ही परमेश्वर उसकी सहायता करता है।</li>
<li class="ltr" id="">जाति जाति के लोग झल्ला उठे, राज्य राज्य के लोग डगमगाने लगे, वह बोल उठा, और पृथ्वी पिघल गई।</li>
<li class="ltr" id="">सेनाओं का यहोवा हमारे संग है, याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है॥</li>
<li class="ltr" id="">आओ, यहोवा के महाकर्म देखो, कि उसने पृथ्वी पर कैसा कैसा उजाड़ किया है।</li>
<li class="ltr" id="">वह पृथ्वी की छोर तक लड़ाइयों को मिटाता है, वह धनुष को तोड़ता, और भाले को दो टुकड़े कर डालता है, और रथों को आग में झोंक देता है.</li>
<li class="ltr" id="">0चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं.</li>
<li class="ltr" id="">1सेनाओं का यहोवा हमारे संग है, याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है॥</li>

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भजन संहिता 47
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<li class="ltr" id="">हे देश देश के सब लोगों, तालियां बजाओ. ऊंचे शब्द से परमेश्वर के लिये जयजयकार करो.</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि यहोवा परमप्रधान और भययोग्य है, वह सारी पृथ्वी के ऊपर महाराजा है।</li>
<li class="ltr" id="">वह देश के लोगों को हमारे सम्मुख नीचा करता, और अन्यजातियों को हमारे पांवों के नीचे कर देता है।</li>
<li class="ltr" id="">वह हमारे लिये उत्तम भाग चुन लेगा, जो उसके प्रिय याकूब के घमण्ड का कारण है॥</li>
<li class="ltr" id="">परमेश्वर जयजयकार सहित, यहोवा नरसिंगे के शब्द के साथ ऊपर गया है।</li>
<li class="ltr" id="">परमेश्वर का भजन गाओ, भजन गाओ. हमारे महाराजा का भजन गाओ, भजन गाओ.</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि परमेश्वर सारी पृथ्वी का महाराजा है, समझ बूझकर बुद्धि से भजन गाओ</li>
<li class="ltr" id="">परमेश्वर जाति जाति पर राज्य करता है, परमेश्वर अपने पवित्र सिंहासन पर विराजमान है।</li>
<li class="ltr" id="">राज्य राज्य के रईस इब्राहीम के परमेश्वर की प्रजा होने के लिये इकट्ठे हुए हैं। क्योंकि पृथ्वी की ढालें परमेश्वर के वश में हैं, वह तो शिरोमणि है.</li>

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भजन संहिता 48
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<li class="ltr" id="">हमारे परमेश्वर के नगर में, और अपने पवित्र पर्वत पर यहोवा महान और अति स्तुति के योग्य है.</li>
<li class="ltr" id="">सिय्योन पर्वत ऊंचाई में सुन्दर और सारी पृथ्वी के हर्ष का कारण है, राजाधिराज का नगर उत्तरी सिरे पर है।</li>
<li class="ltr" id="">उसके महलों में परमेश्वर ऊंचा गढ़ माना गया है।</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि देखो, राजा लोग इकट्ठे हुए, वे एक संग आगे बढ़ गए।</li>
<li class="ltr" id="">उन्होंने आप ही देखा और देखते ही विस्मित हुए, वे घबराकर भाग गए।</li>
<li class="ltr" id="">वहां कपकपी ने उन को आ पकड़ा, और जच्चा की सी पीड़ाएं उन्हें होने लगीं।</li>
<li class="ltr" id="">तू पूर्वी वायु से तर्शीश के जहाजों को तोड़ डालता है।</li>
<li class="ltr" id="">सेनाओं के यहोवा के नगर में, अपने परमेश्वर के नगर में, जैसा हम ने सुना था, वैसा देखा भी है, परमेश्वर उसको सदा दृढ़ और स्थिर रखेगा॥</li>
<li class="ltr" id="">हे परमेश्वर हम ने तेरे मन्दिर के भीतर तेरी करूणा पर ध्यान किया है।</li>
<li class="ltr" id="">0हे परमेश्वर तेरे नाम के योग्य तेरी स्तुति पृथ्वी की छोर तक होती है। तेरा दाहिना हाथ धर्म से भरा है,</li>
<li class="ltr" id="">1तेरे न्याय के कामों के कारण सिय्योन पर्वत आनन्द करे, और यहूदा के नगर की पुत्रियां मगन हों.</li>
<li class="ltr" id="">2सिय्योन के चारों ओर चलो, और उसकी परिक्रमा करो, उसके गुम्मटों को गिन लो,</li>
<li class="ltr" id="">3उसकी शहरपनाह पर दृष्टि लगाओ, उसके महलों को ध्यान से देखो, जिस से कि तुम आने वाली पीढ़ी के लोगों से इस बात का वर्णन कर सको।</li>
<li class="ltr" id="">4क्योंकि वह परमेश्वर सदा सर्वदा हमारा परमेश्वर है, वह मृत्यु तक हमारी अगुवाई करेगा॥</li>

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भजन संहिता 49
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<li class="ltr" id="">हे देश देश के सब लोगों यह सुनो. हे संसार के सब निवासियों, कान लगाओ.</li>
<li class="ltr" id="">क्या ऊंच, क्या नीच क्या धनी, क्या दरिद्र, कान लगाओ.</li>
<li class="ltr" id="">मेरे मुंह से बुद्धि की बातें निकलेंगी, और मेरे हृदय की बातें समझ की होंगी।</li>
<li class="ltr" id="">मैं नीतिवचन की ओर अपना कान लगाऊंगा, मैं वीणा बजाते हुए अपनी गुप्त बात प्रकाशित करूंगा॥</li>
<li class="ltr" id="">विपत्ति के दिनों में जब मैं अपने अड़ंगा मारने वालों की बुराइयों से घिरूं, तब मैं क्यों डरूं?</li>
<li class="ltr" id="">जो अपनी सम्पत्ति पर भरोसा रखते, और अपने धन की बहुतायत पर फूलते हैं,</li>
<li class="ltr" id="">उन में से कोई अपने भाई को किसी भांति छुड़ा नहीं सकता है, और न परमेश्वर को उसकी सन्ती प्रायश्चित्त में कुछ दे सकता है,</li>
<li class="ltr" id="">(क्योंकि उनके प्राण की छुड़ौती भारी है वह अन्त तक कभी न चुका सकेंगे)।</li>
<li class="ltr" id="">कोई ऐसा नहीं जो सदैव जीवित रहे, और कब्र को न देखे॥</li>
<li class="ltr" id="">0क्योंकि देखने में आता है, कि बुद्धिमान भी मरते हैं, और मूर्ख और पशु सरीखे मनुष्य भी दोनोंनाश होते हैं, और अपनी सम्पत्ति औरों के लिये छोड़ जाते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">1वे मन ही मन यह सोचते हैं, कि उनका घर सदा स्थिर रहेगा, और उनके निवास पीढ़ी से पीढ़ी तक बने रहेंगे, इसलिये वे अपनी अपनी भूमि का नाम अपने अपने नाम पर रखते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">2परन्तु मनुष्य प्रतिष्ठा पाकर भी स्थिर नहीं रहता, वह पशुओं के समान होता है, जो मर मिटते हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">3उनकी यह चाल उनकी मूर्खता है, तौभी उनके बाद लोग उनकी बातों से प्रसन्न होते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">4वे अधोलोक की मानों भेड़- बकरियां ठहराए गए हैं, मृत्यु उनका गड़ेरिया ठहरी, और बिहान को सीधे लोग उन पर प्रभुता करेंगे, और उनका सुन्दर रूप अधोलोक का कौर हो जाएगा और उनका कोई आधार न रहेगा।</li>
<li class="ltr" id="">5परन्तु परमेश्वर मेरे प्राण को अधोलोक के वश से छुड़ा लेगा, क्योंकि वही मुझे ग्रहण कर अपनाएगा॥</li>
<li class="ltr" id="">6जब कोई धनी हो जाए और उसके घर का वैभव बढ़ जाए, तब तू भय न खाना।</li>
<li class="ltr" id="">7क्योंकि वह मर कर कुछ भी साथ न ले जाएगा, न उसका वैभव उसके साथ कब्र में जाएगा।</li>
<li class="ltr" id="">8चाहे वह जीते जी अपने आप को धन्य कहता रहे, (जब तू अपनी भलाई करता है, तब वे लोग तेरी प्रशंसा करते हैं)</li>
<li class="ltr" id="">9तौभी वह अपने पुरखाओं के समाज में मिलाया जाएगा, जो कभी उजियाला न देखेंगे।</li>
<li class="ltr" id="">0मनुष्य चाहे प्रतिष्ठित भी हों परन्तु यदि वे समझ नहीं रखते, तो वे पशुओं के समान हैं जो मर मिटते हैं॥</li>

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भजन संहिता 50
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<li class="ltr" id="">ईश्वर परमेश्वर यहोवा ने कहा है, और उदयाचल से लेकर अस्ताचल तक पृथ्वी के लोगों को बुलाया है।</li>
<li class="ltr" id="">सिय्योन से, जो परम सुन्दर है, परमेश्वर ने अपना तेज दिखाया है।</li>
<li class="ltr" id="">हमारा परमेश्वर आएगा और चुपचाप न रहेगा, आग उसके आगे आगे भस्म करती जाएगी, और उसके चारों ओर बड़ी आंधी चलेगी।</li>
<li class="ltr" id="">वह अपनी प्रजा का न्याय करने के लिये ऊपर से आकाश को और पृथ्वी को भी पुकारेगा:</li>
<li class="ltr" id="">मेरे भक्तों को मेरे पास इकट्ठा करो, जिन्होंने बलिदान चढ़ाकर मुझ से वाचा बान्धी है.</li>
<li class="ltr" id="">और स्वर्ग उसके धर्मी होने का प्रचार करेगा क्योंकि परमेश्वर तो आप ही न्यायी है॥</li>
<li class="ltr" id="">हे मेरी प्रजा, सुन, मैं बोलता हूं, और हे इस्राएल, मैं तेरे विषय साक्षी देता हूं। परमेश्वर तेरा परमेश्वर मैं ही हूं।</li>
<li class="ltr" id="">मैं तुझ पर तेरे मेल बलियों के विषय दोष नहीं लगाता, तेरे होमबलि तो नित्य मेरे लिये चढ़ते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">मैं न तो तेरे घर से बैल न तेरे पशुशालों से बकरे ले लूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">0क्योंकि वन के सारे जीवजन्तु और हजारों पहाड़ों के जानवर मेरे ही हैं।</li>
<li class="ltr" id="">1पहाड़ों के सब पक्षियों को मैं जानता हूं, और मैदान पर चलने फिरने वाले जानवार मेरे ही हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">2यदि मैं भूखा होता तो तुझ से न कहता, क्योंकि जगत और जो कुछ उस में है वह मेरा है।</li>
<li class="ltr" id="">3क्या मैं बैल का मांस खाऊं, वा बकरों का लोहू पीऊं?</li>
<li class="ltr" id="">4परमेश्वर को धन्यवाद ही का बलिदान चढ़ा, और परमप्रधान के लिये अपनी मन्नतें पूरी कर,</li>
<li class="ltr" id="">5और संकट के दिन मुझे पुकार, मैं तुझे छुड़ाऊंगा, और तू मेरी महिमा करने पाएगा॥</li>
<li class="ltr" id="">6परन्तु दुष्ट से परमेश्वर कहता है: तुझे मेरी विधियों का वर्णन करने से क्या काम? तू मेरी वाचा की चर्चा क्यों करता है?</li>
<li class="ltr" id="">7तू तो शिक्षा से बैर करता, और मेरे वचनों को तुच्छ जानता है।</li>
<li class="ltr" id="">8जब तू ने चोर को देखा, तब उसकी संगति से प्रसन्न हुआ, और परस्त्रीगामियों के साथ भागी हुआ॥</li>
<li class="ltr" id="">9तू ने अपना मुंह बुराई करने के लिये खोला, और तेरी जीभ छल की बातें गढ़ती है।</li>
<li class="ltr" id="">0तू बैठा हुआ अपने भाई के विरुद्ध बोलता, और अपने सगे भाई की चुगली खाता है।</li>
<li class="ltr" id="">1यह काम तू ने किया, और मैं चुप रहा, इसलिये तू ने समझ लिया कि परमेश्वर बिलकुल मेरे समान है। परन्तु मैं तुझे समझाऊंगा, और तेरी आंखों के साम्हने सब कुछ अलग अलग दिखाऊंगा॥</li>
<li class="ltr" id="">2हे ईश्वर को भूलने वालों यह बात भली भांति समझ लो, कहीं ऐसा न हो कि मैं तुम्हें फाड़ डालूं, और कोई छुड़ाने वाला न हो.</li>
<li class="ltr" id="">3धन्यवाद के बलिदान का चढ़ाने वाला मेरी महिमा करता है, और जो अपना चरित्र उत्तम रखता है उसको मैं परमेश्वर का किया हुआ उद्धार दिखाऊंगा.</li>

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भजन संहिता 51
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<li class="ltr" id="">हे परमेश्वर, अपनी करूणा के अनुसार मुझ पर अनुग्रह कर, अपनी बड़ी दया के अनुसार मेरे अपराधों को मिटा दे।</li>
<li class="ltr" id="">मुझे भलीं भांति धोकर मेरा अधर्म दूर कर, और मेरा पाप छुड़ाकर मुझे शुद्ध कर.</li>
<li class="ltr" id="">मैं तो अपने अपराधों को जानता हूं, और मेरा पाप निरन्तर मेरी दृष्टि में रहता है।</li>
<li class="ltr" id="">मैं ने केवल तेरे ही विरुद्ध पाप किया, और जो तेरी दृष्टि में बुरा है, वही किया है, ताकि तू बोलने में धर्मी और न्याय करने में निष्कलंक ठहरे।</li>
<li class="ltr" id="">देख, मैं अधर्म के साथ उत्पन्न हुआ, और पाप के साथ अपनी माता के गर्भ में पड़ा॥</li>
<li class="ltr" id="">देख, तू हृदय की सच्चाई से प्रसन्न होता है, और मेरे मन ही में ज्ञान सिखाएगा।</li>
<li class="ltr" id="">जूफा से मुझे शुद्ध कर, तो मैं पवित्र हो जाऊंगा, मुझे धो, और मैं हिम से भी अधिक श्वेत बनूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">मुझे हर्ष और आनन्द की बातें सुना, जिस से जो हडि्डयां तू ने तोड़ डाली हैं वह मगन हो जाएं।</li>
<li class="ltr" id="">अपना मुख मेरे पापों की ओर से फेर ले, और मेरे सारे अधर्म के कामों को मिटा डाल॥</li>
<li class="ltr" id="">0हे परमेश्वर, मेरे अन्दर शुद्ध मन उत्पन्न कर, और मेरे भीतर स्थिर आत्मा नये सिरे से उत्पन्न कर।</li>
<li class="ltr" id="">1मुझे अपने साम्हने से निकाल न दे, और अपने पवित्र आत्मा को मुझ से अलग न कर।</li>
<li class="ltr" id="">2अपने किए हुए उद्धार का हर्ष मुझे फिर से दे, और उदार आत्मा देकर मुझे सम्भाल॥</li>
<li class="ltr" id="">3तब मैं अपराधियों को तेरा मार्ग सिखाऊंगा, और पापी तेरी ओर फिरेंगे।</li>
<li class="ltr" id="">4हे परमेश्वर, हे मेरे उद्धारकर्ता परमेश्वर, मुझे हत्या के अपराध से छुड़ा ले, तब मैं तेरे धर्म का जयजयकार करने पाऊंगा॥</li>
<li class="ltr" id="">5हे प्रभु, मेरा मुंह खोल दे तब मैं तेरा गुणानुवाद कर सकूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">6क्योंकि तू मेलबलि से प्रसन्न नहीं होता, नहीं तो मैं देता, होमबलि से भी तू प्रसन्न नहीं होता।</li>
<li class="ltr" id="">7टूटा मन परमेश्वर के योग्य बलिदान है, हे परमेश्वर, तू टूटे और पिसे हुए मन को तुच्छ नहीं जानता॥</li>
<li class="ltr" id="">8प्रसन्न होकर सिय्योन की भलाई कर, यरूशलेम की शहरपनाह को तू बना,</li>
<li class="ltr" id="">9तब तू धर्म के बलिदानों से अर्थात सर्वांग पशुओं के होमबलि से प्रसन्न होगा, तब लोग तेरी वेदी पर बैल चढ़ाएंगे॥</li>

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भजन संहिता 52
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<li class="ltr" id="">हे वीर, तू बुराई करने पर क्यों घमण्ड करता है? ईश्वर की करूणा तो अनन्त है।</li>
<li class="ltr" id="">तेरी जीभ केवल दुष्टता गढ़ती है, सान धरे हुए अस्तुरे की नाईं वह छल का काम करती है।</li>
<li class="ltr" id="">तू भलाई से बढ़कर बुराई में और धर्म की बात से बढ़कर झूठ से प्रीति रखता है।</li>
<li class="ltr" id="">हे छली जीभ तू सब विनाश करने वाली बातों से प्रसन्न रहती है॥</li>
<li class="ltr" id="">हे ईश्वर तुझे सदा के लिये नाश कर देगा, वह तुझे पकड़ कर तेरे डेरे से निकाल देगा, और जीवतों के लोक में से तुझे उखाड़ डालेगा।</li>
<li class="ltr" id="">तब धर्मी लोग इस घटना को देखकर डर जाएंगे, और यह कहकर उस पर हंसेंगे, कि</li>
<li class="ltr" id="">देखो, यह वही पुरूष है जिसने परमेश्वर को अपनी शरण नहीं माना, परन्तु अपने धन की बहुतायत पर भरोसा रखता था, और अपने को दुष्टता में दृढ़ करता रहा.</li>
<li class="ltr" id="">परन्तु मैं तो परमेश्वर के भवन में हरे जलपाई के वृक्ष के समान हूं। मैं ने परमेश्वर की करूणा पर सदा सर्वदा के लिये भरोसा रखा है।</li>
<li class="ltr" id="">मैं तेरा धन्यवाद सर्वदा करता रहूंगा, क्योंकि तू ही ने यह काम किया है। मैं तेरे ही नाम की बाट जोहता रहूंगा, क्योंकि यह तेरे पवित्र भक्तों के साम्हने उत्तम है॥</li>

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भजन संहिता 53
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<li class="ltr" id="">मूढ़ ने अपने मन में कहा है, कि कोई परमेश्वर है ही नहीं। वे बिगड़ गए, उन्होंने कुटिलता के घिनौने काम किए हैं, कोई सुकर्मी नहीं॥</li>
<li class="ltr" id="">परमेश्वर ने स्वर्ग पर से मनुष्यों के ऊपर दृष्टि की ताकि देखे कि कोई बुद्धि से चलने वाला वा परमेश्वर को पूछने वाला है कि नहीं॥</li>
<li class="ltr" id="">वे सब के सब हट गए, सब एक साथ बिगड़ गए, कोई सुकर्मी नहीं, एक भी नहीं॥ क्या उन सब अनर्थकारियों को कुछ भी ज्ञान नहीं?</li>
<li class="ltr" id="">जो मेरे लोगों को ऐसे खाते हैं जैसे रोटी और परमेश्वर का नाम नहीं लेते?</li>
<li class="ltr" id="">वहां उन पर भय छा गया जहां भय का कोई कारण न था। क्योंकि यहोवा ने उनकी हडि्डयों को, जो तेरे विरुद्ध छावनी डाले पड़े थे, तितर बितर कर दिया, तू ने तो उन्हें लज्जित कर दिया इसलिये कि परमेश्वर ने उन को निकम्मा ठहराया है॥</li>
<li class="ltr" id="">भला होता कि इस्राएल का पूरा उद्धार सिय्योन से निकलता. जब परमेश्वर अपनी प्रजा को बन्धुवाई से लौटा ले आएगा तब याकूब मगन और इस्राएल आनन्दित होगा॥</li>

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भजन संहिता 54
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<li class="ltr" id="">हे परमेश्वर अपने नाम के द्वारा मेरा उद्धार कर, और अपने पराक्रम से मेरा न्याय कर।</li>
<li class="ltr" id="">हे परमेश्वर, मेरी प्रार्थना सुन ले, मेरे मुंह के वचनों की ओर कान लगा॥</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि परदेशी मेरे विरुद्ध उठे हैं, और बलात्कारी मेरे प्राण के ग्राहक हुए हैं, उन्होंने परमेश्वर को अपने सम्मुख नहीं जाना॥</li>
<li class="ltr" id="">देखो, परमेश्वर मेरा सहायक है, प्रभु मेरे प्राण के सम्भालने वालों के संग है।</li>
<li class="ltr" id="">वह मेरे द्रोहियों की बुराई को उन्हीं पर लौटा देगा, हे परमेश्वर, अपनी सच्चाई के कारण उन्हें विनाश कर॥</li>
<li class="ltr" id="">मैं तुझे स्वेच्छाबलि चढ़ाऊंगा, हे यहोवा, मैं तेरे नाम का धन्यवाद करूंगा, क्योंकि यह उत्तम है।</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि तू ने मुझे सब दुखों से छुड़ाया है, और मैं अपने शत्रुओं पर दृष्टि करके सन्तुष्ट हुआ हूं॥</li>

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भजन संहिता 55
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<li class="ltr" id="">हे परमेश्वर, मेरी प्रार्थना की ओर कान लगा, और मेरी गिड़गिड़ाहट से मुंह न मोड़.</li>
<li class="ltr" id="">मेरी ओर ध्यान देकर, मुझे उत्तर दे, मैं चिन्ता के मारे छटपटाता हूं और व्याकुल रहता हूं।</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि शत्रु कोलाहल और दुष्ट उपद्रव कर रहें हैं, वे मुझ पर दोषारोपण करते हैं, और क्रोध में आकर मुझे सताते हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">मेरा मन भीतर ही भीतर संकट में है, और मृत्यु का भय मुझ में समा गया है।</li>
<li class="ltr" id="">भय और कंपकपी ने मुझे पकड़ लिया है, और भय के कारण मेरे रोंए रोंए खड़े हो गए हैं।</li>
<li class="ltr" id="">और मैं ने कहा, भला होता कि मेरे कबूतर के से पंख होते तो मैं उड़ जाता और विश्राम पाता.</li>
<li class="ltr" id="">देखो, फिर तो मैं उड़ते उड़ते दूर निकल जाता और जंगल में बसेरा लेता,</li>
<li class="ltr" id="">मैं प्रचण्ड बयार और आन्धी के झोंके से बचकर किसी शरण स्थान में भाग जाता॥</li>
<li class="ltr" id="">हे प्रभु, उन को सत्यानाश कर, और उनकी भाषा में गड़बड़ी डाल दे, क्योंकि मैं ने नगर में उपद्रव और झगड़ा देखा है।</li>
<li class="ltr" id="">0रात दिन वे उसकी शहरपनाह पर चढ़कर चारों ओर घूमते हैं, और उसके भीतर दुष्टता और उत्पात होता है।</li>
<li class="ltr" id="">1उसके भीतर दुष्टता ने बसेरा डाला है, और अन्धेर, अत्याचार और छल उसके चौक से दूर नहीं होते॥</li>
<li class="ltr" id="">2जो मेरी नामधराई करता है वह शत्रु नहीं था, नहीं तो मैं उसको सह लेता, जो मेरे विरुद्ध बड़ाई मारता है वह मेरा बैरी नहीं है, नहीं तो मैं उससे छिप जाता।</li>
<li class="ltr" id="">3परन्तु वह तो तू ही था जो मेरी बराबरी का मनुष्य मेरा परममित्र और मेरी जान पहचान का था।</li>
<li class="ltr" id="">4हम दोनों आपस में कैसी मीठी मीठी बातें करते थे, हम भीड़ के साथ परमेश्वर के भवन को जाते थे।</li>
<li class="ltr" id="">5उन को मृत्यु अचानक आ दबाए, वे जीवित ही अधोलोक में उतर जाएं, क्योंकि उनके घर और मन दोनों में बुराइयां और उत्पात भरा है॥</li>
<li class="ltr" id="">6परन्तु मैं तो परमेश्वर को पुकारूंगा, और यहोवा मुझे बचा लेगा।</li>
<li class="ltr" id="">7सांझ को, भोर को, दोपहर को, तीनों पहर मैं दोहाई दूंगा और कराहता रहूंगा। और वह मेरा शब्द सुन लेगा।</li>
<li class="ltr" id="">8जो लड़ाई मेरे विरुद्ध मची थी उससे उसने मुझे कुशल के साथ बचा लिया है। उन्होंने तो बहुतों को संग लेकर मेरा साम्हना किया था।</li>
<li class="ltr" id="">9ईश्वर जो आदि से विराजमान है यह सुनकर उन को उत्तर देगा। ये वे हैं जिन में कोई परिवर्तन नहीं और उन में परमेश्वर का भय है ही नहीं॥</li>
<li class="ltr" id="">0उसने अपने मेल रखने वालों पर भी हाथ छोड़ा है, उसने अपनी वाचा को तोड़ दिया है।</li>
<li class="ltr" id="">1उसके मुंह की बातें तो मक्खन सी चिकनी थी परन्तु उसके मन में लड़ाई की बातें थीं, उसके वचन तेल से अधिक नरम तो थे परन्तु नंगी तलवारें थीं॥</li>
<li class="ltr" id="">2अपना बोझ यहोवा पर डाल दे वह तुझे सम्भालेगा, वह धर्मी को कभी टलने न देगा॥</li>
<li class="ltr" id="">3परन्तु हे परमेश्वर, तू उन लोगों को विनाश के गड़हे में गिरा देगा, हत्यारे और छली मनुष्य अपनी आधी आयु तक भी जीवित न रहेंगे। परन्तु मैं तुझ पर भरोसा रखे रहूंगा॥</li>

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भजन संहिता 56
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<li class="ltr" id="">हे परमेश्वर, मुझ पर अनुग्रह कर, क्योंकि मनुष्य मुझे निगलना चाहते हैं। वे दिन भर लड़कर मुझे सताते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">मेरे द्रोही दिन भर मुझे निगलना चाहते हैं, क्योंकि जो लोग अभिमान करके मुझ से लड़ते हैं वे बहुत हैं।</li>
<li class="ltr" id="">जिस समय मुझे डर लगेगा, मैं तुझ पर भरोसा रखूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">परमेश्वर की सहायता से मैं उसके वचन की प्रशंसा करूंगा, परमेश्वर पर मैं ने भरोसा रखा है, मैं नहीं डरूंगा। कोई प्राणी मेरा क्या कर सकता है?</li>
<li class="ltr" id="">वे दिन भर मेरे वचनों को, उलटा अर्थ लगा लगाकर मरोड़ते रहते हैं उनकी सारी कल्पनाएं मेरी ही बुराई करने की होती है।</li>
<li class="ltr" id="">वे सब मिलकर इकट्ठे होते हैं और छिपकर बैठते हैं, वे मेरे कदमों को देखते भालते हैं मानों वे मेरे प्राणों की घात में ताक लगाए बैठें हों।</li>
<li class="ltr" id="">क्या वे बुराई करके भी बच जाएंगे? हे परमेश्वर, अपने क्रोध से देश देश के लोगों को गिरा दे.</li>
<li class="ltr" id="">तू मेरे मारे मारे फिरने का हिसाब रखता है, तू मेरे आंसुओं को अपनी कुप्पी में रख ले. क्या उनकी चर्चा तेरी पुस्तक में नहीं है?</li>
<li class="ltr" id="">जब जिस समय मैं पुकारूंगा, उसी समय मेरे शत्रु उलटे फिरेंगे। यह मैं जानता हूं, कि परमेश्वर मेरी ओर है।</li>
<li class="ltr" id="">0परमेश्वर की सहायता से मैं उसके वचन की प्रशंसा करूंगा, यहोवा की सहायता से मैं उसके वचन की प्रशंसा करूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">1मैं ने परमेश्वर पर भरोसा रखा है, मैं न डरूंगा। मनुष्य मेरा क्या कर सकता है?</li>
<li class="ltr" id="">2हे परमेश्वर, तेरी मन्नतों का भार मुझ पर बना है, मैं तुझ को धन्यवाद बलि चढ़ाऊंगा।</li>
<li class="ltr" id="">3क्योंकि तू ने मुझ को मृत्यु से बचाया है, तू ने मेरे पैरों को भी फिसलने से बचाया है, ताकि मैं ईश्वर के साम्हने जीवतों के उजियाले में चलूं फिरूं?</li>

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भजन संहिता 57
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<li class="ltr" id="">हे परमेश्वर, मुझ पर अनुग्रह कर, मुझ पर अनुग्रह कर, क्योंकि मैं तेरा शरणागत हूं, और जब तक ये आपत्तियां निकल न जाएं, तब तक मैं तेरे पंखों के तले शरण लिए रहूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">मैं परम प्रधान परमेश्वर को पुकारूंगा, ईश्वर को जो मेरे लिये सब कुछ सिद्ध करता है।</li>
<li class="ltr" id="">ईश्वर स्वर्ग से भेजकर मुझे बचा लेगा, जब मेरा निगलने वाला निन्दा कर रहा हो। परमेश्वर अपनी करूणा और सच्चाई प्रगट करेगा॥</li>
<li class="ltr" id="">मेरा प्राण सिंहों के बीच में है, मुझे जलते हुओं के बीच में लेटना पड़ता है, अर्थात ऐसे मनुष्यों के बीच में जिन के दांत बर्छी और तीर हैं, और जिनकी जीभ तेज तलवार है॥</li>
<li class="ltr" id="">हे परमेश्वर तू स्वर्ग के ऊपर अति महान और तेजोमय है, तेरी महिमा सारी पृथ्वी के ऊपर फैल जाए.</li>
<li class="ltr" id="">उन्होंने मेरे पैरों के लिये जाल लगाया है, मेरा प्राण ढला जाता है। उन्होंने मेरे आगे गड़हा खोदा, परन्तु आप ही उस में गिर पड़े॥</li>
<li class="ltr" id="">हे परमेश्वर, मेरा मन स्थिर है, मेरा मन स्थिर है, मैं गाऊंगा वरन भजन कीर्तन करूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">हे मेरी आत्मा जाग जा. हे सारंगी और वीणा जाग जाओ। मैं भी पौ फटते ही जाग उठूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">हे प्रभु, मैं देश के लोगों के बीच तेरा धन्यवाद करूंगा, मैं राज्य राज्य के लोगों के बीच में तेरा भजन गाऊंगा।</li>
<li class="ltr" id="">0क्योंकि तेरी करूणा स्वर्ग तक बड़ी है, और तेरी सच्चाई आकाशमण्डल तक पहुंचती है॥</li>
<li class="ltr" id="">1हे परमेश्वर, तू स्वर्ग के ऊपर अति महान है. तेरी महिमा सारी पृथ्वी के ऊपर फैल जाए.</li>

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भजन संहिता 58
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<li class="ltr" id="">हे मनुष्यों, क्या तुम सचमुच धर्म की बात बोलते हो? और हे मनुष्यवंशियों क्या तुम सीधाई से न्याय करते हो?</li>
<li class="ltr" id="">नहीं, तुम मन ही मन में कुटिल काम करते हो, तुम देश भर में उपद्रव करते जाते हो॥</li>
<li class="ltr" id="">दुष्ट लोग जन्मते ही पराए हो जाते हैं, वे पेट से निकलते ही झूठ बोलते हुए भटक जाते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">उन में सर्प का सा विष है, वे उस नाम के समान हैं, जो सुनना नहीं चाहता,</li>
<li class="ltr" id="">और सपेरा कैसी ही निपुणता से क्योंन मंत्र पढ़े, तौभी उसकी नहीं सुनता॥</li>
<li class="ltr" id="">हे परमेश्वर, उनके मुंह में से दांतों को तोड़ दे, हे यहोवा उन जवान सिंहों की दाढ़ों को उखाड़ डाल.</li>
<li class="ltr" id="">वे घुलकर बहते हुए पानी के समान हो जाएं, जब वे अपने तीर चढ़ाएं, तब तीर मानों दो टुकड़े हो जाएं।</li>
<li class="ltr" id="">वे घोंघे के समान हो जाएं जो घुलकर नाश हो जाता है, और स्त्री के गिरे हुए गर्भ के समान हो जिसने सूरज को देखा ही नहीं।</li>
<li class="ltr" id="">उससे पहिले कि तुम्हारी हांडियों में कांटों की आंच लगे, हरे व जले, दोनों को वह बवंडर से उड़ा ले जाएगा॥</li>
<li class="ltr" id="">0धर्मी ऐसा पलटा देखकर आनन्दित होगा, वह अपने पांव दुष्ट के लोहू में धोएगा॥</li>
<li class="ltr" id="">1तब मनुष्य कहने लगेंगे, निश्चय धर्मी के लिये फल है, निश्चय परमेश्वर है, जो पृथ्वी पर न्याय करता है॥</li>

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भजन संहिता 59
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<li class="ltr" id="">हे मेरे परमेश्वर, मुझ को शत्रुओं से बचा, मुझे ऊंचे स्थान पर रखकर मेरे विरोधियों से बचा,</li>
<li class="ltr" id="">मुझ को बुराई करने वालों के हाथ से बचा, और हत्यारों से मेरा उद्धार कर॥</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि देख, वे मेरी घात में लगे हैं, हे यहोवा, मेरा कोई दोष वा पाप नहीं है, तौभी बलवन्त लोग मेरे विरुद्ध इकट्ठे होते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">वह मुझ निर्दोष पर दौड़ें, दौड़कर लड़ने को तैयार हो जाते हैं॥ मुझ से मिलने के लिये जाग उठ, और यह देख.</li>
<li class="ltr" id="">हे सेनाओं के परमेश्वर यहोवा, हे इस्राएल के परमेश्वर सब अन्यजाति वालों को दण्ड देने के लिये जाग, किसी विश्वासघाती अत्याचारी पर अनुग्रह न कर॥</li>
<li class="ltr" id="">वे लोग सांझ को लौटकर कुत्ते की नाईं गुर्राते हैं, और नगर के चारों ओर घूमते हैं। देख वे डकारते हैं,</li>
<li class="ltr" id="">उनके मुंह के भीतर तलवारें हैं, क्योंकि वे कहते हैं, कौन सुनता है?</li>
<li class="ltr" id="">परन्तु हे यहोवा, तू उन पर हंसेगा, तू सब अन्य जातियों को ठट्ठों में उड़ाएगा।</li>
<li class="ltr" id="">हे मेरे बल, मुझे तेरी ही आस होगी, क्योंकि परमेश्वर मेरा ऊंचा गढ़ है॥</li>
<li class="ltr" id="">0परमेश्वर करूणा करता हुआ मुझ से मिलेगा, परमेश्वर मेरे द्रोहियों के विषय मेरी इच्छा पूरी कर देगा॥</li>
<li class="ltr" id="">1उन्हें घात न कर, न हो कि मेरी प्रजा भूल जाए, हे प्रभु, हे हमारी ढाल. अपनी शक्ति से उन्हें तितर बितर कर, उन्हें दबा दे।</li>
<li class="ltr" id="">2वह अपने मुंह के पाप, और ओठों के वचन, और शाप देने, और झूठ बोलने के कारण, अभिमान में फंसे हुए पकड़े जाएं।</li>
<li class="ltr" id="">3जलजलाहट में आकर उनका अन्त कर, उनका अन्त कर दे ताकि वे नष्ट हो जाएं तब लोग जानेंगे कि परमेश्वर याकूब पर, वरन पृथ्वी की छोर तक प्रभुता करता है॥</li>
<li class="ltr" id="">4वे सांझ को लौटकर कुत्ते की नाईं गुर्राएं, और नगर के चारों ओर घूमें।</li>
<li class="ltr" id="">5वे टुकड़े के लिये मारे मारे फिरें, और तृप्त न होने पर रात भर वहीं ठहरे रहें॥</li>
<li class="ltr" id="">6परन्तु मैं तेरी सामर्थ्य का यश गाऊंगा, और भोर को तेरी करूणा का जयजयकार करूंगा। क्योंकि तू मेरा ऊंचा गढ़ है, और संकट के समय मेरा शरणस्थान ठहरा है।</li>
<li class="ltr" id="">7हे मेरे बल, मैं तेरा भजन गाऊंगा, क्योंकि हे परमेश्वर, तू मेरा ऊंचा गढ़ और मेरा करूणामय परमेश्वर है॥</li>

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भजन संहिता 60
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<li class="ltr" id="">हे परमेश्वर तू ने हम को त्याग दिया, और हम को तोड़ डाला है, तू क्रोधित हुआ, फिर हम को ज्यों का त्यों कर दे।</li>
<li class="ltr" id="">तू ने भूमि को कंपाया और फाड़ डाला है, उसकी दरारों को भर दे, क्योंकि वह डगमगा रही है।</li>
<li class="ltr" id="">तू ने अपनी प्रजा को कठिन दु:ख भुगताया, तू ने हमें लड़खड़ा देने वाला दाखमधु पिलाया है॥</li>
<li class="ltr" id="">तू ने अपने डरवैयों को झण्डा दिया है, कि वह सच्चाई के कारण फहराया जाए।</li>
<li class="ltr" id="">तू अपने दाहिने हाथ से बचा, और हमारी सुन ले कि तेरे प्रिय छुड़ाए जाएं॥</li>
<li class="ltr" id="">परमेश्वर पवित्रता के साथ बोला है मैं प्रफुल्लित हूंगा, मैं शकेम को बांट लूंगा, और सुक्कोत की तराई को नपवाऊंगा।</li>
<li class="ltr" id="">गिलाद मेरा है, मनश्शे भी मेरा है, और एप्रैम मेरे सिर का टोप, यहूदा मेरा राजदण्ड है।</li>
<li class="ltr" id="">मोआब मेरे धोने का पात्रा है, मैं एदोम पर अपना जूता फेंकूंगा, हे पलिश्तीन मेरे ही कारण जयजयकार कर॥</li>
<li class="ltr" id="">मुझे गढ़ वाले नगर में कौन पहुंचाएगा? एदोम तक मेरी अगुवाई किस ने की है?</li>
<li class="ltr" id="">0हे परमेश्वर, क्या तू ने हम को त्याग नही दिया? हे परमेश्वर, तू हमारी सेना के साथ नहीं जाता।</li>
<li class="ltr" id="">1द्रोही के विरुद्ध हमारी सहायता कर, क्योंकि मनुष्य का किया हुआ छुटकारा व्यर्थ होता है।</li>
<li class="ltr" id="">2परमेश्वर की सहायता से हम वीरता दिखाएंगे, क्योंकि हमारे द्रोहियों को वही रौंदेगा॥</li>

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भजन संहिता 61
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<li class="ltr" id="">हे परमेश्वर, मेरा चिल्लाना सुन, मेरी प्रार्थना की ओर घ्यान दे।</li>
<li class="ltr" id="">मूर्छा खाते समय मैं पृथ्वी की छोर से भी तुझे पुकारूंगा, जो चट्टान मेरे लिये ऊंची है, उस पर मुझ को ले चला,</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि तू मेरा शरणस्थान है, और शत्रु से बचने के लिये ऊंचा गढ़ है॥</li>
<li class="ltr" id="">मै तेरे तम्बू में युगानुयुग बना रहूंगा। मैं तेरे पंखों की ओट में शरण लिये रहुंगा</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि हे परमेश्वर, तू ने मेरी मन्नतें सुनीं, जो तेरे नाम के डरवैये हैं, उनका सा भाग तू ने मुझे दिया है॥</li>
<li class="ltr" id="">तू राजा की आयु को बहुत बढ़ाएगा, उसके वर्ष पीढ़ी पीढ़ी के बराबर होंगे।</li>
<li class="ltr" id="">वह परमेश्वर के सम्मुख सदा बना रहेगा, तू अपनी करूणा और सच्चाई को उसकी रक्षा के लिये ठहरा रख।</li>
<li class="ltr" id="">और मैं सर्वदा तेरे नाम का भजन गा गाकर अपनी मन्नतें हर दिन पूरी किया करूंगा॥</li>

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भजन संहिता 62
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<li class="ltr" id="">सचमुच मैं चुपचाप होकर परमेरश्वर की ओर मन लगाए हूं, मेरा उद्धार उसी से होता है।</li>
<li class="ltr" id="">सचमुच वही, मेरी चट्टान और मेरा उद्धार है, वह मेरा गढ़ है, मैं बहुत न डिगूंगा॥</li>
<li class="ltr" id="">तुम कब तक एक पुरूष पर धावा करते रहोगे, कि सब मिलकर उसका घात करो? वह तो झुकी हुई भीत वा गिरते हुए बाड़े के समान है।</li>
<li class="ltr" id="">सचमुच वे उसको, उसके ऊंचे पद से गिराने की सम्मति करते हैं, वे झूठ से प्रसन्न रहते हैं। मुंह से तो वे आशीर्वाद देते पर मन में कोसते हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">हे मेरे मन, परमेश्वर के साम्हने चुपचाप रह, क्योंकि मेरी आशा उसी से है।</li>
<li class="ltr" id="">सचमुच वही मेरी चट्टान, और मेरा उद्धार है, वह मेरा गढ़ है, इसलिये मैं न डिगूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">मेरा उद्धार और मेरी महिमा का आधार परमेश्वर है, मेरी दृढ़ चट्टान, और मेरा शरणस्थान परमेश्वर है।</li>
<li class="ltr" id="">हे लोगो, हर समय उस पर भरोसा रखो, उससे अपने अपने मन की बातें खोलकर कहो, परमेश्वर हमारा शरणस्थान है।</li>
<li class="ltr" id="">सचमुच नीच लोग तो अस्थाई, और बड़े लोग मिथ्या ही हैं, तौल में वे हलके निकलते हैं, वे सब के सब सांस से भी हलके हैं।</li>
<li class="ltr" id="">0अन्धेर करने पर भरोसा मत रखो, और लूट पाट करने पर मत फूलो, चाहे धन सम्पति बढ़े, तौभी उस पर मन न लगाना॥</li>
<li class="ltr" id="">1परमेश्वर ने एक बार कहा है, और दो बार मैं ने यह सुना है: कि सामर्थ्य परमेश्वर का है।</li>
<li class="ltr" id="">2और हे प्रभु, करूणा भी तेरी है। क्योंकि तू एक एक जन को उसके काम के अनुसार फल देता है॥</li>

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भजन संहिता 63
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<li class="ltr" id="">हे परमेश्वर, तू मेरा ईश्वर है, मैं तुझे यत्न से ढूंढूंगा, सूखी और निर्जल ऊसर भूमि पर, मेरा मन तेरा प्यासा है, मेरा शरीर तेरा अति अभिलाषी है।</li>
<li class="ltr" id="">इस प्रकार से मैं ने पवित्रास्थान में तुझ पर दृष्टि की, कि तेरी सामर्थ्य और महिमा को देखूं।</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि तेरी करूणा जीवन से भी उत्तम है मैं तेरी प्रशंसा करूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">इसी प्रकार मैं जीवन भर तुझे धन्य कहता रहूंगा, और तेरा नाम लेकर अपने हाथ उठाऊंगा॥</li>
<li class="ltr" id="">मेरा जीव मानो चर्बी और चिकने भोजन से तृप्त होगा, और मैं जयजयकार करके तेरी स्तुति करूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">जब मैं बिछौने पर पड़ा तेरा स्मरण करूंगा, तब रात के एक एक पहर में तुझ पर ध्यान करूंगा,</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि तू मेरा सहायक बना है, इसलिये मैं तेरे पंखों की छाया में जयजयकार करूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">मेरा मन तेरे पीछे पीछे लगा चलता है, और मुझे तो तू अपने दाहिने हाथ से थाम रखता है॥</li>
<li class="ltr" id="">परन्तु जो मेरे प्राण के खोजी हैं, वे पृथ्वी के नीचे स्थानों में जा पड़ेंगे,</li>
<li class="ltr" id="">0वे तलवार से मारे जाएंगे, और गीदड़ों का आहार हो जाएंगे।</li>
<li class="ltr" id="">1परन्तु राजा परमेश्वर के कारण आनन्दित होगा, जो कोई ईश्वर की शपथ खाए, वह बड़ाई करने पाएगा, परन्तु झूठ बोलने वालों का मुंह बन्द किया जाएगा॥</li>

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भजन संहिता 64
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<li class="ltr" id="">हे परमेश्वर, जब मैं तेरी दोहाई दूं, तब मेरी सुन, शत्रु के उपजाए हुए भय के समय मेरे प्राण की रक्षा कर।</li>
<li class="ltr" id="">कुकर्मियों की गोष्ठी से, और अनर्थकारियों के हुल्लड़ से मेरी आड़ हो।</li>
<li class="ltr" id="">उन्होंने अपनी जीभ को तलवार की नाईं तेज किया है, और अपने कड़वे वचनों के तीरों को चढ़ाया है,</li>
<li class="ltr" id="">ताकि छिपकर खरे मनुष्य को मारें, वे निडर होकर उसको अचानक मारते भी हैं।</li>
<li class="ltr" id="">वे बुरे काम करने को हियाव बान्धते हैं, वे फन्दे लगाने के विषय बातचीत करते हैं, और कहते हैं, कि हम को कौन देखेगा?</li>
<li class="ltr" id="">वे कुटिलता की युक्ति निकालते हैं, और कहते हैं, कि हम ने पक्की युक्ति खोजकर निकाली है। क्योंकि मनुष्य का मन और हृदय अथाह हैं.</li>
<li class="ltr" id="">परन्तु परमेश्वर उन पर तीर चलाएगा, वे अचानक घायल हो जाएंगे।</li>
<li class="ltr" id="">वे अपने ही वचनों के कारण ठोकर खाकर गिर पड़ेंगे, जितने उन पर दृष्टि करेंगे वे सब अपने अपने सिर हिलाएंगे</li>
<li class="ltr" id="">तब सारे लोग डर जाएंगे, और परमेश्वर के कामों का बखान करेंगे, और उसके कार्यक्रम को भली भांति समझेंगे॥</li>
<li class="ltr" id="">0धर्मी तो यहोवा के कारण आनन्दित होकर उसका शरणागत होगा, और सब सीधे मन वाले बड़ाई करेंगे॥</li>

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भजन संहिता 65
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<li class="ltr" id="">हे परमेश्वर, सिय्योन में स्तुति तेरी बाट जोहती है, और तेरे लिये मन्नतें पूरी की जाएंगी।</li>
<li class="ltr" id="">हे प्रार्थना के सुनने वाले. सब प्राणी तेरे ही पास आएंगे।</li>
<li class="ltr" id="">अर्धम के काम मुझ पर प्रबल हुए हैं, हमारे अपराधों को तू ढांप देगा।</li>
<li class="ltr" id="">क्या ही धन्य है वह, जिस को तू चुनकर अपने समीप आने देता है, कि वह तेरे आंगनों में बास करे. हम तेरे भवन के, अर्थात तेरे पवित्र मन्दिर के उत्तम उत्तम पदार्थों से तृप्त होंगे॥</li>
<li class="ltr" id="">हे हमारे उद्धारकर्ता परमेश्वर, हे पृथ्वी के सब दूर दूर देशों के और दूर के समुद्र पर के रहने वालों के आधार, तू धर्म से किए हुए भयानक कामों के द्वारा हमारा मुंह मांगा वर देगा,</li>
<li class="ltr" id="">तू जो पराक्रम का फेंटा कसे हुए, अपनी सामर्थ्य के पर्वतों को स्थिर करता है,</li>
<li class="ltr" id="">तू जो समुद्र का महाशब्द, उसकी तरंगो का महाशब्द, और देश देश के लोगों का कोलाहल शन्त करता है,</li>
<li class="ltr" id="">इसलिये दूर दूर देशों के रहने वाले तेरे चिन्ह देखकर डर गए हैं, तू उदयाचल और अस्ताचल दोनों से जयजयकार कराता है॥</li>
<li class="ltr" id="">तू भूमि की सुधि लेकर उसको सींचता हैं, तू उसको बहुत फलदायक करता है, परमेश्वर की नहर जल से भरी रहती है, तू पृथ्वी को तैयार करके मनुष्यों के लिये अन्न को तैयार करता है।</li>
<li class="ltr" id="">0तू रेघारियों को भली भांति सींचता है, और उनके बीच की मिट्टी को बैठाता है, तू भूमि को मेंह से नरम करता है, और उसकी उपज पर आशीष देता है।</li>
<li class="ltr" id="">1अपनी भलाई से भरे हुए वर्ष पर तू ने मानो मुकुट धर दिया है, तेरे मार्गों में उत्तम उत्तम पदार्थ पाए जाते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">2वे जंगल की चराइयों में पाए जाते हैं, और पहाड़ियां हर्ष का फेंटा बान्धे हुए है॥</li>
<li class="ltr" id="">3चराइयां भेड़- बकरियों से भरी हुई हैं, और तराइयां अन्न से ढंपी हुई हैं, वे जयजयकार करतीं और गाती भी हैं॥</li>

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भजन संहिता 66
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<li class="ltr" id="">हे सारी पृथ्वी के लोगों, परमेश्वर के लिये जयजयकार करो,</li>
<li class="ltr" id="">उसके नाम की महिमा का भजन गाओ, उसकी स्तुति करते हुए, उसकी महिमा करो।</li>
<li class="ltr" id="">परमेश्वर से कहो, कि तेरे काम क्या ही भयानक हैं. तेरी महासामर्थ्य के कारण तेरे शत्रु तेरी चापलूसी करेंगे।</li>
<li class="ltr" id="">सारी पृथ्वी के लोग तुझे दण्डवत करेंगे, और तेरा भजन गाएंगे, वे तेरे नाम का भजन गाएंगे॥</li>
<li class="ltr" id="">आओ परमेश्वर के कामों को देखो, वह अपने कार्यों के कारण मनुष्यों को भय योग्य देख पड़ता है।</li>
<li class="ltr" id="">उसने समुद्र को सूखी भूमि कर डाला, वे महानद में से पांव पावं पार उतरे। वहां हम उसके कारण आनन्दित हुए,</li>
<li class="ltr" id="">जो पराक्रम से सर्वदा प्रभुता करता है, और अपनी आंखों से जाति जाति को ताकता है। हठीले अपने सिर न उठाएं॥</li>
<li class="ltr" id="">हे देश देश के लोगो, हमारे परमेश्वर को धन्य कहो, और उसकी स्तुति में राग उठाओ,</li>
<li class="ltr" id="">जो हम को जीवित रखता है, और हमारे पांव को टलने नहीं देता।</li>
<li class="ltr" id="">0क्योंकि हे परमेश्वर तू ने हम को जांचा, तू ने हमें चान्दी की नाईं ताया था।</li>
<li class="ltr" id="">1तू ने हम को जाल में फंसाया, और हमारी कटि पर भारी बोझ बान्धा था,</li>
<li class="ltr" id="">2तू ने घुड़चढ़ों को हमारे सिरों के ऊपर से चलाया, हम आग और जल से होकर गए, परन्तु तू ने हम को उबार के सुख से भर दिया है॥</li>
<li class="ltr" id="">3मैं होमबलि लेकर तेरे भवन में आऊंगा मैं उन मन्नतों को तेरे लिये पूरी करूंगा,</li>
<li class="ltr" id="">4जो मैं ने मुंह खोलकर मानीं, और संकट के समय कही थीं।</li>
<li class="ltr" id="">5मैं तुझे मोटे पशुओं के होमबलि, मेंढ़ों की चर्बी के धूप समेत चढ़ऊंगा, मैं बकरों समेत बैल चढ़ाऊंगा॥</li>
<li class="ltr" id="">6हे परमेश्वर के सब डरवैयों आकर सुनो, मैं बताऊंगा कि उसने मेरे लिये क्या क्या किया है।</li>
<li class="ltr" id="">7मैं ने उसको पुकारा, और उसी का गुणानुवाद मुझ से हुआ।</li>
<li class="ltr" id="">8यदि मैं मन में अनर्थ बात सोचता तो प्रभु मेरी न सुनता।</li>
<li class="ltr" id="">9परन्तु परमेश्वर ने तो सुना है, उसने मेरी प्रार्थना की ओर ध्यान दिया है॥</li>
<li class="ltr" id="">0धन्य है परमेश्वर, जिसने न तो मेरी प्रार्थना अनसुनी की, और न मुझ से अपनी करूणा दूर कर दी है.</li>

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भजन संहिता 67
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<li class="ltr" id="">परमेश्वर हम पर अनुग्रह करे और हम को आशीष दे, वह हम पर अपने मुख का प्रकाश चमकाए</li>
<li class="ltr" id="">जिस से तेरी गति पृथ्वी पर, और तेरा किया हुआ उद्धार सारी जातियों में जाना जाए।</li>
<li class="ltr" id="">हे परमेश्वर, देश देश के लोग तेरा धन्यवाद करें, देश देश के सब लोग तेरा धन्यवाद करें॥</li>
<li class="ltr" id="">राज्य राज्य के लोग आनन्द करें, और जयजयकार करें, क्योंकि तू देश देश के लोंगों का न्याय धर्म से करेगा, और पृथ्वी के राज्य राज्य के लोगों की अगुवाई करेगा॥</li>
<li class="ltr" id="">हे परमेश्वर, देश देश के लोग तेरा धन्यवाद करें, देश देश के सब लोग तेरा धन्यवाद करें॥</li>
<li class="ltr" id="">भूमि ने अपनी उपज दी है, परमेश्वर जो हमारा परमेश्वर है, उसने हमें आशीष दी है।</li>
<li class="ltr" id="">परमेश्वर हम को आशीष देगा, और पृथ्वी के दूर दूर देशों के सब लोग उसका भय मानेंगे॥</li>

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भजन संहिता 68
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<li class="ltr" id="">परमेश्वर उठे, उसके शत्रु तित्तर बितर हों, और उसके बैरी उसके साम्हने से भाग जाएं।</li>
<li class="ltr" id="">जैसे धुआं उड़ जाता है, वैसे ही तू उन को उड़ा दे, जैसे मोम आग की आंच से पिघल जाता है, वैसे ही दुष्ट लोग परमेश्वर की उपस्थिति से नाश हों।</li>
<li class="ltr" id="">परन्तु धर्मी आनन्दित हों, वे परमेश्वर के साम्हने प्रफुल्लित हों, वे आनन्द से मगन हों.</li>
<li class="ltr" id="">परमेश्वर का गीत गाओ, उसके नाम का भजन गाओ, जो निर्जल देशों में सवार होकर चलता है, उसके लिये सड़क बनाओ, उसका नाम याह है, इसलिये तुम उसके साम्हने प्रफुल्लित हो.</li>
<li class="ltr" id="">परमेश्वर अपने पवित्र धाम में, अनाथों का पिता और विधवाओं का न्यायी है।</li>
<li class="ltr" id="">परमेश्वर अनाथों का घर बसाता है, और बन्धुओं को छुड़ाकर भाग्यवान करता है, परन्तु हठीलों को सूखी भूमि पर रहना पड़ता है॥</li>
<li class="ltr" id="">हे परमेश्वर, जब तू अपनी प्रजा के आगे आगे चलता था, जब तू निर्जल भूमि में सेना समेत चला,</li>
<li class="ltr" id="">तब पृथ्वी कांप उठी, और आकाश भी परमेश्वर के साम्हने टपकने लगा, उधर सीनै पर्वत परमेश्वर, हां इस्राएल के परमेश्वर के साम्हने कांप उठा।</li>
<li class="ltr" id="">हे परमेश्वर, तू ने बहुत से वरदान बरसाए, तेरा निज भाग तो बहुत सूखा था, परन्तु तू ने उसको हरा भरा किया है,</li>
<li class="ltr" id="">0तेरा झुण्ड उस में बसने लगा, हे परमेश्वर तू ने अपनी भलाई से दीन जन के लिये तैयारी की है।</li>
<li class="ltr" id="">1प्रभु आज्ञा देता है, तब शुभ समाचार सुनाने वालियों की बड़ी सेना हो जाती है।</li>
<li class="ltr" id="">2अपनी अपनी सेना समेत राजा भागे चले जाते हैं, और गृहस्थिन लूट को बांट लेती है।</li>
<li class="ltr" id="">3क्या तुम भेड़शालों के बीच लेट जाओगे? और ऐसी कबूतरी के समान होगे जिसके पंख चान्दी से और जिसके पर पीले सोने से मढ़े हुए हों?</li>
<li class="ltr" id="">4जब सर्वशक्तिमान ने उस में राजाओं को तित्तर बितर किया, तब मानो सल्मोन पर्वत पर हिम पड़ा॥</li>
<li class="ltr" id="">5बाशान का पहाड़ परमेश्वर का पहाड़ है, बाशान का पहाड़ बहुत शिखरवाला पहाड़ है।</li>
<li class="ltr" id="">6परन्तु हे शिखर वाले पहाड़ों, तुम क्यों उस पर्वत को घूरते हो, जिसे परमेश्वर ने अपने वास के लिये चाहा है, और जहां यहोवा सदा वास किए रहेगा?</li>
<li class="ltr" id="">7परमेश्वर के रथ बीस हजार, वरन हजारों हजार हैं, प्रभु उनके बीच में है, जैसे वह सीनै पवित्र स्थान में है।</li>
<li class="ltr" id="">8तू ऊंचे पर चढ़ा, तू लोगों को बन्धुवाई में ले गया, तू ने मनुष्यों से, वरन हठीले मनुष्यों से भी भेंटें लीं, जिस से याह परमेश्वर उन में वास करे॥</li>
<li class="ltr" id="">9धन्य है प्रभु, जो प्रति दिन हमारा बोझ उठाता है, वही हमारा उद्धारकर्ता ईश्वर है।</li>
<li class="ltr" id="">0वही हमारे लिये बचाने वाला ईश्वर ठहरा, यहोवा प्रभु मृत्यु से भी बचाता है॥</li>
<li class="ltr" id="">1निश्चय परमेश्वर अपने शत्रुओं के सिर पर, और जो अधर्म के र्माग पर चलता रहता है, उसके बाल भरी खोपड़ी पर मार मार के उसे चूर करेगा।</li>
<li class="ltr" id="">2प्रभु ने कहा है, कि मैं उन्हें बाशान से निकाल लाऊंगा, मैं उन को गहिरे सागर के तल से भी फेर ले आऊंगा,</li>
<li class="ltr" id="">3कि तू अपने पांव को लोहू में डुबोए, और तेरे शत्रु तेरे कुत्तों का भाग ठहरें॥</li>
<li class="ltr" id="">4हे परमेश्वर तेरी गति देखी गई, मेरे ईश्वर, मेरे राजा की गति पवित्र स्थान में दिखाई दी है,</li>
<li class="ltr" id="">5गाने वाले आगे आगे और तार वाले बाजों के बजाने वाले पीछे पीछे गए, चारों ओर कुमारियां डफ बजाती थीं।</li>
<li class="ltr" id="">6सभाओं में परमेश्वर का, हे इस्राएल के सोते से निकले हुए लोगों, प्रभु का धन्यवाद करो।</li>
<li class="ltr" id="">7वहां उनका अध्यक्ष छोटा बिन्यामीन है, वहां यहूदा के हाकिम अपने अनुचरों समेत हैं, वहां जबूलून और नप्ताली के भी हाकिम हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">8तेरे परमेश्वर ने आज्ञा दी, कि तुझे सामर्थ्य मिले, हे परमेश्वर जो कुछ तू ने हमारे लिये किया है, उसे दृढ़ कर।</li>
<li class="ltr" id="">9तेरे मन्दिर के कारण जो यरूशलेम में हैं, राजा तेरे लिये भेंट ले आएंगे।</li>
<li class="ltr" id="">0नरकटों में रहने वाले बनैले पशुओं को, सांड़ों के झुण्ड को और देश देश के बछड़ों को झिड़क दे। वे चान्दी के टुकड़े लिये हुए प्रणाम करेंगे, जो लोगे युद्ध से प्रसन्न रहते हैं, उन को उसने तितर बितर किया है।</li>
<li class="ltr" id="">1मिस्त्र से रईस आएंगे, कूशी अपने हाथों को परमेश्वर की ओर फुर्ती से फैलाएंगे॥</li>
<li class="ltr" id="">2हे पृथ्वी पर के राज्य राज्य के लोगों परमेश्वर का गीत गाओ, प्रभु का भजन गाओ,</li>
<li class="ltr" id="">3जो सब से ऊंचे सनातन स्वर्ग में सवार होकर चलता है, देखो वह अपनी वाणी सुनाता है, वह गम्भीर वाणी शक्तिशाली है।</li>
<li class="ltr" id="">4परमेश्वर की सामर्थ्य की स्तुति करो, उसका प्रताप इस्राएल पर छाया हुआ है, और उसकी सामर्थ्य आकाशमण्डल में है।</li>
<li class="ltr" id="">5हे परमेश्वर, तू अपने पवित्र स्थानों में भय योग्य है, इस्राएल का ईश्वर ही अपनी प्रजा को सामर्थ्य और शक्ति का देने वाला है। परमेश्वर धन्य है॥</li>

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भजन संहिता 69
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<li class="ltr" id="">हे परमेश्वर, मेरा उद्धार कर, मैं जल में डूबा जाता हूं।</li>
<li class="ltr" id="">मैं बड़े दलदल में धसा जाता हूं, और मेरे पैर कहीं नहीं रूकते, मैं गहिरे जल में आ गया, और धारा में डूबा जाता हूं।</li>
<li class="ltr" id="">मैं पुकारते पुकारते थक गया, मेरा गला सूख गया है, अपने परमेश्वर की बाट जोहते जोहते, मेरी आंखे रह गई हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">जो अकारण मेरे बैरी हैं, वे गिनती में मेरे सिर के बालों से अधिक हैं, मेरे विनाश करने वाले जो व्यर्थ मेरे शत्रु हैं, वे सामर्थी हैं, इसलिये जो मैं ने लूटा नहीं वह भी मुझ को देना पड़ा है।</li>
<li class="ltr" id="">हे परमेश्वर, तू तो मेरी मूढ़ता को जानता है, और मेरे दोष तुझ से छिपे नहीं हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">हे प्रभु, हे सेनाओं के यहोवा, जो तेरी बाट जोहते हैं, उनकी आशा मेरे कारण न टूटे, हे इस्राएल के परमेश्वर, जो तुझे ढूंढते हैं उनका मुंह मेरे कारण काला न हो।</li>
<li class="ltr" id="">तेरे ही कारण मेरी निन्दा हुई है, और मेरा मुंह लज्जा से ढंपा है।</li>
<li class="ltr" id="">मैं अपने भाइयों के साम्हने अजनबी हुआ, और अपने सगे भाइयों की दृष्टि में परदेशी ठहरा हूं॥</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि मैं तेरे भवन के निमित्त जलते जलते भस्म हुआ, और जो निन्दा वे तेरी करते हैं, वही निन्दा मुझ को सहनी पड़ी है।</li>
<li class="ltr" id="">0जब मैं रोकर और उपवास करके दु:ख उठाता था, तब उससे भी मेरी नामधराई ही हुई।</li>
<li class="ltr" id="">1और जब मैं टाट का वस्त्र पहिने था, तब मेरा दृष्टान्त उन में चलता था।</li>
<li class="ltr" id="">2फाटक के पास बैठने वाले मेरे विषय बातचीत करते हैं, और मदिरा पीने वाले मुझ पर लगता हुआ गीत गाते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">3परन्तु हे यहोवा, मेरी प्रार्थना तो तेरी प्रसन्नता के समय में हो रही है, हे परमेश्वर अपनी करूणा की बहुतायात से, और बचाने की अपनी सच्ची प्रतिज्ञा के अनुसार मेरी सुन ले।</li>
<li class="ltr" id="">4मुझ को दलदल में से उबार, कि मैं धंस न जाऊं, मैं अपने बैरियों से, और गहिरे जल में से बच जाऊं।</li>
<li class="ltr" id="">5मैं धारा में डूब न जाऊं, और न मैं गहिरे जल में डूब मरूं, और न पाताल का मुंह मेरे ऊपर बन्द हो॥</li>
<li class="ltr" id="">6हे यहोवा, मेरी सुन ले, क्योंकि तेरी करूणा उत्तम है, अपनी दया की बहुतायत के अनुसार मेरी ओर ध्यान दे।</li>
<li class="ltr" id="">7अपने दास से अपना मुंह न मोड़, क्योंकि मैं संकट में हूं, फुर्ती से मेरी सुन ले।</li>
<li class="ltr" id="">8मेरे निकट आकर मुझे छुड़ा ले, मेरे शत्रुओं से मुझ को छुटकारा दे॥</li>
<li class="ltr" id="">9मेरी नामधराई और लज्जा और अनादर को तू जानता है: मेरे सब द्रोही तेरे साम्हने हैं।</li>
<li class="ltr" id="">0मेरा हृदय नामधराई के कारण फट गया, और मैं बहुत उदास हूं। मैं ने किसी तरस खाने वाले की आशा तो की, परन्तु किसी को न पाया, और शान्ति देने वाले ढूंढ़ता तो रहा, परन्तु कोई न मिला।</li>
<li class="ltr" id="">1और लोगों ने मेरे खाने के लिये इन्द्रायन दिया, और मेरी प्यास बुझाने के लिये मुझे सिरका पिलाया॥</li>
<li class="ltr" id="">2उनका भोजन उनके लिये फन्दा हो जाए, और उनके सुख के समय जाल बन जाए।</li>
<li class="ltr" id="">3उनकी आंखों पर अन्धेरा छा जाए, ताकि वे देख न सकें, और तू उनकी कटि को निरन्तर कंपाता रह।</li>
<li class="ltr" id="">4उनके ऊपर अपना रोष भड़का, और तेरे क्रोध की आंच उन को लगे।</li>
<li class="ltr" id="">5उनकी छावनी उजड़ जाए, उनके डेरों में कोई न रहे।</li>
<li class="ltr" id="">6क्योंकि जिस को तू ने मारा, वे उसके पीछे पड़े हैं, और जिन को तू ने घायल किया, वे उनकी पीड़ा की चर्चा करते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">7उनके अधर्म पर अधर्म बढ़ा, और वे तेरे धर्म को प्राप्त न करें।</li>
<li class="ltr" id="">8उनका नाम जीवन की पुस्तक में से काटा जाए, और धर्मियों के संग लिखा न जाए॥</li>
<li class="ltr" id="">9परन्तु मैं तो दु:खी और पीड़ित हूं, इसलिये हे परमेश्वर तू मेरा उद्धार करके मुझे ऊंचे स्थान पर बैठा।</li>
<li class="ltr" id="">0मैं गीत गाकर तेरे नाम की स्तुति करूंगा, और धन्यवाद करता हुआ तेरी बड़ाई करूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">1यह यहोवा को बैल से अधिक, वरन सींग और खुर वाले बैल से भी अधिक भाएगा।</li>
<li class="ltr" id="">2नम्र लोग इसे देख कर आनन्दित होंगे, हे परमेश्वर के खोजियों तुम्हारा मन हरा हो जाए।</li>
<li class="ltr" id="">3क्योंकि यहोवा दरिद्रों की ओर कान लगाता है, और अपने लोगों को जो बन्धुए हैं तुच्छ नहीं जानता॥</li>
<li class="ltr" id="">4स्वर्ग और पृथ्वी उसकी स्तुति करें, और समुद्र अपने सब जीव जन्तुओं समेत उसकी स्तुति करे।</li>
<li class="ltr" id="">5क्योंकि परमेश्वर सिय्योन का उद्धार करेगा, और यहूदा के नगरों को फिर बसाएगा, और लोग फिर वहां बस कर उसके अधिकारी हो जाएंगे।</li>
<li class="ltr" id="">6उसके दासों को वंश उसको अपने भाग में पाएगा, और उसके नाम के प्रेमी उस में वास करेंगे॥</li>

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भजन संहिता 70
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<li class="ltr" id="">हे परमेश्वर मुझे छुड़ाने के लिये, हे यहोवा मेरी सहायता करने के लिये फुर्ती कर.</li>
<li class="ltr" id="">जो मेरे प्राण के खोजी हैं, उनकी आशा टूटे, और मुंह काला हो जाए. जो मेरी हानि से प्रसन्न होते हैं, वे पीछे हटाए और निरादर किए जाएं।</li>
<li class="ltr" id="">जो कहते हैं, आहा, आहा, वे अपनी लज्जा के मारे उलटे फेरे जाएं॥</li>
<li class="ltr" id="">जितने तुझे ढूंढ़ते हैं, वे सब तेरे कारण हर्षित और आनन्दित हों. और जो तेरा उद्धार चाहते हैं, वे निरन्तर कहते रहें, कि परमेश्वर की बड़ाई हो।</li>
<li class="ltr" id="">मैं तो दीन और दरिद्र हूं, हे परमेश्वर मेरे लिये फुर्ती कर. तू मेरा सहायक और छुड़ाने वाला है, हे यहोवा विलम्ब न कर.</li>

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भजन संहिता 71
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<li class="ltr" id="">हे यहोवा मैं तेरा शरणागत हूं, मेरी आशा कभी टूटने न पाए.</li>
<li class="ltr" id="">तू तो धर्मी है, मुझे छुड़ा और मेरा उद्धार कर, मेरी ओर कान लगा, और मेरा उद्धार कर.</li>
<li class="ltr" id="">मेरे लिये सनातन काल की चट्टान का धाम बन, जिस में मैं नित्य जा सकूं, तू ने मेरे उद्धार की आज्ञा तो दी है, क्योंकि तू मेरी चट्टान और मेरा गढ़ ठहरा है॥</li>
<li class="ltr" id="">हे मेरे परमेश्वर दुष्ट के, और कुटिल और क्रूर मनुष्य के हाथ से मेरी रक्षा कर।</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि हे प्रभु यहोवा, मैं तेरी ही बाट जोहता आया हूं, बचपन से मेरा आधार तू है।</li>
<li class="ltr" id="">मैं गर्भ से निकलते ही, तुझ से सम्भाला गया, मुझे मां की कोख से तू ही ने निकाला, इसलिये मैं नित्य तेरी स्तुति करता रहूंगा॥</li>
<li class="ltr" id="">मैं बहुतों के लिये चमत्कार बना हूं, परन्तु तू मेरा दृढ़ शरण स्थान है।</li>
<li class="ltr" id="">मेरे मुंह से तेरे गुणानुवाद, और दिन भर तेरी शोभा का वर्णन बहुत हुआ करे।</li>
<li class="ltr" id="">बुढ़ापे के समय मेरा त्याग न कर, जब मेरा बल घटे तब मुझ को छोड़ न दे।</li>
<li class="ltr" id="">0क्योंकि मेरे शत्रु मेरे विषय बातें करते हैं, और जो मेरे प्राण की ताक में हैं, वे आपस में यह सम्मति करते हैं, कि</li>
<li class="ltr" id="">1परमेश्वर ने उसको छोड़ दिया है, उसका पीछा करके उसे पकड़ लो, क्योंकि उसका कोई छुड़ाने वाला नहीं॥</li>
<li class="ltr" id="">2हे परमेश्वर, मुझ से दूर न रह, हे मेरे परमेश्वर, मेरी सहायता के लिये फुर्ती कर.</li>
<li class="ltr" id="">3जो मेरे प्राण के विरोधी हैं, उनकी आशा टूटे और उनका अन्त हो जाए, जो मेरी हानि के अभिलाषी हैं, वे नामधराई और अनादर में गड़ जाएं।</li>
<li class="ltr" id="">4मैं तो निरन्तर आशा लगाए रहूंगा, और तेरी स्तुति अधिक अधिक करता जाऊंगा।</li>
<li class="ltr" id="">5मैं अपने मुंह से तेरे धर्म का, और तेरे किए हुए उद्धार का वर्णन दिन भर करता रहूंगा, परन्तु उनका पूरा ब्योरा जाना भी नहीं जाता।</li>
<li class="ltr" id="">6मैं प्रभु यहोवा के पराक्रम के कामों का वर्णन करता हुआ आऊंगा, मैं केवल तेरे ही धर्म की चर्चा किया करूंगा॥</li>
<li class="ltr" id="">7हे परमेश्वर, तू तो मुझ को बचपन ही से सिखाता आया है, और अब तक मैं तेरे आश्चर्य कर्मों का प्रचार करता आया हूं।</li>
<li class="ltr" id="">8इसलिये हे परमेश्वर जब मैं बूढ़ा हो जाऊं और मेरे बाल पक जाएं, तब भी तू मुझे न छोड़, जब तक मैं आने वाली पीढ़ी के लोगों को तेरा बाहुबल और सब उत्पन्न होने वालों को तेरा पराक्रम सुनाऊं।</li>
<li class="ltr" id="">9और हे परमेश्वर, तेरा धर्म अति महान है॥ तू जिसने महाकार्य किए हैं, हे परमेश्वर तेरे तुल्य कौन है?</li>
<li class="ltr" id="">0तू ने तो हम को बहुत से कठिन कष्ट दिखाए हैं परन्तु अब तू फिर से हम को जिलाएगा, और पृथ्वी के गहिरे गड़हे में से उबार लेगा।</li>
<li class="ltr" id="">1तू मेरी बड़ाई को बढ़ाएगा, और फिर कर मुझे शान्ति देगा॥</li>
<li class="ltr" id="">2हे मेरे परमेश्वर, मैं भी तेरी सच्चाई का धन्यवाद सारंगी बजाकर गाऊंगा, हे इस्राएल के पवित्र मैं वीणा बजा कर तेरा भजन गाऊंगा।</li>
<li class="ltr" id="">3जब मैं तेरा भजन गाऊंगा, तब अपने मुंह से और अपने प्राण से भी जो तू ने बचा लिया है, जयजयकार करूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">4और मैं तेरे धर्म की चर्चा दिन भर करता रहूंगा, क्योंकि जो मेरी हानि के अभिलाषी थे, उनकी आशा टूट गई और मुंह काले हो गए हैं॥</li>

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भजन संहिता 72
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<li class="ltr" id="">हे परमेश्वर, राजा को अपना नियम बता, राजपुत्र को अपना धर्म सिखला.</li>
<li class="ltr" id="">वह तेरी प्रजा का न्याय धर्म से, और तेरे दीन लोगों का न्याय ठीक ठीक चुकाएगा।</li>
<li class="ltr" id="">पहाडों और पहाड़ियों से प्रजा के लिये, धर्म के द्वारा शान्ति मिला करेगी</li>
<li class="ltr" id="">वह प्रजा के दीन लोगों का न्याय करेगा, और दरिद्र लोगों को बचाएगा, और अन्धेर करने वालों को चूर करेगा॥</li>
<li class="ltr" id="">जब तक सूर्य और चन्द्रमा बने रहेंगे तब तक लोग पीढ़ी- पीढ़ी तेरा भय मानते रहेंगे।</li>
<li class="ltr" id="">वह घास की खूंटी पर बरसने वाले मेंह, और भूमि सींचने वाली झाड़ियों के समान होगा।</li>
<li class="ltr" id="">उसके दिनों में धर्मी फूले फलेंगे, और जब तक चन्द्रमा बना रहेगा, तब तक शान्ति बहुत रहेगी॥</li>
<li class="ltr" id="">वह समुद्र से समुद्र तक और महानद से पृथ्वी की छोर तक प्रभुता करेगा।</li>
<li class="ltr" id="">उसके साम्हने जंगल के रहने वाले घुटने टेकेंगे, और उसके शत्रु मिट्टी चाटेंगे।</li>
<li class="ltr" id="">0तर्शीश और द्वीप द्वीप के राजा भेंट ले आएंगे, शेबा और सबा दोनों के राजा द्रव्य पहुंचाएंगे।</li>
<li class="ltr" id="">1सब राजा दण्डवत करेंगे, जाति जाति के लोग उसके आधीन हो जाएंगे॥</li>
<li class="ltr" id="">2क्योंकि वह दोहाई देने वाले दरिद्र को, और दु:खी और असहाय मनुष्य का उद्धार करेगा।</li>
<li class="ltr" id="">3वह कंगाल और दरिद्र पर तरस खाएगा, और दरिद्रों के प्राणो को बचाएगा।</li>
<li class="ltr" id="">4वह उनके प्राणों को अन्धेर और उपद्रव से छुड़ा लेगा, और उनका लोहू उसकी दृष्टि में अनमोल ठहरेगा॥</li>
<li class="ltr" id="">5वह तो जीवित रहेगा और शेबा के सोने में से उसको दिया जाएगा। लोग उसके लिये नित्य प्रार्थना करेंगे, और दिन भर उसको धन्य कहते रहेंगे।</li>
<li class="ltr" id="">6देश में पहाड़ों की चोटियों पर बहुत सा अन्न होगा, जिसकी बालें लबानोन के देवदारों की नाईं झूमेंगी, और नगर के लोग घास की नाईं लहलहाएंगे।</li>
<li class="ltr" id="">7उसका नाम सदा सर्वदा बना रहेगा, जब तक सूर्य बना रहेगा, तब तक उसका नाम नित्य नया होता रहेगा, और लोग अपने को उसके कारण धन्य गिनेंगे, सारी जातियां उसको भाग्यवान कहेंगी॥</li>
<li class="ltr" id="">8धन्य है, यहोवा परमेश्वर जो इस्राएल का परमेश्वर है, आश्चर्य कर्म केवल वही करता है।</li>
<li class="ltr" id="">9उसका महिमायुक्त नाम सर्वदा धन्य रहेगा, और सारी पृथ्वी उसकी महिमा से परिपूर्ण होगी। आमीन फिर आमीन॥</li>
<li class="ltr" id="">0यिशै के पुत्र दाऊद की प्रार्थना समाप्त हुई॥</li>

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भजन संहिता 73
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<li class="ltr" id="">सचमुच इस्त्राएल के लिये अर्थात शुद्ध मन वालों के लिये परमेश्वर भला है।</li>
<li class="ltr" id="">मेरे डग तो उखड़ना चाहते थे, मेरे डग फिसलने ही पर थे।</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि जब मैं दुष्टों का कुशल देखता था, तब उन घमण्डियों के विषय डाह करता था॥</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि उनकी मृत्यु में वेदनाएं नहीं होतीं, परन्तु उनका बल अटूट रहता है।</li>
<li class="ltr" id="">उन को दूसरे मनुष्यों की नाईं कष्ट नहीं होता, और और मनुष्यों के समान उन पर विपत्ति नहीं पड़ती।</li>
<li class="ltr" id="">इस कारण अहंकार उनके गले का हार बना है, उनका ओढ़ना उपद्रव है।</li>
<li class="ltr" id="">उनकी आंखें चर्बी से झलकती हैं, उनके मन की भवनाएं उमण्डती हैं।</li>
<li class="ltr" id="">वे ठट्ठा मारते हैं, और दुष्टता से अन्धेर की बात बोलते हैं,</li>
<li class="ltr" id="">वे डींग मारते हैं। वे मानों स्वर्ग में बैठे हुए बोलते हैं, और वे पृथ्वी में बोलते फिरते हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">0तौभी उसकी प्रजा इधर लौट आएगी, और उन को भरे हुए प्याले का जल मिलेगा।</li>
<li class="ltr" id="">1फिर वे कहते हैं, ईश्वर कैसे जानता है? क्या परमप्रधान को कुछ ज्ञान है?</li>
<li class="ltr" id="">2देखो, ये तो दुष्ट लोग हैं, तौभी सदा सुभागी रहकर, धन सम्पत्ति बटोरते रहते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">3निश्चय, मैं ने अपने हृदय को व्यर्थ शुद्ध किया और अपने हाथों को निर्दोषता में धोया है,</li>
<li class="ltr" id="">4क्योंकि मैं दिन भर मार खाता आया हूं और प्रति भोर को मेरी ताड़ना होती आई है॥</li>
<li class="ltr" id="">5यदि मैं ने कहा होता कि मैं ऐसा ही कहूंगा, तो देख मैं तेरे लड़कों की सन्तान के साथ क्रूरता का व्यवहार करता,</li>
<li class="ltr" id="">6जब मैं सोचने लगा कि इसे मैं कैसे समझूं, तो यह मेरी दृष्टि में अति कठिन समस्या थी,</li>
<li class="ltr" id="">7जब तक कि मैं ने ईश्वर के पवित्र स्थान में जाकर उन लोगों के परिणाम को न सोचा।</li>
<li class="ltr" id="">8निश्चय तू उन्हें फिसलने वाले स्थानों में रखता है, और गिराकर सत्यानाश कर देता है।</li>
<li class="ltr" id="">9अहा, वे क्षण भर में कैसे उजड़ गए हैं. वे मिट गए, वे घबराते घबराते नाश हो गए हैं।</li>
<li class="ltr" id="">0जैसे जागने हारा स्वप्न को तुच्छ जानता है, वैसे ही हे प्रभु जब तू उठेगा, तब उन को छाया सा समझ कर तुच्छ जानेगा॥</li>
<li class="ltr" id="">1मेरा मन तो चिड़चिड़ा हो गया, मेरा अन्त:करण छिद गया था,</li>
<li class="ltr" id="">2मैं तो पशु सरीखा था, और समझता न था, मैं तेरे संग रह कर भी, पशु बन गया था।</li>
<li class="ltr" id="">3तौभी मैं निरन्तर तेरे संग ही था, तू ने मेरे दाहिने हाथ को पकड़ रखा।</li>
<li class="ltr" id="">4तू सम्मति देता हुआ, मेरी अगुवाई करेगा, और तब मेरी महिमा करके मुझ को अपने पास रखेगा।</li>
<li class="ltr" id="">5स्वर्ग में मेरा और कौन है? तेरे संग रहते हुए मैं पृथ्वी पर और कुछ नहीं चाहता।</li>
<li class="ltr" id="">6मेरे हृदय और मन दोनों तो हार गए हैं, परन्तु परमेश्वर सर्वदा के लिये मेरा भाग और मेरे हृदय की चट्टान बना है॥</li>
<li class="ltr" id="">7जो तुझ से दूर रहते हैं वे तो नाश होंगे, जो कोई तेरे विरुद्ध व्यभिचार करता है, उसको तू विनाश करता है।</li>
<li class="ltr" id="">8परन्तु परमेश्वर के समीप रहना, यही मेरे लिये भला है, मैं ने प्रभु यहोवा को अपना शरणस्थान माना है, जिस से मैं तेरे सब कामों का वर्णन करूं॥</li>

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भजन संहिता 74
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<li class="ltr" id="">हे परमेश्वर, तू ने हमें क्यों सदा के लिये छोड़ दिया है? तेरी कोपाग्नि का धुआं तेरी चराई की भेंड़ों के विरुद्ध क्यों उठ रहा है?</li>
<li class="ltr" id="">अपनी मण्डली को जिसे तू ने प्राचीन काल में मोल लिया था, और अपने निज भाग का गोत्र होने के लिये छुड़ा लिया था, और इस सिय्योन पर्वत को भी, जिस पर तू ने वास किया था, स्मारण कर.</li>
<li class="ltr" id="">अपने डग सनातन की खंडहर की ओर बढ़ा, अर्थात उन सब बुराइयों की ओर जो शत्रु ने पवित्र स्थान में किए हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">तेरे द्रोही तेरे सभा स्थान के बीच गरजते रहे हैं, उन्होंने अपनी ही ध्वजाओं को चिन्ह ठहराया है। वे उन मनुष्यों के समान थे</li>
<li class="ltr" id="">जो घने वन के पेड़ों पर कुल्हाड़े चलाते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">और अब वे उस भवन की नक्काशी को, कुल्हाडियों और हथौड़ों से बिलकुल तोड़े डालते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">उन्होंने तेरे पवित्र स्थान को आग में झोंक दिया है, और तेरे नाम के निवास को गिरा कर अशुद्ध कर डाला है।</li>
<li class="ltr" id="">उन्होंने मन में कहा है कि हम इन को एकदम दबा दें, उन्होंने इस देश में ईश्वर के सब सभा स्थानों को फूंक दिया है॥</li>
<li class="ltr" id="">हम को हमारे निशान नहीं देख पड़ते, अब कोई नबी नहीं रहा, न हमारे बीच कोई जानता है कि कब तक यह दशा रहेगी।</li>
<li class="ltr" id="">0हे परमेश्वर द्रोही कब तक नामधराई करता रहेगा? क्या शत्रु, तेरे नाम की निन्दा सदा करता रहेगा?</li>
<li class="ltr" id="">1तू अपना दहिना हाथ क्यों रोके रहता है? उसे अपने पांजर से निकाल कर उनका अन्त कर दे॥</li>
<li class="ltr" id="">2परमेश्वर तो प्राचीन काल से मेरा राजा है, वह पृथ्वी पर उद्धार के काम करता आया है।</li>
<li class="ltr" id="">3तू ने अपनी शक्ति से समुद्र को दो भाग कर दिया, तू ने जल में मगरमच्छों के सिरों को फोड़ दिया।</li>
<li class="ltr" id="">4तू ने तो लिव्यातानों के सिर टुकड़े टुकड़े करके जंगली जन्तुओं को खिला दिए।</li>
<li class="ltr" id="">5तू ने तो सोता खोल कर जल की धारा बहाई, तू ने तो बारहमासी नदियों को सुखा डाला।</li>
<li class="ltr" id="">6दिन तेरा है रात भी तेरी है, सूर्य और चन्द्रमा को तू ने स्थिर किया है।</li>
<li class="ltr" id="">7तू ने तो पृथ्वी के सब सिवानों को ठहराया, धूपकाल और जाड़ा दोनों तू ने ठहराए हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">8हे यहोवा स्मरण कर, कि शत्रु ने नामधराई की है, और मूढ़ लोगों ने तेरे नाम की निन्दा की है।</li>
<li class="ltr" id="">9अपनी पिण्डुकी के प्राण को वनपशु के वश में न कर, अपने दीन जनों को सदा के लिये न भूल</li>
<li class="ltr" id="">0अपनी वाचा की सुधि ले, क्योंकि देश के अन्धेरे स्थान अत्याचार के घरों से भरपूर हैं।</li>
<li class="ltr" id="">1पिसे हुए जन को निरादर होकर लौटना न पड़े, दीन दरिद्र लोग तेरे नाम की स्तुति करने पाएं॥</li>
<li class="ltr" id="">2हे परमेश्वर उठ, अपना मुकद्दमा आप ही लड़, तेरी जो नामधराई मूढ़ से दिन भर होती रहती है, उसे स्मरण कर।</li>
<li class="ltr" id="">3अपने द्रोहियों का बड़ा बोल न भूल, तेरे विरोधियों का कोलाहल तो निरन्तर उठता रहता है।</li>

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भजन संहिता 75
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<li class="ltr" id="">हे परमेश्वर हम तेरा धन्यवाद करते, हम तेरा नाम का धन्यवाद करते हैं, क्योंकि तेरा नाम प्रगट हुआ है, तेरे आश्चर्यकर्मों का वर्णन हो रहा है॥</li>
<li class="ltr" id="">जब ठीक समय आएगा तब मैं आप ही ठीक ठीक न्याय करूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">पृथ्वी अपने सब रहने वालों समेत डोल रही है, मैं ने उसके खम्भों को स्थिर कर दिया है।</li>
<li class="ltr" id="">मैं ने घमंडियों से कहा, घमंड मत करो, और दुष्टों से, कि सींग ऊंचा मत करो,</li>
<li class="ltr" id="">अपना सींग बहुत ऊंचा मत करो, न सिर उठा कर ढिठाई की बात बोलो॥</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि बढ़ती न तो पूरब से न पच्छिम से, और न जंगल की ओर से आती है,</li>
<li class="ltr" id="">परन्तु परमेश्वर ही न्यायी है, वह एक को घटाता और दूसरे को बढ़ाता है।</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा के हाथ में एक कटोरा है, जिस में का दाखमधु झाग वाला है, उस में मसाला मिला है, और वह उस में से उंडेलता है, निश्चय उसकी तलछट तक पृथ्वी के सब दृष्ट लोग पी जाएंगे॥</li>
<li class="ltr" id="">परन्तु मैं तो सदा प्रचार करता रहूंगा, मैं याकूब के परमेश्वर का भजन गांऊगा।</li>
<li class="ltr" id="">0दुष्टों के सब सींगों को मैं काट डालूंगा, परन्तु धर्मी के सींग ऊंचे किए जाएंगे।</li>

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भजन संहिता 76
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<li class="ltr" id="">परमेश्वर यहूदा में जाना गया है, उसका नाम इस्राएल में महान हुआ है।</li>
<li class="ltr" id="">और उसका मण्डप शालेम में, और उसका धाम सिय्योन में है।</li>
<li class="ltr" id="">वहां उसने चमचमाते तीरों को, और ढाल और तलवार को तोड़कर, निदान लड़ाई ही को तोड़ डाला है॥</li>
<li class="ltr" id="">हे परमेश्वर तू तो ज्योतिमय है, तू अहेर से भरे हुए पहाड़ों से अधिक उत्तम और महान है।</li>
<li class="ltr" id="">दृढ़ मन वाले लुट गए, और भरी नींद में पड़े हैं,</li>
<li class="ltr" id="">और शूरवीरों में से किसी का हाथ न चला। हे याकूब के परमेश्वर, तेरी घुड़की से, रथों समेत घोड़े भारी नींद में पड़े हैं।</li>
<li class="ltr" id="">केवल तू ही भय योग्य है, और जब तू क्रोध करने लगे, तब तेरे साम्हने कौन खड़ा रह सकेगा?</li>
<li class="ltr" id="">तू ने स्वर्ग से निर्णय सुनाया है, पृथ्वी उस समय सुनकर डर गई, और चुप रही,</li>
<li class="ltr" id="">जब परमेश्वर न्याय करने को, और पृथ्वी के सब नम्र लोगों का उद्धार करने को उठा॥</li>
<li class="ltr" id="">0निश्चय मनुष्य की जलजलाहट तेरी स्तुति का कारण हो जाएगी, और जो जलजलाहट रह जाए, उसको तू रोकेगा।</li>
<li class="ltr" id="">1अपने परमेश्वर यहोवा की मन्नत मानो, और पूरी भी करो, वह जो भय के योग्य है, उसके आस पास के सब उसके लिये भेंट ले आएं।</li>
<li class="ltr" id="">2वह तो प्रधानों का अभिमान मिटा देगा, वह पृथ्वी के राजाओं को भय योग्य जान पड़ता है॥</li>

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भजन संहिता 77
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<li class="ltr" id="">मैं परमेश्वर की दोहाई चिल्ला चिल्लाकर दूंगा, मैं परमेश्वर की दोहाई दूंगा, और वह मेरी ओर कान लगाएगा।</li>
<li class="ltr" id="">संकट के दिन मैं प्रभु की खोज में लगा रहा, रात को मेरा हाथ फैला रहा, और ढीला न हुआ, मुझ में शांति आई ही नहीं।</li>
<li class="ltr" id="">मैं परमेश्वर का स्मरण कर करके करहाता हूं, मैं चिन्ता करते करते मूर्छित हो चला हूं। (सेला)</li>
<li class="ltr" id="">तू मुझे झपक्की लगने नहीं देता, मैं ऐसा घबराया हूं कि मेरे मुंह से बात नहीं निकलती॥</li>
<li class="ltr" id="">मैंने प्राचीन काल के दिनों को, और युग युग के वर्षों को सोचा है।</li>
<li class="ltr" id="">मैं रात के समय अपने गीत को स्मरण करता, और मन में ध्यान करता हूं, और मन में भली भांति विचार करता हूं:</li>
<li class="ltr" id="">क्या प्रभु युग युग के लिये छोड़ देगा, और फिर कभी प्रसन्न न होगा?</li>
<li class="ltr" id="">क्या उसकी करूणा सदा के लिये जाती रही? क्या उसका वचन पीढ़ी पीढ़ी के लिये निष्फल हो गया है?</li>
<li class="ltr" id="">क्या ईश्वर अनुग्रह करना भूल गया? क्या उसने क्रोध करके अपनी सब दया को रोक रखा है? (सेला)</li>
<li class="ltr" id="">0मैने कहा यह तो मेरी दुर्बलता ही है, परन्तु मैं परमप्रधान के दाहिने हाथ के वर्षों को विचारता हूं॥</li>
<li class="ltr" id="">1मैं याह के बड़े कामों की चर्चा करूंगा, निश्चय मैं तेरे प्राचीन काल वाले अद्भुत कामों को स्मरण करूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">2मैं तेरे सब कामों पर ध्यान करूंगा, और तेरे बड़े कामों को सोचूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">3हे परमेश्वर तेरी गति पवित्रता की है। कौन सा देवता परमेश्वर के तुल्य बड़ा है?</li>
<li class="ltr" id="">4अद्भुत काम करने वाला ईश्वर तू ही है, तू ने अपने देश देश के लोगों पर अपनी शक्ति प्रगट की है।</li>
<li class="ltr" id="">5तू ने अपने भुजबल से अपनी प्रजा, याकूब और यूसुफ के वंश को छुड़ा लिया है॥ (सेला)</li>
<li class="ltr" id="">6हे परमेश्वर समुद्र ने तुझे देखा, समुद्र तुझे देख कर ड़र गया, गहिरा सागर भी कांप उठा।</li>
<li class="ltr" id="">7मेघों से बड़ी वर्षा हुई, आकाश से शब्द हुआ, फिर तेरे तीर इधर उधर चले।</li>
<li class="ltr" id="">8बवणडर में तेरे गरजने का शब्द सुन पड़ा था, जगत बिजली से प्रकाशित हुआ, पृथ्वी कांपी और हिल गई।</li>
<li class="ltr" id="">9तेरे मार्ग समुद्र में है, और तेरा रास्ता गहिरे जल में हुआ, और तेरे पांवों के चिन्ह मालूम नहीं होते।</li>
<li class="ltr" id="">0तू ने मूसा और हारून के द्धारा, अपनी प्रजा की अगुवाई भेड़ों की सी की॥</li>

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भजन संहिता 78
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<li class="ltr" id="">हे मेरे लोगों, मेरी शिक्षा सुनो, मेरे वचनों की ओर कान लगाओ.</li>
<li class="ltr" id="">मैं अपना मूंह नीतिवचन कहने के लिये खोलूंगा, मैं प्राचीन काल की गुप्त बातें कहूंगा,</li>
<li class="ltr" id="">जिन बातों को हम ने सुना, ओर जान लिया, और हमारे बाप दादों ने हम से वर्णन किया है।</li>
<li class="ltr" id="">उन्हे हम उनकी सन्तान से गुप्त न रखेंगें, परन्तु होनहार पीढ़ी के लोगों से, यहोवा का गुणानुवाद और उसकी सामर्थ और आश्चर्यकर्मों का वर्णन करेंगें॥</li>
<li class="ltr" id="">उसने तो याकूब में एक चितौनी ठहराई, और इस्त्राएल में एक व्यवस्था चलाई, जिसके विषय उसने हमारे पितरों को आज्ञा दी, कि तुम इन्हे अपने अपने लड़के बालों को बताना,</li>
<li class="ltr" id="">कि आने वाली पीढ़ी के लोग, अर्थात जो लड़के बाले उत्पन्न होने वाले हैं, वे इन्हे जानें, और अपने अपने लड़के बालों से इनका बखान करने में उद्यत हों, जिस से वे परमेश्वर का आसरा रखें,</li>
<li class="ltr" id="">और ईश्वर के बड़े कामों को भूल न जाएं, परन्तु उसकी आज्ञाओं का पालन करते रहें,</li>
<li class="ltr" id="">और अपने पितरों के समान न हों, क्योंकि उस पीढ़ी के लोग तो हठीले और झगड़ालू थे, और उन्होंने अपना मन स्थिर न किया था, और न उनकी आत्मा ईश्वर की ओर सच्ची रही॥</li>
<li class="ltr" id="">एप्रेमयों ने तो शस्त्राधारी और धनुर्धारी होने पर भी, युद्ध के समय पीठ दिखा दी।</li>
<li class="ltr" id="">0उन्होंने परमेश्वर की वाचा पूरी नहीं की, और उसकी व्यवस्था पर चलने से इनकार किया।</li>
<li class="ltr" id="">1उन्होंने उसके बड़े कामों को और जो आश्चर्यकर्म उसने उनके साम्हने किए थे, उन को भुला दिया।</li>
<li class="ltr" id="">2उसने तो उनके बाप दादों के सम्मुख मिस्त्र देश के सोअन के मैदान में अद्भुत कर्म किए थे।</li>
<li class="ltr" id="">3उसने समुद्र को दो भाग करके उन्हे पार कर दिया, और जल को ढ़ेर की नाईं खड़ा कर दिया।</li>
<li class="ltr" id="">4और उसने दिन को बादल के खम्भों से और रात भर अग्नि के प्रकाश के द्धारा उनकी अगुवाई की।</li>
<li class="ltr" id="">5वह जंगल में चट्टानें फाड़कर, उन को मानो गहिरे जलाशयों से मनमाने पिलाता था।</li>
<li class="ltr" id="">6उसने चट्टान से भी धाराएं निकालीं और नदियों का सा जल बहाया॥</li>
<li class="ltr" id="">7तौभी वे फिर उसके विरुद्ध अधिक पाप करते गए, और निर्जल देश में परमप्रधान के विरुद्ध उठते रहे।</li>
<li class="ltr" id="">8और अपनी चाह के अनुसार भोजन मांग कर मन ही मन ईश्वर की परीक्षा की।</li>
<li class="ltr" id="">9वे परमेश्वर के विरुद्ध बोले, और कहने लगे, क्या ईश्वर जंगल में मेज लगा सकता है?</li>
<li class="ltr" id="">0उसने चट्टान पर मार के जल बहा तो दिया, और धाराएं उमण्ड़ चली, परन्तु क्या वह रोटी भी दे सकता है? क्या वह अपनी प्रजा के लिये मांस भी तैयार कर सकता?</li>
<li class="ltr" id="">1यहोवा सुनकर क्रोध से भर गया, तब याकूब के बीच आग लगी, और इस्त्राएल के विरुद्ध क्रोध भड़का,</li>
<li class="ltr" id="">2इसलिए कि उन्होंने परमेश्वर पर विश्वास नहीं रखा था, न उसकी उद्धार करने की शक्ति पर भरोसा किया।</li>
<li class="ltr" id="">3तौभी उसने आकाश को आज्ञा दी, और स्वर्ग के द्वारों को खोला,</li>
<li class="ltr" id="">4और उनके लिये खाने को मन्ना बरसाया, और उन्हे स्वर्ग का अन्न दिया।</li>
<li class="ltr" id="">5उन को शूरवीरों की सी रोटी मिली, उसने उन को मनमाना भोजन दिया।</li>
<li class="ltr" id="">6उसने आकाश में पुरवाई को चलाया, और अपनी शक्ति से दक्खिनी बहाई,</li>
<li class="ltr" id="">7और उनके लिये मांस धूलि की नाईं बहुत बरसाया, और समुद्र के बालू के समान अनगिनित पक्षी भेजे,</li>
<li class="ltr" id="">8और उनकी छावनी के बीच में, उनके निवासों के चारों ओर गिराए।</li>
<li class="ltr" id="">9और वे खाकर अति तृप्त हुए, और उसने उनकी कामना पूरी की।</li>
<li class="ltr" id="">0उनकी कामना बनी ही रही, उनका भोजन उनके मुंह ही में था,</li>
<li class="ltr" id="">1कि परमेश्वर का क्रोध उन पर भड़का, और उसने उनके हृष्टपुष्टों को घात किया, और इस्त्राएल के जवानों को गिरा दिया॥</li>
<li class="ltr" id="">2इतने पर भी वे और अधिक पाप करते गए, और परमेश्वर के आश्चर्यकर्मों की प्रतीति न की।</li>
<li class="ltr" id="">3तब उसने उनके दिनों को व्यर्थ श्रम में, और उनके वर्षों को घबराहट में कटवाया।</li>
<li class="ltr" id="">4जब जब वह उन्हे घात करने लगता, तब तब वे उसको पूछते थे, और फिरकर ईश्वर को यत्न से खोजते थे।</li>
<li class="ltr" id="">5और उन को स्मरण होता था कि परमेश्वर हमारी चट्टान है, और परमप्रधान ईश्वर हमारा छुड़ाने वाला है।</li>
<li class="ltr" id="">6तौभी उन्होंने उससे चापलूसी की, वे उससे झूठ बोले।</li>
<li class="ltr" id="">7क्योंकि उनका हृदय उसकी ओर दृढ़ न था, न वे उसकी वाचा के विषय सच्चे थे।</li>
<li class="ltr" id="">8परन्तु वह जो दयालु है, वह अधर्म को ढांपता, और नाश नहीं करता, वह बारबार अपने क्रोध को ठण्डा करता है, और अपनी जलजलाहट को पूरी रीति से भड़कने नहीं देता।</li>
<li class="ltr" id="">9उसको स्मरण हुआ कि ये नाशमान हैं, ये वायु के समान हैं जो चली जाती और लौट नहीं आती।</li>
<li class="ltr" id="">0उन्होंने कितनी ही बार जंगल में उससे बलवा किया, और निर्जल देश में उसको उदास किया.</li>
<li class="ltr" id="">1वे बारबार ईश्वर की परीक्षा करते थे, और इस्त्राएल के पवित्र को खेदित करते थे।</li>
<li class="ltr" id="">2उन्होने न तो उसका भुजबल स्मरण किया, न वह दिन जब उसने उन को द्रोही के वश से छुड़ाया था,</li>
<li class="ltr" id="">3कि उसने क्योंकर अपने चिन्ह मिस्त्र में, और अपने चमत्कार सोअन के मैदान में किए थे।</li>
<li class="ltr" id="">4उसने तो मिस्त्रियों की नहरों को लोहू बना डाला, और वे अपनी नदियों का जल पी न सके।</li>
<li class="ltr" id="">5उसने उनके बीच में डांस भेजे जिन्होंने उन्हे काट खाया, और मेंढक भी भेजे, जिन्होंने उनका बिगाड़ किया।</li>
<li class="ltr" id="">6उसने उनकी भूमि की उपज कीड़ों को, और उनकी खेतीबारी टिड्डयों को खिला दी थी।</li>
<li class="ltr" id="">7उसने उनकी दाखलताओं को ओेलों से, और उनके गूलर के पेड़ों को बड़े बड़े पत्थर बरसा कर नाश किया।</li>
<li class="ltr" id="">8उसने उनके पशुओं को ओलों से, और उनके ढोरों को बिजलियों से मिटा दिया।</li>
<li class="ltr" id="">9उसने उनके ऊपर अपना प्रचणड क्रोध और रोष भड़काया, और उन्हे संकट में डाला, और दुखदाई दूतों का दल भेजा।</li>
<li class="ltr" id="">0उसने अपने क्रोध का मार्ग खोला, और उनके प्राणों को मृत्यु से न बचाया, परन्तु उन को मरी के वश में कर दिया।</li>
<li class="ltr" id="">1उसने मित्र के सब पहिलौठों को मारा, जो हाम के डेरों में पौरूष के पहिले फल थे,</li>
<li class="ltr" id="">2परन्तु अपनी प्रजा को भेड़- बकरियों की नाईं प्रस्थान कराया, और जंगल में उनकी अगुवाई पशुओं के झुण्ड की सी की।</li>
<li class="ltr" id="">3तब वे उसके चलाने से बेखटके चले और उन को कुछ भय न हुआ, परन्तु उनके शत्रु समुद्र में डूब गए।</li>
<li class="ltr" id="">4और उसने उन को अपने पवित्र देश के सिवाने तक, इसी पहाड़ी देश में पहुंचाया, जो उसने अपने दाहिने हाथ से प्राप्त किया था।</li>
<li class="ltr" id="">5उसने उनके साम्हने से अन्यजातियों को भगा दिया, और उनकी भूमि को डोरी से माप माप कर बांट दिया, और इस्त्राएल के गोत्रों को उनके डेरों में बसाया॥</li>
<li class="ltr" id="">6तौभी उन्होने परमप्रधान परमेश्वर की परीक्षा की और उससे बलवा किया, और उसकी चितौनियों को न माना,</li>
<li class="ltr" id="">7और मुड़ कर अपने पुरखाओं की नाईं विश्वासघात किया, उन्होंने निकम्मे धनुष की नाईं धोखा दिया।</li>
<li class="ltr" id="">8क्योंकि उन्होंने ऊंचे स्थान बनाकर उसको रिस दिलाई, और खुदी हुई मुर्तियों के द्वारा उस में जलन उपजाई।</li>
<li class="ltr" id="">9परमेश्वर सुनकर रोष से भर गया, और उसने इस्त्राएल को बिलकुल तज दिया।</li>
<li class="ltr" id="">0उसने शीलो के निवास, अर्थात उस तम्बु को जो उसने मनुष्यों के बीच खडा किया था, त्याग दिया,</li>
<li class="ltr" id="">1और अपनी सामर्थ को बन्धुआई में जाने दिया, और अपनी शोभा को द्रोही के वश में कर दिया।</li>
<li class="ltr" id="">2उसने अपनी प्रजा को तलवार से मरवा दिया, और अपने निज भाग के लोगों पर रोष से भर गया।</li>
<li class="ltr" id="">3उन के जवान आग से भस्म हुए, और उनकी कुमारियों के विवाह के गीत न गाए गए।</li>
<li class="ltr" id="">4उनके याजक तलवार से मारे गए, और उनकी विधवाएं रोने न पाईं।</li>
<li class="ltr" id="">5तब प्रभु मानो नींद से चौंक उठा, और ऐसे वीर के समान उठा जो दाखमधु पीकर ललकारता हो।</li>
<li class="ltr" id="">6और उसने अपने द्रोहियों को मार कर पीछे हटा दिया, और उनकी सदा की नामधराई कराई॥</li>
<li class="ltr" id="">7फिर उसने यूसुफ के तम्बू को तज दिया, और एप्रैम के गोत्रा को न चुना,</li>
<li class="ltr" id="">8परन्तु यहूदा ही के गोत्र को, और अपने प्रिय सिय्योन पर्वत को चुन लिया।</li>
<li class="ltr" id="">9उसने अपने पवित्र स्थान को बहुत ऊंचा बना दिया, और पृथ्वी के समान स्थिर बनाया, जिसकी नेव उसने सदा के लिये डाली है।</li>
<li class="ltr" id="">0फिर उसने अपने दास दाऊद को चुन कर भेड़शालाओं में से ले लिया,</li>
<li class="ltr" id="">1वह उसको बच्चे वाली भेड़ों के पीछे पीछे फिरने से ले आया कि वह उसकी प्रजा याकूब की अर्थात उसके निज भाग इस्त्राएल की चरवाही करे।</li>
<li class="ltr" id="">2तब उसने खरे मन से उनकी चरवाही की, और अपने हाथ की कुशलता से उनकी अगुवाई की॥</li>

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भजन संहिता 79
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<li class="ltr" id="">हे परमेश्वर अन्यजातियां तेरे निज भग में घुस आई, उन्होंने तेरे पवित्र मन्दिर को अशुद्ध किया, और यरूशलेम को खंडहर कर दिया है।</li>
<li class="ltr" id="">उन्होंने तेरे दासों की लोथों को आकाश के पक्षियों का आहार कर दिया, और तेरे भक्तों का मांस वनपशुओें को खिला दिया है।</li>
<li class="ltr" id="">उन्होंने उनका लोहू यरूशलेम के चारों ओर जल की नाईं बहाया, और उन को मिट्टी देने वाला कोई न था।</li>
<li class="ltr" id="">पड़ोसियों के बीच हमारी नामधराई हुई, चारों ओर के रहने वाले हम पर हंसते, और ठट्ठा करते हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा, तू कब तक लगातार क्रोध करता रहेगा? तुझ में आग की सी जलन कब तक भड़कती रहेगी?</li>
<li class="ltr" id="">जो जातियां तुझ को नहीं जानती, और जिन राज्यों के लोग तुझ से प्रार्थना नहीं करते, उन्ही पर अपनी सब जलजलाहट भड़का.</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि उन्होंने याकूब को निगल लिया, और उसके वासस्थान को उजाड़ दिया है।</li>
<li class="ltr" id="">हमारी हानि के लिये हमारे पुरखाओं के अधर्म के कामों को स्मरण न कर, तेरी दया हम पर शीघ्र हो, क्योंकि हम बड़ी दुर्दशा में पड़े हैं।</li>
<li class="ltr" id="">हे हमारे उद्धारकर्ता परमेश्वर, अपने नाम की महिमा के निमित हमारी सहायता कर, और अपने नाम के निमित हम को छुड़ा कर हमारे पापों को ढांप दे।</li>
<li class="ltr" id="">0अनयजातियां क्यों कहने पाएं कि उनका परमेश्वर कहां रहा? अन्यजातियों के बीच तेरे दासों के खून का पलटा लेना हमारे देखते उन्हें मालूम हो जाए॥</li>
<li class="ltr" id="">1बन्धुओं का कराहना तेरे कान तक पहुंचे, घात होने वालों को अपने भुजबल के द्वारा बचा।</li>
<li class="ltr" id="">2और हे प्रभु, हमारे पड़ोसियों ने जो तेरी निन्दा की है, उसका सातगुणा बदला उन को दे.</li>
<li class="ltr" id="">3तब हम जो तेरी प्रजा और तेरी चराई की भेड़ें हैं, तेरा धन्यवाद सदा करते रहेंगे, और पीढ़ी से पीढ़ी तक तेरा गुणानुवाद करते रहेंगें॥</li>

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भजन संहिता 80
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<li class="ltr" id="">हे इस्त्राएल के चरवाहे, तू जो यूसुफ की अगुवाई भेड़ों की सी करता है, कान लगा. तू जो करूबों पर विराजमान है, अपना तेज दिखा.</li>
<li class="ltr" id="">एप्रैम, बिन्यामीन, और मनश्शे के साम्हने अपना पराक्रम दिखा कर, हमारा उद्धार करने को आ.</li>
<li class="ltr" id="">हे परमेश्वर, हम को ज्यों का त्यों कर दे, और अपने मुख का प्रकाश चमका, तब हमारा उद्धार हो जाएगा.</li>
<li class="ltr" id="">हे सेनाओं के परमेश्वर यहोवा, तू कब तक अपनी प्रजा की प्रार्थना पर क्रोधित रहेगा?</li>
<li class="ltr" id="">तू ने आंसुओं को उनका आहार कर दिया, और मटके भर भर के उन्हें आंसु पिलाए हैं।</li>
<li class="ltr" id="">तू हमें हमारे पड़ोसियों के झगड़ने का कारण कर देता है, और हमारे शत्रु मनमाने ठट्ठा करते हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">हे सेनाओं के परमेश्वर, हम को ज्यों का त्यों कर दे, और अपने मुख का प्रकाश हम पर चमका, तब हमारा उद्धार हो जाएगा॥</li>
<li class="ltr" id="">तू मिस्त्र से एक दाखलता ले आया, और अन्यजातियों को निकाल कर उसे लगा दिया।</li>
<li class="ltr" id="">तू ने उसके लिये स्थान तैयार किया है, और उसने जड़ पकड़ी और फैल कर देश को भर दिया।</li>
<li class="ltr" id="">0उसकी छाया पहाड़ों पर फैल गई, और उसकी डालियां ईश्वर के देवदारों के समान हुईं,</li>
<li class="ltr" id="">1उसकी शाखाएं समुद्र तक बढ़ गई, और उसके अंकुर महानद तक फैल गए।</li>
<li class="ltr" id="">2फिर तू ने उसके बाड़ों को क्यों गिरा दिया, कि सब बटोही उसके फलों को तोड़ते हैं?</li>
<li class="ltr" id="">3जंगली सूअर उसको नाश किए डालता है, और मैदान के सब पशु उसे चर जाते हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">4हे सेनाओं के परमेश्वर, फिर आ. स्वर्ग से ध्यान देकर देख, और इस दाखलता की सुधि ले,</li>
<li class="ltr" id="">5ये पौधा तू ने अपने दाहिने हाथ से लगाया, और जो लता की शाखा तू ने अपने लिये दृढ़ की है।</li>
<li class="ltr" id="">6वह जल गई, वह कट गई है, तेरी घुड़की से वे नाश होते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">7तेरे दाहिने हाथ के सम्भाले हुअ पुरूष पर तेरा हाथ रखा रहे, उस आदमी पर, जिसे तू ने अपने लिये दृढ़ किया है।</li>
<li class="ltr" id="">8तब हम लोग तुझ से न मुड़ेंगे: तू हम को जिला, और हम तुझ से प्रार्थना कर सकेंगे।</li>
<li class="ltr" id="">9हे सेनाओं के परमेश्वर यहोवा, हम को ज्यों का त्यों कर दे. और अपने मुख का प्रकाश हम पर चमका, तब हमारा उद्धार हो जाएगा.</li>

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भजन संहिता 81
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<li class="ltr" id="">परमेश्वर जो हमारा बल है, उसका गीत आनन्द से गाओ, याकूब के परमेश्वर का जयजयकार करो.</li>
<li class="ltr" id="">भजन उठाओ, डफ और मधुर बजने वाली वीणा और सारंगी को ले आओ।</li>
<li class="ltr" id="">नये चाँद के दिन, और पूर्णमासी को हमारे पर्व के दिन नरसिंगा फूंको।</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि यह इस्त्राएल के लिये विधि, और याकूब के परमेश्वर का ठहराया हुआ नियम है।</li>
<li class="ltr" id="">इस को उसने यूसुफ में चितौनी की रीति पर उस समय चलाया, जब वह मिस्त्र देश के विरुद्ध चला॥ वहां मैं ने एक अनजानी भाषा सुनी,</li>
<li class="ltr" id="">मैं ने उनके कन्धों पर से बोझ को उतार दिया, उनका टोकरी ढोना छुट गया।</li>
<li class="ltr" id="">तू ने संकट में पड़ कर पुकारा, तब मैं ने तुझे छुड़ाया, बादल गरजने के गुप्त स्थान में से मैं ने तेरी सुनी, और मरीबा नाम सोते के पास तेरी परीक्षा की। (सेला)</li>
<li class="ltr" id="">हे मेरी प्रजा, सुन, मैं तुझे चिता देता हूं. हे इस्त्राएल भला हो कि तू मेरी सुने.</li>
<li class="ltr" id="">तेरे बीच में पराया ईश्वर न हो, और न तू किसी पराए देवता को दणडवत करना.</li>
<li class="ltr" id="">0तेरा परमेश्वर यहोवा मैं हूं, जो तुझे मिस्त्र देश से निकाल लाया है। तू अपना मुंह पसार, मैं उसे भर दूंगा॥</li>
<li class="ltr" id="">1परन्तु मेरी प्रजा ने मेरी न सुनी, इस्त्राएल ने मुझ को न चाहा।</li>
<li class="ltr" id="">2इसलिये मैं ने उसको उसके मन के हठ पर छोड़ दिया, कि वह अपनी ही युक्तियों के अनुसार चले।</li>
<li class="ltr" id="">3यदि मेरी प्रजा मेरी सुने, यदि इस्त्राएल मेरे मार्गों पर चले,</li>
<li class="ltr" id="">4तो क्षण भर में उनके शत्रुओं को दबाऊं, और अपना हाथ उनके द्रोहियों के विरुद्ध चलाऊं।</li>
<li class="ltr" id="">5यहोवा के बैरी तो उस के वश में हो जाते, और उनका अन्त सदाकाल तक बना रहता हैं।</li>
<li class="ltr" id="">6और उनको उत्तम से उत्तम गेहूं खिलाता, और मैं चट्टान में के मधु से उन को तृप्त करूं॥</li>

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भजन संहिता 82
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<li class="ltr" id="">परमेश्वर की सभा में परमेश्वर ही खड़ा है, वह ईश्वरों के बीच में न्याय करता है।</li>
<li class="ltr" id="">तुम लोग कब तक टेढ़ा न्याय करते और दुष्टों का पक्ष लेते रहोगे?</li>
<li class="ltr" id="">कंगाल और अनाथों का न्याय चुकाओ, दीन दरिद्र का विचार धर्म से करो।</li>
<li class="ltr" id="">कंगाल और निर्धन को बचा लो, दुष्टों के हाथ से उन्हें छुड़ाओ॥</li>
<li class="ltr" id="">वे न तो कुछ समझते और न कुछ बूझते हैं, परन्तु अन्धेरे में चलते फिरते रहते हैं, पृथ्वी की पूरी नीव हिल जाती है॥</li>
<li class="ltr" id="">मैं ने कहा था कि तुम ईश्वर हो, और सब के सब परमप्रधान के पुत्र हो,</li>
<li class="ltr" id="">तौभी तुम मनुष्यों की नाईं मरोगे, और किसी प्रधान के समान गिर जाओगे॥</li>
<li class="ltr" id="">हे परमेश्वर उठ, पृथ्वी का न्याय कर, क्योंकि तू ही सब जातियों को अपने भाग में लेगा.</li>

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भजन संहिता 83
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<li class="ltr" id="">हे परमेश्वर मौन न रह, हे ईश्वर चुप न रह, और न शांत रह.</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि देख तेरे शत्रु धूम मचा रहे हैं, और तेरे बैरियों ने सिर उठाया है।</li>
<li class="ltr" id="">वे चतुराई से तेरी प्रजा की हानि की सम्मति करते, और तेरे रक्षित लोगों के विरुद्ध युक्तियां निकालते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">उन्होंने कहा, आओ, हम उन को ऐसा नाश करें कि राज्य भी मिट जाए, और इस्त्राएल का नाम आगे को स्मरण न रहे।</li>
<li class="ltr" id="">उन्होंने एक मन हो कर युक्ति निकाली है, और तेरे ही विरुद्ध वाचा बान्धी है।</li>
<li class="ltr" id="">ये तो एदोम के तम्बू वाले और इश्माइली, मोआबी और हुग्री,</li>
<li class="ltr" id="">गबाली, अम्मोनी, अमालेकी, और सोर समेत पलिश्ती हैं।</li>
<li class="ltr" id="">इनके संग अश्शूरी भी मिल गए हैं, उन से भी लूतवंशियों को सहारा मिला है।</li>
<li class="ltr" id="">इन से ऐसा कर जैसा मिद्यानियों से, और कीशोन नाले में सीसरा और याबीन से किया था, जो एन्दोर में नाश हुए,</li>
<li class="ltr" id="">0और भूमि के लिये खाद बन गए।</li>
<li class="ltr" id="">1इनके रईसों को ओरेब और जाएब सरीखे, और इनके सब प्रधानों को जेबह और सल्मुन्ना के समान कर दे,</li>
<li class="ltr" id="">2जिन्होंने कहा था, कि हम परमेश्वर की चराइयों के अधिकारी आप ही हो जाएं॥</li>
<li class="ltr" id="">3हे मेरे परमेश्वर इन को बवन्डर की धूलि, वा पवन से उड़ाए हुए भूसे के समान कर दे।</li>
<li class="ltr" id="">4उस आग की नाईं जो वन को भस्म करती है, और उस लौ की नाईं जो पहाड़ों को जला देती है,</li>
<li class="ltr" id="">5तू इन्हे अपनी आंधी से भाग दे, और अपने बवन्डर से घबरा दे.</li>
<li class="ltr" id="">6इनके मुंह को अति लज्जित कर, कि हे यहोवा ये तेरे नाम को ढूंढ़ें।</li>
<li class="ltr" id="">7ये सदा के लिये लज्जित और घबराए रहें इनके मुंह काले हों, और इनका नाश हो जाए,</li>
<li class="ltr" id="">8जिस से यह जानें कि केवल तू जिसका नाम यहोवा है, सारी पृथ्वी के ऊपर परमप्रधान है॥</li>

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भजन संहिता 84
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<li class="ltr" id="">हे सेनाओं के यहोवा, तेरे निवास क्या ही प्रिय हैं.</li>
<li class="ltr" id="">मेरा प्राण यहोवा के आंगनों की अभिलाषा करते करते मूर्छित हो चला, मेरा तन मन दोनों जीवते ईश्वर को पुकार रहे॥</li>
<li class="ltr" id="">हे सेनाओं के यहोवा, हे मेरे राजा, और मेरे परमेश्वर, तेरी वेदियों मे गौरैया ने अपना बसेरा और शूपाबेनी ने घोंसला बना लिया है जिस में वह अपने बच्चे रखे।</li>
<li class="ltr" id="">क्या ही धन्य हैं वे, जो तेरे भवन में रहते हैं, वे तेरी स्तुति निरन्तर करते रहेंगे॥</li>
<li class="ltr" id="">क्या ही धन्य है, वह मनुष्य जो तुझ से शक्ति पाता है, और वे जिन को सिय्योन की सड़क की सुधि रहती है।</li>
<li class="ltr" id="">वे रोने की तराई में जाते हुए उसको सोतों का स्थान बनाते हैं, फिर बरसात की अगली वृष्टि उसमें आशीष ही आशीष उपजाती है।</li>
<li class="ltr" id="">वे बल पर बल पाते जाते हैं, उन में से हर एक जन सिय्योन में परमेश्वर को अपना मुंह दिखाएगा॥</li>
<li class="ltr" id="">हे सेनाओं के परमेश्वर यहोवा, मेरी प्रार्थना सुन, हे याकूब के परमेश्वर, कान लगा.</li>
<li class="ltr" id="">हे परमेश्वर, हे हमारी ढ़ाल, दृष्टि कर, और अपने अभिषिक्ति का मुख देख.</li>
<li class="ltr" id="">0क्योंकि तेरे आंगनों में का एक दिन और कहीं के हजार दिन से उत्तम है। दुष्टों के डेरों में वास करने से अपने परमेश्वर के भवन की डेवढ़ी पर खड़ा रहना ही मुझे अधिक भावता है।</li>
<li class="ltr" id="">1क्योंकि यहोवा परमेश्वर सूर्य और ढाल है, यहोवा अनुग्रह करेगा, और महिमा देगा, और जो लोग खरी चाल चलते हैं, उन से वह कोई अच्छा पदार्थ रख न छोड़ेगा।</li>
<li class="ltr" id="">2हे सेनाओं के यहोवा, क्या ही धन्य वह मनुष्य है, जो तुझ पर भरोसा रखता है.</li>

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भजन संहिता 85
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<li class="ltr" id="">हे यहोवा, तू अपने देश पर प्रसन्न हुआ, याकूब को बन्धुआई से लौटा ले आया है।</li>
<li class="ltr" id="">तू ने अपनी प्रजा के अधर्म को क्षमा किया है, और उसके सब पापों को ढांप दिया है।</li>
<li class="ltr" id="">तू ने अपने रोष को शान्त किया है, और अपने भड़के हुए कोप को दूर किया है॥</li>
<li class="ltr" id="">हे हमारे उद्धारकर्ता परमेश्वर हम को फेर, और अपना क्रोध हम पर से दूर कर.</li>
<li class="ltr" id="">क्या तू हम पर सदा कोपित रहेगा? क्या तू पीढ़ी से पीढ़ी तक कोप करता रहेगा?</li>
<li class="ltr" id="">क्या तू हम को फिर न जिलाएगा, कि तेरी प्रजा तुझ में आनन्द करे?</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा अपनी करूणा हमें दिखा, और तू हमारा उद्धार कर॥</li>
<li class="ltr" id="">मैं कान लगाए रहूंगा, कि ईश्वर यहोवा क्या कहता है, वह तो अपनी प्रजा से जो उसके भक्त है, शान्ति की बातें कहेगा, परन्तु वे फिर के मूर्खता न करने लगें।</li>
<li class="ltr" id="">निश्चय उसके डरवैयों के उद्धार का समय निकट है, तब हमारे देश में महिमा का निवास होगा॥</li>
<li class="ltr" id="">0करूणा और सच्चाई आपस में मिल गई हैं, धर्म और मेल ने आपस में चुम्बन किया है।</li>
<li class="ltr" id="">1पृथ्वी में से सच्चाई उगती और स्वर्ग से धर्म झुकता है।</li>
<li class="ltr" id="">2फिर यहोवा उत्तम पदार्थ देगा, और हमारी भूमि अपनी उपज देगी।</li>
<li class="ltr" id="">3धर्म उसके आगे आगे चलेगा, और उसके पांवों के चिन्हों को हमारे लिये मार्ग बनाएगा॥</li>

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भजन संहिता 86
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<li class="ltr" id="">हे यहोवा कान लगा कर मेरी सुन ले, क्योंकि मैं दीन और दरिद्र हूं।</li>
<li class="ltr" id="">मेरे प्राण की रक्षा कर, क्योंकि मैं भक्त हूं, तू मेरा परमेश्वर है, इसलिये अपने दास का, जिसका भरोसा तुझ पर है, उद्धार कर।</li>
<li class="ltr" id="">हे प्रभु मुझ पर अनुग्रह कर, क्योंकि मैं तुझी को लगातार पुकारता रहता हूं।</li>
<li class="ltr" id="">अपने दास के मन को आनन्दित कर, क्योंकि हे प्रभु, मैं अपना मन तेरी ही ओर लगाता हूं।</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि हे प्रभु, तू भला और क्षमा करने वाला है, और जितने तुझे पुकारते हैं उन सभों के लिये तू अति करूणामय है।</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा मेरी प्रार्थना की ओर कान लगा, और मेरे गिड़गिड़ाने को ध्यान से सुन।</li>
<li class="ltr" id="">संकट के दिन मैं तुझ को पुकारूंगा, क्योंकि तू मेरी सुन लेगा॥</li>
<li class="ltr" id="">हे प्रभु देवताओं में से कोई भी तेरे तुल्य नहीं, और ने किसी के काम तेरे कामों के बराबर हैं।</li>
<li class="ltr" id="">हे प्रभु जितनी जातियों को तू ने बनाया है, सब आकर तेरे साम्हने दणडवत करेंगी, और तेरे नाम की महिमा करेंगी।</li>
<li class="ltr" id="">0क्योंकि तू महान और आश्चर्य कर्म करने वाला है, केवल तू ही परमेश्वर है।</li>
<li class="ltr" id="">1हे यहोवा अपना मार्ग मुझे दिखा, तब मैं तेरे सत्य मार्ग पर चलूंगा, मुझ को एक चित्त कर कि मैं तेरे नाम का भय मानूं।</li>
<li class="ltr" id="">2हे प्रभु हे मेरे परमेश्वर मैं अपने सम्पूर्ण मन से तेरा धन्यवाद करूंगा, और तेरे नाम की महिमा सदा करता रहूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">3क्योंकि तेरी करूणा मेरे ऊपर बड़ी है, और तू ने मुझ को अधोलोक की तह में जाने से बचा लिया है॥</li>
<li class="ltr" id="">4हे परमेश्वर अभिमानी लोग तो मेरे विरुद्ध उठे हैं, और बलात्कारियों का समाज मेरे प्राण का खोजी हुआ है, और वे तेरा कुछ विचार नहीं रखते।</li>
<li class="ltr" id="">5परन्तु प्रभु तू दयालु और अनुग्रहकारी ईश्वर है, तू विलम्ब से कोप करने वाला और अति करूणामय है।</li>
<li class="ltr" id="">6मेरी ओर फिर कर मुझ पर अनुग्रह कर, अपने दास को तू शक्ति दे, और अपनी दासी के पुत्र का उद्धार कर॥</li>
<li class="ltr" id="">7मुझे भलाई का कोई लक्षण दिखा, जिसे देख कर मेरे बैरी निराश हों, क्योंकि हे यहोवा तू ने आप मेरी सहायता की और मुझे शान्ति दी है॥</li>

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भजन संहिता 87
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<li class="ltr" id="">उसकी नेव पवित्र पर्वतों में है,</li>
<li class="ltr" id="">और यहोवा सिय्योन के फाटकों को याकूब के सारे निवासों से बढ़ कर प्रीति रखता है।</li>
<li class="ltr" id="">हे परमेश्वर के नगर, तेरे विषय महिमा की बातें कही गई हैं।</li>
<li class="ltr" id="">मैं अपने जान- पहचान वालों से रहब और बाबेल की भी चर्चा करूंगा, पलिश्त, सोर और कूश को देखो, यह वहां उत्पन्न हुआ था।</li>
<li class="ltr" id="">और सिय्योन के विषय में यह कहा जाएगा, कि अमुक अमुक मनुष्य उस में उत्पन्न हुआ था, और परमप्रधान आप ही उसको स्थिर रखेगा।</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा जब देश देश के लोगों के नाम लिख कर गिन लेगा, तब यह कहेगा, कि यह वहां उत्पन्न हुआ था॥</li>
<li class="ltr" id="">गवैये और नृतक दोनों कहेंगे कि हमारे सब सोते तुझी में पाए जाते हैं॥</li>

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भजन संहिता 88
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<li class="ltr" id="">हे मेरे उद्धारकर्ता परमेश्वर यहोवा, मैं दिन को और रात को तेरे आगे चिल्लाता आया हूं।</li>
<li class="ltr" id="">मेरी प्रार्थना तुझ तक पहुंचे, मेरे चिल्लाने की ओर कान लगा.</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि मेरा प्राण क्लेश में भरा हुआ है, और मेरा प्राण अधोलोक के निकट पहुंचा है।</li>
<li class="ltr" id="">मैं कबर में पड़ने वालों में गिना गया हूं, मैं बलहीन पुरूष के समान हो गया हूं।</li>
<li class="ltr" id="">मैं मुर्दों के बीच छोड़ा गया हूं, और जो घात हो कर कबर में पड़े हैं, जिन को तू फिर स्मरण नहीं करता और वे तेरी सहायता रहित हैं, उनके समान मैं हो गया हूं।</li>
<li class="ltr" id="">तू ने मुझे गड़हे के तल ही में, अन्धेरे और गहिरे स्थान में रखा है।</li>
<li class="ltr" id="">तेरी जलजलाहट मुझी पर बनी हुई है, और तू ने अपने सब तरंगों से मुझे दु:ख दिया है,</li>
<li class="ltr" id="">तू ने मेरे पहिचान वालों को मुझ से दूर किया है, और मुझ को उनकी दृष्टि में घिनौना किया है। मैं बन्दी हूं और निकल नही सकता,</li>
<li class="ltr" id="">दु:ख भोगते भोगते मेरी आंखे धुन्धला गई। हे यहोवा मैं लगातार तुझे पुकारता और अपने हाथ तेरी ओर फैलाता आया हूं।</li>
<li class="ltr" id="">0क्या तू मुर्दों के लिये अदभुत काम करेगा? क्या मरे लोग उठ कर तेरा धन्यवाद करेंगे?</li>
<li class="ltr" id="">1क्या कबर में तेरी करूणा का, और विनाश की दशा में तेरी सच्चाई का वर्णन किया जाएगा?</li>
<li class="ltr" id="">2क्या तेरे अदभुत काम अन्धकार में, वा तेरा धर्म विश्वासघात की दशा में जाना जाएगा?</li>
<li class="ltr" id="">3परन्तु हे यहोवा, मैं ने तेरी दोहाई दी है, और भोर को मेरी प्रार्थना तुझ तक पहुंचेगी।</li>
<li class="ltr" id="">4हे यहोवा, तू मुझ को क्यों छोड़ता है? तू अपना मुख मुझ से क्यों छिपाता रहता है?</li>
<li class="ltr" id="">5मैं बचपन ही से दु:खी वरन अधमुआ हूं, तुझ से भय खाते मैं अति व्याकुल हो गया हूं।</li>
<li class="ltr" id="">6तेरा क्रोध मुझ पर पड़ा है, उस भय से मैं मिट गया हूं।</li>
<li class="ltr" id="">7वह दिन भर जल की नाईं मुझे घेरे रहता है, वह मेरे चारों ओर दिखाई देता है।</li>
<li class="ltr" id="">8तू ने मित्र और भाईबन्धु दोनों को मुझ से दूर किया है, और मेरे जान-पहिचान वालों को अन्धकार में डाल दिया है॥</li>

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भजन संहिता 89
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<li class="ltr" id="">मैं यहोवा की सारी करूणा के विषय सदा गाता रहूंगा, मैं तेरी सच्चाई पीढ़ी पीढ़ी तक जताता रहूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि मैं ने कहा है, तेरी करूणा सदा बनी रहेगी, तू स्वर्ग में अपनी सच्चाई को स्थिर रखेगा।</li>
<li class="ltr" id="">मैं ने अपने चुने हुए से वाचा बान्धी है, मैं ने अपने दास दाऊद से शपथ खाई है,</li>
<li class="ltr" id="">कि मैं तेरे वंश को सदा स्थिर रखूंगा, और तेरी राजगद्दी को पीढ़ी पीढ़ी तक बनाए रखूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा, स्वर्ग में तेरे अद्भुत काम की, और पवित्रों की सभा में तेरी सच्चाई की प्रशंसा होगी।</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि आकाश मण्डल में यहोवा के तुल्य कौन ठहरेगा? बलवन्तों के पुत्रों में से कौन है जिसके साथ यहोवा की उपमा दी जाएगी?</li>
<li class="ltr" id="">ईश्वर पवित्रों की गोष्ठी में अत्यन्त प्रतिष्ठा के योग्य, और अपने चारों ओर सब रहने वालों से अधिक भय योग्य है।</li>
<li class="ltr" id="">हे सेनाओं के परमेश्वर यहोवा, हे याह, तेरे तुल्य कौन सामर्थी है? तेरी सच्चाई तो तेरे चारों ओर है.</li>
<li class="ltr" id="">समुद्र के गर्व को तू ही तोड़ता है, जब उसके तरंग उठते हैं, तब तू उन को शान्त कर देता है।</li>
<li class="ltr" id="">0तू ने रहब को घात किए हुए के समान कुचल डाला, और अपने शत्रुओं को अपने बाहुबल से तितर बितर किया है।</li>
<li class="ltr" id="">1आकाश तेरा है, पृथ्वी भी तेरी है, जगत और जो कुछ उस में है, उसे तू ही ने स्थिर किया है।</li>
<li class="ltr" id="">2उत्तर और दक्खिन को तू ही ने सिरजा, ताबोर और हेर्मोन तेरे नाम का जयजयकार करते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">3तेरी भुजा बलवन्त है, तेरा हाथ शक्तिमान और तेरा दहिना हाथ प्रबल है।</li>
<li class="ltr" id="">4तेरे सिंहासन का मूल, धर्म और न्याय है, करूणा और सच्चाई तेरे आगे आगे चलती है।</li>
<li class="ltr" id="">5क्या ही धन्य है वह समाज जो आनन्द के ललकार को पहिचानता है, हे यहोवा, वे लोग तेरे मुख के प्रकाश में चलते हैं,</li>
<li class="ltr" id="">6वे तेरे नाम के हेतु दिन भर मगन रहते हैं, और तेरे धर्म के कारण महान हो जाते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">7क्योंकि तू उनके बल की शोभा है, और अपनी प्रसन्नता से हमारे सींग को ऊंचा करेगा।</li>
<li class="ltr" id="">8क्योंकि हमारी ढाल यहोवा की ओर से है हमारा राजा इस्राएल के पवित्र की ओर से है॥</li>
<li class="ltr" id="">9एक समय तू ने अपने भक्त को दर्शन देकर बातें की, और कहा, मैं ने सहायता करने का भार एक वीर पर रखा है, और प्रजा में से एक को चुन कर बढ़ाया है।</li>
<li class="ltr" id="">0मैं ने अपने दास दाऊद को लेकर, अपने पवित्र तेल से उसका अभिषेक किया है।</li>
<li class="ltr" id="">1मेरा हाथ उसके साथ बना रहेगा, और मेरी भुजा उसे दृढ़ रखेगी।</li>
<li class="ltr" id="">2शत्रु उसको तंग करने न पाएगा, और न कुटिल जन उसको दु:ख देने पाएगा।</li>
<li class="ltr" id="">3मैं उसके द्रोहियों को उसके साम्हने से नाश करूंगा, और उसके बैरियों पर विपत्ति डालूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">4परन्तु मेरी सच्चाई और करूणा उस पर बनी रहेंगी, और मेरे नाम के द्वारा उसका सींग ऊंचा हो जाएगा।</li>
<li class="ltr" id="">5मैं समुद्र को उसके हाथ के नीचे और महानदों को उसके दाहिने हाथ के नीचे कर दूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">6वह मुझे पुकार के कहेगा, कि तू मेरा पिता है, मेरा ईश्वर और मेरे बचने की चट्टान है।</li>
<li class="ltr" id="">7फिर मैं उसको अपना पहिलौठा, और पृथ्वी के राजाओं पर प्रधान ठहराऊंगा।</li>
<li class="ltr" id="">8मैं अपनी करूणा उस पर सदा बनाए रहूंगा, और मेरी वाचा उसके लिये अटल रहेगी।</li>
<li class="ltr" id="">9मैं उसके वंश को सदा बनाए रखूंगा, और उसकी राजगद्दी स्वर्ग के समान सर्वदा बनी रहेगी।</li>
<li class="ltr" id="">0यदि उसके वंश के लोग मेरी व्यवस्था को छोड़ें और मेरे नियमों के अनुसार न चलें,</li>
<li class="ltr" id="">1यदि वे मेरी विधियों का उल्लंघन करें, और मेरी आज्ञाओं को न मानें,</li>
<li class="ltr" id="">2तो मैं उनके अपराध का दण्ड सोंटें से, और उनके अधर्म का दण्ड कोड़ों से दूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">3परन्तु मैं अपनी करूणा उस पर से न हटाऊंगा, और न सच्चाई त्याग कर झूठा ठहरूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">4मैं अपनी वाचा न तोडूंगा, और जो मेरे मुंह से निकल चुका है, उसे न बदलूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">5एक बार मैं अपनी पवित्राता की शपथ खा चुका हूं, मैं दाऊद को कभी धोखा न दूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">6उसका वंश सर्वदा रहेगा, और उसकी राजगद्दी सूर्य की नाईं मेरे सम्मुख ठहरी रहेगी।</li>
<li class="ltr" id="">7वह चन्द्रमा की नाईं, और आकाश मण्डल के विश्वास योग्य साक्षी की नाईं सदा बना रहेगा।</li>
<li class="ltr" id="">8तौभी तू ने अपने अभिषिक्त को छोड़ा और उसे तज दिया, और उस पर अति क्रोध किया है।</li>
<li class="ltr" id="">9तू अपने दास के साथ की वाचा से घिनाया, और उसके मुकुट को भूमि पर गिरा कर अशुद्ध किया है।</li>
<li class="ltr" id="">0तू ने उसके सब बाड़ों को तोड़ डाला है, और उसके गढ़ों को उजाड़ दिया है।</li>
<li class="ltr" id="">1सब बटोही उसको लूट लेते हैं, और उसके पड़ोसियों में उसकी नामधराई होती है।</li>
<li class="ltr" id="">2तू ने उसके द्रोहियों को प्रबल किया, और उसके सब शत्रुओं को आनन्दित किया है।</li>
<li class="ltr" id="">3फिर तू उसकी तलवार की धार को मोड़ देता है, और युद्ध में उसके पांव जमने नहीं देता।</li>
<li class="ltr" id="">4तू ने उसका तेज हर लिया है और उसके सिंहासन को भूमि पर पटक दिया है।</li>
<li class="ltr" id="">5तू ने उसकी जवानी को घटाया, और उसको लज्जा से ढांप दिया है॥</li>
<li class="ltr" id="">6हे यहोवा तू कब तक लगातार मूंह फेरे रहेगा, तेरी जलजलाहट कब तक आग की नाईं भड़की रहेगी॥</li>
<li class="ltr" id="">7मेरा स्मरण कर, कि मैं कैसा अनित्य हूं, तू ने सब मनुष्यों को क्यों व्यर्थ सिरजा है?</li>
<li class="ltr" id="">8कौन पुरूष सदा अमर रहेगा? क्या कोई अपने प्राण को अधोलोक से बचा सकता है?</li>
<li class="ltr" id="">9हे प्रभु तेरी प्राचीनकाल की करूणा कहां रही, जिसके विषय में तू ने अपनी सच्चाई की शपथ दाऊद से खाई थी?</li>
<li class="ltr" id="">0हे प्रभु अपने दासों की नामधराई की सुधि कर, मैं तो सब सामर्थी जातियों का बोझ लिए रहता हूं।</li>
<li class="ltr" id="">1तेरे उन शत्रुओं ने तो हे यहोवा तेरे अभिषिक्त के पीछे पड़ कर उसकी नामधराई की है॥</li>
<li class="ltr" id="">2यहोवा सर्वदा धन्य रहेगा. आमीन फिर आमीन॥</li>

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भजन संहिता 90
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<li class="ltr" id="">हे प्रभु, तू पीढ़ी से पीढ़ी तक हमारे लिये धाम बना है।</li>
<li class="ltr" id="">इस से पहिले कि पहाड़ उत्पन्न हुए, वा तू ने पृथ्वी और जगत की रचना की, वरन अनादिकाल से अनन्तकाल तक तू ही ईश्वर है॥</li>
<li class="ltr" id="">तू मनुष्य को लौटा कर चूर करता है, और कहता है, कि हे आदमियों, लौट आओ.</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि हजार वर्ष तेरी दृष्टि में ऐसे हैं, जैसा कल का दिन जो बीत गया, वा रात का एक पहर॥</li>
<li class="ltr" id="">तू मनुष्यों को धारा में बहा देता है, वे स्वप्न से ठहरते हैं, वे भोर को बढ़ने वाली घास के समान होते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">वह भोर को फूलती और बढ़ती है, और सांझ तक कट कर मुर्झा जाती है॥</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि हम तेरे क्रोध से नाश हुए हैं, और तेरी जलजलाहट से घबरा गए हैं।</li>
<li class="ltr" id="">तू ने हमारे अधर्म के कामों से अपने सम्मुख, और हमारे छिपे हुए पापों को अपने मुख की ज्योति में रखा है॥</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि हमारे सब दिन तेरे क्रोध में बीत जाते हैं, हम अपने वर्ष शब्द की नाईं बिताते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">0हमारी आयु के वर्ष सत्तर तो होते हैं, और चाहे बल के कारण अस्सी वर्ष के भी हो जाएं, तौभी उनका घमण्ड केवल नष्ट और शोक ही शोक है, क्योंकि वह जल्दी कट जाती है, और हम जाते रहते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">1तेरे क्रोध की शक्ति को और तेरे भय के योग्य तेरे रोष को कौन समझता है?</li>
<li class="ltr" id="">2हम को अपने दिन गिनने की समझ दे कि हम बुद्धिमान हो जाएं॥</li>
<li class="ltr" id="">3हे यहोवा लौट आ. कब तक? और अपने दासों पर तरस खा.</li>
<li class="ltr" id="">4भोर को हमें अपनी करूणा से तृप्त कर, कि हम जीवन भर जयजयकार और आनन्द करते रहें।</li>
<li class="ltr" id="">5जितने दिन तू हमें दु:ख देता आया, और जितने वर्ष हम क्लेश भोगते आए हैं उतने ही वर्ष हम को आनन्द दे।</li>
<li class="ltr" id="">6तेरा काम तेरे दासों को, और तेरा प्रताप उनकी सन्तान पर प्रगट हो।</li>
<li class="ltr" id="">7और हमारे परमेश्वर यहोवा की मनोहरता हम पर प्रगट हो, तू हमारे हाथों का काम हमारे लिये दृढ़ कर, हमारे हाथों के काम को दृढ़ कर॥</li>

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भजन संहिता 91
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<li class="ltr" id="">जो परमप्रधान के छाए हुए स्थान में बैठा रहे, वह सर्वशक्तिमान की छाया में ठिकाना पाएगा।</li>
<li class="ltr" id="">मैं यहोवा के विषय कहूंगा, कि वह मेरा शरणस्थान और गढ़ है, वह मेरा परमेश्वर है, मैं उस पर भरोसा रखूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">वह तो तुझे बहेलिये के जाल से, और महामारी से बचाएगा,</li>
<li class="ltr" id="">वह तुझे अपने पंखों की आड़ में ले लेगा, और तू उसके पैरों के नीचे शरण पाएगा, उसकी सच्चाई तेरे लिये ढाल और झिलम ठहरेगी।</li>
<li class="ltr" id="">तू न रात के भय से डरेगा, और न उस तीर से जो दिन को उड़ता है,</li>
<li class="ltr" id="">न उस मरी से जो अन्धेरे में फैलती है, और न उस महारोग से जो दिन दुपहरी में उजाड़ता है॥</li>
<li class="ltr" id="">तेरे निकट हजार, और तेरी दाहिनी ओर दस हजार गिरेंगे, परन्तु वह तेरे पास न आएगा।</li>
<li class="ltr" id="">परन्तु तू अपनी आंखों की दृष्टि करेगा और दुष्टों के अन्त को देखेगा॥</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा, तू मेरा शरण स्थान ठहरा है। तू ने जो परमप्रधान को अपना धाम मान लिया है,</li>
<li class="ltr" id="">0इसलिये कोई विपत्ति तुझ पर न पड़ेगी, न कोई दु:ख तेरे डेरे के निकट आएगा॥</li>
<li class="ltr" id="">1क्योंकि वह अपने दूतों को तेरे निमित्त आज्ञा देगा, कि जहां कहीं तू जाए वे तेरी रक्षा करें।</li>
<li class="ltr" id="">2वे तुझ को हाथों हाथ उठा लेंगे, ऐसा न हो कि तेरे पांवों में पत्थर से ठेस लगे।</li>
<li class="ltr" id="">3तू सिंह और नाग को कुचलेगा, तू जवान सिंह और अजगर को लताड़ेगा।</li>
<li class="ltr" id="">4उसने जो मुझ से स्नेह किया है, इसलिये मैं उसको छुड़ाऊंगा, मैं उसको ऊंचे स्थान पर रखूंगा, क्योंकि उसने मेरे नाम को जान लिया है।</li>
<li class="ltr" id="">5जब वह मुझ को पुकारे, तब मैं उसकी सुनूंगा, संकट में मैं उसके संग रहूंगा, मैं उसको बचा कर उसकी महिमा बढ़ाऊंगा।</li>
<li class="ltr" id="">6मैं उसको दीर्घायु से तृप्त करूंगा, और अपने किए हुए उद्धार का दर्शन दिखाऊंगा॥</li>

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भजन संहिता 92
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<li class="ltr" id="">यहोवा का धन्यवाद करना भला है, हे परमप्रधान, तेरे नाम का भजन गाना,</li>
<li class="ltr" id="">प्रात:काल को तेरी करूणा, और प्रति रात तेरी सच्चाई का प्रचार करना,</li>
<li class="ltr" id="">दस तार वाले बाजे और सारंगी पर, और वीणा पर गम्भीर स्वर से गाना भला है।</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि, हे यहोवा, तू ने मुझ को अपने काम से आनन्दित किया है, और मैं तेरे हाथों के कामों के कारण जयजयकार करूंगा॥</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा, तेरे काम क्या ही बड़े हैं. तेरी कल्पनाएं बहुत गम्भीर हैं.</li>
<li class="ltr" id="">पशु समान मनुष्य इस को नहीं समझता, और मूर्ख इसका विचार नहीं करता:</li>
<li class="ltr" id="">कि दुष्ट जो घास की नाईं फूलते- फलते हैं, और सब अनर्थकारी जो प्रफुल्लित होते हैं, यह इसलिये होता है, कि वे सर्वदा के लिये नाश हो जाएं,</li>
<li class="ltr" id="">परन्तु हे यहोवा, तू सदा विराजमान रहेगा।</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि हे यहोवा, तेरे शत्रु, हां तेरे शत्रु नाश होंगे, सब अनर्थकारी तितर बितर होंगे॥</li>
<li class="ltr" id="">0परन्तु मेरा सींग तू ने जंगली सांढ़ का सा ऊंचा किया है, मैं टटके तेल से चुपड़ा गया हूं।</li>
<li class="ltr" id="">1और मैं अपने द्रोहियों पर दृष्टि कर के, और उन कुकर्मियों का हाल मेरे विरुद्ध उठे थे, सुनकर सन्तुष्ट हुआ हूं॥</li>
<li class="ltr" id="">2धर्मी लोग खजूर की नाईं फूले फलेंगे, और लबानोन के देवदार की नाईं बढ़ते रहेंगे।</li>
<li class="ltr" id="">3वे यहोवा के भवन में रोपे जा कर, हमारे परमेश्वर के आंगनों में फूले फलेंगे।</li>
<li class="ltr" id="">4वे पुराने होने पर भी फलते रहेंगे, और रस भरे और लहलहाते रहेंगे,</li>
<li class="ltr" id="">5जिस से यह प्रगट हो, कि यहोवा सीधा है, वह मेरी चट्टान है, और उस में कुटिलता कुछ भी नहीं॥</li>

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भजन संहिता 93
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<li class="ltr" id="">यहोवा राजा है, उसने माहात्म्य का पहिरावा पहिना है, यहोवा पहिरावा पहिने हुए, और सामर्थ्य का फेटा बान्धे है। इस कारण जगत स्थिर है, वह नहीं टलने का।</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा, तेरी राजगद्दी अनादिकाल से स्थिर है, तू सर्वदा से है॥</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा, महानदों का कोलाहल हो रहा है, महानदों का बड़ा शब्द हो रहा है, महानद गरजते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">महासागर के शब्द से, और समुद्र की महातरंगों से, विराजमान यहोवा अधिक महान है॥</li>
<li class="ltr" id="">तेरी चितौनियां अति विश्वासयोग्य हैं, हे यहोवा तेरे भवन को युग युग पवित्रता ही शोभा देती है॥</li>

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भजन संहिता 94
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<li class="ltr" id="">हे यहोवा, हे पलटा लेने वाले ईश्वर, हे पलटा लेने वाले ईश्वर, अपना तेज दिखा.</li>
<li class="ltr" id="">हे पृथ्वी के न्यायी उठ, और घमण्ड़ियों को बदला दे.</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा, दुष्ट लोग कब तक, दुष्ट लोग कब तक डींग मारते रहेंगे?</li>
<li class="ltr" id="">वे बकते और ढ़िठाई की बातें बोलते हैं, सब अनर्थकारी बड़ाई मारते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा, वे तेरी प्रजा को पीस डालते हैं, वे तेरे निज भाग को दु:ख देते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">वे विधवा और परदेशी का घात करते, और अनाथों को मार डालते हैं,</li>
<li class="ltr" id="">और कहते हैं, कि याह न देखेगा, याकूब का परमेश्वर विचार न करेगा॥</li>
<li class="ltr" id="">तुम जो प्रजा में पशु सरीखे हो, विचार करो, और हे मूर्खों तुम कब तक बुद्धिमान हो जाओगे?</li>
<li class="ltr" id="">जिसने कान दिया, क्या वह आप नहीं सुनता? जिसने आंख रची, क्या वह आप नहीं देखता?</li>
<li class="ltr" id="">0जो जाति जाति को ताड़ना देता, और मनुष्य को ज्ञान सिखाता है, क्या वह न समझाएगा?</li>
<li class="ltr" id="">1यहोवा मनुष्य की कल्पनाओं को तो जानता है कि वे मिथ्या हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">2हे याह, क्या ही धन्य है वह पुरूष जिस को तू ताड़ना देता है, और अपनी व्यवस्था सिखाता है,</li>
<li class="ltr" id="">3क्योंकि तू उसको विपत्ति के दिनों में उस समय तक चैन देता रहता है, जब तक दुष्टों के लिये गड़हा नहीं खोदा जाता।</li>
<li class="ltr" id="">4क्योंकि यहोवा अपनी प्रजा को न तजेगा, वह अपने निज भाग को न छोड़ेगा,</li>
<li class="ltr" id="">5परन्तु न्याय फिर धर्म के अनुसार किया जाएगा, और सारे सीधे मन वाले उसके पीछे पीछे हो लेंगे॥</li>
<li class="ltr" id="">6कुकर्मियों के विरुद्ध मेरी ओर कौन खड़ा होगा? मेरी ओर से अनर्थकारियों का कौन साम्हना करेगा?</li>
<li class="ltr" id="">7यदि यहोवा मेरा सहायक न होता, तो क्षण भर में मुझे चुपचाप होकर रहना पड़ता।</li>
<li class="ltr" id="">8जब मैं ने कहा, कि मेरा पांव फिसलने लगा है, तब हे यहोवा, तेरी करूणा ने मुझे थाम लिया।</li>
<li class="ltr" id="">9जब मेरे मन में बहुत सी चिन्ताएं होती हैं, तब हे यहोवा, तेरी दी हुई शान्ति से मुझ को सुख होता है।</li>
<li class="ltr" id="">0क्या तेरे और दुष्टों के सिंसाहन के बीच सन्धि होगी, जो कानून की आड़ में उत्पात मचाते हैं?</li>
<li class="ltr" id="">1वे धर्मी का प्राण लेने को दल बान्धते हैं, और निर्दोष को प्राणदण्ड देते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">2परन्तु यहोवा मेरा गढ़, और मेरा परमेश्वर मेरी शरण की चट्टान ठहरा है।</li>
<li class="ltr" id="">3और उसने उनका अनर्थ काम उन्हीं पर लौटाया है, और वह उन्हें उन्हीं की बुराई के द्वारा सन्यानाश करेगा, हमारा परमेश्वर यहोवा उन को सत्यानाश करेगा॥</li>

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भजन संहिता 95
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<li class="ltr" id="">आओ हम यहोवा के लिये ऊंचे स्वर से गाएं, अपने उद्धार की चट्टान का जयजयकार करें.</li>
<li class="ltr" id="">हम धन्यवाद करते हुए उसके सम्मुख आएं, और भजन गाते हुए उसका जयजयकार करें.</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि यहोवा महान ईश्वर है, और सब देवताओं के ऊपर महान राजा है।</li>
<li class="ltr" id="">पृथ्वी के गहिरे स्थान उसी के हाथ में हैं, और पहाड़ों की चोटियां भी उसी की हैं।</li>
<li class="ltr" id="">समुद्र उसका है, और उसी ने उसको बनाया, और स्थल भी उसी के हाथ का रचा है॥</li>
<li class="ltr" id="">आओ हम झुक कर दण्डवत करें, और अपने कर्ता यहोवा के साम्हने घुटने टेकें.</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि वही हमारा परमेश्वर है, और हम उसकी चराई की प्रजा, और उसके हाथ की भेड़ें हैं॥ भला होता, कि आज तुम उसकी बात सुनते.</li>
<li class="ltr" id="">अपना अपना हृदय ऐसा कठोर मत करो, जैसा मरीबा में, वा मस्सा के दिन जंगल में हुआ था,</li>
<li class="ltr" id="">जब तुम्हारे पुरखाओं ने मुझे परखा, उन्होंने मुझ को जांचा और मेरे काम को भी देखा।</li>
<li class="ltr" id="">0चालीस वर्ष तक मैं उस पीढ़ी के लोगों से रूठा रहा, और मैं ने कहा, ये तो भरमाने वाले मन के हैं, और इन्होंने मेरे मार्गों को नहीं पहिचाना।</li>
<li class="ltr" id="">1इस कारण मैं ने क्रोध में आकर शपथ खाई कि ये मेरे विश्राम स्थान में कभी प्रवेश न करने पाएंगे॥</li>

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भजन संहिता 96
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<li class="ltr" id="">यहोवा के लिये एक नया गीत गाओ, हे सारी पृथ्वी के लोगों यहोवा के लिये गाओ.</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा के लिये गाओ, उसके नाम को धन्य कहो, दिन दिन उसके किए हुए उद्धार का शुभ समाचार सुनाते रहो।</li>
<li class="ltr" id="">अन्य जातियों में उसकी महिमा का, और देश देश के लोगों में उसके आश्चर्यकर्मों का वर्णन करो।</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि यहोवा महान और अति स्तुति के योग्य है, वह तो सब देवताओं से अधिक भय योग्य है।</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि देश देश के सब देवता तो मूरतें ही हैं, परन्तु यहोवा ही ने स्वर्ग को बनाया है।</li>
<li class="ltr" id="">उसके चारों और वैभव और ऐश्वर्य है, उसके पवित्र स्थान में सामर्थ्य और शोभा है।</li>
<li class="ltr" id="">हे देश देश के कुलों, यहोवा का गुणानुवाद करो, यहोवा की महिमा और सामर्थ्य को मानो.</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा के नाम की ऐसी महिमा करो जो उसके योग्य है, भेंट ले कर उसके आंगनों में आओ.</li>
<li class="ltr" id="">पवित्रता से शोभायमान होकर यहोवा को दण्डवत करो, हे सारी पृथ्वी के लोगों उसके साम्हने कांपते रहो.</li>
<li class="ltr" id="">0जाति जाति में कहो, यहोवा राजा हुआ है. और जगत ऐसा स्थिर है, कि वह टलने का नहीं, वह देश देश के लोगों का न्याय सीधाई से करेगा॥</li>
<li class="ltr" id="">1आकाश आनन्द करे, और पृथ्वी मगन हो, समुद्र और उस में की सब वस्तुएं गरज उठें,</li>
<li class="ltr" id="">2मैदान और जो कुछ उस में है, वह प्रफुल्लित हो, उसी समय वन के सारे वृक्ष जयजयकार करेंगे।</li>
<li class="ltr" id="">3यह यहोवा के साम्हने हो, क्योंकि वह आने वाला है। वह पृथ्वी का न्याय करने को आने वाला है, वह धर्म से जगत का, और सच्चाई से देश देश के लोगों का न्याय करेगा॥</li>

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भजन संहिता 97
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<li class="ltr" id="">यहोवा राजा हुआ है, पृथ्वी मगन हो, और द्वीप जो बहुतेरे हैं, वह भी आनन्द करें.</li>
<li class="ltr" id="">बादल और अन्धकार उसके चारों ओर हैं, उसके सिंहासन का मूल धर्म और न्याय है।</li>
<li class="ltr" id="">उसके आगे आगे आग चलती हुई उसके द्रोहियों को चारों ओर भस्म करती है।</li>
<li class="ltr" id="">उसकी बिजलियों से जगत प्रकाशित हुआ, पृथ्वी देखकर थरथरा गई है.</li>
<li class="ltr" id="">पहाड़ यहोवा के साम्हने, मोम की नाईं पिघल गए, अर्थात सारी पृथ्वी के परमेश्वर के साम्हने॥</li>
<li class="ltr" id="">आकाश ने उसके धर्म की साक्षी दी, और देश देश के सब लोगों ने उसकी महिमा देखी है।</li>
<li class="ltr" id="">जितने खुदी हुई मूर्तियों की उपासना करते और मूरतों पर फूलते हैं, वे लज्जित हों, हे सब देवताओं तुम उसी को दण्डवत करो।</li>
<li class="ltr" id="">सिय्योन सुन कर आनन्दित हुई, और यहूदा की बेटियां मगन हुईं, हे यहोवा, यह तेरे नियमों के कारण हुआ।</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि हे यहोवा, तू सारी पृथ्वी के ऊपर परमप्रधान है, तू सारे देवताओं से अधिक महान ठहरा है।</li>
<li class="ltr" id="">0हे यहोवा के प्रेमियों, बुराई से घृणा करो, वह अपने भक्तों के प्राणो की रक्षा करता, और उन्हें दुष्टों के हाथ से बचाता है।</li>
<li class="ltr" id="">1धर्मी के लिये ज्योति, और सीधे मन वालों के लिये आनन्द बोया गया है।</li>
<li class="ltr" id="">2हे धर्मियों यहोवा के कारण आनन्दित हो, और जिस पवित्र नाम से उसका स्मरण होता है, उसका धन्यवाद करो.</li>

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भजन संहिता 98
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<li class="ltr" id="">यहोवा के लिये एक नया गीत गाओ, क्योंकि उसने आश्चर्यकर्म किए है. उसके दाहिने हाथ और पवित्र भुजा ने उसके लिये उद्धार किया है.</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा ने अपना किया हुआ उद्धार प्रकाशित किया, उसने अन्यजातियों की दृष्टि में अपना धर्म प्रगट किया है।</li>
<li class="ltr" id="">उसने इस्राएल के घराने पर की अपनी करूणा और सच्चाई की सुधि ली, और पृथ्वी के सब दूर दूर देशों ने हमारे परमेश्वर का किया हुआ उद्धार देखा है॥</li>
<li class="ltr" id="">हे सारी पृथ्वी के लोगों यहोवा का जयजयकार करो, उत्साहपूर्वक जयजयकार करो, और भजन गाओ.</li>
<li class="ltr" id="">वीणा बजा कर यहोवा का भजन गाओ, वीणा बजा कर भजन का स्वर सुनाओ।</li>
<li class="ltr" id="">तुरहियां और नरसिंगे फूंक फूंककर यहोवा राजा का जयजयकार करो॥</li>
<li class="ltr" id="">समुद्र और उस में की सब वस्तुएं गरज उठें, जगत और उसके निवासी महाशब्द करें.</li>
<li class="ltr" id="">नदियां तालियां बजाएं, पहाड़ मिलकर जयजयकार करें।</li>
<li class="ltr" id="">यह यहोवा के साम्हने हो, क्योंकि वह पृथ्वी का न्याय करने को आने वाला है। वह धर्म से जगत का, और सीधाई से देश देश के लोगों का न्याय करेगा॥</li>

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भजन संहिता 99
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<li class="ltr" id="">यहोवा राजा हुआ है, देश देश के लोग कांप उठें. वह करूबों पर विराजमान है, पृथ्वी डोल उठे.</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा सिय्योन में महान है, और वह देश देश के लोगों के ऊपर प्रधान है।</li>
<li class="ltr" id="">वे तेरे महान और भययोग्य नाम का धन्यवाद करें. वह तो पवित्र है।</li>
<li class="ltr" id="">राजा की सामर्थ्य न्याय से मेल रखती है, तू ही ने सीधाई को स्थापित किया, न्याय और धर्म को याकूब में तू ही ने चालू किया है।</li>
<li class="ltr" id="">हमारे परमेश्वर यहोवा को सराहो, और उसके चरणों की चौकी के साम्हने दण्डवत करो. वह पवित्र है.</li>
<li class="ltr" id="">उसके याजकों में मूसा और हारून, और उसके प्रार्थना करने वालों में से शमूएल यहोवा को पुकारते थे, और वह उनकी सुन लेता था।</li>
<li class="ltr" id="">वह बादल के खम्भे में हो कर उन से बातें करता था, और वे उसकी चितौनियों और उसकी दी हुई विधियों पर चलते थे॥</li>
<li class="ltr" id="">हे हमारे परमेश्वर यहोवा तू उनकी सुन लेता था, तू उनके कामों का पलटा तो लेता था तौभी उनके लिये क्षमा करने वाला ईश्वर था।</li>
<li class="ltr" id="">हमारे परमेश्वर यहोवा को सराहो, और उसके पवित्र पर्वत पर दण्डवत करो, क्योंकि हमारा परमेश्वर यहोवा पवित्र है.</li>

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भजन संहिता 100
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<li class="ltr" id="">हे सारी पृथ्वी के लोगों यहोवा का जयजयकार करो.</li>
<li class="ltr" id="">आनन्द से यहोवा की आराधना करो. जयजयकार के साथ उसके सम्मुख आओ.</li>
<li class="ltr" id="">निश्चय जानो, कि यहोवा ही परमेश्वर है। उसी ने हम को बनाया, और हम उसी के हैं, हम उसकी प्रजा, और उसकी चराई की भेड़ें हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">उसके फाटकों से धन्यवाद, और उसके आंगनों में स्तुति करते हुए प्रवेश करो, उसका धन्यवाद करो, और उसके नाम को धन्य कहो.</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि यहोवा भला है, उसकी करूणा सदा के लिये, और उसकी सच्चाई पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहती है॥</li>

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भजन संहिता 101
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<li class="ltr" id="">मैं करूणा और न्याय के विषय गाऊंगा, हे यहोवा, मैं तेरा ही भजन गाऊंगा।</li>
<li class="ltr" id="">मैं बुद्धिमानी से खरे मार्ग में चलूंगा। तू मेरे पास कब आएगा. मैं अपने घर में मन की खराई के साथ अपनी चाल चलूंगा,</li>
<li class="ltr" id="">मैं किसी ओछे काम पर चित्त न लगाऊंगा॥ मैं कुमार्ग पर चलने वालों के काम से घिन रखता हूं, ऐसे काम में मैं न लगूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">टेढ़ा स्वभाव मुझ से दूर रहेगा, मैं बुराई को जानूंगा भी नहीं॥</li>
<li class="ltr" id="">जो छिप कर अपने पड़ोसी की चुगली खाए, उसको मैं सत्यानाश करूंगा, जिसकी आंखें चढ़ी हों और जिसका मन घमण्डी है, उसकी मैं न सहूंगा॥</li>
<li class="ltr" id="">मेरी आंखें देश के विश्वासयोग्य लोगों पर लगी रहेंगी कि वे मेरे संग रहें, जो खरे मार्ग पर चलता है वही मेरा टहलुआ होगा॥</li>
<li class="ltr" id="">जो छल करता है वह मेरे घर के भीतर न रहने पाएगा, जो झूठ बोलता है वह मेरे साम्हने बना न रहेगा॥</li>
<li class="ltr" id="">भोर ही भोर को मैं देश के सब दुष्टों को सत्यानाश किया करूंगा, इसलिये कि यहोवा के नगर के सब अनर्थकारियों को नाश करूं॥</li>

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भजन संहिता 102
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<li class="ltr" id="">हे यहोवा, मेरी प्रार्थना सुन, मेरी दोहाई तुझ तक पहुंचे.</li>
<li class="ltr" id="">मेरे संकट के दिन अपना मुख मुझ से न छिपा ले, अपना कान मेरी ओर लगा, जिस समय मैं पुकारूं, उसी समय फुर्ती से मेरी सुन ले.</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि मेरे दिन धुएं की नाईं उड़े जाते हैं, और मेरी हडि्डयां लुकटी के समान जल गई हैं।</li>
<li class="ltr" id="">मेरा मन झुलसी हुई घास की नाईं सूख गया है, और मैं अपनी रोटी खाना भूल जाता हूं।</li>
<li class="ltr" id="">कराहते कराहते मेरा चमड़ा हडि्डयों में सट गया है।</li>
<li class="ltr" id="">मैं जंगल के धनेश के समान हो गया हूं, मैं उजड़े स्थानों के उल्लू के समान बन गया हूं।</li>
<li class="ltr" id="">मैं पड़ा पड़ा जागता रहता हूं और गौरे के समान हो गया हूं जो छत के ऊपर अकेला बैठता है।</li>
<li class="ltr" id="">मेरे शत्रु लगातार मेरी नामधराई करते हैं, जो मेरे विराध की धुन में बावले हो रहे हैं, वे मेरा नाम लेकर शपथ खाते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि मैं ने रोटी की नाईं राख खाई और आंसू मिला कर पानी पीता हूं।</li>
<li class="ltr" id="">0यह तेरे क्रोध और कोप के कारण हुआ है, क्योंकि तू ने मुझे उठाया, और फिर फेंक दिया है।</li>
<li class="ltr" id="">1मेरी आयु ढलती हुई छाया के समान है, और मैं आप घास की नाईं सूख चला हूं॥</li>
<li class="ltr" id="">2परन्तु हे यहोवा, तू सदैव विराजमान रहेगा, और जिस नाम से तेरा स्मरण होता है, वह पीढ़ी से पीढ़ी तक बना रहेगा।</li>
<li class="ltr" id="">3तू उठकर सिय्योन पर दया करेगा, क्योंकि उस पर अनुग्रह करने का ठहराया हुआ समय आ पहुंचा है।</li>
<li class="ltr" id="">4क्योंकि तेरे दास उसके पत्थरों को चाहते हैं, और उसकी धूलि पर तरस खाते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">5इसलिये अन्यजातियां यहोवा के नाम का भय मानेंगी, और पृथ्वी के सब राजा तेरे प्रताप से डरेंगे।</li>
<li class="ltr" id="">6क्योंकि यहोवा ने सिय्योन को फिर बसाया है, और वह अपनी महिमा के साथ दिखाई देता है,</li>
<li class="ltr" id="">7वह लाचार की प्रार्थना की ओर मुंह करता है, और उनकी प्रार्थना को तुच्छ नहीं जानता।</li>
<li class="ltr" id="">8यह बात आने वाली पीढ़ी के लिये लिखी जाएगी, और एक जाति जो सिरजी जाएगी वही याह की स्तुति करेगी।</li>
<li class="ltr" id="">9क्योंकि यहोवा ने अपने ऊंचे और पवित्र स्थान से दृष्टि करके स्वर्ग से पृथ्वी की ओर देखा है,</li>
<li class="ltr" id="">0ताकि बन्धुओं का कराहना सुने, और घात होन वालों के बन्धन खोले,</li>
<li class="ltr" id="">1और सिय्योन में यहोवा के नाम का वर्णन किया जाए, और यरूशलेम में उसकी स्तुति की जाए,</li>
<li class="ltr" id="">2यह उस समय होगा जब देश देश, और राज्य राज्य के लोग यहोवा की उपासना करने को इकट्ठे होंगे॥</li>
<li class="ltr" id="">3उसने मुझे जीवन यात्रा में दु:ख देकर, मेरे बल और आयु को घटाया।</li>
<li class="ltr" id="">4मैं ने कहा, हे मेरे ईश्वर, मुझे आधी आयु में न उठा ले, मेरे वर्ष पीढ़ी से पीढ़ी तक बने रहेंगे.</li>
<li class="ltr" id="">5आदि में तू ने पृथ्वी की नेव डाली, और आकाश तेरे हाथों का बनाया हुआ है।</li>
<li class="ltr" id="">6वह तो नाश होगा, परन्तु तू बना रहेगा, और वह सब कपड़े के समान पुराना हो जाएगा। तू उसको वस्त्र की नाईं बदलेगा, और वह तो बदल जाएगा,</li>
<li class="ltr" id="">7परन्तु तू वहीं है, और तेरे वर्षों का अन्त नहीं होने का।</li>
<li class="ltr" id="">8तेरे दासों की सन्तान बनी रहेगी, और उनका वंश तेरे साम्हने स्थिर रहेगा॥</li>

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भजन संहिता 103
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<li class="ltr" id="">हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह, और जो कुछ मुझ में है, वह उसके पवित्र नाम को धन्य कहे.</li>
<li class="ltr" id="">हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह, और उसके किसी उपकार को न भूलना।</li>
<li class="ltr" id="">वही तो तेरे सब अधर्म को क्षमा करता, और तेरे सब रोगों को चंगा करता है,</li>
<li class="ltr" id="">वही तो तेरे प्राण को नाश होने से बचा लेता है, और तेरे सिर पर करूणा और दया का मुकुट बान्धता है,</li>
<li class="ltr" id="">वही तो तेरी लालसा को उत्तम पदार्थों से तृप्त करता है, जिस से तेरी जवानी उकाब की नाईं नई हो जाती है॥</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा सब पिसे हुओं के लिये धर्म और न्याय के काम करता है।</li>
<li class="ltr" id="">उसने मूसा को अपनी गति, और इस्राएलियों पर अपने काम प्रगट किए।</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा दयालु और अनुग्रहकरी, विलम्ब से कोप करने वाला और अति करूणामय है।</li>
<li class="ltr" id="">वह सर्वदा वादविवाद करता न रहेगा, न उसका क्रोध सदा के लिये भड़का रहेगा।</li>
<li class="ltr" id="">0उसने हमारे पापों के अनुसार हम से व्यवहार नहीं किया, और न हमारे अधर्म के कामों के अनुसार हम को बदला दिया है।</li>
<li class="ltr" id="">1जैसे आकाश पृथ्वी के ऊपर ऊंचा है, वैसे ही उसकी करूणा उसके डरवैयों के ऊपर प्रबल है।</li>
<li class="ltr" id="">2उदयाचल अस्ताचल से जितनी दूर है, उसने हमारे अपराधों को हम से उतनी ही दूर कर दिया है।</li>
<li class="ltr" id="">3जैसे पिता अपने बालकों पर दया करता है, वैसे ही यहोवा अपने डरवैयों पर दया करता है।</li>
<li class="ltr" id="">4क्योंकि वह हमारी सृष्टि जानता है, और उसको स्मरण रहता है कि मनुष्य मिट्टी ही है॥</li>
<li class="ltr" id="">5मनुष्य की आयु घास के समान होती है, वह मैदान के फूल की नाईं फूलता है,</li>
<li class="ltr" id="">6जो पवन लगते ही ठहर नहीं सकता, और न वह अपने स्थान में फिर मिलता है।</li>
<li class="ltr" id="">7परन्तु यहोवा की करूणा उसके डरवैयों पर युग युग, और उसका धर्म उनके नाती- पोतों पर भी प्रगट होता रहता है,</li>
<li class="ltr" id="">8अर्थात उन पर जो उसकी वाचा का पालन करते और उसके उपदेशों को स्मरण करके उन पर चलते हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">9यहोवा ने तो अपना सिंहासन स्वर्ग में स्थिर किया है, और उसका राज्य पूरी सृष्टि पर है।</li>
<li class="ltr" id="">0हे यहोवा के दूतों, तुम जो बड़े वीर हो, और उसके वचन के मानने से उसको पूरा करते हो उसको धन्य कहो.</li>
<li class="ltr" id="">1हे यहोवा की सारी सेनाओं, हे उसके टहलुओं, तुम जो उसकी इच्छा पूरी करते हो, उसको धन्य कहो.</li>
<li class="ltr" id="">2हे यहोवा की सारी सृष्टि, उसके राज्य के सब स्थानों में उसको धन्य कहो। हे मेरे मन, तू यहोवा को धन्य कह.</li>

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भजन संहिता 104
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<li class="ltr" id="">हे मेरे मन, तू यहोवा को धन्य कह. हे मेरे परमेश्वर यहोवा, तू अत्यन्त महान है. तू वैभव और ऐश्वर्य का वस्त्र पहिने हुए है,</li>
<li class="ltr" id="">जो उजियाले को चादर की नाईं ओढ़े रहता है, और आकाश को तम्बू के समान ताने रहता है,</li>
<li class="ltr" id="">जो अपनी अटारियों की कड़ियां जल में धरता है, और मेघों को अपना रथ बनाता है, और पवन के पंखों पर चलता है,</li>
<li class="ltr" id="">जो पवनों को अपने दूत, और धधकती आग को अपने टहलुए बनाता है॥</li>
<li class="ltr" id="">तू ने पृथ्वी को उसकी नीव पर स्थिर किया है, ताकि वह कभी न डगमगाए।</li>
<li class="ltr" id="">तू ने उसको गहिरे सागर से ढांप दिया है जैसे वस्त्र से, जल पहाड़ों के ऊपर ठहर गया।</li>
<li class="ltr" id="">तेरी घुड़की से वह भाग गया, तेरे गरजने का शब्द सुनते ही, वह उतावली करके बह गया।</li>
<li class="ltr" id="">वह पहाड़ों पर चढ़ गया, और तराईयों के मार्ग से उस स्थान में उतर गया जिसे तू ने उसके लिये तैयार किया था।</li>
<li class="ltr" id="">तू ने एक सिवाना ठहराया जिस को वह नहीं लांघ सकता है, और न फिरकर स्थल को ढांप सकता है॥</li>
<li class="ltr" id="">0तू नालों में सोतों को बहाता है, वे पहाड़ों के बीच से बहते हैं,</li>
<li class="ltr" id="">1उन से मैदान के सब जीव- जन्तु जल पीते हैं, जंगली गदहे भी अपनी प्यास बुझा लेते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">2उनके पास आकाश के पक्षी बसेरा करते, और डालियों के बीच में से बोलते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">3तू अपनी अटारियों में से पहाड़ों को सींचता है तेरे कामों के फल से पृथ्वी तृप्त रहती है॥</li>
<li class="ltr" id="">4तू पशुओं के लिये घास, और मनुष्यों के काम के लिये अन्न आदि उपजाता है, और इस रीति भूमि से वह भोजन- वस्तुएं उत्पन्न करता है,</li>
<li class="ltr" id="">5और दाखमधु जिस से मनुष्य का मन आनन्दित होता है, और तेल जिस से उसका मुख चमकता है, और अन्न जिस से वह सम्भल जाता है।</li>
<li class="ltr" id="">6यहोवा के वृक्ष तृप्त रहते हैं, अर्थात लबानोन के देवदार जो उसी के लगाए हुए हैं।</li>
<li class="ltr" id="">7उन में चिड़ियां अपने घोंसले बनाती हैं, लगलग का बसेरा सनौवर के वृक्षों में होता है।</li>
<li class="ltr" id="">8ऊंचे पहाड़ जंगली बकरों के लिये हैं, और चट्टानें शापानों के शरणस्थान हैं।</li>
<li class="ltr" id="">9उसने नियत समयों के लिये चन्द्रमा को बनाया है, सूर्य अपने अस्त होने का समय जानता है।</li>
<li class="ltr" id="">0तू अन्धकार करता है, तब रात हो जाती है, जिस में वन के सब जीव जन्तु घूमते फिरते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">1जवान सिंह अहेर के लिये गरजते हैं, और ईश्वर से अपना आहार मांगते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">2सूर्य उदय होते ही वे चले जाते हैं और अपनी मांदों में जा बैठते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">3तब मनुष्य अपने काम के लिये और सन्ध्या तक परिश्रम करने के लिये निकलता है।</li>
<li class="ltr" id="">4हे यहोवा तेरे काम अनगिनित हैं. इन सब वस्तुओं को तू ने बुद्धि से बनाया है, पृथ्वी तेरी सम्पत्ति से परिपूर्ण है।</li>
<li class="ltr" id="">5इसी प्रकार समुद्र बड़ा और बहुत ही चौड़ा है, और उस में अनगिनित जलचर जीव- जन्तु, क्या छोटे, क्या बड़े भरे पड़े हैं।</li>
<li class="ltr" id="">6उस में जहाज भी आते जाते हैं, और लिव्यातान भी जिसे तू ने वहां खेलने के लिये बनाया है॥</li>
<li class="ltr" id="">7इन सब को तेरा ही आसरा है, कि तू उनका आहार समय पर दिया करे।</li>
<li class="ltr" id="">8तू उन्हें देता हे, वे चुन लेते हैं, तू अपनी मुट्ठी खोलता है और वे उत्तम पदार्थों से तृप्त होते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">9तू मुख फेर लेता है, और वे घबरा जाते हैं, तू उनकी सांस ले लेता है, और उनके प्राण छूट जाते हैं और मिट्टी में फिर मिल जाते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">0फिर तू अपनी ओर से सांस भेजता है, और वे सिरजे जाते हैं, और तू धरती को नया कर देता है॥</li>
<li class="ltr" id="">1यहोवा की महिमा सदा काल बनी रहे, यहोवा अपने कामों से आन्दित होवे.</li>
<li class="ltr" id="">2उसकी दृष्टि ही से पृथ्वी कांप उठती है, और उसके छूते ही पहाड़ों से धुआं निकलता है।</li>
<li class="ltr" id="">3मैं जीवन भर यहोवा का गीत गाता रहूंगा, जब तक मैं बना रहूंगा तब तक अपने परमेश्वर का भजन गाता रहूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">4मेरा ध्यान करना, उसको प्रिय लगे, क्योंकि मैं तो यहोवा के कारण आनन्दित रहूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">5पापी लोग पृथ्वी पर से मिट जाएं, और दुष्ट लोग आगे को न रहें. हे मेरे मन यहोवा को धन्य कह. याह की स्तुति करो.</li>

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भजन संहिता 105
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<li class="ltr" id="">यहोवा का धन्यवाद करो, उससे प्रार्थना करो, देश देश के लोगों में उसके कामों का प्रचार करो.</li>
<li class="ltr" id="">उसके लिये गीत गाओ, उसके लिये भजन गाओ, उसके सब आश्चर्यकर्मों पर ध्यान करो.</li>
<li class="ltr" id="">उसके पवित्र नाम की बड़ाई करो, यहोवा के खोजियों का हृदय आनन्दित हो.</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा और उसकी सामर्थ को खोजो, उसके दर्शन के लगातार खोजी बने रहो.</li>
<li class="ltr" id="">उसके किए हुए आश्चर्यकर्म स्मरण करो, उसके चमत्कार और निर्णय स्मरण करो.</li>
<li class="ltr" id="">हे उसके दास इब्राहीम के वंश, हे याकूब की सन्तान, तुम तो उसके चुने हुए हो.</li>
<li class="ltr" id="">वही हमारा परमेश्वर यहोवा है, पृथ्वी भर में उसके निर्णय होते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">वह अपनी वाचा को सदा स्मरण रखता आया है, यह वही वचन है जो उसने हजार पीढ़ीयों के लिये ठहराया है,</li>
<li class="ltr" id="">वही वाचा जो उसने इब्राहीम के साथ बान्धी, और उसके विषय में उसने इसहाक से शपथ खाई,</li>
<li class="ltr" id="">0और उसी को उसने याकूब के लिये विधि करके, और इस्राएल के लिये यह कह कर सदा की वाचा करके दृढ़ किया,</li>
<li class="ltr" id="">1कि मैं कनान देश को तुझी को दूंगा, वह बांट में तुम्हारा निज भाग होगा॥</li>
<li class="ltr" id="">2उस समय तो वे गिनती में थोड़े थे, वरन बहुत ही थोड़े, और उस देश में परदेशी थे।</li>
<li class="ltr" id="">3वे एक जाति से दूसरी जाति में, और एक राज्य से दूसरे राज्य में फिरते रहे,</li>
<li class="ltr" id="">4परन्तु उसने किसी मनुष्य को उन पर अन्धेर करने न दिया, और वह राजाओं को उनके निमित्त यह धमकी देता था,</li>
<li class="ltr" id="">5कि मेरे अभिषिक्तों को मत छुओ, और न मेरे नबियों की हानि करो.</li>
<li class="ltr" id="">6फिर उसने उस देश में अकाल भेजा, और अन्न के सब आधार को दूर कर दिया।</li>
<li class="ltr" id="">7उसने यूसुफ नाम एक पुरूष को उन से पहिले भेजा था, जो दास होने के लिये बेचा गया था।</li>
<li class="ltr" id="">8लोगों ने उसके पैरों में बेड़ियां डाल कर उसे दु:ख दिया, वह लोहे की सांकलों से जकड़ा गया,</li>
<li class="ltr" id="">9जब तक कि उसकी बात पूरी न हुई तब तक यहोवा का वचन उसे कसौटी पर कसता रहा।</li>
<li class="ltr" id="">0तब राजा ने दूत भेज कर उसे निकलवा लिया, और देश देश के लोगों के स्वामी ने उसके बन्धन खुलवाए,</li>
<li class="ltr" id="">1उसने उसको अपने भवन का प्रधान और अपनी पूरी सम्पत्ति का अधिकारी ठहराया,</li>
<li class="ltr" id="">2कि वह उसके हाकिमों को अपनी इच्छा के अनुसार कैद करे और पुरनियों को ज्ञान सिखाए॥</li>
<li class="ltr" id="">3फिर इस्राएल मिस्त्र में आया, और याकूब हाम के देश में परदेशी रहा।</li>
<li class="ltr" id="">4तब उसने अपनी प्रजा को गिनती में बहुत बढ़ाया, और उसके द्रोहियों से अधिक बलवन्त किया।</li>
<li class="ltr" id="">5उसने मिस्त्रियों के मन को ऐसा फेर दिया, कि वे उसकी प्रजा से बैर रखने, और उसके दासों से छल करने लगे॥</li>
<li class="ltr" id="">6उसने अपने दास मूसा को, और अपने चुने हुए हारून को भेजा।</li>
<li class="ltr" id="">7उन्होंने उनके बीच उसकी ओर से भांति भांति के चिन्ह, और हाम के देश में चमत्कार दिखाए।</li>
<li class="ltr" id="">8उसने अन्धकार कर दिया, और अन्धियारा हो गया, और उन्होंने उसकी बातों को न टाला।</li>
<li class="ltr" id="">9उसने मिस्त्रियों के जल को लोहू कर डाला, और मछलियों को मार डाला।</li>
<li class="ltr" id="">0मेंढक उनकी भूमि में वरन उनके राजा की कोठरियों में भी भर गए।</li>
<li class="ltr" id="">1उसने आज्ञा दी, तब डांस आ गए, और उनके सारे देश में कुटकियां आ गईं।</li>
<li class="ltr" id="">2उसने उनके लिये जलवृष्टि की सन्ती ओले, और उनके देश में धधकती आग बरसाई।</li>
<li class="ltr" id="">3और उसने उनकी दाखलताओं और अंजीर के वृक्षों को वरन उनके देश के सब पेड़ों को तोड़ डाला।</li>
<li class="ltr" id="">4उसने आज्ञा दी तब अनगिनत टिडि्डयां, और कीड़े आए,</li>
<li class="ltr" id="">5और उन्होंने उनके देश के सब अन्न आदि को खा डाला, और उनकी भूमि के सब फलों को चट कर गए।</li>
<li class="ltr" id="">6उसने उनके देश के सब पहिलौठों को, उनके पौरूष के सब पहिले फल को नाश किया॥</li>
<li class="ltr" id="">7तब वह अपने गोत्रियों को सोना चांदी दिला कर निकाल लाया, और उन में से कोई निर्बल न था।</li>
<li class="ltr" id="">8उनके जाने से मिस्त्री आनन्दित हुए, क्योंकि उनका डर उन में समा गया था।</li>
<li class="ltr" id="">9उसने छाया के लिये बादल फैलाया, और रात को प्रकाश देने के लिये आग प्रगट की।</li>
<li class="ltr" id="">0उन्होंने मांगा तब उसने बटेरें पहुंचाई, और उन को स्वर्गीय भोजन से तृप्त किया।</li>
<li class="ltr" id="">1उसने चट्टान फाड़ी तब पानी बह निकला, और निर्जल भूमि पर नदी बहने लगी।</li>
<li class="ltr" id="">2क्योंकि उसने अपने पवित्र वचन और अपने दास इब्राहीम को स्मरण किया॥</li>
<li class="ltr" id="">3वह अपनी प्रजा को हर्षित करके और अपने चुने हुओं से जयजयकार कराके निकाल लाया।</li>
<li class="ltr" id="">4और उन को अन्यजातियों के देश दिए, और वे और लोगों के श्रम के फल के अधिकारी किए गए,</li>
<li class="ltr" id="">5कि वे उसकी विधियों को मानें, और उसकी व्यवस्था को पूरी करें। याह की स्तुति करो.</li>

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भजन संहिता 106
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<li class="ltr" id="">याह की स्तुति करो. यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है, और उसकी करूणा सदा की है.</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा के पराक्रम के कामों का वर्णन कौन कर सकता है, या उसका पूरा गुणानुवाद कौन सुना सकता?</li>
<li class="ltr" id="">क्या ही धन्य हैं वे जो न्याय पर चलते, और हर समय धर्म के काम करते हैं.</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा, अपनी प्रजा पर की प्रसन्नता के अनुसार मुझे स्मरण कर, मेरे उद्धार के लिये मेरी सुधि ले,</li>
<li class="ltr" id="">कि मैं तेरे चुने हुओं का कल्याण देखूं, और तेरी प्रजा के आनन्द में आनन्दित हो जाऊं, और तेरे निज भाग के संग बड़ाई करने पाऊं॥</li>
<li class="ltr" id="">हम ने तो अपने पुरखाओं की नाईं पाप किया है, हम ने कुटिलता की, हम ने दुष्टता की है.</li>
<li class="ltr" id="">मिस्त्र में हमारे पुरखाओं ने तेरे आश्चर्यकर्मों पर मन नहीं लगाया, न तेरी अपार करूणा को स्मरण रखा, उन्होंने समुद्र के तीर पर, अर्थात लाल समुद्र के तीर पर बलवा किया।</li>
<li class="ltr" id="">तौभी उसने अपने नाम के निमित्त उनका उद्धार किया, जिस से वह अपने पराक्रम को प्रगट करे।</li>
<li class="ltr" id="">तब उसने लाल समुद्र को घुड़का और वह सूख गया, और वह उन्हें गहिरे जल के बीच से मानों जंगल में से निकाल ले गया।</li>
<li class="ltr" id="">0उसने उन्हें बैरी के हाथ से उबारा, और शत्रु के हाथ से छुड़ा लिया।</li>
<li class="ltr" id="">1और उन के द्रोही जल में डूब गए, उन में से एक भी न बचा।</li>
<li class="ltr" id="">2तब उन्हों ने उसके वचनों का विश्वास किया, और उसकी स्तुति गाने लगे॥</li>
<li class="ltr" id="">3परन्तु वे झट उसके कामों को भूल गए, और उसकी युक्ति के लिये न ठहरे।</li>
<li class="ltr" id="">4उन्होंने जंगल में अति लालसा की और निर्जल स्थान में ईश्वर की परीक्षा की।</li>
<li class="ltr" id="">5तब उसने उन्हें मुंह मांगा वर तो दिया, परन्तु उनके प्राण को सुखा दिया॥</li>
<li class="ltr" id="">6उन्होंने छावनी में मूसा के, और यहोवा के पवित्र जन हारून के विषय में डाह की,</li>
<li class="ltr" id="">7भूमि फट कर दातान को निगल गई, और अबीराम के झुण्ड को ग्रस लिया।</li>
<li class="ltr" id="">8और उन के झुण्ड में आग भड़क उठी, और दुष्ट लोग लौ से भस्म हो गए॥</li>
<li class="ltr" id="">9उन्होंने होरब में बछड़ा बनाया, और ढली हुई मूर्ति को दण्डवत की।</li>
<li class="ltr" id="">0यों उन्होंने अपनी महिमा अर्थात ईश्वर को घास खाने वाले बैल की प्रतिमा से बदल डाला।</li>
<li class="ltr" id="">1वे अपने उद्धारकर्ता ईश्वर को भूल गए, जिसने मिस्त्र में बड़े बड़े काम किए थे।</li>
<li class="ltr" id="">2उसने तो हाम के देश में आश्चर्यकर्म और लाल समुद्र के तीर पर भयंकर काम किए थे।</li>
<li class="ltr" id="">3इसलिये उसने कहा, कि मैं इन्हें सत्यानाश कर डालता यदि मेरा चुना हुआ मूसा जोखिम के स्थान में उनके लिये खड़ा न होता ताकि मेरी जलजलाहट को ठण्डा करे कहीं ऐसा न हो कि मैं उन्हें नाश कर डालूं॥</li>
<li class="ltr" id="">4उन्होंने मनभावने देश को निकम्मा जाना, और उसके वचन की प्रतीति न की।</li>
<li class="ltr" id="">5वे अपने तम्बुओं में कुड़कुड़ाए, और यहोवा का कहा न माना।</li>
<li class="ltr" id="">6तब उसने उनके विषय में शपथ खाई कि मैं इन को जंगल में नाश करूंगा,</li>
<li class="ltr" id="">7और इनके वंश को अन्यजातियों के सम्मुख गिरा दूंगा, और देश देश में तितर बितर करूंगा॥</li>
<li class="ltr" id="">8वे पोर वाले बाल देवता को पूजने लगे और मुर्दों को चढ़ाए हुए पशुओं का मांस खाने लगे।</li>
<li class="ltr" id="">9यों उन्होंने अपने कामों से उसको क्रोध दिलाया और मरी उन में फूट पड़ी।</li>
<li class="ltr" id="">0तब पीनहास ने उठ कर न्यायदण्ड दिया, जिस से मरी थम गई।</li>
<li class="ltr" id="">1और यह उसके लेखे पीढ़ी से पीढ़ी तक सर्वदा के लिये धर्म गिना गया॥</li>
<li class="ltr" id="">2उन्होंने मरीबा के सोते के पास भी यहोवा का क्रोध भड़काया, और उनके कारण मूसा की हानि हुई,</li>
<li class="ltr" id="">3क्योंकि उन्होंने उसकी आत्मा से बलवा किया, तब मूसा बिन सोचे बोल उठा।</li>
<li class="ltr" id="">4जिन लोगों के विषय यहोवा ने उन्हें आज्ञा दी थी, उन को उन्होंने सत्यानाश न किया,</li>
<li class="ltr" id="">5वरन उन्हीं जातियों से हिलमिल गए और उनके व्यवहारों को सीख लिया,</li>
<li class="ltr" id="">6और उनकी मूर्तियों की पूजा करने लगे, और वे उनके लिये फन्दा बन गईं।</li>
<li class="ltr" id="">7वरन उन्होंने अपने बेटे- बेटियों को पिशाचों के लिये बलिदान किया,</li>
<li class="ltr" id="">8और अपने निर्दोष बेटे- बेटियों का लोहू बहाया जिन्हें उन्होंने कनान की मूर्तियों पर बलि किया, इसलिये देश खून से अपवित्र हो गया।</li>
<li class="ltr" id="">9और वे आप अपने कामों के द्वारा अशुद्ध हो गए, और अपने कार्यों के द्वारा व्यभिचारी भी बन गए॥</li>
<li class="ltr" id="">0तब यहोवा का क्रोध अपनी प्रजा पर भड़का, और उसको अपने निज भाग से घृणा आई,</li>
<li class="ltr" id="">1तब उसने उन को अन्यजातियों के वश में कर दिया, और उनके बैरियों ने उन पर प्रभुता की।</li>
<li class="ltr" id="">2उन के शत्रुओं ने उन पर अन्धेर किया, और वे उनके हाथ तले दब गए।</li>
<li class="ltr" id="">3बारम्बार उसने उन्हें छुड़ाया, परन्तु वे उसके विरुद्ध युक्ति करते गए, और अपने अधर्म के कारण दबते गए।</li>
<li class="ltr" id="">4तौभी जब जब उनका चिल्लाना उसके कान में पड़ा, तब तब उसने उनके संकट पर दृष्टि की.</li>
<li class="ltr" id="">5और उनके हित अपनी वाचा को स्मरण करके अपनी अपार करूणा के अनुसार तरस खाया,</li>
<li class="ltr" id="">6और जो उन्हें बन्धुए करके ले गए थे उन सब से उन पर दया कराई॥</li>
<li class="ltr" id="">7हे हमारे परमेश्वर यहोवा, हमारा उद्धार कर, और हमें अन्यजातियों में से इकट्ठा कर ले, कि हम तेरे पवित्र नाम का धन्यवाद करें, और तेरी स्तुति करते हुए तेरे विषय में बड़ाई करें॥</li>
<li class="ltr" id="">8इस्राएल का परमेश्वर यहोवा अनादिकाल से अनन्तकाल तक धन्य है. और सारी प्रजा कहे आमीन. याह की स्तुति करो॥</li>

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भजन संहिता 107
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<li class="ltr" id="">यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है, और उसकी करूणा सदा की है.</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा के छुड़ाए हुए ऐसा ही कहें, जिन्हें उसने द्रोही के हाथ से दाम दे कर छुड़ा लिया है,</li>
<li class="ltr" id="">और उन्हें देश देश से पूरब- पश्चिम, उत्तर और दक्खिन से इकट्ठा किया है॥</li>
<li class="ltr" id="">वे जंगल में मरूभूमि के मार्ग पर भटकते फिरे, और कोई बसा हुआ नगर न पाया,</li>
<li class="ltr" id="">भूख और प्यास के मारे, वे विकल हो गए।</li>
<li class="ltr" id="">तब उन्होंने संकट में यहोवा की दोहाई दी, और उसने उन को सकेती से छुड़ाया,</li>
<li class="ltr" id="">और उन को ठीक मार्ग पर चलाया, ताकि वे बसने के लिये किसी नगर को जा पहुंचे।</li>
<li class="ltr" id="">लोग यहोवा की करूणा के कारण, और उन आश्चर्यकर्मों के कारण, जो वह मनुष्यों के लिये करता है, उसका धन्यवाद करें.</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि वह अभिलाषी जीव को सन्तुष्ट करता है, और भूखे को उत्तम पदार्थों से तृप्त करता है॥</li>
<li class="ltr" id="">0जो अन्धियारे और मृत्यु की छाया में बैठे, और दु:ख में पड़े और बेड़ियों से जकड़े हुए थे,</li>
<li class="ltr" id="">1इसलिये कि वे ईश्वर के वचनों के विरुद्ध चले, और परमप्रधान की सम्मति को तुच्छ जाना।</li>
<li class="ltr" id="">2तब उसने उन को कष्ट के द्वारा दबाया, वे ठोकर खाकर गिर पड़े, और उन को कोई सहायक न मिला।</li>
<li class="ltr" id="">3तब उन्होंने संकट में यहोवा की दोहाई दी, और उस ने सकेती से उनका उद्धार किया,</li>
<li class="ltr" id="">4उसने उन को अन्धियारे और मृत्यु की छाया में से निकाल लिया, और उन के बन्धनों को तोड़ डाला।</li>
<li class="ltr" id="">5लोग यहोवा की करूणा के कारण, और उन आश्चर्यकर्मों के कारण जो वह मनुष्यों के लिये करता है, उसका धन्यवाद करें.</li>
<li class="ltr" id="">6क्योंकि उसने पीतल के फाटकों को तोड़ा, और लोहे के बेण्डों को टुकड़े टुकड़े किया॥</li>
<li class="ltr" id="">7मूढ़ अपनी कुचाल, और अधर्म के कामों के कारण अति दु:खित होते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">8उनका जी सब भांति के भोजन से मिचलाता है, और वे मृत्यु के फाटक तक पहुंचते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">9तब वे संकट में यहोवा की दोहाई देते हैं, और व सकेती से उनका उद्धार करता है,</li>
<li class="ltr" id="">0वह अपने वचन के द्वारा उन को चंगा करता और जिस गड़हे में वे पड़े हैं, उससे निकालता है।</li>
<li class="ltr" id="">1लोग यहोवा की करूणा के कारण और उन आश्चर्यकर्मों के कारण जो वह मनुष्यों के लिये करता है, उसका धन्यवाद करें.</li>
<li class="ltr" id="">2और वे धन्यवाद बलि चढ़ाएं, और जयजयकार करते हुए, उसके कामों का वर्णन करें॥</li>
<li class="ltr" id="">3जो लोग जहाजों में समुद्र पर चलते हैं, और महासागर पर होकर व्यापार करते हैं,</li>
<li class="ltr" id="">4वे यहोवा के कामों को, और उन आश्चर्यकर्मों को जो वह गहिरे समुद्र में करता है, देखते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">5क्योंकि वह आज्ञा देता है, वह प्रचण्ड बयार उठकर तरंगों को उठाती है।</li>
<li class="ltr" id="">6वे आकाश तक चढ़ जाते, फिर गहराई में उतर आते हैं, और क्लेश के मारे उनके जी में जी नहीं रहता,</li>
<li class="ltr" id="">7वे चक्कर खाते, और मत वाले की नाईं लड़खड़ाते हैं, और उनकी सारी बुद्धि मारी जाती है।</li>
<li class="ltr" id="">8तब वे संकट में यहोवा की दोहाई देते हैं, और वह उन को सकेती से निकालता है।</li>
<li class="ltr" id="">9वह आंधी को थाम देता है और तरंगें बैठ जाती हैं।</li>
<li class="ltr" id="">0तब वे उनके बैठने से आनन्दित होते हैं, और वह उन को मन चाहे बन्दर स्थान में पहुंचा देता है।</li>
<li class="ltr" id="">1लोग यहोवा की करूणा के कारण, और उन आश्चर्यकर्मों के कारण जो वह मनुष्यों के लिये करता है, उसका धन्यवाद करें।</li>
<li class="ltr" id="">2और सभा में उसको सराहें, और पुरनियों के बैठक में उसकी स्तुति करें॥</li>
<li class="ltr" id="">3वह नदियों को जंगल बना डालता है, और जल के सोतों को सूखी भूमि कर देता है।</li>
<li class="ltr" id="">4वह फलवन्त भूमि को नोनी करता है, यह वहां के रहने वालों की दुष्टता के कारण होता है।</li>
<li class="ltr" id="">5वह जंगल को जल का ताल, और निर्जल देश को जल के सोते कर देता है।</li>
<li class="ltr" id="">6और वहां वह भूखों को बसाता है, कि वे बसने के लिये नगर तैयार करें,</li>
<li class="ltr" id="">7और खेती करें, और दाख की बारियां लगाएं, और भांति भांति के फल उपजा लें।</li>
<li class="ltr" id="">8और वह उन को ऐसी आशीष देता है कि वे बहुत बढ़ जाते हैं, और उनके पशुओं को भी वह घटने नहीं देता॥</li>
<li class="ltr" id="">9फिर अन्धेर, विपत्ति और शोक के कारण, वे घटते और दब जाते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">0और वह हाकिमों को अपमान से लाद कर मार्ग रहित जंगल में भटकाता है,</li>
<li class="ltr" id="">1वह दरिद्रों को दु:ख से छुड़ा कर ऊंचे पर रखता है, और उन को भेड़ों के झुंड सा परिवार देता है।</li>
<li class="ltr" id="">2सीधे लोग देख कर आनन्दित होते हैं, और सब कुटिल लोग अपने मुंह बन्द करते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">3जो कोई बुद्धिमान हो, वह इन बातों पर ध्यान करेगा, और यहोवा की करूणा के कामों पर ध्यान करेगा॥</li>

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भजन संहिता 108
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<li class="ltr" id="">हे परमेश्वर, मेरा हृदय स्थिर है, मैं गाऊंगा, मैं अपनी आत्मा से भी भजन गाऊंगा।</li>
<li class="ltr" id="">हे सारंगी और वीणा जागो. मैं आप पौ फटते जाग उठूंगा.</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा, मैं देश देश के लोगों के मध्य में तेरा धन्यवाद करूंगा, और राज्य राज्य के लोगों के मध्य में तेरा भजन गाऊंगा।</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि तेरी करूणा आकाश से भी ऊंची है, और तेरी सच्चाई आकाशमण्डल तक है॥</li>
<li class="ltr" id="">हे परमेश्वर, तू स्वर्ग के ऊपर हो. और तेरी महिमा सारी पृथ्वी के ऊपर हो.</li>
<li class="ltr" id="">इसलिये कि तेरे प्रिय छुड़ाए जाएं, तू अपने दाहिने हाथ से बचा ले और हमारी बिनती सुन ले.</li>
<li class="ltr" id="">परमेश्वर ने अपनी पवित्रता में होकर कहा है, मैं प्रफुल्लित होकर शेकेम को बांट लूंगा, और सुक्कोत की तराई को नपवाऊंगा।</li>
<li class="ltr" id="">गिलाद मेरा है, मनश्शे भी मेरा है, और एप्रैम मेरे सिर का टोप है, यहूदा मेरा राजदण्ड है।</li>
<li class="ltr" id="">मोआब मेरे धोने का पात्र है, मैं एदोम पर अपना जूता फेंकूंगा, पलिश्त पर मैं जयजयकार करूंगा॥</li>
<li class="ltr" id="">0मुझे गढ़ वाले नगर में कौन पहुंचाएगा? ऐदोम तक मेरी अगुवाई किस ने की है?</li>
<li class="ltr" id="">1हे परमेश्वर, क्या तू ने हम को नहीं त्याग दिया, और हे परमेश्वर, तू हमारी सेना के साथ पलायन नहीं करता।</li>
<li class="ltr" id="">2द्रोहियों के विरुद्ध हमारी सहायता कर, क्योंकि मनुष्य का किया हुआ छुटकारा व्यर्थ है.</li>
<li class="ltr" id="">3परमेश्वर की सहायता से हम वीरता दिखाएंगे, हमारे द्रोहियों को वही रौंदेगा॥</li>

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भजन संहिता 109
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<li class="ltr" id="">हे परमेश्वर तू जिसकी मैं स्तुति करता हूं, चुप न रह।</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि दुष्ट और कपटी मनुष्यों ने मेरे विरुद्ध मुंह खोला है, वे मेरे विषय में झूठ बोलते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">और उन्होंने बैर के वचनों से मुझे चारों ओर घेर लिया है, और व्यर्थ मुझ से लड़ते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">मेरे प्रेम के बदले में वे मुझ से विरोध करते हैं, परन्तु मैं तो प्रार्थना में लवलीन रहता हूं।</li>
<li class="ltr" id="">उन्होंने भलाई के पलटे में मुझ से बुराई की और मेरे प्रेम के बदले मुझ से बैर किया है॥</li>
<li class="ltr" id="">तू उसको किसी दुष्ट के अधिकार में रख, और कोई विरोधी उसकी दाहिनी ओर खड़ा रहे।</li>
<li class="ltr" id="">जब उसका न्याय किया जाए, तब वह दोषी निकले, और उसकी प्रार्थना पाप गिनी जाए.</li>
<li class="ltr" id="">उसके दिन थोड़े हों, और उसके पद को दूसरा ले.</li>
<li class="ltr" id="">उसक लड़के बाले अनाथ हो जाएं और उसकी स्त्री विधवा हो जाए.</li>
<li class="ltr" id="">0और उसके लड़के मारे मारे फिरें, और भीख मांगा करे, उन को उनके उजड़े हुए घर से दूर जा कर टुकड़े मांगना पड़े.</li>
<li class="ltr" id="">1महाजन फन्दा लगा कर, उसका सर्वस्व ले ले, और परदेशी उसकी कमाई को लूट लें.</li>
<li class="ltr" id="">2कोई न हो जो उस पर करूणा करता रहे, और उसके अनाथ बालकों पर कोई अनुग्रह न करे.</li>
<li class="ltr" id="">3उसका वंश नाश हो जाए, दूसरी पीढ़ी में उसका नाम मिट जाए.</li>
<li class="ltr" id="">4उसके पितरों का अधर्म यहोवा को स्मरण रहे, और उसकी माता का पाप न मिटे.</li>
<li class="ltr" id="">5वह निरन्तर यहोवा के सम्मुख रहे, कि वह उनका नाम पृथ्वी पर से मिटा डाले.</li>
<li class="ltr" id="">6क्योंकि वह दुष्ट, कृपा करना भूल गया वरन दीन और दरिद्र को सताता था और मार डालने की इच्छा से खेदित मन वालों के पीछे पड़ा रहता था॥</li>
<li class="ltr" id="">7वह शाप देने में प्रीति रखता था, और शाप उस पर आ पड़ा, वह आशीर्वाद देने से प्रसन्न न होता था, सो आर्शीवाद उससे दूर रहा।</li>
<li class="ltr" id="">8वह शाप देना वस्त्र की नाईं पहिनता था, और वह उसके पेट में जल की नाईं और उसकी हडि्डयों में तेल की नाईं समा गया।</li>
<li class="ltr" id="">9वह उसके लिये ओढ़ने का काम दे, और फेंटे की नाईं उसकी कटि में नित्य कसा रहे॥</li>
<li class="ltr" id="">0यहोवा की ओर से मेरे विरोधियों को, और मेरे विरुद्ध बुरा कहने वालों को यही बदला मिले.</li>
<li class="ltr" id="">1परन्तु मुझ से हे यहोवा प्रभु, तू अपने नाम के निमित्त बर्ताव कर, तेरी करूणा तो बड़ी है, सो तू मुझे छुटकारा दे.</li>
<li class="ltr" id="">2क्योंकि मैं दीन और दरिद्र हूं, और मेरा हृदय घायल हुआ है।</li>
<li class="ltr" id="">3मैं ढलती हुई छाया की नाईं जाता रहा हूं, मैं टिड्डी के समान उड़ा दिया गया हूं।</li>
<li class="ltr" id="">4उपवास करते करते मेरे घुटने निर्बल हो गए, और मुझ में चर्बी न रहने से मैं सूख गया हूं।</li>
<li class="ltr" id="">5मेरी तो उन लोगों से नामधराई होती है, जब वे मुझे देखते, तब सिर हिलाते हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">6हे मेरे परमेश्वर यहोवा, मेरी सहायता कर. अपनी करूणा के अनुसार मेरा उद्धार कर.</li>
<li class="ltr" id="">7जिस से वे जाने कि यह तेरा काम है, और हे यहोवा, तू ही ने यह किया है.</li>
<li class="ltr" id="">8वे कोसते तो रहें, परन्तु तू आशीष दे. वे तो उठते ही लज्जित हों, परन्तु तेरा दास आनन्दित हो.</li>
<li class="ltr" id="">9मेरे विरोधियों को अनादररूपी वस्त्र पहिनाया जाए, और वे अपनी लज्जा को कम्बल की नाईं ओढ़ें.</li>
<li class="ltr" id="">0मैं यहोवा का बहुत धन्यवाद करूंगा, और बहुत लोगों के बीच में उसकी स्तुति करूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">1क्योंकि वह दरिद्र की दाहिनी ओर खड़ा रहेगा, कि उसको घात करने वाले न्यायियों से बचाए॥</li>

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भजन संहिता 110
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<li class="ltr" id="">मेरे प्रभु से यहोवा की वाणी यह है, कि तू मेरे दाहिने हाथ बैठ, जब तक मैं तेरे शत्रुओं को तेरे चरणों की चौकी न कर दूं॥</li>
<li class="ltr" id="">तेरे पराक्रम का राजदण्ड यहोवा सिय्योन से बढ़ाएगा। तू अपने शत्रुओं के बीच में शासन कर।</li>
<li class="ltr" id="">तेरी प्रजा के लोग तेरे पराक्रम के दिन स्वेच्छाबलि बनते हैं, तेरे जवान लोग पवित्रता से शोभायमान, और भोर के गर्भ से जन्मी हुई ओस के समान तेरे पास हैं।</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा ने शपथ खाई और न पछताएगा, कि तू मेल्कीसेदेक की रीति पर सर्वदा का याजक है॥</li>
<li class="ltr" id="">प्रभु तेरी दाहिनी ओर होकर अपने क्रोध के दिन राजाओं को चूर कर देगा।</li>
<li class="ltr" id="">वह जाति जाति में न्याय चुकाएगा, रणभूमि लोथों से भर जाएगी, वह लम्बे चौड़े देश के प्रधान को चूर चूर कर देगा।</li>
<li class="ltr" id="">वह मार्ग में चलता हुआ नदी का जल पीएगा इस कारण वह सिर को ऊंचा करेगा॥</li>

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भजन संहिता 111
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<li class="ltr" id="">याह की स्तुति करो। मैं सीधे लोगों की गोष्ठी में और मण्डली में भी सम्पूर्ण मन से यहोवा का धन्यवाद करूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा के काम बड़े हैं, जितने उन से प्रसन्न रहते हैं, वे उन पर ध्यान लगाते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">उसके काम का वैभवमय और ऐश्वरर्यमय होते हैं, और उसका धर्म सदा तक बना रहेगा।</li>
<li class="ltr" id="">उसने अपने आश्चर्यकर्मों का स्मरण कराया है, यहोवा अनुग्रहकारी और दयावन्त है।</li>
<li class="ltr" id="">उसने अपने डरवैयों को आहार दिया है, वह अपनी वाचा को सदा तक स्मरण रखेगा।</li>
<li class="ltr" id="">उसने अपनी प्रजा को अन्यजातियों का भाग देने के लिये, अपने कामों का प्रताप दिखाया है।</li>
<li class="ltr" id="">सच्चाई और न्याय उसके हाथों के काम हैं, उसके सब उपदेश विश्वासयोग्य हैं,</li>
<li class="ltr" id="">वे सदा सर्वदा अटल रहेंगे, वे सच्चाई और सिधाई से किए हुए हैं।</li>
<li class="ltr" id="">उसने अपनी प्रजा का उद्धार किया है, उसने अपनी वाचा को सदा के लिये ठहराया है। उसका नाम पवित्र और भय योग्य है।</li>
<li class="ltr" id="">0बुद्धि का मूल यहोवा का भय है, जितने उसकी आज्ञाओं को मानते हैं, उनकी बुद्धि अच्छी होती है। उसकी स्तुति सदा बनी रहेगी॥</li>

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भजन संहिता 112
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<li class="ltr" id="">याह की स्तुति करो। क्या ही धन्य है वह पुरूष जो यहोवा का भय मानता है, और उसकी आज्ञाओं से अति प्रसन्न रहता है.</li>
<li class="ltr" id="">उसका वंश पृथ्वी पर पराक्रमी होगा, सीधे लोगों की सन्तान आशीष पाएगी।</li>
<li class="ltr" id="">उसके घर में धन सम्पत्ति रहती है, और उसका धर्म सदा बना रहेगा।</li>
<li class="ltr" id="">सीधे लोगों के लिये अन्धकार के बीच में ज्योति उदय होती है, वह अनुग्रहकारी, दयावन्त और धर्मी होता है।</li>
<li class="ltr" id="">जो पुरूष अनुग्रह करता और उधार देता है, उसका कल्याण होता है, वह न्याय में अपने मुकद्दमें को जीतेगा।</li>
<li class="ltr" id="">वह तो सदा तक अटल रहेगा, धर्मी का स्मरण सदा तक बना रहेगा।</li>
<li class="ltr" id="">वह बुरे समाचार से नहीं डरता, उसका हृदय यहोवा पर भरोसा रखने से स्थिर रहता है।</li>
<li class="ltr" id="">उसका हृदय सम्भला हुआ है, इसलिये वह न डरेगा, वरन अपने द्रोहियों पर दृष्टि करके सन्तुष्ट होगा।</li>
<li class="ltr" id="">उसने उदारता से दरिद्रों को दान दिया, उसका धर्म सदा बना रहेगा और उसका सींग महिमा के साथ ऊंचा किया जाएगा।</li>
<li class="ltr" id="">0दुष्ट उसे देख कर कुढेगा, वह दांत पीस- पीसकर गल जाएगा, दुष्टों की लालसा पूरी न होगी॥</li>

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भजन संहिता 113
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<li class="ltr" id="">याह की स्तुति करो हे यहोवा के दासों स्तुति करो, यहोवा के नाम की स्तुति करो.</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा का नाम अब से ले कर सर्वदा तक धन्य कहा जाय.</li>
<li class="ltr" id="">उदयाचल से ले कर अस्ताचल तक, यहोवा का नाम स्तुति के योग्य है।</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा सारी जातियों के ऊपर महान है, और उसकी महिमा आकाश से भी ऊंची है॥</li>
<li class="ltr" id="">हमारे परमेश्वर यहोवा के तुल्य कौन है? वह तो ऊंचे पर विराजमान है,</li>
<li class="ltr" id="">और आकाश और पृथ्वी पर भी, दृष्टि करने के लिये झुकता है।</li>
<li class="ltr" id="">वह कंगाल को मिट्टी पर से, और दरिद्र को घूरे पर से उठा कर ऊंचा करता है,</li>
<li class="ltr" id="">कि उसको प्रधानों के संग, अर्थात अपनी प्रजा के प्रधानों के संग बैठाए।</li>
<li class="ltr" id="">वह बांझ को घर में लड़कों की आनन्द करने वाली माता बनाता है। याह की स्तुति करो.</li>

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भजन संहिता 114
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<li class="ltr" id="">जब इस्राएल ने मिस्त्र से, अर्थात याकूब के घराने ने अन्य भाषा वालों के बीच में कूच किया,</li>
<li class="ltr" id="">तब यहूदा यहोवा का पवित्र स्थान और इस्राएल उसके राज्य के लोग हो गए॥</li>
<li class="ltr" id="">समुद्र देखकर भागा, यर्दन नदी उलटी बही।</li>
<li class="ltr" id="">पहाड़ मेढ़ों की नाईं उछलने लगे, और पहाड़ियां भेड़- बकरियों के बच्चों की नाईं उछलने लगीं॥</li>
<li class="ltr" id="">हे समुद्र, तुझे क्या हुआ, कि तू भागा? और हे यर्दन तुझे क्या हुआ, कि तू उलटी बही?</li>
<li class="ltr" id="">हे पहाड़ों तुम्हें क्या हुआ, कि तुम भेड़ों की नाईं, और हे पहाड़ियों तुम्हें क्या हुआ, कि तुम भेड़- बकरियों के बच्चों की नाईं उछलीं?</li>
<li class="ltr" id="">हे पृथ्वी प्रभु के साम्हने, हां याकूब के परमेश्वर के साम्हने थरथरा।</li>
<li class="ltr" id="">वह चट्टान को जल का ताल, चकमक के पत्थर को जल का सोता बना डालता है॥</li>

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भजन संहिता 115
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<li class="ltr" id="">हे यहोवा, हमारी नहीं, हमारी नहीं, वरन अपने ही नाम की महिमा, अपनी करूणा और सच्चाई के निमित्त कर।</li>
<li class="ltr" id="">जाति जाति के लोग क्यों कहने पांए, कि उनका परमेश्वर कहां रहा?</li>
<li class="ltr" id="">हमारा परमेश्वर तो स्वर्ग में हैं, उसने जो चाहा वही किया है।</li>
<li class="ltr" id="">उन लोगों की मूरतें सोने चान्दी ही की तो हैं, वे मनुष्यों के हाथ की बनाईं हुई हैं।</li>
<li class="ltr" id="">उनका मुंह तो रहता है परन्तु वे बोल नहीं सकती, उनके आंखें तो रहती हैं परन्तु वे देख नहीं सकतीं।</li>
<li class="ltr" id="">उनके कान तो रहते हैं, परन्तु वे सुन नहीं सकतीं, उनके नाक तो रहती हैं, परन्तु वे सूंघ नहीं सकतीं।</li>
<li class="ltr" id="">उनके हाथ तो रहते हैं, परन्तु वे स्पर्श नहीं कर सकतीं, उनके पांव तो रहते हैं, परन्तु वे चल नहीं सकतीं, और अपने कण्ठ से कुछ भी शब्द नहीं निकाल सकतीं।</li>
<li class="ltr" id="">जैसी वे हैं वैसे ही उनके बनाने वाले हैं, और उन पर भरोसा रखने वाले भी वैसे ही हो जाएंगे॥</li>
<li class="ltr" id="">हे इस्राएल यहोवा पर भरोसा रख. तेरा सहायक और ढाल वही है।</li>
<li class="ltr" id="">0हे हारून के घराने यहोवा पर भरोसा रख. तेरा सहायक और ढाल वही है।</li>
<li class="ltr" id="">1हे यहोवा के डरवैयो, यहोवा पर भरोसा रखो. तुम्हारा सहायक और ढाल वही है॥</li>
<li class="ltr" id="">2यहोवा ने हम को स्मरण किया है, वह आशीष देगा, वह इस्राएल के घराने को आशीष देगा, वह हारून के घराने को आशीष देगा।</li>
<li class="ltr" id="">3क्या छोटे क्या बड़े जितने यहोवा के डरवैये हैं, वह उन्हें आशीष देगा॥</li>
<li class="ltr" id="">4यहोवा तुम को और तुम्हारे लड़कों को भी अधिक बढ़ाता जाए.</li>
<li class="ltr" id="">5यहोवा जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है, उसकी ओर से तुम अशीष पाए हो॥</li>
<li class="ltr" id="">6स्वर्ग तो यहोवा का है, परन्तु पृथ्वी उसने मनुष्यों को दी है।</li>
<li class="ltr" id="">7मृतक जितने चुपचाप पड़े हैं, वे तो याह की स्तुति नहीं कर सकते,</li>
<li class="ltr" id="">8परन्तु हम लोग याह को अब से ले कर सर्वदा तक धन्य कहते रहेंगे। याह की स्तुति करो.</li>

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भजन संहिता 116
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<li class="ltr" id="">मैं प्रेम रखता हूं, इसलिये कि यहोवा ने मेरे गिड़गिड़ाने को सुना है।</li>
<li class="ltr" id="">उसने जो मेरी ओर कान लगाया है, इसलिये मैं जीवन भर उसको पुकारा करूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">मृत्यु की रस्सियां मेरे चारोंओर थीं, मैं अधोलोक की सकेती में पड़ा था, मुझे संकट और शोक भोगना पड़ा।</li>
<li class="ltr" id="">तब मैं ने यहोवा से प्रार्थना की, कि हे यहोवा बिनती सुन कर मेरे प्राण को बचा ले.</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा अनुग्रहकारी और धर्मी है, और हमारा परमेश्वर दया करने वाला है।</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा भोलों की रक्षा करता है, जब मैं बलहीन हो गया था, उसने मेरा उद्धार किया।</li>
<li class="ltr" id="">हे मेरे प्राण तू अपने विश्राम स्थान में लौट आ, क्योंकि यहोवा ने तेरा उपकार किया है॥</li>
<li class="ltr" id="">तू ने तो मेरे प्राण को मृत्यु से, मेरी आंख को आंसू बहाने से, और मेरे पांव को ठोकर खाने से बचाया है।</li>
<li class="ltr" id="">मैं जीवित रहते हुए, अपने को यहोवा के साम्हने जान कर नित चलता रहूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">0मैं ने जो ऐसा कहा है, इसे विश्वास की कसौटी पर कस कर कहा है, कि मैं तो बहुत ही दु:खित हुआ,</li>
<li class="ltr" id="">1मैं ने उतावली से कहा, कि सब मनुष्य झूठे हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">2यहोवा ने मेरे जितने उपकार किए हैं, उनका बदला मैं उसको क्या दूं?</li>
<li class="ltr" id="">3मैं उद्धार का कटोरा उठा कर, यहोवा से प्रार्थना करूंगा,</li>
<li class="ltr" id="">4मैं यहोवा के लिये अपनी मन्नतें सभों की दृष्टि में प्रगट रूप में उसकी सारी प्रजा के साम्हने पूरी करूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">5यहोवा के भक्तों की मृत्यु, उसकी दृष्टि में अनमोल है।</li>
<li class="ltr" id="">6हे यहोवा, सुन, मैं तो तेरा दास हूं, मैं तेरा दास, और तेरी दासी का पुत्र हूं। तू ने मेरे बन्धन खोल दिए हैं।</li>
<li class="ltr" id="">7मैं तुझ को धन्यवाद बलि चढ़ाऊंगा, और यहोवा से प्रार्थना करूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">8मैं यहोवा के लिये अपनी मन्नतें, प्रगट में उसकी सारी प्रजा के साम्हने</li>
<li class="ltr" id="">9यहोवा के भवन के आंगनों में, हे यरूशलेम, तेरे भीतर पूरी करूंगा। याह की स्तुति करो.</li>

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भजन संहिता 117
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<li class="ltr" id="">हे जाति जाति के सब लोगोंयहोवा की स्तुति करो. हे राज्य राज्य के सब लोगो, उसकी प्रशंसा करो.</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि उसकी करूणा हमारे ऊपर प्रबल हुई है, और यहोवा की सच्चाई सदा की है याह की स्तुति करो.</li>

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भजन संहिता 118
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<li class="ltr" id="">हे जाति जाति के सब लोगों यहोवा की स्तुति करो. हे राज्य राज्य के सब लोगो, उसकी प्रशंसा करो.क्योंकि उसकी करूणा हमारे ऊपर प्रबल हुई है, और यहोवा की सच्चाई सदा की है याह की स्तुति करो. यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है, और उसकी करूणा सदा की है.</li>
<li class="ltr" id="">इस्राएल कहे, उसकी करूणा सदा की है।</li>
<li class="ltr" id="">हारून का घराना कहे, उसकी करूणा सदा की है।</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा के डरवैये कहें, उसकी करूणा सदा की है।</li>
<li class="ltr" id="">मैं ने सकेती में परमेश्वर को पुकारा, परमेश्वर ने मेरी सुन कर, मुझे चौड़े स्थान में पहुंचाया।</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा मेरी ओर है, मैं न डरूंगा। मनुष्य मेरा क्या कर सकता है?</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा मेरी ओर मेरे सहायकों में है, मैं अपने बैरियों पर दृष्टि कर सन्तुष्ट हूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा की शरण लेनी, मनुष्य पर भरोसा रखने से उत्तम है।</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा की शरण लेनी, प्रधानों पर भी भरोसा रखने से उत्तम है॥</li>
<li class="ltr" id="">0सब जातियों ने मुझ को घेर लिया है, परन्तु यहोवा के नाम से मैं निश्चय उन्हें नाश कर डालूंगा.</li>
<li class="ltr" id="">1उन्होंने मुझ को घेर लिया है, नि:सन्देह घेर लिया है, परन्तु यहोवा के नाम से मैं निश्चय उन्हें नाश कर डालूंगा.</li>
<li class="ltr" id="">2उन्होंने मुझे मधुमक्खियों की नाईं घेर लिया है, परन्तु कांटों की आग की नाईं वे बुझ गए, यहोवा के नाम से मैं निश्चय उन्हें नाश कर डालूंगा.</li>
<li class="ltr" id="">3तू ने मुझे बड़ा धक्का दिया तो था, कि मैं गिर पडूं परन्तु यहोवा ने मेरी सहायता की।</li>
<li class="ltr" id="">4परमेश्वर मेरा बल और भजन का विषय है, वह मेरा उद्धार ठहरा है॥</li>
<li class="ltr" id="">5धर्मियों के तम्बुओं में जयजयकार और उद्धार की ध्वनि हो रही है, यहोवा के दाहिने हाथ से पराक्रम का काम होता है,</li>
<li class="ltr" id="">6यहोवा का दहिना हाथ महान हुआ है, यहोवा के दाहिने हाथ से पराक्रम का काम होता है.</li>
<li class="ltr" id="">7मैं न मरूंगा वरन जीवित रहूंगा, और परमेश्वर के कामों का वर्णन करता रहूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">8परमेश्वर ने मेरी बड़ी ताड़ना तो की है परन्तु मुझे मृत्यु के वश में नहीं किया॥</li>
<li class="ltr" id="">9मेरे लिये धर्म के द्वार खोलो, मैं उन से प्रवेश करके याह का धन्यवाद करूंगा॥</li>
<li class="ltr" id="">0यहोवा का द्वार यही है, इस से धर्मी प्रवेश करने पाएंगे॥</li>
<li class="ltr" id="">1हे यहोवा मैं तेरा धन्यवाद करूंगा, क्योंकि तू ने मेरी सुन ली है और मेरा उद्धार ठहर गया है।</li>
<li class="ltr" id="">2राजमिस्त्रियों ने जिस पत्थर को निकम्मा ठहराया था वही कोने का सिरा हो गया है।</li>
<li class="ltr" id="">3यह तो यहोवा की ओर से हुआ है, यह हमारी दृष्टि में अद्भुत है।</li>
<li class="ltr" id="">4आज वह दिन है जो यहोवा ने बनाया है, हम इस में मगन और आनन्दित हों।</li>
<li class="ltr" id="">5हे यहोवा, बिनती सुन, उद्धार कर. हे यहोवा, बिनती सुन, सफलता दे.</li>
<li class="ltr" id="">6धन्य है वह जो यहोवा के नाम से आता है. हम ने तुम को यहोवा के घर से आशीर्वाद दिया है।</li>
<li class="ltr" id="">7यहोवा ईश्वर है, और उसने हम को प्रकाश दिया है। यज्ञपशु को वेदी के सींगों से रस्सियों बान्धो.</li>
<li class="ltr" id="">8हे यहोवा, तू मेरा ईश्वर है, मैं तेरा धन्यवाद करूंगा, तू मेरा परमेश्वर है, मैं तुझ को सराहूंगा॥</li>
<li class="ltr" id="">9यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है, और उसकी करूणा सदा बनी रहेगी.</li>

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भजन संहिता 119
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<li class="ltr" id="">क्या ही धन्य हैं वे जो चाल के खरे हैं, और यहोवा की व्यवस्था पर चलते हैं.</li>
<li class="ltr" id="">क्या ही धन्य हैं वे जो उसकी चितौनियों को मानते हैं, और पूर्ण मन से उसके पास आते हैं.</li>
<li class="ltr" id="">फिर वे कुटिलता का काम नहीं करते, वे उसके मार्गों में चलते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">तू ने अपने उपदेश इसलिये दिए हैं, कि वे यत्न से माने जाएं।</li>
<li class="ltr" id="">भला होता कि तेरी विधियों के मानने के लिये मेरी चालचलन दृढ़ हो जाए.</li>
<li class="ltr" id="">तब मैं तेरी सब आज्ञाओं की ओर चित्त लगाए रहूंगा, और मेरी आशा न टूटेगी।</li>
<li class="ltr" id="">जब मैं तेरे धर्ममय नियमों को सीखूंगा, तब तेरा धन्यवाद सीधे मन से करूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">मैं तेरी विधियों को मानूंगा: मुझे पूरी रीति से न तज.</li>
<li class="ltr" id="">जवान अपनी चाल को किस उपाय से शुद्ध रखे? तेरे वचन के अनुसार सावधान रहने से।</li>
<li class="ltr" id="">0मैं पूरे मन से तेरी खोज मे लगा हूं, मुझे तेरी आज्ञाओं की बाट से भटकने न दे.</li>
<li class="ltr" id="">1मैं ने तेरे वचन को अपने हृदय में रख छोड़ा है, कि तेरे विरुद्ध पाप न करूं।</li>
<li class="ltr" id="">2हे यहोवा, तू धन्य है, मुझे अपनी विधियां सिखा.</li>
<li class="ltr" id="">3तेरे सब कहे हुए नियमों का वर्णन, मैं ने अपने मुंह से किया है।</li>
<li class="ltr" id="">4मैं तेरी चितौनियों के मार्ग से, मानों सब प्रकार के धन से हर्षित हुआ हूं।</li>
<li class="ltr" id="">5मैं तेरे उपदेशों पर ध्यान करूंगा, और तेरे मार्गों की ओर दृष्टि रखूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">6मैं तेरी विधियों से सुख पाऊंगा, और तेरे वचन को न भूलूंगा॥</li>
<li class="ltr" id="">7अपने दास का उपकार कर, कि मैं जीवित रहूं, और तेरे वचन पर चलता रहूं।</li>
<li class="ltr" id="">8मेरी आंखें खोल दे, कि मैं तेरी व्यवस्था की अद्भुत बातें देख सकूं।</li>
<li class="ltr" id="">9मैं तो पृथ्वी पर परदेशी हूं, अपनी आज्ञाओं को मुझ से छिपाए न रख.</li>
<li class="ltr" id="">0मेरा मन तेरे नियमों की अभिलाषा के कारण हर समय खेदित रहता है।</li>
<li class="ltr" id="">1तू ने अभिमानियों को, जो शापित हैं, घुड़का है, वे तेरी आज्ञाओं की बाट से भटके हुए हैं।</li>
<li class="ltr" id="">2मेरी नामधराई और अपमान दूर कर, क्योंकि मैं तेरी चितौनियों को पकड़े हूं।</li>
<li class="ltr" id="">3हाकिम भी बैठे हुए आपास में मेरे विरुद्ध बातें करते थे, परन्तु तेरा दास तेरी विधियों पर ध्यान करता रहा।</li>
<li class="ltr" id="">4तेरी चितौनियां मेरा सुखमूल और मेरे मन्त्री हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">5मैं धूल में पड़ा हूं, तू अपने वचन के अनुसार मुझ को जिला.</li>
<li class="ltr" id="">6मैं ने अपनी चालचलन का तुझ से वर्णन किया है और तू ने मेरी बात मान ली है, तू मुझ को अपनी विधियां सिखा.</li>
<li class="ltr" id="">7अपने उपदेशों का मार्ग मुझे बता, तब मैं तेरे आश्यर्चकर्मों पर ध्यान करूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">8मेरा जीवन उदासी के मारे गल चला है, तू अपने वचन के अनुसार मुझे सम्भल.</li>
<li class="ltr" id="">9मुझ को झूठ के मार्ग से दूर कर, और करूणा कर के अपनी व्यवस्था मुझे दे।</li>
<li class="ltr" id="">0मैं ने सच्चाई का मार्ग चुन लिया है, तेरे नियमों की ओर मैं चित्त लगाए रहता हूं।</li>
<li class="ltr" id="">1मैं तेरी चितौनियों में लौलीन हूं, हे यहोवा, मेरी आशा न तोड़.</li>
<li class="ltr" id="">2जब तू मेरा हियाव बढ़ाएगा, तब मैं तेरी आज्ञाओं के मार्ग में दौडूंगा॥</li>
<li class="ltr" id="">3हे यहोवा, मुझे अपनी विधियों का मार्ग दिखा दे, तब मैं उसे अन्त तक पकड़े रहूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">4मुझे समझ दे, तब मैं तेरी व्यवस्था को पकड़े रहूंगा और पूर्ण मन से उस पर चलूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">5अपनी आज्ञाओं के पथ में मुझ को चला, क्योंकि मैं उसी से प्रसन्न हूं।</li>
<li class="ltr" id="">6मेरे मन को लोभ की ओर नहीं, अपनी चितौनियों ही की ओर फेर दे।</li>
<li class="ltr" id="">7मेरी आंखों को व्यर्थ वस्तुओं की ओर से फेर दे, तू अपने मार्ग में मुझे जिला।</li>
<li class="ltr" id="">8तेरा वचन जो तेरे भय मानने वालों के लिये है, उसको अपने दास के निमित्त भी पूरा कर।</li>
<li class="ltr" id="">9जिस नामधराई से मैं डरता हूं, उसे दूर कर, क्योंकि तेरे नियम उत्तम हैं।</li>
<li class="ltr" id="">0देख, मैं तेरे उपदेशों का अभिलाषी हूं, अपने धर्म के कारण मुझ को जिला।</li>
<li class="ltr" id="">1हे यहोवा, तेरी करूणा और तेरा किया हुआ उद्धार, तेरे वचन के अनुसार, मुझ को भी मिले,</li>
<li class="ltr" id="">2तब मैं अपनी नामधराई करने वालों को कुछ उत्तर दे सकूंगा, क्योंकि मेरा भरोसा, तेरे वचन पर है।</li>
<li class="ltr" id="">3मुझे अपने सत्य वचन कहने से न रोक क्योंकि मेरी आशा तेरे नियमों पर हैं।</li>
<li class="ltr" id="">4तब मैं तेरी व्यवस्था पर लगातार, सदा सर्वदा चलता रहूंगा,</li>
<li class="ltr" id="">5और मैं चोड़े स्थान में चला फिरा करूंगा, क्योंकि मैं ने तेरे उपदेशों की सुधि रखी है।</li>
<li class="ltr" id="">6और मैं तेरी चितौनियों की चर्चा राजाओं के साम्हने भी करूंगा, और संकोच न करूंगा,</li>
<li class="ltr" id="">7क्योंकि मैं तेरी आज्ञाओं के कारण सुखी हूं, और मैं उन से प्रीति रखता हूं।</li>
<li class="ltr" id="">8मैं तेरी आज्ञाओं की ओर जिन में मैं प्रीति रखता हूं, हाथ फैलाऊंगा और तेरी विधियों पर ध्यान करूंगा॥</li>
<li class="ltr" id="">9जो वचन तू ने अपने दास को दिया है, उसे स्मरण कर, क्योंकि तू ने मुझे आशा दी है।</li>
<li class="ltr" id="">0मेरे दु:ख में मुझे शान्ति उसी से हुई है, क्योंकि तेरे वचन के द्वारा मैं ने जीवन पाया है।</li>
<li class="ltr" id="">1अभिमानियों ने मुझे अत्यन्त ठट्ठे में उड़ाया है, तौभी मैं तेरी व्यवस्था से नहीं हटा।</li>
<li class="ltr" id="">2हे यहोवा, मैं ने तेरे प्राचीन नियमों को स्मरण करके शान्ति पाई है।</li>
<li class="ltr" id="">3जो दुष्ट तेरी व्यवस्था को छोड़े हुए हैं, उनके कारण मैं सन्ताप से जलता हूं।</li>
<li class="ltr" id="">4जहां मैं परदेशी होकर रहता हूं, वहां तेरी विधियां, मेरे गीत गाने का विषय बनी हैं।</li>
<li class="ltr" id="">5हे यहोवा, मैं ने रात को तेरा नाम स्मरण किया और तेरी व्यवस्था पर चला हूं।</li>
<li class="ltr" id="">6यह मुझ से इस कारण हुआ, कि मैं तेरे उपदेशों को पकड़े हुए था॥</li>
<li class="ltr" id="">7यहोवा मेरा भाग है, मैं ने तेरे वचनों के अनुसार चलने का निश्चय किया है।</li>
<li class="ltr" id="">8मैं ने पूरे मन से तुझे मनाया है, इसलिये अपने वचन के अनुसार मुझ पर अनुग्रह कर।</li>
<li class="ltr" id="">9मैं ने अपनी चालचलन को सोचा, और तेरी चितौनियों का मार्ग लिया।</li>
<li class="ltr" id="">0मैं ने तेरी आज्ञाओं के मानने में विलम्ब नहीं, फुर्ती की है।</li>
<li class="ltr" id="">1मैं दुष्टों की रस्सियों बन्ध गया हूं, तौभी मैं तेरी व्यवस्था को नहीं भूला।</li>
<li class="ltr" id="">2तेरे धर्ममय नियमों के कारण मैं आधी रात को तेरा धन्यवाद करने को उठूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">3जितने तेरा भय मानते और तेरे उपदेशों पर चलते हैं, उनका मैं संगी हूं।</li>
<li class="ltr" id="">4हे यहोवा, तेरी करुणा पृथ्वी में भरी हुई है, तू मुझे अपनी विधियां सिखा.</li>
<li class="ltr" id="">5हे यहोवा, तू ने अपने वचन के अनुसार अपने दास के संग भलाई की है।</li>
<li class="ltr" id="">6मुझे भली विवेक- शक्ति और ज्ञान दे, क्योंकि मैं ने तेरी आज्ञाओं का विश्वास किया है।</li>
<li class="ltr" id="">7उससे पहिले कि मैं दु:खित हुआ, मैं भटकता था, परन्तु अब मैं तेरे वचन को मानता हूं।</li>
<li class="ltr" id="">8तू भला है, और भला करता भी है, मुझे अपनी विधियां सिखा।</li>
<li class="ltr" id="">9अभिमानियों ने तो मेरे विरुद्ध झूठ बात गढ़ी है, परन्तु मैं तेरे उपदेशों को पूरे मन से पकड़े रहूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">0उनका मन मोटा हो गया है, परन्तु मैं तेरी व्यवस्था के कारण सुखी हूं।</li>
<li class="ltr" id="">1मुझे जो दु:ख हुआ वह मेरे लिये भला ही हुआ है, जिस से मैं तेरी विधियों को सीख सकूं।</li>
<li class="ltr" id="">2तेरी दी हुई व्यवस्था मेरे लिये हजारों रूपयों और मुहरों से भी उत्तम है॥</li>
<li class="ltr" id="">3तेरे हाथों से मैं बनाया और रचा गया हूं, मुझे समझ दे कि मैं तेरी आज्ञाओं को सीखूं।</li>
<li class="ltr" id="">4तेरे डरवैये मुझे देख कर आनन्दित होंगे, क्योंकि मैं ने तेरे वचन पर आशा लगाई है।</li>
<li class="ltr" id="">5हे यहोवा, मैं जान गया कि तेरे नियम धर्ममय हैं, और तू ने अपने सच्चाई के अनुसार मुझे दु:ख दिया है।</li>
<li class="ltr" id="">6मुझे अपनी करूणा से शान्ति दे, क्योंकि तू ने अपने दास को ऐसा ही वचन दिया है।</li>
<li class="ltr" id="">7तेरी दया मुझ पर हो, तब मैं जीवित रहूंगा, क्योंकि मैं तेरी व्यवस्था से सुखी हूं।</li>
<li class="ltr" id="">8अभिमानियों की आशा टूटे, क्योंकि उन्होंने मुझे झूठ के द्वारा गिरा दिया है, परन्तु मैं तेरे उपदेशों पर ध्यान करूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">9जो तेरा भय मानते हैं, वह मेरी ओर फिरें, तब वे तेरी चितौनियों को समझ लेंगे।</li>
<li class="ltr" id="">0मेरा मन तेरी विधियों के मानने में सिद्ध हो, ऐसा न हो कि मुझे लज्जित होना पड़े॥</li>
<li class="ltr" id="">1मेरा प्राण तेरे उद्धार के लिये बैचेन है, परन्तु मुझे तेरे वचन पर आशा रहती है।</li>
<li class="ltr" id="">2मेरी आंखें तेरे वचन के पूरे होने की बाट जोहते जोहते रह गईं है, और मैं कहता हूं कि तू मुझे कब शान्ति देगा?</li>
<li class="ltr" id="">3क्योंकि मैं धूएं में की कुप्पी के समान हो गया हूं, तौभी तेरी विधियों को नहीं भूला।</li>
<li class="ltr" id="">4तेरे दास के कितने दिन रह गए हैं? तू मेरे पीछे पड़े हुओं को दण्ड कब देगा?</li>
<li class="ltr" id="">5अभिमानी जो तरी व्यवस्था के अनुसार नहीं चलते, उन्होंने मेरे लिये गड़हे खोदे हैं।</li>
<li class="ltr" id="">6तेरी सब आज्ञाएं विश्वासयोग्य हैं, वे लोग झूठ बोलते हुए मेरे पीछे पड़े हैं, तू मेरी सहायता कर.</li>
<li class="ltr" id="">7वे मुझ को पृथ्वी पर से मिटा डालने ही पर थे, परन्तु मैं ने तेरे उपदेशों को नहीं छोड़ा।</li>
<li class="ltr" id="">8अपनी करूणा के अनुसार मुझ को जिला, तब मैं तेरी दी हुई चितौनी को मानूंगा॥</li>
<li class="ltr" id="">9हे यहोवा, तेरा वचन, आकाश में सदा तक स्थिर रहता है।</li>
<li class="ltr" id="">0तेरी सच्चाई पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहती है, तू ने पृथ्वी को स्थिर किया, इसलिये वह बनी है।</li>
<li class="ltr" id="">1वे आज के दिन तक तेरे नियमों के अनुसार ठहरे हैं, क्योंकि सारी सृष्टि तेरे आधीन है।</li>
<li class="ltr" id="">2यदि मैं तेरी व्यवस्था से सुखी न होता, तो मैं दु:ख के समय नाश हो जाता।</li>
<li class="ltr" id="">3मैं तेरे उपदेशों को कभी न भूलूंगा, क्योंकि उन्हीं के द्वारा तू ने मुझे जिलाया है।</li>
<li class="ltr" id="">4मैं तेरा ही हूं, तू मेरा उद्धार कर, क्योंकि मैं तेरे उपदेशों की सुधि रखता हूं।</li>
<li class="ltr" id="">5दुष्ट मेरा नाश करने के लिये मेरी घात में लगे हैं, परन्तु मैं तेरी चितौनियों पर ध्यान करता हूं।</li>
<li class="ltr" id="">6जितनी बातें पूरी जान पड़ती हैं, उन सब को तो मैं ने अधूरी पाया है, परन्तु तेरी आज्ञा का विस्तार बड़ा है॥</li>
<li class="ltr" id="">7अहा. मैं तेरी व्यवस्था में कैसी प्रीति रखता हूं. दिन भर मेरा ध्यान उसी पर लगा रहता है।</li>
<li class="ltr" id="">8तू अपनी आज्ञाओं के द्वारा मुझे अपने शत्रुओं से अधिक बुद्धिमान करता है, क्योंकि वे सदा मेरे मन में रहती हैं।</li>
<li class="ltr" id="">9मैं अपने सब शिक्षकों से भी अधिक समझ रखता हूं, क्योंकि मेरा ध्यान तेरी चितौनियों पर लगा है।</li>
<li class="ltr" id="">00मैं पुरनियों से भी समझदार हूं, क्योंकि मैं तेरे उपदेशों को पकड़े हुए हूं।</li>
<li class="ltr" id="">01मैं ने अपने पांवों को हर एक बुरे रास्ते से रोक रखा है, जिस से मैं तेरे वचन के अनुसार चलूं।</li>
<li class="ltr" id="">02मैं तेरे नियमों से नहीं हटा, क्योंकि तू ही ने मुझे शिक्षा दी है।</li>
<li class="ltr" id="">03तेरे वचन मुझ को कैसे मीठे लगते हैं, वे मेरे मुंह में मधु से भी मीठे हैं.</li>
<li class="ltr" id="">04तेरे उपदेशों के कारण मैं समझदार हो जाता हूं, इसलिये मैं सब मिथ्या मार्गों से बैर रखता हूं॥</li>
<li class="ltr" id="">05तेरा वचन मेरे पांव के लिये दीपक, और मेरे मार्ग के लिये उजियाला है।</li>
<li class="ltr" id="">06मैं ने शपथ खाई, और ठाना भी है कि मैं तेरे धर्ममय नियमों के अनुसार चलूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">07मैं अत्यन्त दु:ख में पड़ा हूं, हे यहोवा, अपने वचन के अनुसार मुझे जिला।</li>
<li class="ltr" id="">08हे यहोवा, मेरे वचनों को स्वेच्छाबलि जान कर ग्रहण कर, और अपने नियमों को मुझे सिखा।</li>
<li class="ltr" id="">09मेरा प्राण निरन्तर मेरी हथेली पर रहता है, तौभी मैं तेरी व्यवस्था को भूल नहीं गया।</li>
<li class="ltr" id="">10दुष्टों ने मेरे लिये फन्दा लगाया है, परन्तु मैं तेरे उपदेशों के मार्ग से नहीं भटका।</li>
<li class="ltr" id="">11मैं ने तेरी चितौनियों को सदा के लिये अपना निज भाग कर लिया है, क्योंकि वे मेरे हृदय के हर्ष का कारण हैं।</li>
<li class="ltr" id="">12मैं ने अपने मन को इस बात पर लगाया है, कि अन्त तक तेरी विधियों पर सदा चलता रहूं।</li>
<li class="ltr" id="">13मैं दुचित्तों से तो बैर रखता हूं, परन्तु तेरी व्यवस्था से प्रीति रखता हूं।</li>
<li class="ltr" id="">14तू मेरी आड़ और ढ़ाल है, मेरी आशा तेरे वचन पर है।</li>
<li class="ltr" id="">15हे कुकर्मियों, मुझ से दूर हो जाओ, कि मैं अपने परमेश्वर की आज्ञाओं को पकड़े रहूं।</li>
<li class="ltr" id="">16हे यहोवा, अपने वचन के अनुसार मुझे सम्भाल, कि मैं जीवित रहूं, और मेरी आशा को न तोड़.</li>
<li class="ltr" id="">17मुझे थाम रख, तब मैं बचा रहूंगा, और निरन्तर तेरी विधियों की ओर चित्त लगाए रहूंगा.</li>
<li class="ltr" id="">18जितने तेरी विधियों के मार्ग से भटक जाते हैं, उन सब को तू तुच्छ जानता है, क्योंकि उनकी चतुराई झूठ है।</li>
<li class="ltr" id="">19तू ने पृथ्वी के सब दुष्टों को धातु के मैल के समान दूर किया है, इस कारण मैं तेरी चितौनियों से प्रीति रखता हूं।</li>
<li class="ltr" id="">20तेरे भय से मेरा शरीर कांप उठता है, और मैं तेरे नियमों से डरता हूं॥</li>
<li class="ltr" id="">21मैं ने तो न्याय और धर्म का काम किया है, तू मुझे अन्धेर करने वालों के हाथ में न छोड़।</li>
<li class="ltr" id="">22अपने दास की भलाई के लिये जामिन हो, ताकि अभिमानी मुझ पर अन्धेर न करने पांए।</li>
<li class="ltr" id="">23मेरी आंखें तुझ से उद्धार पाने, और तेरे धर्ममय वचन के पूरे होने की बाट जोहते जोहते रह गई हैं।</li>
<li class="ltr" id="">24अपने दास के संग अपनी करूणा के अनुसार बर्ताव कर, और अपनी विधियां मुझे सिखा।</li>
<li class="ltr" id="">25मैं तेरा दास हूं, तू मुझे समझ दे कि मैं तेरी चितौनियों को समझूं।</li>
<li class="ltr" id="">26वह समय आया है, कि यहोवा काम करे, क्योंकि लोगों ने तेरी व्यवस्था को तोड़ दिया है।</li>
<li class="ltr" id="">27इस कारण मैं तेरी आज्ञाओं को सोने से वरन कुन्दन से भी अधिक प्रिय मानता हूं।</li>
<li class="ltr" id="">28इसी कारण मैं तेरे सब उपदेशों को सब विषयों में ठीक जानता हूं, और सब मिथ्या मार्गों से बैर रखता हूं॥</li>
<li class="ltr" id="">29तेरी चितौनियां अनूप हैं, इस कारण मैं उन्हें अपने जी से पकड़े हुए हूं।</li>
<li class="ltr" id="">30तेरी बातों के खुलने से प्रकाश होता है, उससे भोले लोग समझ प्राप्त करते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">31मैं मुंह खोल कर हांफने लगा, क्योंकि मैं तेरी आज्ञाओं का प्यासा था।</li>
<li class="ltr" id="">32जैसी तेरी रीति अपने नाम की प्रीति रखने वालों से है, वैसे ही मेरी ओर भी फिर कर मुझ पर अनुग्रह कर।</li>
<li class="ltr" id="">33मेरे पैरों को अपने वचन के मार्ग पर स्थिर कर, और किसी अनर्थ बात को मुझ पर प्रभुता न करने दे।</li>
<li class="ltr" id="">34मुझे मनुष्यों के अन्धेर से छुड़ा ले, तब मैं तेरे उपदेशों को मानूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">35अपने दास पर अपने मुख का प्रकाश चमका दे, और अपनी विधियां मुझे सिखा।</li>
<li class="ltr" id="">36मेरी आंखों से जल की धारा बहती रहती है, क्योंकि लोग तेरी व्यवस्था को नहीं मानते॥</li>
<li class="ltr" id="">37हे यहोवा तू धर्मी है, और तेरे नियम सीधे हैं।</li>
<li class="ltr" id="">38तू ने अपनी चितौनियों को धर्म और पूरी सत्यता से कहा है।</li>
<li class="ltr" id="">39मैं तेरी धुन में भस्म हो रहा हूं, क्योंकि मेरे सताने वाले तेरे वचनों को भूल गए हैं।</li>
<li class="ltr" id="">40तेरा वचन पूरी रीति से ताया हुआ है, इसलिये तेरा दास उस में प्रीति रखता है।</li>
<li class="ltr" id="">41मैं छोटा और तुच्छ हूं, तौभी मैं तेरे उपदेशों को नही भूलता।</li>
<li class="ltr" id="">42तेरा धर्म सदा का धर्म है, और तेरी व्यवस्था सत्य है।</li>
<li class="ltr" id="">43मैं संकट और सकेती में फंसा हूं, परन्तु मैं तेरी आज्ञाओं से सुखी हूं।</li>
<li class="ltr" id="">44तेरी चितौनियां सदा धर्ममय हैं, तू मुझ को समझ दे कि मैं जीवित रहूं॥</li>
<li class="ltr" id="">45मैं ने सारे मन से प्रार्थना की है, हे यहोवा मेरी सुन लेना. मैं तेरी विधियों को पकड़े रहूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">46मैं ने तुझ से प्रार्थना की है, तू मेरा उद्धार कर, और मैं तेरी चितौनियों को माना करूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">47मैं ने पौ फटने से पहिले दोहाई दी, मेरी आशा तेरे वचनों पर थी।</li>
<li class="ltr" id="">48मेरी आंखें रात के एक एक पहर से पहिले खुल गईं, कि मैं तेरे वचन पर ध्यान करूं।</li>
<li class="ltr" id="">49अपनी करूणा के अनुसार मेरी सुन ले, हे यहोवा, अपनी रीति के अनुसार मुझे जीवित कर।</li>
<li class="ltr" id="">50जो दुष्टता में धुन लगाते हैं, वे निकट आ गए हैं, वे तेरी व्यवस्था से दूर हैं।</li>
<li class="ltr" id="">51हे यहोवा, तू निकट है, और तेरी सब आज्ञाएं सत्य हैं।</li>
<li class="ltr" id="">52बहुत काल से मैं तेरी चितौनियों को जानता हूं, कि तू ने उनकी नेव सदा के लिये डाली है॥</li>
<li class="ltr" id="">53मेरे दु:ख को देख कर मुझे छुड़ा ले, क्योंकि मैं तेरी व्यवस्था को भूल नहीं गया।</li>
<li class="ltr" id="">54मेरा मुकद्दमा लड़, और मुझे छुड़ा ले, अपने वचन के अनुसार मुझ को जिला।</li>
<li class="ltr" id="">55दुष्टों को उद्धार मिलना कठिन है, क्योंकि वे तेरी विधियों की सुधि नहीं रखते।</li>
<li class="ltr" id="">56हे यहोवा, तेरी दया तो बड़ी है, इसलिये अपने नियमों के अनुसार मुझे जिला।</li>
<li class="ltr" id="">57मेरा पीछा करने वाले और मेरे सताने वाले बहुत हैं, परन्तु मैं तेरी चितौनियों से नहीं हटता।</li>
<li class="ltr" id="">58मैं विश्वासघातियों को देख कर उदास हुआ, क्योंकि वे तेरे वचन को नहीं मानते।</li>
<li class="ltr" id="">59देख, मैं तेरे नियमों से कैसी प्रीति रखता हूं. हे यहोवा, अपनी करूणा के अनुसार मुझ को जिला।</li>
<li class="ltr" id="">60तेरा सारा वचन सत्य ही है, और तेरा एक एक धर्ममय नियम सदा काल तक अटल है॥</li>
<li class="ltr" id="">61हाकिम व्यर्थ मेरे पीछे पड़े हैं, परन्तु मेरा हृदय तेरे वचनों का भय मानता है।</li>
<li class="ltr" id="">62जैसे कोई बड़ी लूट पा कर हर्षित होता है, वैसे ही मैं तेरे वचन के कारण हर्षित हूं।</li>
<li class="ltr" id="">63झूठ से तो मैं बैर और घृणा रखता हूं, परन्तु तेरी व्यवस्था से प्रीति रखता हूं।</li>
<li class="ltr" id="">64तेरे धर्ममय नियमों के कारण मैं प्रतिदिन सात बेर तेरी स्तुति करता हूं।</li>
<li class="ltr" id="">65तेरी व्यवस्था से प्रीति रखने वालों को बड़ी शान्ति होती है, और उन को कुछ ठोकर नहीं लगती।</li>
<li class="ltr" id="">66हे यहोवा, मैं तुझ से उद्धार पाने की आशा रखता हूं, और तेरी आज्ञाओं पर चलता आया हूं।</li>
<li class="ltr" id="">67मैं तेरी चितौनियों को जी से मानता हूं, और उन से बहुत प्रीति रखता आया हूं।</li>
<li class="ltr" id="">68मैं तेरे उपदेशों और चितौनियों को मानता आया हूं, क्योंकि मेरी सारी चालचलन तेरे सम्मुख प्रगट है॥</li>
<li class="ltr" id="">69हे यहोवा, मेरी दोहाई तुझ तक पहुंचे, तू अपने वचन के अनुसार मुझे समझ दे.</li>
<li class="ltr" id="">70मेरा गिड़गिड़ाना तुझ तक पहुंचे, तू अपने वचन के अनुसार मुझे छुड़ा ले।</li>
<li class="ltr" id="">71मेरे मुंह से स्तुति निकला करे, क्योंकि तू मुझे अपनी विधियां सिखाता है।</li>
<li class="ltr" id="">72मैं तेरे वचन का गीत गाऊंगा, क्योंकि तेरी सब आज्ञाएं धर्ममय हैं।</li>
<li class="ltr" id="">73तेरा हाथ मेरी सहायता करने को तैयार रहता है, क्योंकि मैं ने तेरे उपदेशों को अपनाया है।</li>
<li class="ltr" id="">74हे यहोवा, मैं तुझ से उद्धार पाने की अभिलाषा करता हूं, मैं तेरी व्यवस्था से सुखी हूं।</li>
<li class="ltr" id="">75मुझे जिला, और मैं तेरी स्तुति करूंगा, तेरे नियमों से मेरी सहायता हो।</li>
<li class="ltr" id="">76मैं खोई हुई भेड़ की नाईं भटका हूं, तू अपने दास को ढूंढ़ ले, क्योंकि मैं तेरी आज्ञाओं को भूल नहीं गया॥</li>

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भजन संहिता 120
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<li class="ltr" id="">संकट के समय मैं ने यहोवा को पुकारा, और उसने मेरी सुन ली।</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा, झूठ बोलने वाले मुंह से और छली जीभ से मेरी रक्षा कर॥</li>
<li class="ltr" id="">हे छली जीभ, तुझ को क्या मिले? और तेरे साथ और क्या अधिक किया जाए?</li>
<li class="ltr" id="">वीर के नोकीले तीर और झाऊ के अंगारे.</li>
<li class="ltr" id="">हाय, हाय, क्योंकि मुझे मेशेक में परदेशी होकर रहना पड़ा और केदार के तम्बुओं में बसना पड़ा है.</li>
<li class="ltr" id="">बहुत काल से मुझ को मेल के बैरियों के साथ बसना पड़ा है।</li>
<li class="ltr" id="">मैं तो मेल चाहता हूं, परन्तु मेरे बोलते ही, वे लड़ना चाहते हैं.</li>

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भजन संहिता 121
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<li class="ltr" id="">मैं अपनी आंखें पर्वतों की ओर लगाऊंगा। मुझे सहायता कहां से मिलेगी?</li>
<li class="ltr" id="">मुझे सहायता यहोवा की ओर से मिलती है, जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है॥</li>
<li class="ltr" id="">वह तेरे पांव को टलने न देगा, तेरा रक्षक कभी न ऊंघेगा।</li>
<li class="ltr" id="">सुन, इस्राएल का रक्षक, न ऊंघेगा और न सोएगा॥</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा तेरा रक्षक है, यहोवा तेरी दाहिनी ओर तेरी आड़ है।</li>
<li class="ltr" id="">न तो दिन को धूप से, और न रात को चांदनी से तेरी कुछ हानि होगी॥</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा सारी विपत्ति से तेरी रक्षा करेगा, वह तेरे प्राण की रक्षा करेगा।</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा तेरे आने जाने में तेरी रक्षा अब से ले कर सदा तक करता रहेगा॥</li>

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भजन संहिता 122
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<li class="ltr" id="">जब लोगों ने मुझ से कहा, कि हम यहोवा के भवन को चलें, तब मैं आनन्दित हुआ।</li>
<li class="ltr" id="">हे यरूशलेम, तेरे फाटकों के भीतर, हम खड़े हो गए हैं.</li>
<li class="ltr" id="">हे यरूशलेम, तू ऐसे नगर के समान बना है, जिसके घर एक दूसरे से मिले हुए हैं।</li>
<li class="ltr" id="">वहां याह के गोत्र गोत्र के लोग यहोवा के नाम का धन्यवाद करने को जाते हैं, यह इस्राएल के लिये साक्षी है।</li>
<li class="ltr" id="">वहां तो न्याय के सिंहासन, दाऊद के घराने के लिये धरे हुए हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">यरूशलेम की शान्ति का वरदान मांगो, तेरे प्रेमी कुशल से रहें.</li>
<li class="ltr" id="">तेरी शहरपनाह के भीतर शान्ति, और तेरे महलों में कुशल होवे.</li>
<li class="ltr" id="">अपने भाइयों और संगियों के निमित्त, मैं कहूंगा कि तुझ में शान्ति होवे.</li>
<li class="ltr" id="">अपने परमेश्वर यहोवा के भवन के निमित्त, मैं तेरी भलाई का यत्न करूंगा॥</li>

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भजन संहिता 123
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<li class="ltr" id="">हे स्वर्ग में विराजमान मैं अपनी आंखें तेरी ओर लगाता हूं.</li>
<li class="ltr" id="">देख, जैसे दासों की आंखें अपने स्वामियों के हाथ की ओर, और जैसे दासियों की आंखें अपनी स्वामिनी के हाथ की ओर लगी रहती है, वैसे ही हमारी आंखें हमारे परमेश्वर यहोवा की ओर उस समय तक लगी रहेंगी, जब तक वह हम पर अनुग्रह न करे॥</li>
<li class="ltr" id="">हम पर अनुग्रह कर, हे यहोवा, हम पर अनुग्रह कर, क्योंकि हम अपमान से बहुत ही भर गए हैं।</li>
<li class="ltr" id="">हमारा जीव सुखी लोगों के ठट्ठों से, और अहंकारियों के अपमान से बहुत ही भर गया है॥</li>

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भजन संहिता 124
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<li class="ltr" id="">इस्राएल यह कहे, कि यदि हमारी ओर यहोवा न होता,</li>
<li class="ltr" id="">यदि यहोवा उस समय हमारी ओर न होता जब मनुष्यों ने हम पर चढ़ाई की,</li>
<li class="ltr" id="">तो वे हम को उसी समय जीवित निगल जाते, जब उनका क्रोध हम पर भड़का था,</li>
<li class="ltr" id="">हम उसी समय जल में डूब जाते और धारा में बह जाते,</li>
<li class="ltr" id="">उमड़ते जल में हम उसी समय ही बह जाते॥</li>
<li class="ltr" id="">धन्य है यहोवा, जिसने हम को उनके दातों तले जाने न दिया.</li>
<li class="ltr" id="">हमार जीव पक्षी की नाईं चिड़ीमार के जाल से छूट गया, जाल फट गया, हम बच निकले.</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है, हमारी सहायता उसी के नाम से होती है।</li>

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भजन संहिता 125
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<li class="ltr" id="">जो यहोवा पर भरोसा रखते हैं, वे सिय्योन पर्वत के समान हैं, जो टलता नहीं, वरन सदा बना रहता है।</li>
<li class="ltr" id="">जिस प्रकार यरूशलेम के चारों ओर पहाड़ हैं, उसी प्रकार यहोवा अपनी प्रजा के चारों ओर अब से लेकर सर्वदा तक बना रहेगा।</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि दुष्टों का राजदण्ड धर्मियों के भाग पर बना न रहेगा, ऐसा न हो कि धर्मी अपने हाथ कुटिल काम की ओर बढ़ाएं॥</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा, भलों का, और सीधे मन वालों का भला कर.</li>
<li class="ltr" id="">परन्तु जो मुड़ कर टेढ़े मार्गों में चलते हैं, उन को यहोवा अनर्थकारियों के संग निकाल देगा. इस्राएल को शान्ति मिले.</li>

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भजन संहिता 126
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<li class="ltr" id="">जब यहोवा सिय्योन से लौटने वालों को लौटा ले आया, तब हम स्वप्न देखने वाले से हो गए।</li>
<li class="ltr" id="">तब हम आनन्द से हंसने और जयजयकार करने लगे, तब जाति जाति के बीच में कहा जाता था, कि यहोवा ने, इनके साथ बड़े बड़े काम किए हैं।</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा ने हमारे साथ बड़े बड़े काम किए हैं, और इस से हम आनन्दित हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा, दक्खिन देश के नालों की नाईं, हमारे बन्धुओं को लौटा ले आ.</li>
<li class="ltr" id="">जो आंसू बहाते हुए बोते हैं, वे जयजयकार करते हुए लवने पाएंगे।</li>
<li class="ltr" id="">चाहे बोने वाला बीज ले कर रोता हुआ चला जाए, परन्तु वह फिर पूलियां लिए जयजयकार करता हुआ निश्चय लौट आएगा॥</li>

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भजन संहिता 127
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<li class="ltr" id="">यदि घर को यहोवा न बनाए, तो उसके बनाने वालों को परिश्रम व्यर्थ होगा। यदि नगर की रक्षा यहोवा न करे, तो रखवाले का जागना व्यर्थ ही होगा।</li>
<li class="ltr" id="">तुम जो सवेरे उठते और देर करके विश्राम करते और दु:ख भरी रोटी खाते हो, यह सब तुम्हारे लिये व्यर्थ ही है, क्योंकि वह अपने प्रियों को यों ही नींद दान करता है॥</li>
<li class="ltr" id="">देखे, लड़के यहोवा के दिए हुए भाग हैं, गर्भ का फल उसकी ओर से प्रतिफल है।</li>
<li class="ltr" id="">जैसे वीर के हाथ में तीर, वैसे ही जवानी के लड़के होते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">क्या ही धन्य है वह पुरूष जिसने अपने तर्कश को उन से भर लिया हो. वह फाटक के पास शत्रुओं से बातें करते संकोच न करेगा॥</li>

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भजन संहिता 128
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<li class="ltr" id="">क्या ही धन्य है हर एक जो यहोवा का भय मानता है, और उसके मार्गों पर चलता है.</li>
<li class="ltr" id="">तू अपनी कमाई को निश्चय खाने पाएगा, तू धन्य होगा, और तेरा भला ही होगा॥</li>
<li class="ltr" id="">तेरे घर के भीतर तेरी स्त्री फलवन्त दाखलता सी होगी, तेरी मेज के चारों ओर तेरे बालक जलपाई के पौधे से होंगे।</li>
<li class="ltr" id="">सुन, जो पुरूष यहोवा का भय मानता हो, वह ऐसी ही आशीष पाएगा॥</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा तुझे सिय्योन से आशीष देवे, और तू जीवन भर यरूशलेम का कुशल देखता रहे.</li>
<li class="ltr" id="">वरन तू अपने नाती- पोतों को भी देखने पाए. इस्राएल को शान्ति मिले.</li>

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भजन संहिता 129
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<li class="ltr" id="">इस्राएल अब यह कहे, कि मेरे बचपन से लोग मुझे बार बार क्लेश देते आए हैं,</li>
<li class="ltr" id="">मेरे बचपन से वे मुझ को बार बार क्लेश देते तो आए हैं, परन्तु मुझ पर प्रबल नहीं हुए।</li>
<li class="ltr" id="">हलवाहों ने मेरी पीठ के ऊपर हल चलाया, और लम्बी लम्बी रेखाएं कीं।</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा धर्मी है, उसने दुष्टों के फन्दों को काट डाला है।</li>
<li class="ltr" id="">जितने सिय्योन से बैर रखते हैं, उन सभों की आशा टूटे, ओर उन को पीछे हटना पड़े.</li>
<li class="ltr" id="">वे छत पर की घास के समान हों, जो बढ़ने से पहिले सूख जाती है,</li>
<li class="ltr" id="">जिस से कोई लवैया अपनी मुट्ठी नहीं भरता, न पूलियों का कोई बान्धने वाला अपनी अंकवार भर पाता है,</li>
<li class="ltr" id="">और न आने जाने वाले यह कहते हैं, कि यहोवा की आशीष तुम पर होवे. हम तुम को यहोवा के नाम से आशीर्वाद देते हैं.</li>

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भजन संहिता 130
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<li class="ltr" id="">हे यहोवा, मैं ने गहिरे स्थानों में से तुझ को पुकारा है.</li>
<li class="ltr" id="">हे प्रभु, मेरी सुन. तेरे कान मेरे गिड़गिड़ाने की ओर ध्यान से लगे रहें.</li>
<li class="ltr" id="">हे याह, यदि तू अधर्म के कामों का लेखा ले, तो हे प्रभु कौन खड़ा रह सकेगा?</li>
<li class="ltr" id="">परन्तु तू क्षमा करने वाला है? जिस से तेरा भय माना जाए।</li>
<li class="ltr" id="">मैं यहोवा की बाट जोहता हूं, मैं जी से उसकी बाट जोहता हूं, और मेरी आशा उसके वचन पर है,</li>
<li class="ltr" id="">पहरूए जितना भोर को चाहते हैं, हां, पहरूए जितना भोर को चाहते हैं, उससे भी अधिक मैं यहोवा को अपने प्राणों से चाहता हूं॥</li>
<li class="ltr" id="">इस्राएल यहोवा पर आशा लगाए रहे. क्योंकि यहोवा करूणा करने वाला और पूरा छुटकारा देने वाला है।</li>
<li class="ltr" id="">इस्राएल को उसके सारे अधर्म के कामों से वही छुटकारा देगा॥</li>

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भजन संहिता 131
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<li class="ltr" id="">हे यहोवा, न तो मेरा मन गर्व से और न मेरी दृष्टि घमण्ड से भरी है, और जो बातें बड़ी और मेरे लिये अधिक कठिन हैं, उन से मैं काम नहीं रखता।</li>
<li class="ltr" id="">निश्चय मैं ने अपने मन को शान्त और चुप कर दिया है, जैसे दूध छुड़ाया हुआ लड़का अपनी मां की गोद में रहता है, वैसे ही दूध छुड़ाए हुए लड़के के समान मेरा मन भी रहता है॥</li>
<li class="ltr" id="">हे इस्राएल, अब से लेकर सदा सर्वदा यहोवा ही पर आशा लगाए रह.</li>

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भजन संहिता 132
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<li class="ltr" id="">हे यहोवा, दाऊद के लिये उसकी सारी दुर्दशा को स्मरण कर,</li>
<li class="ltr" id="">उसने यहोवा से शपथ खाई, और याकूब के सर्वशक्तिमान की मन्नत मानी है,</li>
<li class="ltr" id="">कि निश्चय मैं उस समय तक अपने घर में प्रवेश न करूंगा, और ने अपने पलंग पर चढूंगा,</li>
<li class="ltr" id="">न अपनी आंखों में नींद, और न अपनी पलकों में झपकी आने दूंगा,</li>
<li class="ltr" id="">जब तक मैं यहोवा के लिये एक स्थान, अर्थात याकूब के सर्वशक्तिमान के लिये निवास स्थान न पाऊं॥</li>
<li class="ltr" id="">देखो, हम ने एप्राता में इसकी चर्चा सुनी है, हम ने इस को वन के खेतों में पाया है।</li>
<li class="ltr" id="">आओ, हम उसके निवास में प्रवेश करें, हम उसके चरणों की चौकी के आगे दण्डवत करें.</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा, उठकर अपने विश्रामस्थान में अपनी सामर्थ्य के सन्दूक समेत आ।</li>
<li class="ltr" id="">तेरे याजक धर्म के वस्त्र पहिने रहें, और तेरे भक्त लोग जयजयकार करें।</li>
<li class="ltr" id="">0अपने दास दाऊद के लिये अपने अभिषिक्त की प्रार्थना की अनसुनी न कर॥</li>
<li class="ltr" id="">1यहोवा ने दाऊद से सच्ची शपथ खाई है और वह उससे न मुकरेगा: कि मैं तेरी गद्दी पर तेरे एक निज पुत्र को बैठाऊंगा।</li>
<li class="ltr" id="">2यदि तेरे वंश के लोग मेरी वाचा का पालन करें और जो चितौनी मैं उन्हें सिखाऊंगा, उस पर चलें, तो उनके वंश के लोग भी तेरी गद्दी पर युग युग बैठते चले जाएंगे।</li>
<li class="ltr" id="">3क्योंकि यहोवा ने सिय्योन को अपनाया है, और उसे अपने निवास के लिये चाहा है॥</li>
<li class="ltr" id="">4यह तो युग युग के लिये मेरा विश्रामस्थान हैं, यहीं मैं रहूंगा, क्योंकि मैं ने इसको चाहा है।</li>
<li class="ltr" id="">5मैं इस में की भोजन वस्तुओं पर अति आशीष दूंगा, और इसके दरिद्रों को रोटी से तृप्त करूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">6इसके याजकों को मैं उद्धार का वस्त्र पहिनाऊंगा, और इसके भक्त लोग ऊंचे स्वर से जयजयकार करेंगे।</li>
<li class="ltr" id="">7वहां मैं दाऊद के एक सींग उगाऊंगा, मैं ने अपने अभिषिक्त के लिये एक दीपक तैयार कर रखा है।</li>
<li class="ltr" id="">8मैं उसके शत्रुओं को तो लज्जा का वस्त्र पहिनाऊंगा, परन्तु उस के सिर पर उसका मुकुट शोभायमान रहेगा॥</li>

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भजन संहिता 133
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<li class="ltr" id="">देखो, यह क्या ही भली और मनोहर बात है कि भाई लोग आपस में मिले रहें.</li>
<li class="ltr" id="">यह तो उस उत्तम तेल के समान है, जो हारून के सिर पर डाला गया था, और उसकी दाढ़ी पर बह कर, उसके वस्त्र की छोर तक पहुंच गया।</li>
<li class="ltr" id="">वह हेर्मोन की उस ओस के समान है, जो सिय्योन के पहाड़ों पर गिरती है. यहोवा ने तो वहीं सदा के जीवन की आशीष ठहराई है॥</li>

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भजन संहिता 134
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<li class="ltr" id="">हे यहोवा के सब सेवकों, सुनो, तुम जो रात रात को यहोवा के भवन में खड़े रहते हो, यहोवा को धन्य कहो।</li>
<li class="ltr" id="">अपने हाथ पवित्र स्थान में उठा कर, यहोवा को धन्य कहो।</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है, वह सिय्योन में से तुझे आशीष देवे॥</li>

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भजन संहिता 135
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<li class="ltr" id="">याह की स्तुति करो, यहोवा के नाम की स्तुति करो, हे यहोवा के सेवकों तुम स्तुति करो,</li>
<li class="ltr" id="">तुम जो यहोवा के भवन में, अर्थात हमारे परमेश्वर के भवन के आंगनों में खड़े रहते हो.</li>
<li class="ltr" id="">याह की स्तुति करो, क्योंकि यहोवा भला है, उसके नाम का भजन गाओ, क्योंकि यह मन भाऊ है.</li>
<li class="ltr" id="">याह ने तो याकूब को अपने लिये चुना है, अर्थात इस्राएल को अपने निज धन होने के लिये चुन लिया है।</li>
<li class="ltr" id="">मैं तो जानता हूं कि हमारा प्रभु यहोवा सब देवताओं से महान है।</li>
<li class="ltr" id="">जो कुछ यहोवा ने चाहा उसे उसने आकाश और पृथ्वी और समुद्र और सब गहिरे स्थानों में किया है।</li>
<li class="ltr" id="">वह पृथ्वी की छोर से कुहरे उठाता है, और वर्षा के लिये बिजली बनाता है, और पवन को अपने भण्डार में से निकालता है।</li>
<li class="ltr" id="">उसने मिस्त्र में क्या मनुष्य क्या पशु, सब के पहिलौठों को मार डाला.</li>
<li class="ltr" id="">हे मिस्त्र, उसने तेरे बीच में फिरौन और उसके सब कर्मचारियों के बीच चिन्ह और चमत्कार किए।</li>
<li class="ltr" id="">0उसने बहुत सी जातियां नाश की, और सामर्थी राजाओं को,</li>
<li class="ltr" id="">1अर्थात एमोरियों के राजा सीहोन को, और बाशान के राजा ओग को, और कनान के सब राजाओं को घात किया,</li>
<li class="ltr" id="">2और उनके देश को बांट कर, अपनी प्रजा इस्राएल के भाग होने के लिये दे दिया॥</li>
<li class="ltr" id="">3हे यहोवा, तेरा नाम सदा स्थिर है, हे यहोवा जिस नाम से तेरा स्मरण होता है, वह पीढ़ी- पीढ़ी बना रहेगा।</li>
<li class="ltr" id="">4यहोवा तो अपनी प्रजा का न्याय चुकाएगा, और अपने दासों की दुर्दशा देख कर तरस खाएगा।</li>
<li class="ltr" id="">5अन्यजातियों की मूरतें सोना- चान्दी ही हैं, वे मनुष्यों की बनाईं हुई हैं।</li>
<li class="ltr" id="">6उनके मुंह तो रहता है, परन्तु वे बोल नहीं सकतीं, उनके आंखें तो रहती हैं, परन्तु वे देख नहीं सकतीं,</li>
<li class="ltr" id="">7उनके कान तो रहते हैं, परन्तु वे सुन नहीं सकतीं, न उनके कुछ भी सांस चलती है।</li>
<li class="ltr" id="">8जैसी वे हैं वैसे ही उनके बनाने वाले भी हैं, और उन पर सब भरोसा रखने वाले भी वैसे ही हो जाएंगे.</li>
<li class="ltr" id="">9हे इस्राएल के घराने यहोवा को धन्य कह. हे हारून के घराने यहोवा को धन्य कह.</li>
<li class="ltr" id="">0हे लेवी के घराने यहोवा को धन्य कह. हे यहोवा के डरवैयो यहोवा को धन्य कहो.</li>
<li class="ltr" id="">1यहोवा जो यरूशलेम में वास करता है, उसे सिय्योन में धन्य कहा जावे. याह की स्तुति करो.</li>

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भजन संहिता 136
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<li class="ltr" id="">यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है, और उसकी करूणा सदा की है।</li>
<li class="ltr" id="">जो ईश्वरों का परमेश्वर है, उसका धन्यवाद करो, उसकी करूणा सदा की है।</li>
<li class="ltr" id="">जो प्रभुओं का प्रभु है, उसका धन्यवाद करो, उसकी करूणा सदा की है॥</li>
<li class="ltr" id="">उसको छोड़कर कोई बड़े बड़े अशचर्यकर्म नहीं करता, उसकी करूणा सदा की है।</li>
<li class="ltr" id="">उसने अपनी बुद्धि से आकाश बनाया, उसकी करूणा सदा की है।</li>
<li class="ltr" id="">उसने पृथ्वी को जल के ऊपर फैलाया है, उसकी करूणा सदा की है।</li>
<li class="ltr" id="">उसने बड़ी बड़ी ज्योतियों बनाईं, उसकी करूणा सदा की है।</li>
<li class="ltr" id="">दिन पर प्रभुता करने के लिये सूर्य को बनाया, उसकी करूणा सदा की है।</li>
<li class="ltr" id="">और रात पर प्रभुता करने के लिये चन्द्रमा और तारागण को बनाया, उसकी करूणा सदा की है।</li>
<li class="ltr" id="">0उसने मिस्त्रियों के पहिलौठों को मारा, उसकी करूणा सदा की है॥</li>
<li class="ltr" id="">1और उनके बीच से इस्राएलियों को निकाला, उसकी करूणा सदा की है।</li>
<li class="ltr" id="">2बलवन्त हाथ और बढ़ाई हुई भुजा से निकाल लाया, उसकी करूणा सदा की है।</li>
<li class="ltr" id="">3उसने लाल समुद्र को खण्ड खण्ड कर दिया, उसकी करूणा सदा की है।</li>
<li class="ltr" id="">4और इस्राएल को उसके बीच से पार कर दिया, उसकी करूणा सदा की है।</li>
<li class="ltr" id="">5और फिरौन को सेना समेत लाल समुद्र में डाल दिया, उसकी करूणा सदा की है।</li>
<li class="ltr" id="">6वह अपनी प्रजा को जंगल में ले चला, उसकी करूणा सदा की है।</li>
<li class="ltr" id="">7उसने बड़े बड़े राजा मारे, उसकी करूणा सदा की है।</li>
<li class="ltr" id="">8उसने प्रतापी राजाओं को भी मारा, उसकी करूणा सदा की है।</li>
<li class="ltr" id="">9एमोरियों के राजा सीहोन को, उसकी करूणा सदा की है।</li>
<li class="ltr" id="">0और बाशान के राजा ओग को घात किया, उसकी करूणा सदा की है।</li>
<li class="ltr" id="">1और उनके देश को भाग होने के लिये, उसकी करूणा सदा की है।</li>
<li class="ltr" id="">2अपने दास इस्राएलियों के भाग होने के लिये दे दिया, उसकी करूणा सदा की है।</li>
<li class="ltr" id="">3उसने हमारी दुर्दशा में हमारी सुधि ली, उसकी करूणा सदा की है।</li>
<li class="ltr" id="">4और हम को द्रोहियों से छुड़ाया है, उसकी करूणा सदा की है।</li>
<li class="ltr" id="">5वह सब प्राणियों को आहार देता है, उसकी करूणा सदा की है।</li>
<li class="ltr" id="">6स्वर्ग के परमेश्वर का धन्यवाद करो, उसकी करूणा सदा की है।</li>

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भजन संहिता 137
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<li class="ltr" id="">बाबुल की नहरों के किनारे हम लोग बैठ गए, और सिय्योन को स्मरण करके रो पड़े.</li>
<li class="ltr" id="">उसके बीच के मजनू वर्क्षों पर हम ने अपनी वीणाओं को टांग दिया,</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि जो हम को बन्धुए करके ले गए थे, उन्होंने वहां हम से गीत गवाना चाहा, और हमारे रूलाने वालों ने हम से आनन्द चाह कर कहा, सिय्योन के गीतों में से हमारे लिये कोई गीत गाओ.</li>
<li class="ltr" id="">हम यहोवा के गीत को, पराए देश में क्योंकर गाएं?</li>
<li class="ltr" id="">हे यरूशलेम, यदि मैं तुझे भूल जाऊं, तो मेरा दहिना हाथ झूठा हो जाए.</li>
<li class="ltr" id="">यदि मैं तुझे स्मरण न रखूं, यदि मैं यरूशलेम को अपने सब आनन्द से श्रेष्ठ न जानूं, तो मेरी जीभ तालू से चिपट जाए.</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा, यरूशलेम के दिन को एदोमियों के विरुद्ध स्मरण कर, कि वे क्योंकर कहते थे, ढाओ. उसको नेव से ढा दो।</li>
<li class="ltr" id="">हे बाबुल तू जो उजड़ने वाली है, क्या ही धन्य वह होगा, जो तुझ से ऐसा बर्ताव करेगा जैसा तू ने हम से किया है.</li>
<li class="ltr" id="">क्या ही धन्य वह होगा, जो तेरे बच्चों को पकड़ कर, चट्टान पर पटक देगा.</li>

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भजन संहिता 138
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<li class="ltr" id="">मैं पूरे मन से तेरा धन्यवाद करूँगा, देवताओं के सामने भी मैं तेरा भजन गाऊँगा।</li>
<li class="ltr" id="">मैं तेरे पवित्र मन्दिर की ओर दण्डवत करूँगा, और तेरी करुणा और सच्चाई के कारण तेरे नाम का धन्यवाद करूँगा, क्योंकि तू ने अपने वचन को अपने बड़े नाम से अधिक महत्त्व दिया है।</li>
<li class="ltr" id=""> जिस दिन मैंने पुकारा, उसी दिन तू ने मेरी सुन ली, और मुझ में बल दे कर मुझे हियाव बन्धाया।</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा, पृथ्वी के सब राजा तेरा धन्यवाद करेंगे, क्योंकि उन्होंने तेरे वचन सुने हैं,</li>
<li class="ltr" id="">और वे यहोवा की गति के विषय में गाएंगे, क्योंकि यहोवा की महिमा बड़ी है।</li>
<li class="ltr" id="">यद्यपि यहोवा महान है, तौभी वह नम्र मनुष्य की ओर दृष्टि करता है, परन्तु अहंकारी को दूर ही से पहिचानता है।</li>
<li class="ltr" id="">चाहे मैं संकट के बीच में रहूं तौभी तू मुझे जिलाएगा, तू मेरे क्रोधित शत्रुओं के विरुद्ध हाथ बढ़ाएगा, और अपने दाहिने हाथ से मेरा उद्धार करेगा।</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा मेरे लिये सब कुछ पूरा करेगा, हे यहोवा तेरी करुणा सदा की है। तू अपने हाथों के कार्यों को त्याग न दे।</li>

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भजन संहिता 139
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<li class="ltr" id="">हे यहोवा, तू ने मुझे जांच कर जान लिया है॥</li>
<li class="ltr" id="">तू मेरा उठना बैठना जानता है, और मेरे विचारों को दूर ही से समझ लेता है।</li>
<li class="ltr" id="">मेरे चलने और लेटने की तू भली भांति छानबीन करता है, और मेरी पूरी चालचलन का भेद जानता है।</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा, मेरे मुंह में ऐसी कोई बात नहीं जिसे तू पूरी रीति से न जानता हो।</li>
<li class="ltr" id="">तू ने मुझे आगे पीछे घेर रखा है, और अपना हाथ मुझ पर रखे रहता है।</li>
<li class="ltr" id="">यह ज्ञान मेरे लिये बहुत कठिन है, यह गम्भीर और मेरी समझ से बाहर है॥</li>
<li class="ltr" id="">मैं तेरे आत्मा से भाग कर किधर जाऊं? वा तेरे साम्हने से किधर भागूं?</li>
<li class="ltr" id="">यदि मैं आकाश पर चढूं, तो तू वहां है. यदि मैं अपना बिछौना अधोलोक में बिछाऊं तो वहां भी तू है.</li>
<li class="ltr" id="">यदि मैं भोर की किरणों पर चढ़ कर समुद्र के पार जा बसूं,</li>
<li class="ltr" id="">0तो वहां भी तू अपने हाथ से मेरी अगुवाई करेगा, और अपने दाहिने हाथ से मुझे पकड़े रहेगा।</li>
<li class="ltr" id="">1यदि मैं कहूं कि अन्धकार में तो मैं छिप जाऊंगा, और मेरे चारों ओर का उजियाला रात का अन्धेरा हो जाएगा,</li>
<li class="ltr" id="">2तौभी अन्धकार तुझ से न छिपाएगा, रात तो दिन के तुल्य प्रकाश देगी, क्योंकि तेरे लिये अन्धियारा और उजियाला दोनों एक समान हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">3मेरे मन का स्वामी तो तू है, तू ने मुझे माता के गर्भ में रचा।</li>
<li class="ltr" id="">4मैं तेरा धन्यवाद करूंगा, इसलिये कि मैं भयानक और अद्भुत रीति से रचा गया हूं। तेरे काम तो आश्चर्य के हैं, और मैं इसे भली भांति जानता हूं।</li>
<li class="ltr" id="">5जब मैं गुप्त में बनाया जाता, और पृथ्वी के नीचे स्थानों में रचा जाता था, तब मेरी हडि्डयां तुझ से छिपी न थीं।</li>
<li class="ltr" id="">6तेरी आंखों ने मेरे बेडौल तत्व को देखा, और मेरे सब अंग जो दिन दिन बनते जाते थे वे रचे जाने से पहिले तेरी पुस्तक में लिखे हुए थे।</li>
<li class="ltr" id="">7और मेरे लिये तो हे ईश्वर, तेरे विचार क्या ही बहुमूल्य हैं. उनकी संख्या का जोड़ कैसा बड़ा है॥</li>
<li class="ltr" id="">8यदि मैं उन को गिनता तो वे बालू के किनकों से भी अधिक ठहरते। जब मैं जाग उठता हूं, तब भी तेरे संग रहता हूं॥</li>
<li class="ltr" id="">9हे ईश्वर निश्चय तू दुष्ट को घात करेगा. हे हत्यारों, मुझ से दूर हो जाओ।</li>
<li class="ltr" id="">0क्योंकि वे तेरी चर्चा चतुराई से करते हैं, तेरे द्रोही तेरा नाम झूठी बात पर लेते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">1हे यहोवा, क्या मैं तेरे बैरियों से बैर न रखूं, और तेरे विरोधियों से रूठ न जाऊं?</li>
<li class="ltr" id="">2हां, मैं उन से पूर्ण बैर रखता हूं, मैं उन को अपना शत्रु समझता हूं।</li>
<li class="ltr" id="">3हे ईश्वर, मुझे जांच कर जान ले. मुझे परख कर मेरी चिन्ताओं को जान ले.</li>
<li class="ltr" id="">4और देख कि मुझ में कोई बुरी चाल है कि नहीं, और अनन्त के मार्ग में मेरी अगुवाई कर.</li>

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भजन संहिता 140
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<li class="ltr" id="">हे यहोवा, मुझ को बुरे मनुष्य से बचा ले, उपद्रवी पुरूष से मेरी रक्षा कर,</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि उन्होंने मन में बुरी कल्पनाएं की हैं, वे लगातार लड़ाइयां मचाते हैं।</li>
<li class="ltr" id="">उनका बोलना सांप का काटना सा है, उनके मुंह में नाग का सा विष रहता है॥</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा, मुझे दुष्ट के हाथों से बचा ले, उपद्रवी पुरूष से मेरी रक्षा कर, क्योंकि उन्होंने मेरे पैरों के उखाड़ने की युक्ति की है।</li>
<li class="ltr" id="">घमण्डियों ने मेरे लिये फन्दा और पासे लगाए, और पथ के किनारे जाल बिछाया है, उन्होंने मेरे लिये फन्दे लगा रखे हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा, मैं ने तुझ से कहा है कि तू मेरा ईश्वर है, हे यहोवा, मेरे गिड़गड़ाने की ओर कान लगा.</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा प्रभु, हे मेरे सामर्थी उद्धारकर्ता, तू ने युद्ध के दिन मेरे सिर की रक्षा की है।</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा दुष्ट की इच्छा को पूरी न होने दे, उसकी बुरी युक्ति को सफल न कर, नहीं तो वह घमण्ड करेगा॥</li>
<li class="ltr" id="">मेरे घेरने वालों के सिर पर उन्हीं का विचारा हुआ उत्पात पड़े.</li>
<li class="ltr" id="">0उन पर अंगारे डाले जाएं. वे आग में गिरा दिए जाएं. और ऐसे गड़हों में गिरें, कि वे फिर उठ न सकें.</li>
<li class="ltr" id="">1बकवादी पृथ्वी पर स्थिर नहीं होने का, उपद्रवी पुरूष को गिराने के लिये बुराई उसका पीछा करेगी॥</li>
<li class="ltr" id="">2हे यहोवा, मुझे निश्चय है कि तू दीन जन का और दरिद्रों का न्याय चुकाएगा।</li>
<li class="ltr" id="">3नि:सन्देह धर्मी तेरे नाम का धन्यवाद करने पाएंगे, सीधे लोग तेरे सम्मुख वास करेंगे॥</li>

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भजन संहिता 141
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<li class="ltr" id="">हे यहोवा, मैं ने तुझे पुकारा है, मेरे लिये फुर्ती कर. जब मैं तुझ को पुकारूं, तब मेरी ओर कान लगा.</li>
<li class="ltr" id="">मेरी प्रार्थना तेरे साम्हने सुगन्ध धूप, और मेरा हाथ फैलाना, संध्या काल का अन्नबलि ठहरे.</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा, मेरे मुख का पहरा बैठा, मेरे हाठों के द्वार पर रखवाली कर.</li>
<li class="ltr" id="">मेरा मन किसी बुरी बात की ओर फिरने न दे, मैं अनर्थकारी पुरूषों के संग, दुष्ट कामों में न लगूं, और मैं उनके स्वादिष्ट भोजन वस्तुओं में से कुछ न खाऊं.</li>
<li class="ltr" id="">धर्मी मुझ को मारे तो यह कृपा मानी जाएगी, और वह मुझे ताड़ना दे, तो यह मेरे सिर पर का तेल ठहरेगा, मेरा सिर उस से इन्कार न करेगा॥ लोगों के बुरे काम करने पर भी मैं प्रार्थना में लवलीन रहूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">जब उनके न्यायी चट्टान के पास गिराए गए, तब उन्होंने मेरे वचन सुन लिए, क्योंकि वे मधुर हैं।</li>
<li class="ltr" id="">जैसे भूमि में हल चलने से ढेले फूटते हैं, वैसे ही हमारी हडि्डयां अधोलोक के मुंह पर छितराई हुई हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">परन्तु हे यहोवा, प्रभु, मेरी आंखे तेरी ही ओर लगी हैं, मैं तेरा शरणागत हूं, तू मेरे प्राण जाने न दे.</li>
<li class="ltr" id="">मुझे उस फन्दे से, जो उन्होंने मेरे लिये लगाया है, और अनर्थकारियों के जाल से मेरी रक्षा कर.</li>
<li class="ltr" id="">0दुष्ट लोग अपने जालों में आप ही फंसें, और मैं बच निकलूं॥</li>

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भजन संहिता 142
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<li class="ltr" id="">ममैं यहोवा की दोहाई देता, मैं यहोवा से गिड़गिड़ाता हूं,</li>
<li class="ltr" id="">मैं अपने शोक की बातें उस से खोलकर कहता, मैं अपना संकट उस के आगे प्रगट करता हूं।</li>
<li class="ltr" id="">जब मेरी आत्मा मेरे भीतर से व्याकुल हो रही थी, तब तू मेरी दशा को जानता था. जिस रास्ते से मैं जाने वाला था, उसी में उन्होंने मेरे लिये फन्दा लगाया।</li>
<li class="ltr" id="">मैं ने दाहिनी ओर देखा, परन्तु कोई मुझे नहीं देखता है। मेरे लिये शरण कहीं नहीं रही, न मुझ को कोई पूछता है॥</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा, मैं ने तेरी दोहाई दी है, मैं ने कहा, तू मेरा शरणस्थान है, मेरे जीते जी तू मेरा भाग है।</li>
<li class="ltr" id="">मेरी चिल्लाहट को ध्यान देकर सुन, क्योंकि मेरी बड़ी दुर्दशा हो गई है. जो मेरे पीछे पड़े हैं, उन से मुझे बचा ले, क्योंकि वे मुझ से अधिक सामर्थी हैं।</li>
<li class="ltr" id="">मुझ को बन्दीगृह से निकाल कि मैं तेरे नाम का धन्यवाद करूं. धर्मी लोग मेरे चारों ओर आएंगे, क्योंकि तू मेरा उपकार करेगा॥</li>

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भजन संहिता 143
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<li class="ltr" id="">हे यहोवा मेरी प्रार्थना सुन, मेरे गिड़गिड़ाने की ओर कान लगा. तू जो सच्चा और धर्मी है, सो मेरी सुन ले,</li>
<li class="ltr" id="">और अपने दास से मुकद्दमा न चला. क्योंकि कोई प्राणी तेरी दृष्टि में निर्दोष नहीं ठहर सकता॥</li>
<li class="ltr" id="">शत्रु तो मेरे प्राण का ग्राहक हुआ है, उसने मुझे चूर कर के मिट्टी में मिलाया है, और मुझे ढेर दिन के मरे हुओं के समान अन्धेरे स्थान में डाल दिया है।</li>
<li class="ltr" id="">मेरी आत्मा भीतर से व्याकुल हो रही है मेरा मन विकल है॥</li>
<li class="ltr" id="">मुझे प्राचीन काल के दिन स्मरण आते हैं, मैं तेरे सब अद्भुत कामों पर ध्यान करता हूं, और तेरे काम को सोचता हूं।</li>
<li class="ltr" id="">मैं तेरी ओर अपने हाथ फैलाए हूए हूं, सूखी भूमि की नाईं मैं तेरा प्यासा हूं॥</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा, फुर्ती कर के मेरी सुन ले, क्योंकि मेरे प्राण निकलने ही पर हैं मुझ से अपना मुंह न छिपा, ऐसा न हो कि मैं कबर में पड़े हुओं के समान हो जाऊं।</li>
<li class="ltr" id="">अपनी करूणा की बात मुझे शीघ्र सुना, क्योंकि मैं ने तुझी पर भरोसा रखा है। जिस मार्ग से मुझे चलना है, वह मुझ को बता दे, क्योंकि मैं अपना मन तेरी ही ओर लगाता हूं॥</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा, मुझे शत्रुओं से बचा ले, मैं तेरी ही आड़ में आ छिपा हूं।</li>
<li class="ltr" id="">0मुझ को यह सिखा, कि मैं तेरी इच्छा क्योंकर पूरी करूं, क्योंकि मेरा परमेश्वर तू ही है. तेरा भला आत्मा मुझ को धर्म के मार्ग में ले चले.</li>
<li class="ltr" id="">1हे यहोवा, मुझे अपने नाम के निमित्त जिला. तू जो धर्मी है, मुझ को संकट से छुड़ा ले.</li>
<li class="ltr" id="">2और करूणा करके मेरे शत्रुओं को सत्यानाश कर, और मेरे सब सताने वालों का नाश कर डाल, क्योंकि मैं तेरा दास हूं॥</li>

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भजन संहिता 144
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<li class="ltr" id="">धन्य है यहोवा, जो मेरी चट्टान है, वह मेरे हाथों को लड़ने, और युद्ध करने के लिये तैयार करता है।</li>
<li class="ltr" id="">वह मेरे लिये करूणानिधान और गढ़, ऊंचा स्थान और छुड़ाने वाला है, वह मेरी ढ़ाल और शरण स्थान है, जो मेरी प्रजा को मेरे वश में कर देता है॥</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा, मनुष्य क्या है कि तू उसकी सुधि लेता है, या आदमी क्या है, कि तू उसकी कुछ चिन्ता करता है?</li>
<li class="ltr" id="">मनुष्य तो सांस के समान है, उसके दिन ढलती हुई छाया के समान हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">हे यहोवा, अपने स्वर्ग को नीचा करके उतर आ. पहाड़ों को छू तब उन से धुंआं उठेगा.</li>
<li class="ltr" id="">बिजली कड़का कर उन को तितर बितर कर दे, अपने तीर चला कर उन को घबरा दे.</li>
<li class="ltr" id="">अपने हाथ ऊपर से बढ़ा कर मुझे महासागर से उबार, अर्थात परदेशियों के वश से छुड़ा।</li>
<li class="ltr" id="">उनके मुंह से तो व्यर्थ बातें निकलती हैं, और उनके दाहिने हाथ से धोखे के काम होते हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">हे परमेश्वर, मैं तेरी स्तुति का नया गीत गाऊंगा, मैं दस तार वाली सारंगी बजा कर तेरा भजन गाऊंगा।</li>
<li class="ltr" id="">0तू राजाओं का उद्धार करता है, और अपने दास दाऊद को तलवार की मार से बचाता है।</li>
<li class="ltr" id="">1तू मुझ को उबार और परदेशियों के वश से छुड़ा ले, जिन के मुंह से व्यर्थ बातें निकलती हैं, और जिनका दाहिना हाथ झूठ का दाहिना हाथ है॥</li>
<li class="ltr" id="">2जब हमारे बेटे जवानी के समय पौधों की नाईं बढ़े हुए हों, और हमारी बेटियां उन कोने वाले पत्थरों के समान हों, जो मन्दिर के पत्थरों की नाईं बनाए जाएं,</li>
<li class="ltr" id="">3जब हमारे खत्ते भरे रहें, और उन में भांति भांति का अन्न धरा जाए, और हमारी भेड़- बकरियां हमारे मैदानों में हजारों हजार बच्चे जनें,</li>
<li class="ltr" id="">4जब हमारे बैल खूब लदे हुए हों, जब हमें न विघ्न हो और न हमारा कहीं जाना हो, और न हमारे चौकों में रोना- पीटना हो,</li>
<li class="ltr" id="">5तो इस दशा में जो राज्य हो वह क्या ही धन्य होगा. जिस राज्य का परमेश्वर यहोवा है, वह क्या ही धन्य है.</li>

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भजन संहिता 145
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<li class="ltr" id="">हे मेरे परमेश्वर, हे राजा, मैं तुझे सराहूंगा, और तेरे नाम को सदा सर्वदा धन्य कहता रहूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">प्रति दिन मैं तुझ को धन्य कहा करूंगा, और तेरे नाम की स्तुति सदा सर्वदा करता रहूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा महान और अति स्तुति के योग्य है, और उसकी बड़ाई अगम है॥</li>
<li class="ltr" id="">तेरे कामों की प्रशंसा और तेरे पराक्रम के कामों का वर्णन, पीढ़ी पीढ़ी होता चला जाएगा।</li>
<li class="ltr" id="">मैं तेरे ऐश्वर्य की महिमा के प्रताप पर और तेरे भांति भांति के आश्चर्यकर्मों पर ध्यान करूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">लोग तेरे भयानक कामों की शक्ति की चर्चा करेंगे, और मैं तेरे बड़े बड़े कामों का वर्णन करूंगा।</li>
<li class="ltr" id="">लोग तेरी बड़ी भलाई का स्मरण करके उसकी चर्चा करेंगे, और तेरे धर्म का जयजयकार करेंगे॥</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा अनुग्रहकारी और दयालु, विलम्ब से क्रोध करने वाला और अति करूणामय है।</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा सभों के लिये भला है, और उसकी दया उसकी सारी सृष्टि पर है॥</li>
<li class="ltr" id="">0हे यहोवा, तेरी सारी सृष्टि तेरा धन्यवाद करेगी, और तेरे भक्त लोग तुझे धन्य कहा करेंगे.</li>
<li class="ltr" id="">1वे तेरे राज्य की महिमा की चर्चा करेंगे, और तेरे पराक्रम के विषय में बातें करेंगे,</li>
<li class="ltr" id="">2कि वे आदमियों पर तेरे पराक्रम के काम और तेरे राज्य के प्रताप की महिमा प्रगट करें।</li>
<li class="ltr" id="">3तेरा राज्य युग युग का और तेरी प्रभुता सब पीढ़ियों तक बनी रहेगी॥</li>
<li class="ltr" id="">4यहोवा सब गिरते हुओं को संभालता है, और सब झुके हुओं को सीधा खड़ा करता है।</li>
<li class="ltr" id="">5सभों की आंखें तेरी ओर लगी रहती हैं, और तू उन को आहार समय पर देता है।</li>
<li class="ltr" id="">6तू अपनी मुट्ठी खोल कर, सब प्राणियों को आहार से तृप्त करता है।</li>
<li class="ltr" id="">7यहोवा अपनी सब गति में धर्मी और अपने सब कामों में करूणामय है।</li>
<li class="ltr" id="">8जितने यहोवा को पुकारते हैं, अर्थात जितने उसको सच्चाई से पुकारते हें, उन सभों के वह निकट रहता है।</li>
<li class="ltr" id="">9वह अपने डरवैयों की इच्छा पूरी करता है, ओर उनकी दोहाई सुन कर उनका उद्धार करता है।</li>
<li class="ltr" id="">0यहोवा अपने सब प्रेमियों की तो रक्षा करता, परन्तु सब दुष्टों को सत्यानाश करता है॥</li>
<li class="ltr" id="">1मैं यहोवा की स्तुति करूंगा, और सारे प्राणी उसके पवित्र नाम को सदा सर्वदा धन्य कहते रहें॥</li>

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भजन संहिता 146
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<li class="ltr" id="">याह की स्तुति करो। हे मेरे मन यहोवा की स्तुति कर.</li>
<li class="ltr" id="">मैं जीवन भर यहोवा की स्तुति करता रहूंगा, जब तक मैं बना रहूंगा, तब तक मैं अपने परमेश्वर का भजन गाता रहूंगा॥</li>
<li class="ltr" id="">तुम प्रधानों पर भरोसा न रखना, न किसी आदमी पर, क्योंकि उस में उद्धार करने की भी शक्ति नहीं।</li>
<li class="ltr" id="">उसका भी प्राण निकलेगा, वही भी मिट्टी में मिल जाएगा, उसी दिन उसकी सब कल्पनाएं नाश हो जाएंगी॥</li>
<li class="ltr" id="">क्या ही धन्य वह है, जिसका सहायक याकूब का ईश्वर है, और जिसका भरोसा अपने परमेश्वर यहोवा पर है।</li>
<li class="ltr" id="">वह आकाश और पृथ्वी और समुद्र और उन में जो कुछ है, सब का कर्ता है, और वह अपना वचन सदा के लिये पूरा करता रहेगा।</li>
<li class="ltr" id="">वह पिसे हुओं का न्याय चुकाता है, और भूखों को रोटी देता है॥ यहोवा बन्धुओं को छुड़ाता है,</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा अन्धों को आंखें देता है। यहोवा झुके हुओं को सीधा खड़ा करता है, यहोवा धर्मियों से प्रेम रखता है।</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा परदेशियों की रक्षा करता है, और अनाथों और विधवा को तो सम्भालता है, परन्तु दुष्टों के मार्ग को टेढ़ा मेढ़ा करता है॥</li>
<li class="ltr" id="">0हे सिय्योन, यहोवा सदा के लिये, तेरा परमेश्वर पीढ़ी पीढ़ी राज्य करता रहेगा। याह की स्तुति करो.</li>

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भजन संहिता 147
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<li class="ltr" id="">याह की स्तुति करो. क्योंकि अपने परमेश्वर का भजन गाना अच्छा है, क्योंकि वह मन भावना है, उसकी स्तुति करनी मन भावनी है।</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा यरूशलेम को बसा रहा है, वह निकाले हुए इस्राएलियों को इकट्ठा कर रहा है।</li>
<li class="ltr" id="">वह खेदित मन वालों को चंगा करता है, और उनके शोक पर मरहम- पट्टी बान्धता है।</li>
<li class="ltr" id="">वह तारों को गिनता, और उन में से एक एक का नाम रखता है।</li>
<li class="ltr" id="">हमारा प्रभु महान और अति सामर्थी है, उसकी बुद्धि अपरम्पार है।</li>
<li class="ltr" id="">यहोवा नम्र लोगों को सम्भलता है, और दुष्टों को भूमि पर गिरा देता है॥</li>
<li class="ltr" id="">धन्यवाद करते हुए यहोवा का गीत गाओ, वीणा बजाते हुए हमारे परमेश्वर का भजन गाओ।</li>
<li class="ltr" id="">वह आकाश को मेघों से छा देता है, और पृथ्वी के लिये मेंह की तैयारी करता है, और पहाड़ों पर घास उगाता है।</li>
<li class="ltr" id="">वह पशुओं को और कौवे के बच्चों को जो पुकारते हैं, आहार देता है।</li>
<li class="ltr" id="">0न तो वह घोड़े के बल को चाहता है, और न पुरूष के पैरों से प्रसन्न होता है,</li>
<li class="ltr" id="">1यहोवा अपने डरवैयों ही से प्रसन्न होता है, अर्थात उन से जो उसकी करूणा की आशा लगाए रहते हैं॥</li>
<li class="ltr" id="">2हे यरूशलेम, यहोवा की प्रशंसा कर. हे सिय्योन, अपने परमेश्वर की स्तुति कर.</li>
<li class="ltr" id="">3क्योंकि उसने तेरे फाटकों के खम्भों को दृढ़ किया है, और तेरे लड़के बालों को आशीष दी है।</li>
<li class="ltr" id="">4और तेरे सिवानों में शान्ति देता है, और तुझ को उत्तम से उत्तम गेहूं से तृप्त करता है।</li>
<li class="ltr" id="">5वह पृथ्वी पर अपनी आज्ञा का प्रचार करता है, उसका वचन अति वेग से दौड़ता है।</li>
<li class="ltr" id="">6वह ऊन के समान हिम को गिराता है, और राख की नाईं पाला बिखेरता है।</li>
<li class="ltr" id="">7वह बर्फ के टुकड़े गिराता है, उसकी की हुई ठण्ड को कौन सह सकता है?</li>
<li class="ltr" id="">8वह आज्ञा देकर उन्हें गलाता है, वह वायु बहाता है, तब जल बहने लगता है।</li>
<li class="ltr" id="">9वह याकूब को अपना वचन, और इस्राएल को अपनी विधियां और नियम बताता है।</li>
<li class="ltr" id="">0किसी और जाति से उसने ऐसा बर्ताव नहीं किया, और उसके नियमों को औरों ने नहीं जाना॥ याह की स्तुति करो।</li>

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भजन संहिता 148
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<li class="ltr" id="">याह की स्तुति करो. यहोवा की स्तुति स्वर्ग में से करो, उसकी स्तुति ऊंचे स्थानों में करो.</li>
<li class="ltr" id="">हे उसके सब दूतों, उसकी स्तुति करो: हे उसकी सब सेना उसकी स्तुति कर.</li>
<li class="ltr" id="">हे सूर्य और चन्द्रमा उसकी स्तुति करो, हे सब ज्योतिमय तारागण उसकी स्तुति करो.</li>
<li class="ltr" id="">हे सब से ऊंचे आकाश, और हे आकाश के ऊपर वाले जल, तुम दोनों उसकी स्तुति करो।</li>
<li class="ltr" id="">वे यहोवा के नाम की स्तुति करें, क्योंकि उसी ने आज्ञा दी और ये सिरजे गए।</li>
<li class="ltr" id="">और उसने उन को सदा सर्वदा के लिये स्थिर किया है, और ऐसी विधि ठहराई है, जो टलने की नहीं॥</li>
<li class="ltr" id="">पृथ्वी में से यहोवा की स्तुति करो, हे मगरमच्छों और गहिरे सागर,</li>
<li class="ltr" id="">हे अग्नि और ओलो, हे हिम और कुहरे, हे उसका वचन मानने वाली प्रचण्ड बयार.</li>
<li class="ltr" id="">हे पहाड़ों और सब टीलो, हे फलदाई वृक्षों और सब देवदारों.</li>
<li class="ltr" id="">0हे वन- पशुओं और सब घरैलू पशुओं, हे रेंगने वाले जन्तुओं और हे पक्षियों.</li>
<li class="ltr" id="">1हे पृथ्वी के राजाओं, और राज्य राज्य के सब लोगों, हे हाकिमों और पृथ्वी के सब न्यायियों.</li>
<li class="ltr" id="">2हे जवानों और कुमारियों, हे पुरनियों और बालकों.</li>
<li class="ltr" id="">3यहोवा के नाम की स्तुति करो, क्योंकि केवल उसकी का नाम महान है, उसका ऐश्वर्य पृथ्वी और आकाश के ऊपर है।</li>
<li class="ltr" id="">4और उसने अपनी प्रजा के लिये एक सींग ऊंचा किया है, यह उसके सब भक्तों के लिये अर्थात इस्राएलियों के लिये और उसके समीप रहने वाली प्रजा के लिये स्तुति करने का विषय है। याह की स्तुति करो।</li>

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भजन संहिता 149
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<li class="ltr" id="">याह की स्तुति करो. यहोवा के लिये नया गीत गाओ, भक्तों की सभा में उसकी स्तुति गाओ.</li>
<li class="ltr" id="">इस्राएल अपने कर्ता के कारण आनन्दित हो, सिय्योन के निवासी अपने राजा के कारण मगन हों.</li>
<li class="ltr" id="">वे नाचते हुए उसके नाम की स्तुति करें, और डफ और वीणा बजाते हुए उसका भजन गाएं.</li>
<li class="ltr" id="">क्योंकि यहोवा अपनी प्रजा से प्रसन्न रहता है, वह नम्र लोगों का उद्धार कर के उन्हें शोभायमान करेगा।</li>
<li class="ltr" id="">भक्त लोग महिमा के कारण प्रफुल्लित हों, और अपने बिछौनों पर भी पड़े पड़े जयजयकार करें।</li>
<li class="ltr" id="">उनके कण्ठ से ईश्वर की प्रशंसा हो, और उनके हाथों में दोधारी तलवारें रहें,</li>
<li class="ltr" id="">कि वे अन्यजातियों से पलटा ले सकें, और राज्य राज्य के लोगों को ताड़ना दें,</li>
<li class="ltr" id="">और उनके राजाओं को सांकलों से, और उनके प्रतिष्ठित पुरूषों को लोहे की बेड़ियों से जकड़ रखें,</li>
<li class="ltr" id="">और उन को ठहराया हुआ दण्ड दें. उसके सब भक्तों की ऐसी ही प्रतिष्ठा होगी। याह की स्तुति करो।</li>

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भजन संहिता 150
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<li class="ltr" id="">याह की स्तुति करो. ईश्वर के पवित्रस्थान में उसकी स्तुति करो, उसकी सामर्थ्य से भरे हुए आकाशमण्डल में उसी की स्तुति करो.</li>
<li class="ltr" id="">उसके पराक्रम के कामों के कारण उसकी स्तुति करो, उसकी अत्यन्त बड़ाई के अनुसार उसकी स्तुति करो.</li>
<li class="ltr" id="">नरसिंगा फूंकते हुए उसकी स्तुति करो, सारंगी और वीणा बजाते हुए उसकी स्तुति करो.</li>
<li class="ltr" id="">डफ बजाते और नाचते हुए उसकी स्तुति करो, तार वाले बाजे और बांसुली बजाते हुए उसकी स्तुति करो.</li>
<li class="ltr" id="">ऊंचे शब्द वाली झांझ बजाते हुए उसकी स्तुति करो, आनन्द के महाशब्द वाली झांझ बजाते हुए उसकी स्तुति करो.</li>
<li class="ltr" id="">जितने प्राणी हैं सब के सब याह की स्तुति करें. याह की स्तुति करो.</li>

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